Tag: TKMS

70,000 करोड़ की लागत वाले पी-75आई को मिले पंख, 6 AIP सबमरीन डील के लिए सीसीएस की मंजूरी का इंतजार

सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को जल्द कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के सामने रखा जाएगा। अंतिम मंजूरी के बाद कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होंगे...

70,000 करोड़ की मेगा डील! भारतीय नौसेना को मिलेंगी ऐसी पनडुब्बियां जो हफ्तों तक नहीं आएंगी सतह पर

रक्षा सूत्रों के मुताबिक इस परियोजना से जुड़ी प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इसी महीने इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप से मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद सितंबर तक कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत हो सकते हैं...

तीन दिन के दौरे पर जर्मनी जाएंगे राजनाथ सिंह, Project 75I पनडुब्बी डील पर लग सकती है मुहर

इस सौदे में जर्मनी की कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी कंपनी के डिजाइन पर आधारित पनडुब्बियां भारत को मिल सकती हैं...

भारतीय नौसेना को मिलेगा नया अंडरवाटर हथियार, जर्मन कंपनी TKMS भारत में बनाएगी आधुनिक हेवीवेट टॉरपीडो

टीकेएमएस और वीईएम के बीच सहयोग की शुरुआत पहले ही हो चुकी थी। सितंबर 2025 में दोनों कंपनियों के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) साइन किया गया था...

भारत-जर्मनी सबमरीन डील फाइनल! प्रोजेक्ट 75I से भारतीय नौसेना को मिलेगी नई अंडरवॉटर ताकत

टीकेएमएस दुनिया की सबसे अनुभवी सबमरीन डिजाइन कंपनियों में से एक मानी जाती है। भारत के लिए वह अपनी टाइप-214 एनजी सबमरीन का एडवांस्ड और बड़ा वर्जन ऑफर कर रही है, जो करीब 3000 टन क्लास की होगी...

Exclusive: मोदी-मर्ज मुलाकात से पहले भारत-जर्मनी का बड़ा फैसला, देश में तैनात होगा जर्मन लायजन ऑफिसर

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज 12 और 13 जनवरी को भारत यात्रा पर हैं। जर्मनी के चांसलर का पदभार संभालने के आठ महीने बाद यह भारत उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है...

Pakistan Hangor Submarines: अगले साल से पाकिस्तान को मिलेंगी नई हैंगोर क्लास चीनी AIP पनडुब्बियां, भारतीय नौसेना है 7 साल पीछे?

नौसेना के अधिकारियों का मानना है कि भारत की अंडरवाटर फ्लीट में कमी एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। चीन के पास फिलहाल 50 से अधिक डीजल-इलेक्ट्रिक और 10 परमाणु पनडुब्बियां हैं, जबकि पाकिस्तान की संख्या भी अब तेजी से बढ़ रही है...

India German submarines: सरकार ने फ्रांस का सबमरीन प्रोजेक्ट क्यों दिया जर्मनी को, क्या है प्रोजेक्ट-76 से कनेक्शन, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

फ्रेंच स्कॉर्पीन में “ब्लैक बॉक्स टेक्नोलॉजी” यानी कोर सिस्टम्स ट्रांसफर नहीं होता। जबकि टीकेएमएस के साथ भारत को फुल डिजाइन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मिलेगा, यानी मझगांव डॉक को हुल स्ट्रक्चर, प्रोपल्शन लेआउट और डेटा-इंटीग्रेशन पर कंट्रोल मिलेगा...