📍नई दिल्ली | 21 Aug, 2026, 8:00 PM
Baaz Battalion: भारतीय सेना ने पश्चिमी मोर्चे पर अपनी ड्रोन क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए पंजाब के जालंधर स्थित 11 कोर (वज्र कोर) के तहत एक विशेष ‘बाज बटालियन’ का गठन किया है। यह यूनिट पूरी तरह ड्रोन ऑपरेशंस, हवाई निगरानी और बैटलफील्ड इंटेलिजेंस पर केंद्रित होगी। सेना के अनुसार यह नई बटालियन वज्र कोर की हवाई पहुंच, प्रतिक्रिया क्षमता और युद्धक्षेत्र में निगरानी की ताकत को बढ़ाएगी।
वेस्टर्न कमांड के अंतर्गत बनाई गई इस यूनिट को ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू किए गए सैन्य बदलावों का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सेना का कहना है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और अनमैन्ड सिस्टम्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए बाज बटालियन जैसी विशेष ड्रोन यूनिट्स तैयार की जा रही हैं।
जालंधर में होगा Baaz Battalion का मुख्यालय
नई बनाई गई बाज बटालियन भारतीय सेना की 11 कोर के अधीन काम करेगी, जिसका मुख्यालय पंजाब के जालंधर में स्थित है। 11 कोर को वज्र कोर के नाम से भी जाना जाता है और यह पाकिस्तान से लगने वाले संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सेना ने इन विशेष ड्रोन यूनिट्स का नाम “बाज” रखा है। बाज एक शिकारी पक्षी होता है, जो तेज नजर, लंबी दूरी तक निगरानी और सटीक टारगेट पहचानने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इन बटालियनों का नामकरण किया गया है।
हाल के महीनों में इस यूनिट को खड़ा करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। जालंधर में स्थापित यह यूनिट पाकिस्तान सीमा से जुड़े इलाके में बनाई गई पहली बाज बटालियन मानी जा रही है। (Baaz Battalion)

क्या होती है बाज बटालियन?
बाज बटालियन भारतीय सेना की विशेष ड्रोन यूनिट है, जिसे आर्मी एविएशन कॉर्प्स के तहत बनाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी की निगरानी, टोही मिशन, लक्ष्य पहचान और युद्धक्षेत्र की लगातार जानकारी जुटाना है।
सेना में पहले से मौजूद छोटे ड्रोन प्लाटून और लोइटरिंग म्यूनिशन यूनिट्स की तुलना में बाज बटालियन कहीं बड़े स्तर पर काम करेगी। जहां इन्फैंट्री यूनिट्स के साथ “अश्नि ड्रोन प्लाटून” तत्काल इलाके की निगरानी करते हैं, वहीं बाज बटालियन कई किलोमीटर दूर तक निगरानी और डेटा एकत्र करने की क्षमता रखेगी।
इसका फोकस केवल ड्रोन उड़ाने तक सीमित नहीं होगा बल्कि पूरे ड्रोन इकोसिस्टम को संचालित करना होगा। इसमें ऑपरेशन, डेटा विश्लेषण, रखरखाव और जमीनी सैनिकों के साथ तालमेल शामिल रहेगा। (Baaz Battalion)
युद्धक्षेत्र में बढ़ेगी हवाई निगरानी
सेना के सूत्रों के अनुसार बाज बटालियन अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों को बेहतर हवाई निगरानी और रियल टाइम सिचुएशनल अवेयरनेस उपलब्ध कराएगी।
आधुनिक युद्ध में यह जानना बेहद जरूरी होता है कि दुश्मन की गतिविधियां कहां हो रही हैं, कौन से क्षेत्र में सैनिकों की आवाजाही है और किस दिशा में खतरा बढ़ रहा है। ड्रोन लगातार हवा में रहकर यह जानकारी जुटा सकते हैं।
बाज बटालियन के जरिए सेना को सीमा क्षेत्रों और गहरे इलाकों में होने वाली गतिविधियों पर अधिक प्रभावी नजर रखने में मदद मिलेगी। इससे कमांडरों को तेजी से फैसले लेने के लिए जरूरी जानकारी मिल सकेगी। (Baaz Battalion)

कई तरह के ड्रोन चला सकेगी यूनिट
जानकारी के अनुसार बाज़ बटालियन को अलग-अलग कैटेगरी के ड्रोन ऑपरेट करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसमें लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले यूएवी और कुछ लॉइटरिंग म्युनिशंस वाले ड्रोन भी शामिल हो सकते हैं।
इनमें अमेरिका की जनरल एटॉमिक्स कंपनी के एमक्यू-9बी, इजराइल के हेरॉन और हर्मीस जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इसके अलावा डीआरडीओ द्वारा विकसित किए जा रहे घटक यूएवी तथा भारतीय कंपनियों आइडियाफोर्ज, एसएमपीपी और न्यूस्पेस रिसर्च द्वारा तैयार ड्रोन भी इस इकोसिस्टम का हिस्सा हो सकते हैं।
इन प्लेटफॉर्म की मदद से बेहतर निगरानी, टारगेट की पहचान, बॉर्डर मॉनिटरिंग और लंबे समय तक हवा में बने रहने जैसी क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। (Baaz Battalion)
ड्रोन ऑपरेशंस का बनेगा केंद्रीय कमांड सेंटर
बाज बटालियन को केवल ड्रोन यूनिट नहीं बल्कि एक तरह का सेंट्रल ऑपरेशन सेंटर भी माना जा रहा है। सेना के पास अब अलग-अलग कंपनियों और अलग-अलग क्षमताओं वाले ड्रोन तेजी से बढ़ रहे हैं।
ऐसे में ट्रेनिंग, डेटा मैनेजमेंट, सॉफ्टवेयर अपडेट, रखरखाव और ऑपरेशनल कॉर्डिनेशन को एक जगह से ऑपरेट करने की जरूरत महसूस की जा रही थी। बाज बटालियन इसी भूमिका को निभाएगी।
सूत्रों के अनुसार आधुनिक ड्रोन बड़ी मात्रा में वीडियो, इमेज और सेंसर डेटा भेजते हैं। इस डेटा को प्रोसेस करना और उपयोगी इंटेलिजेंस में बदलना किसी भी ऑपरेशन की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।

ऑपरेशन सिंदूर से मिला अनुभव
सेना के इस फैसले के पीछे हाल के सालों के कई सैन्य अनुभवों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ हुए सीमा गतिरोध और मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन और निगरानी सिस्टम्स की भूमिका काफी अहम रही थी।
इन अभियानों से यह स्पष्ट हुआ कि युद्धक्षेत्र में लगातार निगरानी और तेज सूचना प्रवाह सैन्य अभियानों की प्रभावशीलता को बढ़ाता है। इसी अनुभव के आधार पर सेना अपने ड्रोन स्ट्रक्चर का विस्तार कर रही है। (Baaz Battalion)

अश्नि ड्रोन प्लाटून और दिव्यास्त्र के साथ होगा तालमेल
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने विभिन्न स्तरों पर ड्रोन क्षमताओं को बढ़ाया है। प्रत्येक इन्फैंट्री बटालियन में “अश्नि ड्रोन प्लाटून” तैनात किए जा रहे हैं, जो आसपास के क्षेत्र की तत्काल निगरानी करते हैं।
वहीं आर्टिलरी रेजिमेंट्स ऐसे ड्रोन भी संचालित करती हैं जो लोइटरिंग म्यूनिशन ले जाते हैं। इन्हें वन-वे ड्रोन भी कहा जाता है क्योंकि ये टारगेट पर हमला करने के बाद वापस नहीं लौटते।
बाज बटालियन इन सभी क्षमताओं को बड़े स्तर की निगरानी और इंटेलिजेंस नेटवर्क से जोड़ने का काम करेगी। इसके लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम तैयार की गई है, जो ड्रोन ऑपरेशंस, डेटा एक्सप्लॉइटेशन और जमीनी सैनिकों के साथ कॉर्डिनेशन करेगी। (Baaz Battalion)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





