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तेजस Mk2 और स्टेल्थ फाइटर AMCA को मिली रफ्तार, ADA ने शुरू की हाई-टेक सिस्टम इंटीग्रेशन की तैयारी

एडीए की तरफ से जारी सबसे महत्वपूर्ण टेंडरों में से एक फाइबर ऑप्टिक ऑप्टिकल सेंसिंग सिस्टम सूट से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट के तहत ऐसे उपकरण खरीदे जाएंगे जो उड़ान के दौरान विमान की स्थिति पर लगातार नजर रख सकें...

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📍नई दिल्ली | 6 Jun, 2026, 4:21 PM

Tejas MK2-AMCA Development: भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों ने रफ्तार पकड़ ली है। एक तरफ भारतीय वायुसेना के लिए तेजस मार्क-2 डेवलप किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ देश का पहला पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन दोनों महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स को लेकर डीआरडीओ के विंग एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) ने हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग टेंडर जारी किए हैं।

एडीए न केवल नए विमान डेवलप कर रही है, बल्कि उनके लिए स्टेट-ऑफ-द-आर्ट सर्विलांस सिस्टम, फ्लाइट डेटा नेटवर्क और कॉम्प्लेक्स इंटरनल सिस्टम्स इंटीग्रेशन की तैयारी भी कर रही है।

Tejas MK2-AMCA Development: तेजस मार्क-2 और एएमसीए क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण?

भारतीय वायुसेना लंबे समय से अपने फाइटर जेट के मॉडर्नाइजेशन पर काम कर रही है। तेजस मार्क-1 के बाद अब तेजस मार्क-2 को अधिक ताकतवर इंजन, लॉन्ग रेंज और मॉडर्न वेपन सिस्टम्स के साथ डेवलप किया जा रहा है।

तेजस एमके-2 को मिराज-2000, जगुआर और कुछ मिग-29 विमानों के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी तरफ एएमसीए डेवलप करने का उद्देश्य ऐसी क्षमता हासिल करना है, जो वर्तमान में केवल अमेरिका, चीन और कुछ हद तक रूस के पास मौजूद है।

वहीं एएमसीए भारत का पहला स्वदेशी पांचवी पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान होगा। यह ऐसा विमान होगा जो दुश्मन के रडार से बचते हुए लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने में सक्षम होगा।

इन दोनों कार्यक्रमों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इन्हें भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है।

दोनों ही प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। यही कारण है कि सरकार और रक्षा अनुसंधान संस्थान इन प्रोग्राम को तेज गति से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। (Tejas MK2-AMCA Development)

फाइबर ऑप्टिक सेंसिंग सिस्टम पर बड़ा फोकस

एडीए की तरफ से जारी सबसे महत्वपूर्ण टेंडरों में से एक फाइबर ऑप्टिक ऑप्टिकल सेंसिंग सिस्टम सूट से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट के तहत ऐसे उपकरण खरीदे जाएंगे जो उड़ान के दौरान विमान की स्थिति पर लगातार नजर रख सकें।

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सरल भाषा में समझें तो यह सिस्टम विमान के भीतर एक तरह का डिजिटल डॉक्टर होगा। विमान के अंदर लगे विशेष फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क के माध्यम से इंजीनियर रियल टाइम में यह देख सकते हैं कि उड़ान के दौरान विमान पर कितना दबाव पड़ रहा है, किस हिस्से में कंपन बढ़ रहा है, तापमान कितना बदल रहा है और स्ट्रक्चर पर कितना तनाव आ रहा है।

आधुनिक लड़ाकू विमान लगातार तेज रफ्तार, तीखे मोड़ और कठिन युद्धाभ्यास करते हैं। ऐसी स्थिति में विमान के स्ट्रक्चर की मजबूती पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी होता है। इसी उद्देश्य से एडीए यह नई सिस्टम डेवलप कर रहा है।

फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी कैसे करेगी काम?

इस टेक्नोलॉजी में विमान के भीतर विशेष प्रकार की ऑप्टिकल केबल लगाई जाती हैं। इन केबलों के भीतर प्रकाश की तरंगें भेजी जाती हैं।

जब विमान तेज रफ्तार से उड़ता है या उस पर अधिक दबाव पड़ता है तो स्ट्रक्चर में बहुत छोटे स्तर पर बदलाव होते हैं। ये बदलाव लाइट वेव्स पर असर डालतेहैं।

सिस्टम तुरंत इन बदलावों को रिकॉर्ड कर लेता है और इंजीनियरों को जानकारी मिल जाती है कि विमान के किस हिस्से पर कितना दबाव पड़ रहा है।

इससे विमान के स्ट्रक्चर में होने वाले संभावित नुकसान का पता समय रहते लगाया जा सकता है।

आधुनिक फाइटर जेट्स के लिए क्यों जरूरी है यह सिस्टम?

तेजस मार्क-2 और एएमसीए दोनों में बड़े पैमाने पर कंपोजिट मैटेरियल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कंपोजिट मैटेरियल पारंपरिक धातु से हल्का होता है और यह विमान का वजन कम करने में मदद करत है। लेकिन इनकी निगरानी के लिए पुराने तरीकों से काम नहीं चलता।

विशेषज्ञों के अनुसार स्टेल्थ विमानों और नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में रियल टाइम सर्विलांस बेहद जरूरी होता है क्योंकि उनका स्ट्रक्चर ज्यादा मुश्किल होता है। यही वजह है कि एडीए इन एडवांस सिस्टम्स को फ्लाइट ट्रायल्स से पहले तैयार करना चाहता है।

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विशेषज्ञों के अनुसार एएमसीए और तेजस एमके-2 के आगामी फ्लाइट ट्रायल्स के दौरान यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित होगी। (Tejas MK2-AMCA Development)

फ्लाइट डेटा मैनेजमेंट सिस्टम पर भी काम तेज

एडीए ने एक और महत्वपूर्ण टेंडर फ्लाइट डेटा मैनेजमेंट सिस्टम (एफडीएमएस) के डेवलपमेंट के लिए जारी किया है। यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर बेस्ड है। इसका उद्देश्य फ्लाइट ट्रायल्स से मिलने वाले विशाल डेटा को व्यवस्थित करना, प्रोसेस करना और उसका विश्लेषण करना है।

आज के लड़ाकू विमान हजारों सेंसरों से लैस होते हैं। उड़ान के दौरान इंजन, एवियोनिक्स, फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, रडार और स्ट्रक्चरल सेंसर लगातार डेटा भेजते रहते हैं।

एक फ्लाइट ट्रायल के दौरान लाखों डेटा पॉइंट्स जनरेट हो सकते हैं। यदि इस डेटा को सही तरीके से समझा और विश्लेषित नहीं किया जाए, तो जेट के डेवलपमेंट प्रोग्राम की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। (Tejas MK2-AMCA Development)

तेजस एमके-2 के लिए क्यों महत्वपूर्ण है एफडीएमएस?

तेजस एमके-2 को लेकर उम्मीद है कि इसका पहला फ्लाइट ट्रायल अगले साल साल की शुरुआत में होगा। इसके बाद डेवलपमेंट्ल ट्रायल्स का लंबा चरण आएगा।

हर परीक्षण के बाद इंजीनियरों को यह समझना होगा कि विमान ने कैसा प्रदर्शन किया, कौन से सिस्टम अपेक्षा के अनुसार काम कर रहे हैं और किसमें में सुधार की जरूरत है।

एफडीएमएस इसी काम को आसान बनाएगा। इससे डेटा विश्लेषण की प्रक्रिया तेज होगी और डेवलपमेंट प्रोग्राम में समय की बचत होगी। सूत्रों का कहना है कि एडीए इस सिस्टम को बड़े फ्लाइट टेस्ट कैम्पेन शुरू होने से पहले पूरी तरह तैयार करना चाहती है। (Tejas MK2-AMCA Development)

एएमसीए में यह खास पैकेज

हाल ही में एएमसीए सिस्टम इंस्टॉलेशन डिटेल डिजाइन पैकेज का भी टेंडर जारी किया गया है। यह दो साल तक चलने वाला प्रोजेक्ट है और इसका संबंध सीधे एएमसीए के इंटरनल डिजाइन से है। इस स्टेज में इंजीनियर तय करते हैं कि विमान के भीतर कौन सा सिस्टम कहां लगेगा।

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इसमें वायरिंग, हाइड्रोलिक लाइनें, ईंधन पाइपलाइन, कूलिंग सिस्टम, एवियोनिक्स और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों का पूरा लेआउट तैयार किया जाता है। (Tejas MK2-AMCA Development)

स्टेल्थ विमान बनाना इतना मुश्किल क्यों?

सामान्य लड़ाकू विमान और स्टेल्थ विमान में सबसे बड़ा अंतर उनके डिजाइन में होता है। स्टेल्थ विमान को इस तरह बनाया जाता है कि उसका रडार सिग्नेचर बहुत कम दिखाई दे। इसके लिए विमान के भीतर उपलब्ध जगह का बेहद सावधानी से इस्तेमाल करना पड़ता है।

एएमसीए में हथियारों को बाहरी हिस्से पर लटकाने के बजाय इंटरनल वेपन में रखा जाएगा। इससे रडार को उसके सिग्नेचर नहीं मिलेंगे। इंजीनियरों को यह सुनिश्चित करना होता है कि कोई भी सिस्टम विमान की स्टेल्थ विशेषताओं को प्रभावित न करे।

इसके अलावा मेंटेनेंस, सेफ्टी, टेंपरेचर कंट्रोल, और कॉम्बैट सर्ववाइबेलिटी को भी ध्यान में रखन पड़ता है। इसी वजह से सिस्टम इंस्टॉलेशन डिजाइन को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकास का सबसे मुश्किल फेज माना जाता है।

सरकार पहले ही एएमसीए के डेवलपमेंट को मंजूरी दे चुकी है। इसके बाद आरएफपी जारी करके निजी क्षेत्र की तीन कंपनियों को भी इस कार्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ताकि प्रोटोटाइप तैयार करने का काम तेज रफ्तार से आगे बढ़ सके। करीब 15,000 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को भारत के सबसे बड़े रक्षा अनुसंधान कार्यक्रमों में गिना जा रहा है। (Tejas MK2-AMCA Development)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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