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AMCA के लिए भारत बनाएगा अपना फाइटर इंजन, Safran-GTRE का 120 kN इंजन प्रपोजल पहुंचा CCS के पास!

साफरान और जीटीआरई के प्रस्ताव में पहले 120 किलो न्यूटन थ्रस्ट वाला इंजन और नौ प्रोटोटाइप तैयार करने की योजना; इसके बाद तकनीक को 140 किलो न्यूटन वर्ग तक ले जाने का लक्ष्य...

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📍नई दिल्ली | 3 Aug, 2026, 10:23 PM

India AMCA Fighter Jet Engine: भारत के स्वदेशी फाइटर जेट इंजन कार्यक्रम में एक अहम प्रस्ताव अब सरकार में टॉप लेवल तक पहुंच गया है। फ्रांस की साफरान और डीआरडीओ की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (जीटीआरई) के साथ मिलकर नया फाइटर इंजन डेवलप करने का प्रस्ताव कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी सीसीएस के सामने है। प्रस्तावित इंजन को शुरुआत में करीब 120 किलो न्यूटन थ्रस्ट के स्तर पर डेवलप करने की योजना है। इसके नौ प्रोटोटाइप तैयार कर टेस्ट और सर्टिफाई करने की बात है। इसके बाद इसी तकनीक को करीब 140 किलो न्यूटन थ्रस्ट तक ले जाया जाएगा।

India AMCA Fighter Jet Engine: 2025 में पीएम मोदी ने उठाया था स्वदेशी इंजन का मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 15 अगस्त पर स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में देश के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र से स्वदेशी फाइटर एयरक्राफ्ट और उसके लिए भारत में विकसित इंजन तैयार करने की दिशा में काम करने को कहा था।

इसके बाद फाइटर एयरक्राफ्ट और इंजन, दोनों स्तर पर गतिविधियां आगे बढ़ी हैं। एक तरफ पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी एएमसीए के निर्माण में निजी कंपनियों को शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है, वहीं दूसरी तरफ स्वदेशी फाइटर इंजन के लिए साफरान और जीटीआरई से जुड़ा प्रस्ताव सामने आया है।

एएमसीए के एयरफ्रेम निर्माण की प्रक्रिया में टाटा, भारत फोर्ज और लार्सन एंड टुब्रो यानी एलएंडटी जैसे बड़े औद्योगिक समूह अपने सार्वजनिक क्षेत्र के साझेदारों के साथ शामिल बताए गए हैं।

120 किलो न्यूटन से शुरू होगा इंजन कार्यक्रम

साफरान-जीटीआरई प्रस्ताव का सबसे अहम हिस्सा इंजन का थ्रस्ट है। शुरुआती इंजन को करीब 120 किलो न्यूटन थ्रस्ट के स्तर पर डेवलप करने की योजना है।

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फाइटर इंजन में थ्रस्ट उस ताकत को बताता है, जिससे इंजन विमान को आगे धकेलता है। आधुनिक लड़ाकू विमान के वजन, हथियार, ईंधन और उसकी उड़ान संबंधी जरूरतों के हिसाब से अधिक थ्रस्ट वाले इंजन की जरूरत होती है।

कार्यक्रम के तहत नौ प्रोटोटाइप इंजन तैयार करने की बात कही गई है। इन्हें अलग-अलग स्तर पर टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन से गुजरना होगा। 120 किलो न्यूटन इंजन के बाद इसी डिजाइन और तकनीक को करीब 140 किलो न्यूटन वर्ग तक ले जाने की योजना है। इस ज्यादा ताकतवर वर्जन को भारत के अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की जरूरतों से जोड़ा गया है। (India AMCA Fighter Jet Engine)

भारत के पास रहेगा इंजन का इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अधिकार

इस प्रस्ताव का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इंजन की तकनीक पर भारत का अधिकार है। सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित पावरप्लांट के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी यानी आईपी राइट्स भारत के पास ही रहेंगे। भारत लंबे समय से विदेशी फाइटर इंजन का इस्तेमाल करता आया है। मिग और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों में रूसी मूल के इंजन लगे हैं, जबकि राफेल में फ्रांस की साफरान का एम88 इंजन इस्तेमाल होता है।

भारत ने 36 राफेल विमान खरीदे हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाला एम88 करीब 88 किलो न्यूटन क्लास का इंजन है।

फाइटर जेट इंजन की सबसे संवेदनशील तकनीक उसके बेहद ज्यादा तापमान में काम करने वाले हिस्सों में होती है। इसमें हॉट सेक्शन, हाई-टेम्परेचर मटेरियल, सिंगल-क्रिस्टल टर्बाइन ब्लेड, विशेष कोटिंग और इंजन कंट्रोल से जुड़ी तकनीक शामिल है। ये तकनीक आम तौर पर इंजन बनाने वाले देश पूरी तरह साझा नहीं करते। (India AMCA Fighter Jet Engine)

सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड क्यों हैं बड़ी चुनौती

जेट इंजन के अंदर तापमान बेहद ज्यादा होता है। इंजन के टर्बाइन ब्लेड को इस गर्मी के बीच बहुत तेज रफ्तार से घूमना पड़ता है। आम मेटल ऐसी स्थिति में लंबे समय तक सुरक्षित तरीके से काम नहीं कर सकती।

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इसी वजह से आधुनिक फाइटर इंजन में खास सुपरअलॉय, सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड और हाई-टेम्परेचर कोटिंग का इस्तेमाल होता है। इनका निर्माण जेट इंजन तकनीक के सबसे मुश्किल हिस्सों में माना जाता है।

इंजन को केवल अधिक थ्रस्ट पैदा नहीं करना होता। उसे अलग-अलग ऊंचाई, तापमान और उड़ान परिस्थितियों में लगातार भरोसेमंद तरीके से काम करना पड़ता है। इसके लिए लंबे समय तक ग्राउंड टेस्टिंग, फ्लाइट टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की जरूरत होती है। (India AMCA Fighter Jet Engine)

जीई एफ414 भी है भारत के फाइटर जेट प्रोग्राम का हिस्सा

भारत फिलहाल अमेरिकी जीई एयरोस्पेस के इंजनों पर भी काम कर रहा है। तेजस एमके1ए के लिए जीई एफ404 इंजन इस्तेमाल किया जा रहा है।

इसके बाद तेजस एमके2 और एएमसीए के शुरुआती विमानों के लिए ज्यादा जीई एफ414 इंजन लगाने की योजना है। जीई और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच भारत में एफ414 इंजन के प्रोडक्शन को लेकर काम चल रहा है।

इसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पहले 100 प्रतिशत होना था, लेकिन असलियत में यह केवल करीब 70 प्रतिशत ही होगा। इंजन के सोर्स कोड, हॉट सेक्शन और सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड जैसी सबसे संवेदनशील तकनीक इसमें शामिल नहीं होगी। शुरुआती चरण में करीब 99 एफ414 इंजनों का प्रोडक्शन किया जाएगा। (India AMCA Fighter Jet Engine)

कावेरी इंजन अभी भी रेस में

भारत का स्वदेशी कावेरी इंजन कार्यक्रम अभी भी रेस में है। डीआरडीओ और जीटीआरई ने कावेरी को मूल रूप से स्वदेशी फाइटर इंजन के रूप में विकसित करना शुरू किया था, लेकिन यह लड़ाकू विमान के लिए जरूरी परफॉरमेंस नहीं दे पाया।

वहीं, कावेरी से जुड़ी तकनीक पर फिर से काम किया जा रहा है और लगभग 80 किलो न्यूटन के स्तर को हासिल करने का लक्ष्य बनाया गया है। इसे इंजन तकनीक विकसित करने और उससे मिले अनुभव को दूसरे कार्यक्रमों में इस्तेमाल करने से जोड़ा गया है।

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आधुनिक फाइटर इंजन बनाने में केवल डिजाइन तैयार करना काफी नहीं होता। मेटलर्जी, टर्बाइन, कंप्रेसर, कम्बशन, डिजिटल इंजन कंट्रोल, मैन्युफैक्चरिंग और हजारों घंटे की टेस्टिंग एक साथ इस प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। (India AMCA Fighter Jet Engine)

चीन का डब्ल्यूएस-15 इंजन भी बढ़ा रहा तकनीकी अंतर

भारत के फाइटर इंजन कार्यक्रम की तुलना चीन की तेजी से बढ़ी क्षमता से भी की जा रही है। चीन ने पहले रूसी इंजन और विदेशी तकनीकों पर निर्भरता के बाद अपने इंजन विकसित करने पर बड़े स्तर पर निवेश किया।

उसने डब्ल्यूएस-10 के बाद डब्ल्यूएस-15 जैसे आधुनिक इंजन पर काम किया है। डब्ल्यूएस-15 को चीन के जे-20 पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर में इस्तेमाल किया गया है।

मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सैन्य तनाव बढ़ने के बाद चीन ने तिब्बत और शिनजियांग क्षेत्र के एयरबेस पर आधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ाई थी। इन क्षेत्रों में होतान, ल्हासा और न्यिंगची जैसे एयरबेस शामिल रहे हैं। (India AMCA Fighter Jet Engine)

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