📍नई दिल्ली | 30 Jul, 2026, 7:06 PM
Project 75I Submarine Deal: भारतीय नौसेना के सबमरीन प्रोजेक्ट-75आई को जल्द ही नई रफ्तार मिल सकती है। जर्मनी के भारत में राजदूत फिलिप एकरमैन ने कहा है कि भारत और जर्मनी के बीच करीब 8 अरब यूरो (लगभग 90,000 करोड़ रुपये) की इस बहुप्रतीक्षित पनडुब्बी प्रोजेक्ट पर जल्द दस्तखत हो सकते हैं। उनके अनुसार, समझौता अगले महीने तक पूरा होने की उम्मीद है।
इस प्रोजेक्ट के तहत भारतीय नौसेना के लिए छह नई पीढ़ी की पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बियां बनाई जाएंगी। इनका निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) और भारत की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) साझेदारी में काम करेंगी। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के साथ देश में पनडुब्बी निर्माण क्षमता को मजबूत करना है।
Project 75I Submarine Deal: लंबे समय से चल रही थी प्रोजेक्ट-75आई की तैयारी
प्रोजेक्ट-75आई भारतीय नौसेना के सबसे महत्वपूर्ण आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में शामिल है। भारतीय नौसेना कई सालों से ऐसी आधुनिक पनडुब्बियों की जरूरत महसूस कर रही थी, जो लंबे समय तक समुद्र के भीतर रहकर बिना दुश्मन की नजर में आए मिशन पूरा कर सकें।
इसी जरूरत को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने प्रोजेक्ट-75आई शुरू किया था। इसमें विदेशी रक्षा कंपनी से तकनीक लेकर भारत में निर्माण करने की योजना बनाई गई। इस प्रोजेक्ट के लिए जर्मनी की टीकेएमएस और मझगांव डॉक से साझेदारी की है। जर्मनी की टीकेएमएस आवश्यक तकनीकी सहयोग देगी, जबकि निर्माण का काम मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड करेगा।
जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है और समझौते पर जल्द हस्ताक्षर होने की संभावना है। (Project 75I Submarine Deal)
टाइप-214 पनडुब्बी पर आधारित होगी नई डिजाइन
इस प्रोजेक्ट में जर्मनी की टाइप-214 पनडुब्बी की तकनीक को आधार बनाया जाएगा। टाइप-214 दुनिया की सबसे आधुनिक पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बियों में गिनी जाती है।
इसे जर्मनी की हाउवाल्ट्सवर्के-डॉयचे वेर्फ्ट (एचडीडब्ल्यू) ने तैयार किया है। इसके डिजाइन में पहले से सफल रही टाइप-209 सीरीज का मजबूत स्ट्रक्चर और टाइप-212ए में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक फ्यूल सेल बेस्ड एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) तकनीक को जोड़ा गया है।
यही तकनीक इस पनडुब्बी को पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों से अलग बनाती है। (Project 75I Submarine Deal)
क्या है एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन तकनीक?
सामान्य डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को कुछ समय बाद बैटरी चार्ज करने के लिए समुद्र की सतह के करीब आना पड़ता है या स्नॉर्कल का उपयोग करना पड़ता है। इस दौरान उनके पकड़े जाने का खतरा बढ़ जाता है।
टाइप-214 में लगी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) टेक्नोलॉजी इस समस्या को काफी हद तक दूर करती है। यह सिस्टम हाइड्रोजन फ्यूल सेल की मदद से बिजली बनाती है, जिससे पनडुब्बी लंबे समय तक बिना सतह पर आए समुद्र के भीतर रह सकती है।
इसी कारण इसकी स्टेल्थ क्षमता यानी दुश्मन से छिपकर काम करने की क्षमता काफी बढ़ जाती है।
साइज और डिजाइन भी आधुनिक
टाइप-214 की लंबाई करीब 65 मीटर है, जबकि इसकी चौड़ाई 6.3 मीटर और ड्राफ्ट लगभग 6 मीटर है। सतह पर इसका वजन करीब 1,690 टन और पानी के भीतर लगभग 1,860 टन होता है।
इसका प्रेशर हल एचवाई-100 फेरोमैग्नेटिक स्टील से बनाया गया है। इस विशेष स्टील का उपयोग पनडुब्बी के चुंबकीय संकेत को कम करने के लिए किया जाता है, जिससे दुश्मन के सेंसर इसे आसानी से पहचान नहीं पाते।
पनडुब्बी के पिछले हिस्से में एक्स-रडर डिजाइन दिया गया है। इससे पानी के भीतर बेहतर मोड़ लेने और सीमित जगह में ऑपरेशन करने में मदद करती है। (Project 75I Submarine Deal)
इंजन और प्रोपल्शन सिस्टम
टाइप-214 में दो एमटीयू 16वी-396 डीजल इंजन लगे हैं, जो लगभग 3.96 मेगावाट की पावर पैदा करते हैं। इसके साथ सीमेंस परमासिन लो-स्पीड इलेक्ट्रिक मोटर लगी है, जिसकी क्षमता 2.85 मेगावाट है।
इसके अलावा इसमें एचडीडब्ल्यू पॉलीमर इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल के दो मॉड्यूल लगाए गए हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 120 किलोवाट है।
यह पूरा प्रोपल्शन सिस्टम आधुनिक डीजल जनरेटर के साथ मिलकर काम करता है। इसमें जरूरत के अनुसार लेड-एसिड बैटरी या लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग किया जा सकता है। (Project 75I Submarine Deal)
तीन सप्ताह तक समुद्र के भीतर रहने की क्षमता
टाइप-214 की सबसे बड़ी विशेषता इसका लंबा ऑपरेशनल एंड्योरेंस है। यह पनडुब्बी सतह पर 10 से 12 नॉट की रफ्तार से चल सकती है, जबकि पानी के भीतर इसकी अधिकतम गति 20 नॉट तक पहुंच सकती है। एआईपी मोड में यह 2 से 6 नॉट की रफ्तार से लगातार ऑपरेशन कर सकती है।
यह पनडुब्बी आधिकारिक तौर पर 250 मीटर से अधिक गहराई तक काम कर सकती है। जबकि इसकी अधिकतम डाइविंग क्षमता करीब 400 मीटर तक है।
इसका ऑपरेशनल एंड्योरेंस 84 दिन तक है। वहीं एआईपी तकनीक की मदद से यह लगातार तीन सप्ताह तक बिना सतह पर आए समुद्र के भीतर रह सकती है।
सतह पर इसकी अधिकतम ऑपरेशनल दूरी लगभग 12,000 नॉटिकल मील है, जबकि फ्यूल सेल सिस्टम के सहारे पानी के भीतर यह करीब 1,248 नॉटिकल मील तक सफर कर सकती है। (Project 75I Submarine Deal)
हथियारों से लैस है यह सबमरीन
टाइप-214 में आगे की तरफ आठ 533 मिलीमीटर टॉरपीडो ट्यूब लगी होती हैं। इनके जरिए डीएम2ए4 और ब्लैक शार्क जैसे हैवीवेट वायर-गाइडेड टॉरपीडो दागे जा सकते हैं। इसके अलावा यह पनडुब्बी सब-हार्पून एंटी-शिप मिसाइल भी लॉन्च कर सकती है।
इसकी वजह से यह दुश्मन के युद्धपोतों, पनडुब्बियों और समुद्री लक्ष्यों पर प्रभावी हमला कर सकती है। (Project 75I Submarine Deal)
आधुनिक कॉम्बैट सिस्टम और सेंसर
पनडुब्बी में ओआरसीसीए कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। इसके साथ आईएसयूएस-90 सोनार और वेपन कंट्रोल सिस्टम भी मौजूद है।
नेविगेशन के लिए इसमें स्फिंक्स-डी लो प्रॉबेबिलिटी ऑफ इंटरसेप्ट रडार लगाया गया है। यह रडार कम इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर छोड़ता है, जिससे दुश्मन के लिए इसकी मौजूदगी का पता लगाना कठिन हो जाता है।
इसके अलावा इसमें टॉरपीडो काउंटरमेजर सिस्टम भी लगाया गया है, जो दुश्मन के टॉरपीडो से बचाव में मदद करता है।
विशेष अभियानों के लिए भी तैयार
टाइप-214 को स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स के मिशनों के लिए भी तैयार किया गया है। इसमें अलग-अलग मिशनों के अनुसार हथियार और उपकरण लगाए जा सकते हैं। ऑपरेटर अपनी जरूरत के अनुसार अलग प्रकार के ऑप्टिकल सेंसर और मिशन मॉड्यूल भी चुन सकते हैं। पनडुब्बी में कुल 27 सदस्यीय चालक दल तैनात रहता है, जिसमें 5 अधिकारी और 22 नाविक शामिल होते हैं। (Project 75I Submarine Deal)
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