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PoJK में उबाल: क्या फेल हो गया है पाकिस्तान का गवर्नेंस मॉडल? ख्वाजा आसिफ ने नागरिकों की मौतों को ठहराया सही

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का कहना है कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में नागरिकों की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग कर रहा है और प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी उसकी दमनकारी नीति का उदाहरण है...

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📍नई दिल्ली | 28 Jul, 2026, 9:35 PM

PoJK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा की खबरें सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई गोलीबारी में कम से कम 17 लोगों की मौत हुई है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में लंबे समय से चल रहा आर्थिक, राजनीतिक और प्रशासनिक असंतोष अब व्यापक जन आंदोलन में बदल गया है। हजारों लोग सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने प्रदर्शन के दौरान हुई नागरिकों की मौतों को उचित ठहराते हुए इसके पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाया है। वहीं भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के दमनकारी शासन और स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही नाराजगी का परिणाम हैं।

PoJK Protests: भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को किया खारिज

भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पीओके में हालिया घटनाएं वहां के लोगों के असंतोष को दर्शाती हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का कहना है कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में नागरिकों की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग कर रहा है और प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी उसकी दमनकारी नीति का उदाहरण है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं है और पाकिस्तान को अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों तथा मानवाधिकारों का सम्मान करना चाहिए।

‘चुनाव केवल दिखावटी प्रक्रिया’

भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में कराए जाने वाले तथाकथित चुनावों पर सवाल उठाए हैं। विदेश मंत्रालय का कहना है कि वहां होने वाले चुनाव केवल दिखावटी प्रक्रिया (कॉस्मेटिक एक्सरसाइज) हैं और उनका वास्तविक लोकतांत्रिक व्यवस्था से कोई संबंध नहीं है।

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विदेश मंत्रालय का कहना है कि जब लोगों को स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने, निष्पक्ष राजनीतिक प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक अधिकारों का अवसर नहीं मिलता, तब केवल चुनाव कराना लोकतंत्र का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

लंबे समय से चले आ रहे असंतोष का नतीजा

पीओके की मौजूदा स्थिति पर भारत की पूर्व राजनयिक वीणा सिकरी ने कहा कि हालिया विरोध प्रदर्शन किसी एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं हैं। उनके अनुसार, यह सालों से चले आ रहे आर्थिक उपेक्षा, प्रशासनिक असंतोष और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पीओके की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए क्योंकि वहां के लोग लगातार अपनी समस्याओं को उठा रहे हैं। (PoJK Protests)

‘पीओके के लोग खुद को दूसरे दर्जे का नागरिक मानते हैं’

वीणा सिकरी के अनुसार, पाकिस्तान जिस क्षेत्र को अपना हिस्सा बताता है, वहीं के लोगों के बीच यह भावना लगातार बढ़ रही है कि उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग लंबे समय से शिकायत करते रहे हैं कि उन्हें बुनियादी सुविधाएं, रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और राजनीतिक अधिकार पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

उनके मुताबिक, यही कारण है कि समय-समय पर वहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं और अब यह असंतोष और अधिक व्यापक रूप ले चुका है। (PoJK Protests)

बिजली परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा लाभ

पूर्व राजनयिक ने पीओके में स्थापित जलविद्युत परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की प्राकृतिक संपदा का लाभ स्थानीय आबादी को पर्याप्त रूप से नहीं मिल रहा है।

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उन्होंने दावा किया कि जिन क्षेत्रों में बिजली परियोजनाएं स्थित हैं, वहां रहने वाले लोगों को बिजली की ऊंची कीमत चुकानी पड़ती है, जबकि उत्पादित बिजली का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के अन्य हिस्सों, विशेष रूप से पंजाब प्रांत, को भेजा जाता है। उनके अनुसार, संसाधनों के असमान वितरण की भावना भी स्थानीय लोगों के असंतोष को बढ़ा रही है। (PoJK Protests)

महिलाएं और युवा भी आंदोलन का हिस्सा

वीणा सिकरी ने कहा कि मौजूदा आंदोलन केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और आम नागरिक भी इसमें भाग ले रहे हैं। उनके अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि असंतोष अब समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय संगठनों ने सरकार के आश्वासनों के बावजूद आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है और उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल

पूर्व राजनयिक के अनुसार, पीओके में चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी लोगों के बीच भरोसे की कमी है। उन्होंने कहा कि कई प्रदर्शनकारी राजनीतिक प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक भागीदारी और निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की भूमिका बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

उनके अनुसार, लोगों का मानना है कि पहले उनकी बुनियादी समस्याओं का समाधान होना चाहिए और उसके बाद ही चुनावी प्रक्रिया को सार्थक माना जा सकता है। (PoJK Protests)

आर्थिक संकट और रोजगार की कमी भी बड़ी वजह

वीणा सिकरी का कहना है कि पीओके में आर्थिक विकास अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ है। स्थानीय उद्योगों, कृषि और रोजगार के अवसरों का पर्याप्त विकास नहीं होने से बड़ी संख्या में लोग आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि महंगाई, खाद्य सुरक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों ने लोगों के असंतोष को और बढ़ा दिया है, जिसके कारण आंदोलन लगातार मजबूत होता जा रहा है। (PoJK Protests)

संयुक्त राष्ट्र तक पहुंची शिकायतें

वीणा सिकरी ने दावा किया कि पीओके के कुछ संगठनों और स्थानीय लोगों ने अपनी शिकायतें संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों तक भी पहुंचाई हैं। उनके अनुसार, इन शिकायतों में मानवाधिकार, राजनीतिक अधिकार और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि यदि इन शिकायतों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाता है, तो पीओके की स्थिति पर वैश्विक चर्चा और तेज हो सकती है।

भारत ने दोहराया अपना रुख

भारत ने एक बार फिर दोहराया कि पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाला क्षेत्र भी शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान को अवैध रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मानवाधिकारों का सम्मान करना चाहिए और नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग तुरंत बंद करना चाहिए। (PoJK Protests)

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  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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