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4,000 करोड़ की लागत से भारतीय सेना खरीदेगी 300 धनुष तोपें, 15 नई रेजिमेंट्स होंगी तैयार

धनुष तोप का परीक्षण 2018 में राजस्थान के पोखरण में किया गया था। इस दौरान हजारों राउंड फायर किए गए और इसके प्रदर्शन को संतोषजनक पाया गया...

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📍नई दिल्ली | 3 Mar, 2026, 9:34 PM

Indian Army Dhanush Howitzer: भारतीय सेना अपनी फायरपावर बढ़ाने के लिए जल्द ही 300 स्वदेशी धनुष हॉवित्जर तोपों के लिए ऑर्डर देने वाली है। यह फैसला रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में मंजूरी मिलने के बाद आगे बढ़ेगा। इस खरीद के जरिए सेना में 15 नई आर्टिलरी रेजिमेंट्स तैयार की जाएंगी।

Indian Army Dhanush Howitzer: धनुष तोपों का दूसरा बड़ा ऑर्डर

यह धनुष हॉवित्जर का दूसरा बड़ा ऑर्डर होगा। इससे पहले भारतीय सेना 114 तोपों का ऑर्डर दे चुकी है, जिनमें से कई पहले ही सेना में शामिल की जा चुकी हैं। इन तोपों के आधार पर अभी तक चार रेजिमेंट्स ऑपरेशनल हो चुकी हैं, जबकि दो और रेजिमेंट्स को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है। अब नए 300 तोपों के ऑर्डर से सेना की आर्टिलरी क्षमता में बड़ा विस्तार होगा।

धनुष तोपों का निर्माण एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) द्वारा किया जा रहा है, जो पहले ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड का हिस्सा था। इन तोपों का उत्पादन जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री में किया जाता है। (Indian Army Dhanush Howitzer)

क्या है धनुष हॉवित्जर

धनुष एक 155 मिमी और 45-कैलिबर की आधुनिक तोप है, जिसे 1980 के दशक में भारत द्वारा खरीदी गई बोफोर्स तोप की टेक्नोलॉजी के आधार पर विकसित किया गया है। इसे पूरी तरह आधुनिक जरूरतों के हिसाब से अपग्रेड किया गया है।

यह तोप अलग-अलग तरह के गोला-बारूद यानी एम्यूनिशन का इस्तेमाल कर सकती है और इसमें बाय-मॉड्यूलर चार्ज सिस्टम लगाया गया है, जिससे इसकी मारक क्षमता बढ़ जाती है। सामान्य स्थिति में इसकी रेंज करीब 36 किलोमीटर है, जबकि खास एम्यूनिशन के साथ यह 38 से 40 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तक निशाना साध सकती है।

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इसमें डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है, जिससे निशाना अधिक सटीक होता है। इसके अलावा इसमें ऑटोमैटिक लोडिंग असिस्ट, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और हाई-एल्टीट्यूड यानी ऊंचाई वाले इलाकों में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता भी है। (Indian Army Dhanush Howitzer)

क्यों जरूरी है यह खरीद

भारतीय सेना लंबे समय से अपनी आर्टिलरी यानी तोपखाने को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। सेना का लक्ष्य है कि वह धीरे-धीरे पुराने 105 मिमी और 130 मिमी की तोपों को हटाकर 155 मिमी स्टैंडर्ड की आधुनिक तोपों को शामिल करे।

इसी योजना के तहत धनुष तोपों की खरीद की जा रही है। यह योजना फील्ड आर्टिलरी रैशनलाइजेशन प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत सेना को हजारों नई तोपों की जरूरत है।

धनुष तोपों की खास बात यह है कि इनका इस्तेमाल पहाड़ी इलाकों में भी आसानी से किया जा सकता है। इन्हें लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे इलाकों में टेस्ट किया जा चुका है, जहां इनका प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया है। (Indian Army Dhanush Howitzer)

लागत करीब 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये

पहले ऑर्डर में 114 तोपों की लागत करीब 1,260 करोड़ रुपये थी। नए 300 तोपों के ऑर्डर की कुल लागत 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये के बीच होने का अनुमान है।

इन तोपों की डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से होगी और यह प्रक्रिया 2028 से 2032 के बीच पूरी हो सकती है। हालांकि पहले ऑर्डर की डिलीवरी में कुछ देरी भी देखी गई है, जिसका कारण सप्लाई चेन और कुछ इंपोर्टेड कंपोनेंट्स की उपलब्धता बताया गया है। (Indian Army Dhanush Howitzer)

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सेना में मौजूदा स्थिति

मार्च 2026 तक धनुष तोपों की चार रेजिमेंट्स सेना में शामिल हो चुकी हैं। दो और रेजिमेंट्स को जल्द शामिल किया जाना है। एक रेजिमेंट में आमतौर पर 18 तोपें होती हैं। नए ऑर्डर के बाद कुल धनुष रेजिमेंट्स की संख्या काफी बढ़ जाएगी।

इन तोपों का इस्तेमाल मुख्य रूप से उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर किया जा रहा है, जहां तेजी से प्रतिक्रिया देने और लंबी दूरी तक सटीक निशाना लगाने की जरूरत होती है। (Indian Army Dhanush Howitzer)

स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा

धनुष तोपों का एक बड़ा फायदा यह है कि इनमें 80 प्रतिशत से अधिक हिस्से स्वदेशी हैं। इसका मतलब है कि इनके स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस में विदेशी निर्भरता कम रहती है।

इस प्रोजेक्ट से देश के रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिल रहा है। इसमें कई छोटे और मध्यम उद्योग भी शामिल हैं, जो अलग-अलग पार्ट्स और उपकरण तैयार करते हैं। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। (Indian Army Dhanush Howitzer)

धनुष तोप की तकनीकी खूबियां

धनुष तोप की फायरिंग स्पीड काफी तेज है। यह एक मिनट में कई राउंड फायर कर सकती है। इसमें नाटो मानकों के अनुसार गोला-बारूद का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उपयोगी बनती है।

इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाए गए हैं, जो लक्ष्य की पहचान और सटीकता को बेहतर बनाते हैं। इसके अलावा इसे भविष्य में और अपग्रेड करने की भी योजना है, जिसमें 52-कैलिबर वर्जन शामिल हो सकता है, जिसकी रेंज और ज्यादा होगी।

धनुष तोप का परीक्षण 2018 में राजस्थान के पोखरण में किया गया था। इस दौरान हजारों राउंड फायर किए गए और इसके प्रदर्शन को संतोषजनक पाया गया। इसके बाद ही इसे सेना में शामिल करने का रास्ता साफ हुआ। (Indian Army Dhanush Howitzer)

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