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Exclusive: तेजस की तरह AMCA के इंजन पर भी बड़ा संकट! तीन गुना बढ़ी F-414 की कीमत, दूसरे विकल्प की तलाश शुरू!

एएमसीए एमके-1 के लिए प्रस्तावित एफ-414 इंजन की कीमत बढ़ने से डीआरडीओ की चिंता बढ़ी है। सूत्रों के अनुसार, जीई एयरोस्पेस के साथ कमर्शियल नेगोशिएशन में लागत, 15 प्रोटोटाइप इंजन और भारत में असेंबली लाइन पर बातचीत चल रही है...

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📍नई दिल्ली | 24 Jun, 2026, 7:00 AM

AMCA MK1 GE F414 Engine: लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस एमके-1ए की तरह भारत के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के इंजन को लेकर जबरदस्त पेंच फंस गया है। इस मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने एएमसीए एमके-1 (AMCA MK1) में लगाए जाने वाले एफ-414 (F414-INS6) इंजन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। वहीं, जीई एयरस्पेस की इस मनमानी के बाद नए इंजन की तलाश शुरू हो गई है। अगर ऐसा होता है कि तेजस प्रोजेक्ट की तरह AMCA के प्रोटोटाइप बनाने में ही दो से तीन साल तक की देरी हो सकती है।

AMCA MK1 GE F414 Engine: टेक्निकल नेगोशिएशन पूरा, कमर्शियल नेगोशिएशन अटका

जीई एयरोस्पेस और डीआरडीओ के बीच भारत में एफ-414 इंजन के निर्माण को लेकर टेक्निकल नेगोशिएशन पर अप्रैल में सहमति बन चुकी है। वहीं, मई से कमर्शियल नेगोशिएशन पर बातचीत शुरू हुई है। सूत्रों का कहना है कि मई में नई दिल्ली में जीई अधिकारियों के साथ हुई इस बैठक में कॉस्टिंग को लेकर बातचीत की गई थी। इस दौरान जीई एयरोस्पेस ने एफ-414 की कीमतों में तीन गुना का इजाफा कर दिया है।

सूत्रों का कहना है कि पहले एफ-414 इंजन की अनुमानित कीमत करीब 70 से 80 करोड़ रुपये के बीच थी, लेकिन अब जीई एयरोस्पेस ने प्रति इंजन की लागत में लगभग तीन गुना तक बढ़ोतरी कर दी है।

कमर्शियल नेगोशिएशन में इंजन की प्रति यूनिट के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, लाइसेंस मैन्युफैक्चरिंग, भारतीय प्रोडक्शन लाइन, क्वॉलिटी स्टैंडर्ड, स्पेयर पार्ट्स, रिपेयर, ओवरहॉल, वारंटी, डिलीवरी शेड्यूल और कीमत बढ़ने का फॉर्मूला भी शामिल होता है। (AMCA MK1 F414 Engine)

पांच प्रोटोटाइप के लिए 15 इंजन की जरूरत

एएमसीए प्रोग्राम के प्रोटोटाइप फेज में पांच फ्लाइंग प्रोटोटाइप बनाने की योजना है। सूत्रों के अनुसार, ट्विन इंजन विमान होने के चलते प्रत्येक प्रोटोटाइप के लिए दो ऑपरेशनल इंजन और एक अतिरिक्त इंजन की जरूरत मानी गई है। इस तरह पांच प्रोटोटाइप के लिए कुल 15 इंजन की जरूरत है।

सूत्रों ने बताया कि कर्मशियल नेगोशिएशन के दौरान जब जीई ने बढ़ी हुई कीमतों का खुलासा किया तो डीआरडीओ-एडीए की नेगोशिएशन टीम को भी हैरानी हुई। जिसके बाद उन्होंने जीई से प्रोटोटाइप के लिए 15 के बजाए केवल 8 इंजन खरीदने की बात भी कही। लेकिन जीई एयरोस्पेस की टीम कीमतों को लेकर टस से मस भी नहीं हुई।

इस साल 27 मई को एएमसीए प्रोटोटाइप के लिए जारी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल में लिखा है कि कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के 30 महीने के भीतर पहली उड़ान का टारगेट रखा गया है। पांचों प्रोटोटाइप के साथ 84 महीनों में लगभग 1,800 टेस्ट सॉर्टी पूरी की जानी हैं। इन उड़ानों में एयरोडायनामिक्स, फ्लाइट कंट्रोल, इंजन परफॉरमेंस, रडार, सेंसर, वेपन और स्टेल्थ से जुड़े कई टेस्ट किए जाएंगे। (AMCA MK1 GE F414 Engine)

असेंबली लाइन के लिए मांगे 6000 करोड़ रुपये

सूत्रों ने बताया कि जीई एयरोस्पेस ने एफ-414 इंजन के लिए भारत में एक डेडिकेटेड असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग लाइन बनाने का प्रस्ताव भी दिया है। लेकिन इसके बदले में जीई एयरोस्पेस ने 800 मिलियन डॉलर यानी 6000 करोड़ रुपये की मांग की है। इस असेंबली लाइन के जरिए एएमसीए एमके-1 के लिए इंजन बनाए जाएंगे।

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सूत्रों ने बताया कि इस असेंबली लाइन के जरिए एफ-414 इंजन के साथ वायुसेना की तुरंत जरूरतों को पूरा करने के लिए एएमसीए एमके-1 के लगभग चार स्क्वॉड्रन बनाए जा सकते हैं। इन स्क्वाड्रनों में करीब 80 फाइटर जेट्स शामिल होंगे। इस तरह अकेले एएमसीए प्रोजेक्ट के लिए ही लगभग 200+ इंजन की जरूरत पड़ सकती है। वहीं यही इंजन फ्यूचर फाइटर जेट्स तेजस एमके-2 और TEDBF के लिए भी इस्तेमाल किए जाने हैं।

सूत्रों का कहना है कि असेंबली लाइन का सेटअप दो साल में पूरा करने की बात कही है। भारत में एफ-414 इंजन का निर्माण एचएएल की बेंगलुरु स्थित फैसिलिटी में लाइसेंस प्रोडक्शन सिस्टम के तहत किया जा सकता है। यह काम लगभग 1 अरब डॉलर (लगभग 9,470 करोड़ रुपये) के लाइसेंस प्राप्त प्रोडक्शन एग्रीमेंट के तहत होगा।

हालांकि लाइसेंस प्रोडक्शन में इंजन का मूल डिजाइन जीई के पास रहेगा, लेकिन एचएएल को तय शर्तों के तहत भारत में इंजन बनाने की अनुमति मिलेगी। इसमें कुछ पार्ट्स भारत में बनाए जा सकते हैं, कुछ पार्ट्स विदेश से आ सकते हैं और अंतिम असेंबली भारत में की जा सकती है। भारत में बने पहले एफ-414 इंजन को साल 2029 के मध्य तक तैयार करने का लक्ष्य रखा है।

इसमें प्रोडक्शन इक्विपमेंट्स, टेक्निकल डॉक्यूमेंट्स, ट्रेनिंग, सप्लाई चेन, क्वालिटी कंट्रोल और लाइसेंस शामिल है। एफ-414 के लिए पहले करीब 80 प्रतिशत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की बात कही थी।

बता दें कि सरकार ने एएमसीए प्रोजेक्ट के तहत प्रोटोटाइप डेवलपमेंट फेज के लिए 15,803 रुपये की राशि तय की है। जिसे मार्च 2024 में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने मंजूरी दी थी। इसमें 5 फ्लाइंग प्रोटोटाइप बनाना, स्ट्रक्चरल टेस्टिंग, फ्लाइट टेस्टिंग, इंटीग्रेशन आदि शामिल है। (AMCA MK1 GE F414 Engine)

एएमसीए के लिए दूसरे इंजन की तलाश!

सूत्रों के मुताबिक, एफ-414 की लागत बढ़ने के बाद डीआरडीओ एएमसीए एमके-1 के इंजन के लिए दूसरे विकल्पों की तलाश कर रहा है। हालांकि इंजन बदलने का फैसला इतना आसान नहीं होता। क्योंकि यह विमान के डिजाइन, एयर इनटेक, वेट रेशियो, थ्रस्ट, इलेक्ट्रिकल पावर, फ्लाइट कंट्रोल सॉफ्टवेयर, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन से जुड़ा होता है।

अगर ऐसा होता है तो क्या एएमसीए के डिजाइन में बदलाव होगा। तो इस पर सूत्रों ने बताया कि एएमसीए को डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह फ्रीज हो चुका है। दूसरे वेंडर से एएमसीए के डिजाइन के मुताबिक इंजन बनाने के लिए कहा जाएगा और ऐसा करना पॉसिबल है। इंजन बदलने से एयरक्राफ्ट के स्ट्रक्चर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

फ्रांस की साफरान, ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस और जीई एयरोस्पेस ने भारत के सामने इंजन सहयोग को लेकर प्रस्ताव रखे हैं। साफरान और रोल्स-रॉयस की ओर से आईपीआर और 100 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की पेशकश की भी की गई है।

एएमसीए एमके-1 में एफ-414 इंजन का इस्तेमाल किया जाना है। यह शुरुआती प्रोटोटाइप, फ्लाइट टेस्ट और शुरुआती प्रोडक्शन बैच के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

इसके बाद एएमसीए एमके-2 के लिए अधिक ताकतवर 110 से 120 किलो न्यूटन कैटेगरी के इंजन की जरूरत है। इस इंजन को भारत और किसी विदेशी इंजन निर्माता के सहयोग से बनाने की योजना है। (AMCA MK1 GE F414 Engine)

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AMCA MK1 GE F414 Engine
Image Credit: Aero India 2025

एएमसीए एमके-1 के लिए क्यों चुना गया था एफ-414 इंजन

फिफ्थ जनरेशन एएमसीए भारत का प्रस्तावित ट्विन इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट प्रोग्राम है। इसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) और भारतीय एयरोस्पेस इंडस्ट्री के सहयोग से डेवलप किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने मई 2025 में एएमसीए के लिए इंडस्ट्री पार्टनरशिप आधारित एक्जीक्यूशन मॉडल को मंजूरी दी थी। इस मॉडल में निजी और सार्वजनिक, दोनों क्षेत्रों की भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धी आधार पर भाग लेने का मौका दिया गया है।

एएमसीए एमके-1 (AMCA MK1) के लिए दो जीई एफ-414-जीई-आईएनएस6 (F-414-GE-INS6) आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन लगाने की योजना बनाई गई थी। यही इंजन तेजस एमके-2 और नौसेना के ट्विन इंजन डेक बेस्ड फाइटर प्रोग्राम (TEDBF) के लिए इस्तेमाल किया जाना है।

एएमसीए के शुरुआती एमके-1 वर्जन को दो एफ-414 इंजन के साथ डेवलप किया जाएगा। एफ-414 एक आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन है। आफ्टरबर्नर का इस्तेमाल फाइटर जेट को तेज रफ्तार और अतिरिक्त थ्रस्ट देने के लिए किया जाता है।

एफ-414-आईएनएस6 लगभग 98 किलो न्यूटन थ्रस्ट देता है। चूंकि एएमसीए में दो इंजन होंगे, इसलिए विमान को कुल मिलाकर लगभग 196 किलो न्यूटन के आसपास आफ्टरबर्निंग थ्रस्ट मिल सकता है। यह थ्रस्ट विमान के वजन, हथियार, ईंधन, स्टेल्थ डिजाइन और फ्लाइट प्रोफाइल के हिसाब से महत्वपूर्ण होता है।

एफ-414 को शुरुआती चरण के लिए चुनने की एक वजह यह भी है कि यह आजमाया हुआ इंजन है। इस इंजन का इस्तेमाल अमेरिकी एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट, ईए-18जी ग्राउलर और साब ग्रिपेन-एफ जैसे फाइटर जेटों में किया जा चुका है। वहीं, भारत के लिए इसका आईएनएस6 वर्जन अलग कॉन्फिगरेशन के साथ आएगा। (AMCA MK1 GE F414 Engine)

जीई ने क्यों बढ़ाई कीमतें

सूत्रों के अनुसार, जीई ने एफ-414 इंजन की कीमत बढ़ने के पीछे एयरोस्पेस ग्रेड मटेरियल्स, टाइटेनियम, कंपोजिट मटेरियल और इंजन में इस्तेमाल होने वाले विशेष कंपोनेंट्स की कीमतों में बढ़ोतरी को वजह बताया है। फाइटर जेट इंजन में सामान्य मेटल या साधारण पार्ट्स इस्तेमाल नहीं होते। इसके लिए बहुत उच्च तापमान सहने वाले टरबाइन ब्लेड, विशेष कोटिंग, प्रिसाइज मशीनिंग और महंगे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की जरूरत होती है।

जीई एयरोस्पेस ने साल 2025 में अमेरिका में अपनी सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत करने के लिए करीब एक अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की थी।

सूत्रों का कहना है कि जीई एयरोस्पेस इंजन की कीमत के साथ उसकी पूरी सर्विस लाइफ का खर्च भी कॉन्ट्रैक्ट में शामिल करना चाहती है। एक फाइटर जेट इंजन करीब 20 से 30 साल तक सेवा में रह सकता है। इस दौरान स्पेयर पार्ट्स, रिपेयर, ओवरहॉल, मेंटेनेंस, तकनीकी सहायता और भारतीय इंजीनियरों की ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती रहती है। कंपनी चाहती है कि इन सभी खर्चों को पहले से कमर्शियल डील में ध्यान में रखा जाए।

सूत्रों ने बताया कि जीई सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम और करेंसी फ्लक्चुएशन का असर भी कीमत में शामिल करना चाहती है। इंजन के कई महत्वपूर्ण पार्ट्स अलग-अलग देशों से आते हैं। यदि किसी देश में प्रोडक्शन रुकता है, कच्चे माल की कमी होती है या डॉलर-रुपये एक्सचेंज रेट में बड़ा बदलाव आता है, तो इंजन की लागत बढ़ सकती है। जीई इस जोखिम को अपने प्रॉफिट मार्जिन के साथ कवर करना चाहती है।

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इसी वजह से प्राइस एस्केलेशन फॉर्मूला भी बातचीत का अहम हिस्सा बना हुआ है। इसका मतलब है कि अगर आने वाले वर्षों में महंगाई, कच्चे माल की कीमत या उत्पादन लागत बढ़ती है, तो इंजन की कीमत भी तय फॉर्मूले के अनुसार बढ़ सके। (AMCA MK1 F414 Engine)

प्राइवेट सेक्टर को मिली बड़ी भूमिका

एएमसीए प्रोग्राम में प्राइवेट सेक्टर की भी भूमिका होगी। रक्षा मंत्रालय के स्वीकृत एक्जीक्यूशन मॉडल के तहत एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) इंडस्ट्री पार्टनरशिप के साथ प्रोग्राम को आगे बढ़ाएगी। पांच प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए तीन कंसोर्टिया पहले से शॉर्टलिस्ट हो चुके हैं। इनमें लार्सन एंड टुब्रो के साथ भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज के साथ बीईएमएल जैसे नाम शामिल हैं। इनमें से सबसे सस्ती और टेक्निकली योग्य बिड वाले कंसोर्टियम को ही चुना जाएगा।

इस मॉडल में एडीए विमान की डिजाइन अथॉरिटी बनी रहेगी, जबकि चुनी गई निजी कंपनी प्रोटोटाइप निर्माण, उत्पादन व्यवस्था, सप्लाई चेन और आगे की निर्माण क्षमता में अहम भूमिका निभाएगी। इसमें कंपनी आंध्र प्रदेश के पुट्टापर्थी में नई ग्रीनफील्ड फैसिलिटी में एडीए के साथ मिल कर 5 प्रोटोटाइप और एक स्ट्रक्चरल टेस्ट आर्टिकल बनाएगी। (AMCA MK1 GE F414 Engine)

कब से शुरू होगा एएमसीए का प्रोडक्शन

योजना के मुताबिक साल 2027 के आखिर तक एएमसीए के पहले प्रोटोटाइप की असेंबली शुरू करने का लक्ष्य है। पहला एएमसीए प्रोटोटाइप साल 2028 के आखिर तक रोलआउट करने का टारगेट रखा गया है। वहीं, एएमसीए की पहली उड़ान साल 2029 में कराने की योजना है। पहली उड़ान को मेडन फ्लाइट कहा जाता है।

पहले प्रोटोटाइप के बाद बाकी चार प्रोटोटाइप भी चरणबद्ध तरीके से तैयार किए जाएंगे। शुरुआती प्रोटोटाइप मुख्य रूप से विमान की उड़ान क्षमता, एयरफ्रेम, इंजन और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम की जांच के लिए होंगे। बाद के प्रोटोटाइप में रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, हथियार, मिसाइल, सेंसर और दूसरे मिशन सिस्टम की टेस्टिंग की जा सकती है।

योजना के अनुसार वर्ष 2029 से 2031 के बीच पांचों प्रोटोटाइप तैयार किए जाने हैं। इनके साथ हजारों घंटे की टेस्टिंग होगी। वहीं, साल 2032 तक एएमसीए के शुरुआती सर्टिफिकेशन का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती सर्टिफिकेशन को इनिशियल ऑपरेशनल क्लीयरेंस यानी आईओसी कहा जाता है। आईओसी मिलने के बाद एएमसीए एमके-1 का लिमिटेड सीरीज प्रोडक्शन शुरू हो सकता है।

मौजूदा योजना के मुताबिक एएमसीए एमके-1 के शुरुआती विमान साल 2033 से 2034 के बीच तैयार हो सकते हैं। जबकि साल 2035 के आसपास एएमसीए एमके-1 का फुल रेट प्रोडक्शन शुरू करने का लक्ष्य है। इसके बाद धीरे-धीरे स्क्वाड्रन बनाए जाएंगे। (AMCA MK1 GE F414 Engine)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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