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सड़क हादसे ने छीन लिया था देश के जांबाज मार्कोस कमांडो का सपना, कोर्ट ने दिलाया 2.46 करोड़ रुपये का मुआवजा

अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई भी आर्थिक मुआवजा उस दर्द, संघर्ष और टूटे हुए सपनों की भरपाई नहीं कर सकता, जो एक युवा सैनिक ने इस हादसे के बाद झेले हैं...

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📍नई दिल्ली | 6 Jun, 2026, 6:28 PM

MARCOS Commando Compensation: देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए सबसे कठिन और जोखिम भरे अभियानों में हिस्सा लेने वाले भारतीय नौसेना के मार्कोस कमांडो लखपत सिंह को दिल्ली की मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने बड़ी राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए कमांडो को 1.65 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। ब्याज जोड़ने के बाद यह राशि 2.46 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई भी आर्थिक मुआवजा उस दर्द, संघर्ष और टूटे हुए सपनों की भरपाई नहीं कर सकता, जो एक युवा सैनिक ने इस हादसे के बाद झेले हैं। अदालत ने माना कि यह दुर्घटना केवल एक शारीरिक चोट नहीं थी, बल्कि इसने एक होनहार सैनिक के पूरे मिलिट्री करियर को प्रभावित कर दिया।

MARCOS Commando Compensation: क्रिसमस के दिन हुआ था दर्दनाक हादसा

यह मामला 25 दिसंबर 2018 का है। उस समय लखपत सिंह विशाखापट्टनम स्थित आईएनएस कर्णा यूनिट में तैनात थे। वह अपने साथी सैनिक के साथ मोटरसाइकिल पर शहर की ओर जा रहे थे। जब उनकी बाइक तेलुगु थल्ली फ्लाईओवर के पास पहुंची, तभी पीछे से तेज रफ्तार में आ रही एक स्विफ्ट कार ने उनकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों सड़क पर गिर पड़े। लखपत सिंह को शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत आईएनएस कल्याणी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत बेहद नाजुक बताई गई। चिकित्सकों ने उन्हें “डेंजर इन लिस्ट” कैटेगरी में रखा। बाद में बेहतर इलाज के लिए उन्हें हवाई मार्ग से पुणे के सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया।

छह महीने तक चला इलाज, कई ऑपरेशन हुए

अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक लखपत सिंह को कूल्हे, हाथ, कोहनी, पसलियों और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर फ्रैक्चर हुए थे। पुणे के मिलिट्री अस्पताल में उनका लगभग छह महीने तक इलाज चला। इस दौरान कई बड़े ऑपरेशन किए गए।

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इलाज के बाद भी वे पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके। मेडिकल बोर्ड ने उन्हें पहले अस्थायी और बाद में स्थायी रूप से मार्कोस ड्यूटी तथा अंडरवाटर डाइविंग के लिए अयोग्य घोषित कर दिया।

कौन हैं मार्कोस कमांडो?

मार्कोस यानी मरीन कमांडो फोर्स भारतीय नौसेना की स्पेशल ऑपरेशन यूनिट है। इसे दुनिया की सबसे कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग्स में से एक माना जाता है। इन कमांडो को समुद्र, नदी और तटीय क्षेत्रों में स्पेशल ऑपरेशन के लिए तैयार किया जाता है।

मार्कोस बनने के लिए सैनिकों को बेहद कठिन शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। लखपत सिंह ने भी वर्षों की मेहनत के बाद यह उपलब्धि हासिल की थी। लेकिन सड़क दुर्घटना के बाद वह दोबारा कभी मार्कोस की भूमिका में नहीं लौट सके। (MARCOS Commando Compensation)

88 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली कैंट स्थित बेस अस्पताल द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र अदालत में पेश किया गया। मेडिकल बोर्ड ने लखपत सिंह की स्थायी दिव्यांगता 88 प्रतिशत निर्धारित की।

रिकॉर्ड के अनुसार उनके शरीर के दाहिने हिस्से पर सबसे अधिक असर पड़ा। हाथ, पैर, कोहनी, पीठ और कूल्हे की सामान्य कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ा। अदालत ने माना कि इतनी गंभीर स्थिति में वह पहले की तरह एक्टिव ड्यूटी नहीं कर सकते।

कमांडो से डेस्क जॉब पर हुए शिफ्ट

दुर्घटना से पहले लखपत सिंह पानी के भीतर स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशंस में हिस्सा लेने वाले प्रशिक्षित डाइवर थे। लेकिन हादसे के बाद उन्हें डेस्क जॉब पर शिफ्ट होना पड़ा।

उन्होंने अदालत को बताया कि अब उन्हें कई रोजमर्रा के कामों में भी मदद की जरूरत पड़ती है। उनके अनुसार वह स्नाइपर और बम डिस्पोजल जैसे एडवांस कोर्स भी नहीं कर पाएंगे, ताकि भविष्य में प्रमोशन के बेहतर मौके मिल सकें।

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सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि यदि दुर्घटना नहीं होती तो लखपत सिंह लंबे समय तक नौसेना में सेवा कर सकते थे। लेकिन मेडिकल कैटेगरी बदलने के कारण उनका करियर प्रभावित हो गया।

नौसेना के रिकॉर्ड पेश करने वाले गवाहों ने अदालत को बताया कि वह भविष्य में अधिकारी स्तर तक पहुंच सकते थे। दुर्घटना के कारण प्रमोशन के अवसर सीमित हो गए और आगे के कई ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में शामिल होना भी संभव नहीं रहा। (MARCOS Commando Compensation)

पेंशन में भी हुआ भारी नुकसान

अदालत के सामने पेश नौसेना मुख्यालय के दस्तावेजों में बताया गया कि यदि लखपत सिंह सामान्य रूप से सेवा पूरी करते तो उन्हें रिटायर होने के बाद लगभग 69,509 रुपये मासिक पेंशन मिल सकती थी।

लेकिन वर्तमान मेडिकल कंडीशंस में उनकी अनुमानित पेंशन लगभग 14,484 रुपये प्रतिमाह रह जाएगी। यानी हर महीने हजारों रुपये की कमी होगी। अदालत ने इसे भी आर्थिक नुकसान का महत्वपूर्ण आधार माना।

हालांकि मेडिकल बोर्ड ने दिव्यांगता 88 प्रतिशत बताई, लेकिन अदालत ने उनके प्रोफेशन को देखते हुए कमाई क्षमता का नुकसान 100 प्रतिशत माना।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि एक मरीन कमांडो और अंडरवाटर डाइवर के तौर पर जो स्किल्स उनके पास थी, उसका इस्तेमाल अब नहीं हो सकता। इसलिए उनकी प्रोफेशनल क्षमता लगभग पूरी तरह प्रभावित हुई है। (MARCOS Commando Compensation)

कैसे तय हुई मुआवजे की राशि

अदालत ने विभिन्न मदों के तहत मुआवजा निर्धारित किया। इसमें भविष्य की आय का नुकसान, प्रमोशन न मिलने से होने वाला आर्थिक नुकसान, विशेष आहार, आने-जाने का खर्च, सहायक कर्मचारी की आवश्यकता, मानसिक पीड़ा और जीवन की सुविधाओं में कमी जैसे पहलुओं को शामिल किया गया।

ट्रिब्यूनल ने कुल 1,65,69,404 रुपये का मुआवजा तय किया। इसके साथ 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया गया। दावा याचिका दाखिल होने की तारीख से ब्याज जोड़ने के बाद कुल राशि 2,46,46,988 रुपये पहुंच गई है।

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फैसले के अंत में ट्रिब्यूनल ने लखपत सिंह के बारे में विशेष टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला केवल एक सड़क दुर्घटना का नहीं है, बल्कि एक ऐसे सैनिक का है जिसने देश की सेवा के लिए कठिन प्रशिक्षण लिया था और जिसके सपने एक लापरवाह ड्राइविंग की वजह से प्रभावित हो गए।

अदालत ने कहा कि लखपत सिंह अब शायद कभी तैराकी और मरीन कमांडो की जिम्मेदारियां नहीं निभा पाएंगे। उन्होंने वर्षों की कठिन ट्रेनिंग के बाद यह मुकाम हासिल किया था, लेकिन एक दुर्घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही किसी व्यक्ति का जीवन बदल सकती है और देश को ऐसे मूल्यवान सैन्य संसाधनों से वंचित कर सकती है।

बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश

ट्रिब्यूनल ने वाहन के बीमाकर्ता को पूरी मुआवजा राशि जमा करने का आदेश दिया। फैसले के अनुसार 50 लाख रुपये तुरंत लखपत सिंह को जारी किए जाएंगे, जबकि शेष राशि लंबी अवधि की सावधि जमा योजनाओं में रखी जाएगी ताकि भविष्य में उन्हें नियमित आर्थिक सुरक्षा मिलती रहे। (MARCOS Commando Compensation)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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