📍नई दिल्ली | 16 Apr, 2026, 9:36 PM
Project 75I Submarine Deal: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 21 अप्रैल से तीन दिवसीय दौरे पर जर्मनी जा रहे हैं। इस यात्रा को भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरान बर्लिन में वे जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस से मिलेंगे, जहां कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। वहीं रक्षा मंत्री की जर्मनी यात्रा के दौरान भारतीय नौसेना के लिए प्रस्तावित प्रोजेक्ट 75आई पनडुब्बी सौदे को भी अंतिम रूप दिया जा सकता है। इस सौदे की लागत लगभग 8 से 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 67,000 से 99,000 करोड़ रुपये) है, जिसके तहत भारतीय नौसेना को छह अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां बनाई जाएंगी।
सूत्रों के मुताबिक, इस दौरे में रक्षा मंत्री जर्मनी के शीर्ष सरकारी अधिकारियों, सैन्य नेतृत्व और डिफेंस इंडस्ट्री से जुड़े प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। इस बातचीत का मकसद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, निवेश और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को आगे बढ़ाना है।
बर्लिन में होने वाली बैठकों में भारत और जर्मनी के बीच लंबे समय तक चलने वाले रणनीतिक सहयोग पर भी चर्चा होगी। खास तौर पर समुद्री सुरक्षा और नौसेना की क्षमता बढ़ाने पर जोर रहेगा।
सूत्रों का कहना है कि इस दौरे में प्रोजेक्ट 75आई के तहत सबमरीन डील पर अंतिम मुहर लगाई जा सकती है। इस प्रोजेक्ट के तहत भारतीय नौसेना के लिए छह आधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां खरीदी जानी हैं। इन पनडुब्बियों में एडवांस एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन यानी एआईपी सिस्टम लगाया जाएगा।
इस सिस्टम की मदद से पनडुब्बियां ज्यादा समय तक पानी के अंदर रह सकती हैं। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है और ऑपरेशन के दौरान उनकी क्षमता बढ़ती है।

Project 75I Submarine Deal: जर्मनी पहुंचे विदेश सचिव
इससे पहले भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री मंगलवार, 14 अप्रैल को जर्मनी की राजधानी बर्लिन पहुंचे। यहां उन्होंने जर्मनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अहम स्तर की बातचीत की। बर्लिन में भारत-जर्मनी विदेश कार्यालय परामर्श की बैठक हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता विक्रम मिस्री और जर्मनी के स्टेट सेक्रेटरी डॉ. गेजा आंद्रेयास वॉन गेयर ने की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रिश्तों के पूरे दायरे पर चर्चा हुई। भारत और जर्मनी ने अपने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर बात की। बातचीत के दौरान व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, तकनीक, ग्रीन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट और लोगों की आवाजाही जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए।
Project 75I Submarine Deal: क्या है प्रोजेक्ट 75आई
प्रोजेक्ट 75आई भारतीय नौसेना का एक बड़ा कार्यक्रम है, जिसके जरिए नई पीढ़ी की पनडुब्बियां शामिल की जानी हैं। इससे पहले प्रोजेक्ट 75 के तहत फ्रांस से स्कॉर्पीन क्लास या कलवरी क्लास की छह पनडुब्बियां शामिल की गई थीं। अब नया प्रोजेक्ट उससे आगे का कदम माना जा रहा है।
इसमें स्टेल्थ यानी छिपकर काम करने की क्षमता, लंबी दूरी तक ऑपरेशन और आधुनिक हथियारों पर खास ध्यान दिया गया है। इन पनडुब्बियों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि वे दुश्मन की नजर से दूर रहकर काम कर सकें।
इस सौदे में जर्मनी की कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी कंपनी के डिजाइन पर आधारित पनडुब्बियां भारत को मिल सकती हैं। जो टाइप 214 नेक्स्ट जेनरेशन या समान वेरिएंट पर डेवलप की जाएंगी। इनका निर्माण भारत में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में किया जाएगा। इस सौदे में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी शामिल होगा, जिससे भारत को पनडुब्बी निर्माण की नई तकनीक सीखने का मौका मिलेगा।
इस सौदे की एक खास बात यह है कि पनडुब्बियों का ज्यादातर निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इससे देश के रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इनका निर्माण शुरू होने में 2-3 साल लग सकते हैं और पहली पनडुब्बी की डिलीवरी 2030 के आसपास हो सकती है।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत यह सौदा एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे भारत की घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता मजबूत होगी।
इससे पहले मार्च 2026 में जर्मनी के राजदूत फिलिप अकरमैन ने कहा था कि यह सौदा 6 से 8 हफ्तों में फाइनल हो सकता है। कीमत को लेकर बातचीत पूरी हो चुकी है और अब सिर्फ मंजूरी और कॉन्ट्रैक्ट साइन करने की प्रक्रिया चल रही है। (Project 75I Submarine Deal)
क्या होंगी खूबियां
इन पनडुब्बियों का वजन करीब 3,000 टन होगा, और ये मौजूदा कलवरी क्लास से बड़ी होंगी। इनकी लंबाई करीब 65 से 80 मीटर के बीच होगी। इनका इंजन डीजल-इलेक्ट्रिक होगा, लेकिन इसमें खास फ्यूल सेल आधारित एआईपी सिस्टम भी लगाया जाएगा। इस तकनीक की वजह से पनडुब्बी एक बार में 2 से 3 हफ्ते तक पानी के अंदर रह सकती है, जबकि सामान्य पनडुब्बियां करीब 48 घंटे में ऊपर आने को मजबूर हो जाती हैं। इससे इन्हें छिपकर काम करने में ज्यादा मदद मिलती है, क्योंकि बार-बार स्नॉर्कलिंग की जरूरत नहीं पड़ती।
स्पीड की बात करें तो ये सतह पर 12 से 15 नॉट की रफ्तार से चल सकती हैं, जबकि पानी के अंदर इनकी गति 20 से 30 नॉट तक जा सकती है। (Project 75I Submarine Deal)
हथियारों के मामले में ये पनडुब्बियां काफी आधुनिक होंगी। इनमें टॉरपीडो, एंटी-शिप मिसाइल और जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइलें लगाई जा सकेंगी। जरूरत पड़ने पर ये समुद्र में माइंस भी बिछा सकती हैं। इसके साथ ही इसमें एडवांस कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और कम आवाज करने वाला प्रोपेलर होगा, जिससे दुश्मन के लिए इन्हें पकड़ना मुश्किल होगा।
इनमें इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, टॉरपीडो से बचाव के उपाय और कम दिखने व कम आवाज करने की तकनीक भी होगी। एआईपी सिस्टम की वजह से ये पनडुब्बियां दुश्मन के रडार और सोनार से बचकर लंबे समय तक गुप्त मिशन कर सकती हैं। साथ ही, एआईपी वाली पनडुब्बियां खुफिया अभियान और दुश्मन की सप्लाई लाइनों को बाधित करने में बेहतर साबित होंगी। इससे भारतीय नौसेना की अंडरवाटर वारफेयर क्षमता में क्रांतिकारी सुधार होगा। (Project 75I Submarine Deal)
बातचीत और निवेश पर भी जोर
रक्षा मंत्री के इस दौरे में सिर्फ पनडुब्बी सौदे पर ही नहीं, बल्कि अन्य रक्षा क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा होगी। इसमें संयुक्त रिसर्च, नई तकनीक और रक्षा निवेश जैसे मुद्दे शामिल रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार, इस दौरान एक डिफेंस इंडस्ट्री इवेंट भी हो सकता है, जिसमें दोनों देशों की कंपनियां हिस्सा लेंगी। इससे रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नई संभावनाओं पर बातचीत होगी।
भारतीय नौसेना अपने बेड़े को लगातार आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। पुराने प्लेटफॉर्म को धीरे-धीरे हटाकर नए सिस्टम शामिल किए जा रहे हैं। ऐसे में प्रोजेक्ट 75आई को नौसेना की जरूरतों के हिसाब से एक अहम कदम माना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के जरिए पानी के नीचे काम करने की क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। (Project 75I Submarine Deal)

