📍नई दिल्ली | 27 Aug, 2026, 11:03 AM
India-UK Electric Propulsion Deal: भारत और ब्रिटेन जल्द ही एक इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट (आईजीए) पर हस्ताक्षर करने की तैयारी कर रहे हैं, जिसके तहत भारतीय नौसेना के लिए चार लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (एलपीडी) युद्धपोतों में इस्तेमाल होने वाली इंटीग्रेटेड फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (आईएफईपी) टेक्नोलॉजी विकसित की जाएगी। इसके साथ ही भारतीय सेना के लिए ब्रिटिश लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल (एलएमएम) की डील पर भी जल्द ही दस्तखत हो सकते हैं।
India-UK Electric Propulsion Deal: क्या है इंटीग्रेटेड फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम?
आज भारतीय नौसेना के अधिकांश युद्धपोत डीजल इंजन, गैस टर्बाइन या स्टीम टर्बाइन से चलते हैं। इन सिस्टम्स में इंजन सीधे जहाज को आगे बढ़ाने के लिए ताकत देता है।
इंटीग्रेटेड फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (आईएफईपी) का तरीका अलग है। इसमें इंजन पहले बिजली पैदा करता है और फिर वही बिजली जहाज को चलाने के साथ-साथ उसके अन्य सिस्टमों को भी ऊर्जा देती है।
सरल शब्दों में कहें तो जहाज में एक सेंट्रलाइज्ड पावर नेटवर्क होता है, जहां पैदा हुई बिजली को जरूरत के अनुसार अलग-अलग सिस्टमों में बांटा जा सकता है।
यही वजह है कि आधुनिक नौसेनाएं अब इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन की ओर बढ़ रही हैं। इससे जहाज पर लगे रडार, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, हथियार और भविष्य की हाई-पावर टेक्नोलॉजी को पर्याप्त ऊर्जा मिल सकती है।
भारतीय नौसेना को क्यों है इसकी जरूरत?
आधुनिक युद्धपोत लगातार एडवांस होते जा रहे हैं। नए जहाजों में लंबी दूरी के रडार, एडवांस सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और डेटा प्रोसेसिंग उपकरण लगाए जा रहे हैं।
इन सभी सिस्टमों को भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। पारंपरिक इंजनों में एनर्जी मैनेजमेंट की सीमाएं होती हैं, जबकि आईएफईपी सिस्टम से जहाज के डिजाइनरों को आसानी होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार 6,000 टन से अधिक वजन वाले बड़े युद्धपोतों के लिए इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन भविष्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता बनता जा रहा है।
चार एलपीडी युद्धपोतों पर होगा पहला इस्तेमाल
भारत इस तकनीक का पहला इस्तेमाल चार लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक वॉरशिप्स पर करने की योजना बना रहा है।
एलपीडी ऐसे बड़े एंफिबियस वॉरशिप्स होते हैं जो सैनिकों, आर्मर्ड व्हीकल्स, हेलीकॉप्टरों और सैन्य उपकरणों को समुद्र के रास्ते युद्ध क्षेत्र तक पहुंचाने में सक्षम होते हैं।
भारतीय नौसेना लंबे समय से ऐसे प्लेटफॉर्म हासिल करने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित एलपीडी भारत के किसी शिपयार्ड में बनाए जाने हैं और इनमें फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन आर्किटेक्चर अपनाने की योजना है। (India-UK Electric Propulsion Deal)
भारत में बनेगी पहली सी ट्रायल फैसिलिटी
इस प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारत की पहली मैरीटाइम लैंड-बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी का निर्माण है।
ब्रिटिश कंपनी जीई वर्नोवा और भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) मिलकर यह सुविधा तैयार करेंगी।
इसमें जहाज पर लगाने से पहले पूरे इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम का जमीन पर परीक्षण किया जाएगा। इससे तकनीकी जोखिम कम होगा और सिस्टम को वास्तविक जहाज में लगाने से पहले उसकी क्षमता की जांच की जा सकेगी।
2024 में शुरू हुई थी प्रक्रिया
भारत और ब्रिटेन के बीच इस सहयोग की औपचारिक शुरुआत 28 नवंबर 2024 को हुई थी। उस दिन ब्रिटेन के पोर्ट्समाउथ शहर में भारतीय नौसेना के लिए इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के डिजाइन और विकास पर सहयोग संबंधी स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट पर दस्तखत किए गए थे।
यह डॉक्युमेंट दोनों देशों के बीच को-डिजाइन, को-क्रिएशन और को-प्रोडक्शन के लिए एक स्ट्रक्चर तैयार करता है।
इसके बाद दोनों देशों के जॉइंट वर्किंग ग्रुप लगातार तकनीकी और औद्योगिक स्तर पर चर्चा करते रहे हैं। (India-UK Electric Propulsion Deal)
ब्रिटेन के पास है बड़ा अनुभव
ब्रिटेन इस क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में गिना जाता है। ब्रिटिश रॉयल नेवी के क्वीन एलिजाबेथ क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर पूरी तरह इंटीग्रेटेड फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम पर आधारित हैं।
ब्रिटेन ने पिछले कई दशकों में टाइप-23 फ्रिगेट, टाइप-45 डिस्ट्रॉयर, लैंडिंग शिप डॉक और एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। अब उसी अनुभव का उपयोग भारत के साथ सहयोग में किया जा रहा है।
वहीं, भारतीय नौसेना 2047 तक लगभग 200 युद्धपोतों वाली आधुनिक समुद्री ताकत बनने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए नए युद्धपोतों का निर्माण और पुराने जहाजों का आधुनिकीकरण दोनों जरूरी हैं।
ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार दोनों देश कुछ पुराने भारतीय नौसैनिक जहाजों में भी इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन आधारित अपग्रेड की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। (India-UK Electric Propulsion Deal)
एलएमएम मिसाइल डील भी अंतिम चरण में
इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन समझौते के अलावा भारत और ब्रिटेन के बीच लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल यानी एलएमएम को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ रही है।
अक्टूबर 2025 में दोनों देशों ने लगभग 350 मिलियन पाउंड के समझौते की घोषणा की थी। अब इस कार्यक्रम के तहत भारतीय सेना के लिए सैकड़ों मिसाइलों की खरीद की तैयारी चल रही है। यह सौदा सरकारी स्तर पर होने वाला है। (India-UK Electric Propulsion Deal)
क्या है लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल?
एलएमएम एक हल्की लेकिन मल्टीपर्पज मिसाइल है, जिसे ब्रिटेन की कंपनी थेल्स यूके बनाती है। इसका वजन लगभग 13 किलोग्राम है और इसकी मारक क्षमता 6 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है। मिसाइल की रफ्तार करीब मैक 1.5 तक है।
इसमें ट्रिपल-इफेक्ट वारहेड और प्रॉक्सिमिटी फ्यूज लगाया गया है, जिससे यह तई तरह के टारगेट्स पर हमला कर सकती है।
एलएमएम को कई तरह के सैन्य अभियानों के लिए तैयार किया गया है। यह हल्के आर्मर्ड व्हीकल्स, ट्रैक्ड व्हीकल्स, सैन्य ठिकानों, हेलीकॉप्टरों और यूएवी के खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती है।
मिसाइल की एक खूबी यह भी है कि इसे शोल्डर लॉन्चर, ट्राइपॉड और वाहन आधारित प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। इससे इसे अलग-अलग ऑपरेशनल परिस्थितियों में इस्तेमाल करना आसान हो जाता है। (India-UK Electric Propulsion Deal)
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