📍नई दिल्ली | 17 Apr, 2026, 12:25 PM
India Maritime Security Vienna Congress: भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमता और नेतृत्व को मजबूती से पेश किया है। ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में आयोजित वर्ल्ड बॉर्डर सिक्योरिटी कांग्रेस 2026 में भारतीय तटरक्षक बल के प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया और समुद्री सुरक्षा से जुड़े अपने अनुभव और मॉडल दुनिया के सामने रखे।
यह सम्मेलन 14 से 16 अप्रैल के बीच वियना में आयोजित किया गया था। इसमें दुनिया के कई देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सुरक्षा विशेषज्ञ और इंडस्ट्री से जुड़े लोग शामिल हुए। सम्मेलन में सीमा सुरक्षा, नई चुनौतियों और तकनीक के इस्तेमाल पर विस्तार से चर्चा की गई।
यह सम्मेलन साल 2012 से लगातार आयोजित किया जा रहा है और आज इसे सीमा सुरक्षा से जुड़े सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय मंचों में गिना जाता है। यहां अलग-अलग देशों के अधिकारी, सुरक्षा विशेषज्ञ और इंडस्ट्री के लोग एक साथ बैठकर सीमा प्रबंधन, नई सुरक्षा चुनौतियों, तकनीक के इस्तेमाल और आपसी सहयोग पर चर्चा करते हैं। 2026 के इस संस्करण में 60 से ज्यादा देशों के करीब 450 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए।
भारत की तरफ से तीन सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल इसमें शामिल हुआ, जिसकी अगुवाई भारतीय तटरक्षक बल के अतिरिक्त महानिदेशक आनंद प्रकाश बडोला ने की। आनंद प्रकाश बडोला नेविगेशन और डायरेक्शन के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी से प्रशिक्षण लिया है और अमेरिका के यूएस नेवल वॉर कॉलेज, न्यूपोर्ट में भी पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने रसायन शास्त्र में मास्टर्स की डिग्री भी हासिल की है।
अपने करियर के दौरान उन्होंने तटरक्षक बल के लगभग हर तरह के जहाजों की कमान संभाली है, जिसमें इनशोर पेट्रोल वेसल, फास्ट पेट्रोल वेसल, ऑफशोर पेट्रोल वेसल और एडवांस ऑफशोर पेट्रोल वेसल शामिल हैं। वे पहले पॉलिसी एंड प्लान्स विंग के प्रमुख भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने संगठन की लंबी अवधि की योजना और क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। नवंबर 2024 से वे अतिरिक्त महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
सम्मेलन के दौरान आनंद प्रकाश बडोला ने “मैरिटाइम सेफ्टी और सिक्योरिटी” विषय पर बोलते हुए कहा कि भारत का तटरक्षक बल समुद्र में सुरक्षा बनाए रखने, अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। (India Maritime Security Vienna Congress)
उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री सीमाएं जमीन की सीमाओं से अलग होती हैं। यहां निगरानी और सुरक्षा का काम ज्यादा जटिल होता है, क्योंकि समुद्र खुला होता है और कई देशों की गतिविधियां एक साथ चलती रहती हैं। ऐसे में तस्करी, अवैध घुसपैठ और अन्य अपराधों का खतरा बना रहता है।
अपने संबोधन में भारतीय प्रतिनिधि ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री सुरक्षा के लिए देशों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। अलग-अलग एजेंसियों के बीच कॉर्डिनेशन और इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी स्ट्रक्चर होना चाहिए, ताकि बदलती चुनौतियों का सामना किया जा सके। (India Maritime Security Vienna Congress)
उन्होंने यह भी साफ किया कि हर देश की संप्रभुता का सम्मान करते हुए ही इस तरह का सहयोग आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
इस सम्मेलन में भारत ने अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए अपनाए गए तरीकों और सिस्टम को भी प्रस्तुत किया। इसमें तटरक्षक बल द्वारा किए जा रहे निगरानी कार्य, बचाव अभियान और कानून लागू करने की प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई।
भारत ने यह दिखाने की कोशिश की कि कैसे वह अपने विशाल समुद्री क्षेत्र में लगातार निगरानी रखता है और किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई करता है। (India Maritime Security Vienna Congress)
बता दें कि भारतीय तटरक्षक बल देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। इसका काम सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समुद्र में होने वाली तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और पर्यावरण से जुड़े मामलों पर भी नजर रखता है।
इसके अलावा समुद्र में फंसे लोगों को बचाने, आपदा के समय राहत पहुंचाने और समुद्री कानून लागू करने का काम भी इसी बल के जिम्मे होता है।
सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी कई चुनौतियों पर चर्चा हुई। इसमें तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल, समुद्र में बढ़ती गतिविधियों और नए तरह के खतरों को लेकर विचार साझा किए गए। (India Maritime Security Vienna Congress)

