📍टोक्यो | 21 Apr, 2026, 10:10 PM
Japan defence export policy: जापान ने अपने रक्षा निर्यात नियमों में कई दशकों का सबसे बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने हथियारों के विदेश में निर्यात पर लगी ज्यादातर पाबंदियों को हटा दिया है। इस फैसले के बाद अब जापान के लिए वॉरशिप, मिसाइल और अन्य डिफेंस इक्विपमेंट को दूसरे देशों को बेचने का रास्ता खुल गया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं और हथियारों की मांग तेजी से बढ़ी है।
Japan defence export policy: क्या बदला है नए नियमों में
पहले जापान केवल कुछ सीमित कैटेगरी में ही डिफेंस एक्सपोर्ट कर सकता था। इनमें रेस्क्यू, ट्रांसपोर्ट, सर्विलांस और माइन-स्वीपिंग जैसे उपकरण शामिल थे। अब इन सीमाओं को हटा दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत हर डील को अलग-अलग आधार पर जांचा जाएगा और उसी के हिसाब से फैसला लिया जाएगा।
हालांकि जापान ने कुछ बेसिक नियम बरकरार रखे हैं। जैसे किसी युद्ध में शामिल देशों को सीधे हथियार नहीं बेचे जाएंगे और थर्ड कंट्री ट्रांसफर पर भी नियंत्रण रहेगा। इसके बावजूद सरकार ने यह साफ किया है कि नेशनल सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए कुछ मामलों में छूट दी जा सकती है।
डिफेंस इंडस्ट्री को मजबूत करने की कोशिश
इस बदलाव का एक बड़ा उद्देश्य जापान की डिफेंस इंडस्ट्री को मजबूत करना है। लंबे समय से वहां की कंपनियां सिर्फ अपनी सेल्फ-डिफेंस फोर्स के लिए ही उपकरण बनाती रही हैं। ऑर्डर कम होने की वजह से प्रोडक्शन भी सीमित रहता था।
अब एक्सपोर्ट की अनुमति मिलने से प्रोडक्शन बढ़ेगा, लागत कम होगी और कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी पर काम करने का मौका मिलेगा। मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां पहले से ही सबमरीन, फाइटर एयरक्राफ्ट और मिसाइल जैसे एडवांस सिस्टम बनाने की क्षमता रखती हैं।
एशिया में बढ़ते सहयोग पर जोर
जापान का यह कदम एशिया के देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। फिलीपींस, पोलैंड और अन्य देश अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए नए सप्लायर तलाश रहे हैं। ऐसे में जापान उनके लिए एक विकल्प बनकर उभर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलीपींस को इस्तेमाल किए गए वॉरशिप देने की संभावना भी सामने आई है। फिलीपींस ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि इससे उन्हें बेहतर गुणवत्ता वाले डिफेंस उपकरण मिल सकेंगे।
वहीं, जापान के इस फैसले पर चीन ने चिंता जताई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस कदम को लेकर सतर्क है और किसी भी तरह के आक्रामक रुख का विरोध करेगा। दोनों देशों के बीच पहले से ही ताइवान से जुड़े मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है।
जापान के प्रधानमंत्री ने कहा है कि आज के समय में कोई भी देश अकेले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता। इसलिए साझेदार देशों के बीच डिफेंस सहयोग जरूरी हो गया है।
अमेरिका और यूरोप का समर्थन
अमेरिका और यूरोप के देशों ने जापान के इस कदम का समर्थन किया है। अमेरिका के राजदूत ने इसे सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने वाला कदम बताया है। जर्मनी ने भी कहा है कि इससे रक्षा क्षेत्र में सहयोग के नए मौके खुलेंगे।
यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्धों की वजह से अमेरिका की हथियार उत्पादन क्षमता पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में उसके सहयोगी देश नए विकल्प तलाश रहे हैं, जहां जापान की एंट्री अहम मानी जा रही है।
जापान की सैन्य तैयारी भी तेज
रक्षा निर्यात के साथ-साथ जापान अपनी सैन्य क्षमता भी लगातार बढ़ा रहा है। सरकार ने हाल के वर्षों में डिफेंस बजट को बढ़ाकर जीडीपी के करीब 2 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है।
जापान मिसाइल, स्टेल्थ फाइटर जेट और ड्रोन जैसे सिस्टम्स पर निवेश कर रहा है। इसके अलावा वह ब्रिटेन और इटली के साथ मिलकर अगली पीढ़ी का फाइटर जेट भी विकसित कर रहा है, जिसे 2030 के दशक में तैनात करने की योजना है।
वहीं, जापान का यह कदम उसकी पारंपरिक शांति नीति से बिल्कुल है। अपनी मंद पड़ी अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए अब वह वैश्विक स्तर पर डिफेंस सप्लायर के रूप में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है।

