📍कीव/इस्लामाबाद | 26 Aug, 2026, 9:09 PM
Fire Point Pakistan Drone Deal: यूक्रेन की डिफेंस कंपनी फायर पॉइंट ने पाकिस्तान की प्राइवेट डिफेंस कंपनियों को अपने लॉन्ग-रेंज लॉइटरिंग म्यूनिशन यानी वन-वे अटैक ड्रोन की पेशकश की है। कंपनी तकनीक और उत्पादों के आदान-प्रदान के साथ-साथ अपने रक्षा सिस्टम को पाकिस्तान की सेना तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि अभी तक किसी बड़े रक्षा सौदे या बड़े पैमाने पर डिलीवरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
Fire Point Pakistan Drone Deal: मिसाइल और ड्रोन बनाती है फायर पॉइंट
फायर पॉइंट की स्थापना वर्ष 2022 में यूक्रेन की राजधानी कीव में हुई थी। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यह कंपनी तेजी से उभरी और कम लागत वाले लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक सिस्टम विकसित करने के लिए जानी जाने लगी।
कंपनी सिर्फ लॉइटरिंग म्यूनिशन ही नहीं बनाती, बल्कि गाइडेड सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल और टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों पर भी काम कर रही है। कंपनी की एफपी-7 मिसाइल की रेंज लगभग 200 किलोमीटर बताई जाती है, जबकि विकासाधीन एफपी-9 मिसाइल की रेंज करीब 855 किलोमीटर हो सकती है। इसके अलावा कंपनी एफपी-7.एक्स फ्रेया नामक बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर पर भी काम कर रही है।
एफपी-5 फ्लेमिंगो को एल-39 ट्रेनर विमान के एआई-25टीएल टर्बोफैन इंजन के आधार पर डेवलप किया गया है। कंपनी के अनुसार इसकी मारक दूरी लगभग 3,000 किलोमीटर तक हो सकती है। कंपनी के अनुसार इसकी कीमत लगभग 6 लाख डॉलर तक हो सकती है, जो अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल की तुलना में काफी कम है। वहीं एफपी-7 टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल की रेंज करीब 200 किलोमीटर बताई जाती है।
पाकिस्तान को कौन से ड्रोन का किया ऑफर
फायर पॉइंट पाकिस्तान में मुख्य रूप से दो सिस्टम को प्रमोट कर रही है। इनमें एफपी-1 डीप स्ट्राइक और एफपी-2 फ्रंट स्ट्राइक शामिल हैं।
एफपी-1 डीप स्ट्राइक एक लॉन्ग-रेंज लॉइटरिंग म्यूनिशन है। इसकी रेंज 1,600 से 2,600 किलोमीटर तक बताई जाती है। कुछ नए वर्जन में 3,400 किलोमीटर तक की क्षमता का दावा भी किया गया है। यह लगभग 60 किलोग्राम का वारहेड ले जा सकता है और सात घंटे तक हवा में रह सकता है।
इस ड्रोन को यूक्रेन ने ईरान के शाहेद-136 और रूस के गेरान-2 जैसे सिस्टम के जवाब में डेवलप किया था। इसकी अनुमानित कीमत करीब 55,000 डॉलर प्रति यूनिट बताई जाती है, जिससे यह अपेक्षाकृत कम लागत वाला स्ट्राइक प्लेटफॉर्म बन जाता है।
दूसरी ओर एफपी-2 फ्रंट स्ट्राइक की रेंज करीब 200 किलोमीटर बताई जाती है। यह 105 किलोग्राम तक का बड़ा वारहेड ले जाने में सक्षम माना जाता है और फ्रंटलाइन ऑपरेशन के लिए बनाया गया है। (Fire Point Pakistan Drone Deal)
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी फोकस
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस नेटवर्क से मिली जानकारी के अनुसार फायर पॉइंट सिर्फ तैयार ड्रोन बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी पाकिस्तान की निजी रक्षा कंपनियों के साथ टेक्नोलॉजी एक्सचेंज, संयुक्त उत्पादन और संभावित टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी बातचीत कर रही है।
कंपनी का कहना है कि आधुनिक युद्ध में केवल स्ट्रैटेजिक डेप्थ काफी नहीं है। बल्कि लंबी दूरी के सस्ते और बड़ी संख्या में बनाए जा सकने वाले ड्रोन किसी देश की स्ट्राइक क्षमता को काफी बढ़ा सकते हैं।
कंपनी का मानना है कि पाकिस्तान के पास भारत जैसी विशाल भौगोलिक गहराई नहीं है, लेकिन आधुनिक तकनीक, लंबी दूरी के ड्रोन और सही सैन्य सिद्धांतों के जरिए इस कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है।
वहीं पाकिस्तान को अगर बड़े पैमाने पर उत्पादन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से बचाव की क्षमता और ऑपरेशनल अनुभव मिल जाए तो उसकी ड्रोन शक्ति तेजी से बढ़ सकती है।
अभी तक कोई बड़ी डील कन्फर्म नहीं
हालांकि पाकिस्तान और यूक्रेन के बीच ड्रोन डील की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दिसंबर 2025 में यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट कहा था कि पाकिस्तान को कोई यूक्रेनी सैन्य ड्रोन नहीं भेजा गया है। उस समय उन्होंने बताया था कि कुछ लेटर ऑफ इंटेंट जरूर मौजूद थे, लेकिन वे किसी अंतिम रक्षा समझौते में नहीं बदले। (Fire Point Pakistan Drone Deal)
पाकिस्तान पहले से बढ़ा रहा है ड्रोन नेटवर्क
पाकिस्तान पिछले कुछ सालों में अपनी ड्रोन क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा है। वह केवल यूक्रेन पर निर्भर नहीं है।
तुर्किये से पाकिस्तान ने बायराक्तर टीबी-2, अकिनजी और एफपीवी कामिकाजे ड्रोन जैसे कई सिस्टम हासिल किए हैं। इसके अलावा चीन भी विभिन्न ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध करा रहा है।
जुलाई 2026 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि देश में इस्तेमाल होने वाले लगभग 60 प्रतिशत ड्रोन अब स्थानीय स्तर पर बनाए जा रहे हैं। कई निजी कंपनियां इंजन, एयरफ्रेम और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम विकसित करने में लगी हुई हैं।
मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने ड्रोन क्षमता को राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल किया है। (Fire Point Pakistan Drone Deal)
पाकिस्तान ने भी दिए थे हथियार
2022 और 2023 के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज के बनाए 155 मिमी तोप के गोले और 122 मिमी रॉकेट पश्चिमी देशों के जरिए यूक्रेन तक पहुंचे। बताया गया कि इन गोला-बारूद की खरीद अमेरिकी रक्षा कंपनियों ने की थी और बाद में उन्हें यूक्रेन की मदद के लिए भेजा गया।
इन रिपोर्ट्स के अनुसार हथियारों की सप्लाई सीधे पाकिस्तान से यूक्रेन नहीं हुई, बल्कि ब्रिटेन, पोलैंड, जर्मनी और रोमानिया जैसे देशों के माध्यम से पहुंचाई गई। कुछ तस्वीरों और वीडियो में यूक्रेनी सेना के पास पाकिस्तान में बने गोला-बारूद दिखाई देने के दावे भी किए गए थे। (Fire Point Pakistan Drone Deal)
युद्ध के अनुभव से मिली तकनीकी बढ़त
रूस-यूक्रेन युद्ध ने ड्रोन युद्ध की अवधारणा को पूरी तरह बदल दिया है। कम लागत वाले लॉइटरिंग म्यूनिशन और एफपीवी ड्रोन ने पारंपरिक सैन्य अभियानों में नई भूमिका निभाई है।
फायर पॉइंट जैसे यूक्रेनी निर्माताओं को वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में अपने सिस्टम का परीक्षण करने का अवसर मिला है। इसी वजह से उनके उत्पादों में इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर रसिस्टेंट, लंबी दूरी की नेविगेशन क्षमता और बड़े पैमाने पर उत्पादन का अनुभव शामिल है।
युद्ध के दौरान यूक्रेन ने ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल डीप स्ट्राइक के लिए किया है। इसी अनुभव के आधार पर कंपनी अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। (Fire Point Pakistan Drone Deal)
भारत के लिए क्या महत्वपूर्ण है?
भारत के लिए चिंता केवल ड्रोन की खरीद तक सीमित नहीं है। अधिक महत्वपूर्ण पहलू उत्पादन तकनीक, नेविगेशन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर रेजिलिएंस और बड़े पैमाने पर ट्रांसफर ऑफ मैन्युफैक्चरिंग है।
क्योंकि अगर पाकिस्तान के हाथ सस्ते लॉन्ग-रेंज ड्रोन बनाने की तकनीक लग जाती है, तो उसकी स्ट्राइक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसी वजह से भारतीय सेनाएं काउंटर यूएएस सिस्टम, इंटरसेप्टर ड्रोन, रडार नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग क्षमताओं पर भी समान रूप से ध्यान दे रही हैं। (Fire Point Pakistan Drone Deal)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।






