📍बेंगलुरु | 26 Aug, 2026, 1:31 PM
Aravalli Engine IMRH Helicopter Programme: भारत के स्वदेशी हेलीकॉप्टर प्रोग्राम को लेकर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और फ्रांस की साफरान हेलीकॉप्टर इंजिन्स ने अपनी संयुक्त कंपनी साफहाल हेलीकॉप्टर इंजिन्स प्राइवेट लिमिटेड (SAFHAL) के साथ नए ‘अरावली’ टर्बोशाफ्ट इंजन के डेवलपमेंट और प्रोडक्शन के लिए फाइनल कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत किए हैं। यह इंजन भारत के महत्वाकांक्षी इंडियन मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (IMRH) और उसके नौसेना संस्करण डेक-बेस्ड मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (DBMRH) को पावर देगा।
यह इंजन 3,500 से 4,000 शाफ्ट हॉर्सपावर (SHP) कैटेगरी का होगा, जो भारत में अब तक विकसित किए गए हेलीकॉप्टर इंजनों की तुलना में कहीं अधिक ताकतवर माना जा रहा है।
Aravalli Engine IMRH Helicopter Programme: चार साल बाद हुआ फाइनल कॉन्ट्रैक्ट
अरावली इंजन कार्यक्रम की शुरुआत जुलाई 2022 में एचएएल और साफरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से हुई थी। इसके बाद फरवरी 2023 में दोनों पक्षों ने वर्कशेयर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए।
9 नवंबर 2023 को साफहाल संयुक्त उद्यम का औपचारिक पंजीकरण हुआ। फिर 30 अगस्त 2024 को पहला एयरफ्रेमर कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया, जिसके बाद इंजन के संयुक्त डिजाइन का काम शुरू हुआ।
अब 26 अगस्त को हुए इस फाइनल कॉन्ट्रैक्ट के साथ यह प्रोग्राम फुल डेवलपमेंट, प्रोडक्शन, सप्लाई और लाइफ-साइकिल सपोर्ट फेज में पहुंच गया है। इसे भारत के एयरोस्पेस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
क्या है अरावली इंजन?
‘अरावली’ नाम दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली पर्वतमाला से लिया गया है। यह इंजन विशेष रूप से भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है।
यह नया टर्बोशाफ्ट इंजन मौजूदा शक्ति इंजन से काफी अधिक ताकतवर होगा। शक्ति इंजन लगभग 1,400 एसएचपी कैटेगरी का है और एएलएच ध्रुव, एलसीएच प्रचंड तथा एलयूएच जैसे 5.5 टन वर्ग के हेलीकॉप्टरों में इस्तेमाल होता है।
जबकि 13 टन वर्ग के आईएमआरएच हेलीकॉप्टर को गर्म मौसम और ऊंचाई वाले इलाकों में पर्याप्त पेलोड क्षमता बनाए रखने के लिए 3,500 से 4,000 एसएचपी शक्ति वाले इंजन की जरूरत है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए अरावली इंजन विकसित किया जा रहा है।
IMRH क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
आईएमआरएच भारत का अगली पीढ़ी का मीडियम-लिफ्ट हेलीकॉप्टर कार्यक्रम है। इसे भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना के पुराने एमआई-8 और एमआई-17 हेलीकॉप्टरों की जगह लेने के लिए डेवलप किया जा रहा है।
सेना, वायुसेना और नौसेना को लगभग 419 हेलीकॉप्टरों की जरूरत है। इनमें करीब 66 हेलीकॉप्टर नौसेना के डेक-बेस्ड मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर वर्जन के लिए होंगे।
मई 2025 में एचएएल ने इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए अपने स्तर पर लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निवेश भी किया था। पूरे हेलीकॉप्टर डिजाइन और प्रोटोटाइप कार्यक्रम की लागत लगभग 13,000 करोड़ रुपये आंकी जाती है, जबकि अरावली इंजन डेवलपमेंट प्रोग्राम की लागत 6,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
हालांकि अभी आईएमआरएच कार्यक्रम को अंतिम सरकारी मंजूरी का इंतजार है
ऊंचाई वाले इलाकों के लिए खास डिजाइन
आईएमआरएच का डिजाइन भारतीय ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका अधिकतम टेक-ऑफ वजन लगभग 13 टन होगा, जबकि नौसेना संस्करण का वजन लगभग 12.5 टन रहेगा।
हेलीकॉप्टर में 24 से 36 सैनिकों को ले जाने की क्षमता होगी। समुद्र तल पर यह लगभग 4,000 से 4,500 किलोग्राम पेलोड उठा सकेगा, जबकि 4,000 मीटर की ऊंचाई पर भी करीब 1,500 किलोग्राम भार ले जाने की क्षमता रखेगा।
इसकी अनुमानित रेंज लगभग 800 किलोमीटर होगी और क्रूज स्पीड करीब 260 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। हेलीकॉप्टर की सर्विस सीलिंग 6,500 से 6,700 मीटर तक हो सकती है।
इसमें 21.2 मीटर व्यास वाला पांच ब्लेड वाला मुख्य रोटर लगाया जाएगा। यह बड़ा रोटर विशेष रूप से सियाचिन, लद्दाख और अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में बेहतर प्रदर्शन के लिए चुना गया है। हेलीकॉप्टर में चार ब्लेड वाला टेल रोटर और 60 प्रतिशत से अधिक कंपोजिट सामग्री का उपयोग भी प्रस्तावित है।
साफहाल की क्या होगी भूमिका?
साफहाल, एचएएल और साफरान हेलीकॉप्टर इंजिन्स का जॉइंट वेंचर है। इसमें एचएएल की हिस्सेदारी लगभग 50.5 प्रतिशत और साफरान की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत है।
यह संयुक्त कंपनी इंजन के डिजाइन, विकास, निर्माण, परीक्षण, सपोर्ट और लाइफ-साइकिल मैनेजमेंट का काम संभालेगी। इसके तहत आधुनिक डिजाइन तकनीक, अत्याधुनिक निर्माण प्रक्रियाएं और अंतरराष्ट्रीय एयरोस्पेस मानकों के अनुरूप परीक्षण किए जाएंगे।
भारत-फ्रांस साझेदारी का नया अध्याय
एचएएल और साफरान 1960 के दशक से साथ काम कर रही हैं। उस समय चेतक और चीता हेलीकॉप्टरों के लिए आर्टूस्ट इंजन उपलब्ध कराए गए थे।
इसके बाद शक्ति इंजन परिवार विकसित किया गया, जो आज एएलएच ध्रुव, एलसीएच प्रचंड और एलयूएच हेलीकॉप्टरों को उड़ा रहा है।
अरावली इंजन कार्यक्रम इस सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाता है क्योंकि इसमें केवल निर्माण ही नहीं बल्कि डिजाइन और विकास स्तर पर भी दोनों पक्ष बराबरी से काम कर रहे हैं। साफरान हेलीकॉप्टर इंजिन्स के लिए भी यह पहली बार है जब वह इस शक्ति श्रेणी के इंजन का को-डेवलपमेंट कर रहा है।
सैन्य के साथ नागरिक क्षेत्र में भी इस्तेमाल
अरावली इंजन का इस्तेमाल भविष्य में ऑफशोर ट्रांसपोर्ट, यूटिलिटी मिशन और वीवीआईपी परिवहन जैसे नागरिक क्षेत्रों में भी किया जा सकेगा।
इसके साथ ही भारत में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ क्षमताओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इंजन को थार रेगिस्तान की गर्म परिस्थितियों से लेकर लद्दाख की ऊंची और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया जा रहा है। (Aravalli Engine IMRH Helicopter Programme)
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