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भारत बना ऑस्ट्रेलिया का टॉप सिक्योरिटी पार्टनर, 887 बिलियन डॉलर का करेगा निवेश

ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है और इसके लिए भारत की भूमिका अहम है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है...

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📍नई दिल्ली | 17 Apr, 2026, 11:42 AM

Australia Defence Strategy 2026 India: ऑस्ट्रेलिया ने अपनी नई नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी 2026 में भारत को एक खास दर्जा दिया है। इस डॉक्यूमेंट में भारत को “टॉप-टियर सिक्योरिटी पार्टनर” और हिंद महासागर के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण डिफेंस पार्टनर बताया गया है। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने अगले दस साल में डिफेंस सेक्टर पर करीब 887 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करने की योजना भी सामने रखी है।

Australia Defence Strategy 2026 India: भारत को क्यों दिया ये खास दर्जा

ऑस्ट्रेलिया की इस नई रणनीति में साफ कहा गया है कि भारत उसके लिए सिर्फ एक साझेदार नहीं, बल्कि बेहद अहम सुरक्षा सहयोगी है। खास तौर पर हिंद महासागर का उत्तर-पूर्वी हिस्सा ऑस्ट्रेलिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी रास्ते से तेल, गैस और कोयले जैसे जरूरी संसाधनों की सप्लाई होती है।

ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है और इसके लिए भारत की भूमिका अहम है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

किन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग

इस रणनीति में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। इसमें रक्षा और सुरक्षा के साथ-साथ व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और ग्रीन डेवलपमेंट जैसे सेक्टर शामिल हैं।

दोनों देश अब सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि जमीन पर काम करने वाले प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दे रहे हैं। इसमें डिफेंस इंडस्ट्री को साथ लाना, नई तकनीक साझा करना और जरूरी सूचनाओं का आदान-प्रदान करना शामिल है।

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इसके अलावा सेना के बीच तालमेल बढ़ाने यानी इंटरऑपरेबिलिटी पर भी जोर है। इसके तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के साथ ज्यादा अभ्यास करेंगी, जिससे ऑपरेशन के समय बेहतर तालमेल हो सके।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर फोकस

ऑस्ट्रेलिया की रणनीति में हिंद-प्रशांत क्षेत्र को खास अहमियत दी गई है। इस क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों और बदलते हालात को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना रहा है।

इसमें समुद्र में नियमित तैनाती, संयुक्त अभ्यास और ट्रेनिंग शामिल हैं। भारत के साथ मिलकर समुद्री निगरानी यानी मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस को भी मजबूत किया जाएगा।

इसके अलावा आपदा राहत और मानवीय सहायता जैसे कामों में भी सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है।

क्वाड की भूमिका भी अहम

इस रणनीति में क्वाड समूह का भी जिक्र किया गया है, जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि इस मंच के जरिए क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम किया जाएगा।

क्वाड के तहत समुद्री सुरक्षा, ऑपरेशनल तालमेल और आपदा के समय मदद जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाया जाएगा।

रक्षा निवेश पर बड़ा ऐलान

ऑस्ट्रेलिया ने इस रणनीति के साथ एक बड़ा निवेश कार्यक्रम भी घोषित किया है। इसके तहत अगले दस साल में करीब 887 बिलियन अमेरिकी डॉलर रक्षा क्षेत्र पर खर्च किए जाएंगे।

इसमें से लगभग 425 बिलियन डॉलर नई क्षमताओं को विकसित करने पर खर्च होंगे। यह पैसा नई तकनीक, हथियारों और सिस्टम को विकसित करने में लगाया जाएगा।

इस निवेश का मकसद ऑस्ट्रेलिया की सैन्य क्षमता को मजबूत करना और बदलते हालात के मुताबिक खुद को तैयार रखना है।

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किन सेक्टर्स में होगा निवेश

इस फंडिंग के तहत कई अहम क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार, ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम, साइबर सुरक्षा और स्पेस टेक्नोलॉजी शामिल हैं।

इसके अलावा पानी के नीचे होने वाली लड़ाई यानी अंडरसी वॉरफेयर पर भी खास जोर रहेगा। पनडुब्बियों और उनसे जुड़ी तकनीक को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया जाएगा।

ऑस्ट्रेलिया अपने रक्षा उद्योग को भी मजबूत करना चाहता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा उपकरण देश के अंदर ही बनाए जा सकें। इसके लिए दूसरे देशों के साथ साझेदारी बढ़ाने की भी योजना है, जिसमें भारत भी शामिल है।

बदलते वैश्विक हालात का असर

इस नई रणनीति में दुनिया के बदलते हालात का भी जिक्र किया गया है। ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि आज का माहौल पहले से ज्यादा अनिश्चित और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

कई जगह एक साथ तनाव की स्थिति बनी हुई है और नई तकनीकों के कारण युद्ध का तरीका भी बदल रहा है। ऐसे में देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था को नए तरीके से तैयार कर रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी रणनीति में यही दिखाने की कोशिश की है कि वह सिर्फ अपने क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत इलाके में संतुलन बनाए रखने में भूमिका निभाना चाहता है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया पहले से ही कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत जुड़े हुए हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा अभ्यास, ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। वहीं, नई रणनीति सामने आने के बाद लगता है किऑस्ट्रेलिया भारत को अपने सबसे भरोसेमंद साझेदारों में गिनता है। खास तौर पर समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के मामले में भारत की भूमिका को अहम माना गया है। (Australia Defence Strategy 2026 India)

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