📍सुल्तानपुर | 21 Apr, 2026, 9:38 PM
Sultanpur ELF Drill: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में 22 अप्रैल को भारतीय वायुसेना का एक अहम अभ्यास होने जा रहा है। इस दौरान पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर बने इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड यानी ईएलएफ को एक्टिव किया जाएगा। इस खास स्ट्रिप पर फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर ऑपरेशन करेंगे।
Sultanpur ELF Drill: क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड
ईएलएफ एक खास तरह का रनवे होता है, जिसे एक्सप्रेसवे पर बनाया जाता है। यह आम दिनों में सड़क की तरह इस्तेमाल होता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे एयरक्राफ्ट लैंडिंग के लिए तैयार किया जा सकता है।
सुल्तानपुर में यह स्ट्रिप करीब 3.2 किलोमीटर लंबी है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसी आपात स्थिति में वायुसेना के विमान यहां उतर सकें और उड़ान भर सकें।
फाइटर जेट्स करेंगे टच एंड गो एक्सरसाइज
इस अभ्यास में वायुसेना के कई प्रमुख फाइटर जेट हिस्सा लेंगे। इनमें सुखोई सु-30 एमकेआई, जगुआर और मिराज 2000 शामिल हैं। ये जेट एक्सप्रेसवे पर टच एंड गो, लो एल्टीट्यूड मैन्यूवर और इमरजेंसी लैंडिंग जैसी ड्रिल करेंगे।
टच एंड गो का मतलब होता है कि विमान रनवे को छूकर तुरंत दोबारा उड़ान भरता है। इससे पायलट्स को मुश्किल हालात में तेजी से ऑपरेशन करने की ट्रेनिंग मिलती है।
हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट विमान भी होंगे शामिल
फाइटर जेट्स के साथ-साथ हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भी इस अभ्यास का हिस्सा होंगे। एमआई-17 हेलीकॉप्टर स्लिथरिंग ड्रिल करेगा। इसमें रस्सी के जरिए जवानों को तेजी से नीचे उतारा जाता है।
ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट में एयरबस सी-295 और एंटोनोव एएन-32 शामिल होंगे। ये विमान फुल लैंडिंग, टेकऑफ और असॉल्ट लैंडिंग की प्रैक्टिस करेंगे।
इस पूरे अभ्यास में अलग-अलग तरह के एयरक्राफ्ट एक साथ काम करेंगे। इसे मल्टी प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन कहा जाता है। इसका मतलब है कि फाइटर, हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट विमान एक साथ तालमेल बनाकर ऑपरेशन करते हैं। इससे वायुसेना की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी यानी अलग-अलग हालात में काम करने की क्षमता दिखाई जाती है।
देश में कितने इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड
देशभर में भारतीय वायुसेना और सड़क परिवहन मंत्रालय ने कुल 28 इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ELF) के लिए जगह तय की है। ये सभी अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बने हुए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर कहीं भी एयरक्राफ्ट उतारे जा सकें।
इनकी सबसे ज्यादा संख्या असम में है, जहां 5 इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड साइट्स हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 4, आंध्र प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में 3-3 जगहों पर ऐसे रनवे बनाए गए हैं।
वहीं जम्मू-कश्मीर, बिहार, हरियाणा और तमिलनाडु में 2-2 इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड साइट्स मौजूद हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, पंजाब और कुछ अन्य राज्यों में 1 या उससे ज्यादा साइट्स हैं। कुल मिला कर 11 साइट्स पश्चिमी सेक्टर में, 9 पूर्वी सेक्टर में, 5 दक्षिणी हिस्से में और 3 मध्य भारत में स्थित हैं।
असम में पीएम मोदी ने किया था उद्घाटन
इससे पहले 14 फरवरी को चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा से तकरीबन 300 किमी दूर असम के डिब्रूगढ़ जिले के मोरान इलाके में नेशनल हाईवे-37 पर बनी 4.2 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी का उद्घाटन पीएम मोदी ने किया था। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहली ऐसी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी है, जो सीधे हाईवे पर तैयार की गई है। इसे नेशनल हाईवे-2 पर मोरान बाईपास के पास बनाया गया है। जरूरत पड़ने पर यहां फाइटर जेट और ट्रांसपोर्ट विमान सुरक्षित रूप से उतर और उड़ान भर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय वायुसेना के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान से यहां उतरकर इस एयर स्ट्रिप का उद्घाटन किया था।
सुल्तानपुर में होगा तीसरी बार
सुल्तानपुर जिले में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर करवल खेड़ी, कुरेभार इलाके में करीब 3.2 किलोमीटर लंबा खास स्ट्रिप बनाया गया है। यह सामान्य दिनों में एक्सप्रेसवे का हिस्सा रहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे रनवे की तरह इस्तेमाल किया जाता है। यही स्ट्रिप अब एक बार फिर एक्टिवेट होने जा रहा है। इससे पहले यहां दो बार ऐसे इवेंट 2021 और 2023 में हो चुके हैं, इसलिए यह सुल्तानपुर का तीसरा बड़ा इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड एक्टिवेशन माना जा रहा है।
पहली बार यह स्ट्रिप 16 नवंबर 2021 को चर्चा में आया था, जब पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुआ था। उस दिन प्रधानमंत्री खुद भारतीय वायुसेना के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान में यहां उतरे थे। उसी दौरान एयर शो भी हुआ था, जिसमें सुखोई-30, मिराज 2000 और जगुआर जैसे फाइटर जेट्स ने टच-एंड-गो और लो अल्टीट्यूड उड़ान का प्रदर्शन किया था। एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान ने असॉल्ट लैंडिंग कर कमांडो और उपकरण उतारे थे।
इसके बाद 24 जून 2023 को यहां दूसरी बार इमरजेंसी एक्सरसाइज हुई। उस दौरान करीब 10 एयरक्राफ्ट ने इस स्ट्रिप का इस्तेमाल किया। मिराज 2000 और जगुआर जैसे फाइटर जेट्स ने टच-एंड-गो अभ्यास किया, जबकि एएन-32 ने पूरी लैंडिंग की।
भारत में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी की शुरुआत 2017 में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुई थी, जहां पहली बार बड़े स्तर पर फाइटर जेट्स को हाईवे पर उतारा गया था। इसके बाद सितंबर 2021 में राजस्थान के बाड़मेर में पहला हाईवे-बेस्ड इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी तैयार हुआ। मार्च 2024 में आंध्र प्रदेश के अड्डंकी इलाके में भी ऐसा ही रनवे एक्टिवेट किया गया, जहां फाइटर और ट्रांसपोर्ट दोनों तरह के एयरक्राफ्ट ने हिस्सा लिया।
अप्रैल 2024 में ‘गगन शक्ति’ अभ्यास के दौरान कश्मीर घाटी में भी हाईवे स्ट्रिप का इस्तेमाल किया गया, जहां चिनूक, एमआई-17 और एएलएच जैसे हेलीकॉप्टर्स ने रात में ऑपरेशन किए।

