📍नई दिल्ली | 6 Jun, 2026, 2:27 PM
MICA NG Missile: फ्रांस ने राफेल लड़ाकू विमान से मीका एनजी (MICA-NG) एयर-टू-एयर मिसाइल का सफल सुपरसोनिक परीक्षण किया है। यह पहली बार था जब इस नई पीढ़ी की मिसाइल को सुपरसोनिक उड़ान के दौरान दागकर उसकी क्षमता परखी गई।
फ्रांसीसी मिसाइल निर्माता एमबीडीए और फ्रांसीसी रक्षा खरीद एजेंसी डीजीए ने इसे भविष्य के हवाई युद्ध की दिशा में बड़ा कदम बताया है। खास बात यह है कि यह मिसाइल केवल सामान्य लड़ाकू विमानों को ही नहीं बल्कि स्टेल्थ फाइटर जेट, ड्रोन और अत्यधिक तेज क्रूज मिसाइलों को भी निशाना बनाने के लिए तैयार की गई है।
भारत के लिए यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय वायुसेना पहले से राफेल लड़ाकू विमान ऑपरेशनल हैं और फ्रांस से बड़ी संख्या में अतिरिक्त 114 राफेल खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
क्या है MICA NG Missile?
मीका (MICA) का पूरा नाम “मिसाइल डी इंटरसेप्शन, डी कॉम्बैट एट डी ऑटोडिफेंस” है। यह फ्रांस की बनाई हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इसका नया संस्करण एमआईसीए एनजी यानी न्यू जेनरेशन मिसाइल है। इसे मूल एमआईसीए मिसाइल की जगह लेने के लिए डेवलप किया गया है।
एमआईसीए फैमिली की मिसाइलें 1990 के दशक से फ्रांसीसी वायुसेना का हिस्सा रही हैं। इन्हें राफेल और मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमानों पर लगाया जाता है।
नई एमआईसीए एनजी बाहर से देखने पर लगभग पुरानी मिसाइल जैसी लगती है, लेकिन इसके अंदर की तकनीक पूरी तरह बदल दी गई है। नई मिसाइल में ज्यादा ताकतवर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाए गए हैं। इसके सेंसर ज्यादा संवेदनशील हैं और इसकी रॉकेट मोटर भी पहले की तुलना में अधिक एडवांस है।
एमबीडीए के अनुसार नई मिसाइल पुरानी एमआईसीए की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक दूरी तक हमला करने में सक्षम है। जहां पुरानी एयर-लॉन्च्ड मीका मिसाइल की रेंज लगभग 60 से 80 किलोमीटर तक थी, वहीं नई पीढ़ी की मीका एनजी मिसाइल की रेंज करीब 84 से 112 किलोमीटर तक मानी जा रही है। यानी नई मिसाइल पुराने वर्जन की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक दूरी पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बना सकती है। हालांकि कंपनी ने आधिकारिक रेंज नहीं बताई है।
एमबीडीए का कहना है कि यह मिसाइल भविष्य के उन खतरों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जो मौजूदा मिसाइलों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
सुपरसोनिक परीक्षण क्यों था इतना महत्वपूर्ण?
साधारण भाषा में समझें तो जब कोई लड़ाकू विमान ध्वनि की गति से तेज उड़ता है तो उसके आसपास का तापमान काफी बढ़ जाता है। हवा के घर्षण से मिसाइल और विमान दोनों के आसपास गर्मी पैदा होती है।
ऐसी स्थिति में किसी टारगेट को पहचानना और उसका पीछा करना काफी कठिन हो जाता है। विशेष रूप से तब जब सामने वाला टारगेट स्टेल्थ तकनीक से लैस हो और उसकी गर्मी भी बहुत कम हो।
इसी चुनौती को देखते हुए फ्रांस ने एमआईसीए एनजी का सुपरसोनिक परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने उच्च तापमान और कठिन परिस्थितियों में भी टारगेट को सफलतापूर्वक ट्रैक किया। इससे साबित हुआ कि इसका नया इंफ्रारेड सीकर वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में भी प्रभावी रहेगा। (MICA NG Missile)
स्टेल्थ विमान क्यों होते हैं इतने खतरनाक
स्टेल्थ विमान ऐसे लड़ाकू जेट होते हैं जिन्हें रडार पर पकड़ना कठिन होता है। चीन का जे-20 और अमेरिका का एफ-35 ऐसे ही विमानों की श्रेणी में आते हैं।
इन विमानों का डिजाइन इस तरह बनाया जाता है कि वे दुश्मन के रडार पर कम दिखाई दें। साथ ही उनकी गर्मी और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर भी कम करने की कोशिश की जाती है।
यही कारण है कि स्टेल्थ विमान आधुनिक वायु युद्ध में सबसे खतरनाक हथियारों में गिने जाते हैं।
एमआईसीए एनजी की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसे ऐसे ही कम सिग्नेचर वाले टारगेट्स को खोजने और मार गिराने के लिए विकसित किया गया है। (MICA NG Missile)
मिसाइल का नया इंफ्रारेड सीकर क्यों खास है?
एमआईसीए एनजी के इंफ्रारेड वर्जन में नया मैट्रिक्स सेंसर लगाया गया है। यह सेंसर टारगेट से निकलने वाली बेहद कम गर्मी को भी पहचान सकता है। पुरानी पीढ़ी की मिसाइलों के लिए कम थर्मल सिग्नेचर वाले टारगेट चुनौती होते थे, लेकिन नई मिसाइल को खासतौर पर इसी समस्या को हल करने के लिए बनाया गया है।
इसका इंफ्रारेड सीकर किसी प्रकार का रडार सिग्नल नहीं भेजता। इसका मतलब है कि दुश्मन को यह पता ही नहीं चलता कि मिसाइल उसे ट्रैक कर रही है। इसीलिए इसे “साइलेंट किलर” भी कहा जा रहा है।
मिसाइल की नई ताकत: डुअल पल्स मोटर
एमआईसीए एनजी में डुअल पल्स रॉकेट मोटर दी गई है। पुरानी मिसाइलों में मोटर एक बार पूरी ताकत के साथ जलती थी और फिर उसका ईंधन समाप्त हो जाता था। नई मिसाइल में दो चरणों वाली मोटर लगाई गई है।
पहला चरण मिसाइल को तेजी से टारगेट की ओर बढ़ाता है। दूसरा चरण जरूरत पड़ने पर सक्रिय होता है और अंतिम समय में अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है।
इसका फायदा यह है कि अंतिम क्षणों में भी मिसाइल तेजी से दिशा बदल सकती है और तेज उड़ते हुए विमान या टारगेट का पीछा कर सकती है।
एमबीडीए के अनुसार यह मिसाइल 50 जी तक का मोड़ लेने में सक्षम है, जिससे बच निकलना दुश्मन के लिए मुश्किल हो जाता है। (MICA NG Missile)
केवल लड़ाकू विमान ही नहीं, ड्रोन भी होंगे निशाने पर
यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दिखा दिया है कि ड्रोन अब युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। छोटे ड्रोन रडार पर कम दिखाई देते हैं और बड़ी संख्या में हमला कर सकते हैं। एमआईसीए एनजी को ऐसे ही खतरों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
कंपनी का कहना है कि मिसाइल बहुत कम इंफ्रारेड और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नेचर वाले टारगेटों को भी पहचान सकती है। इसका मतलब है कि भविष्य में ड्रोन स्वार्म जैसी चुनौतियों से निपटने में भी इसका उपयोग हो सकेगा।
फ्रांस का दावा है कि यह मिसाइल पारंपरिक लड़ाकू विमान के साथ-साथ ड्रोन और अत्यधिक फुर्तीली क्रूज मिसाइलों के खिलाफ भी प्रभावी रहेगी। (MICA NG Missile)
राफेल और एमआईसीए एनजी की जोड़ी क्यों है घातक
राफेल दुनिया के सबसे आधुनिक 4.5 जेनरेशन लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। इसमें आरबीई-2 एईएसए रडार, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और अत्याधुनिक सेंसर लगे हुए हैं। जब राफेल और एमआईसीए एनजी एक साथ काम करते हैं तो दोनों की क्षमता और बढ़ जाती है।
राफेल अपने सेंसरों से टारगेट की जानकारी मिसाइल को भेज सकता है। इसके बाद मिसाइल उड़ान के दौरान भी अपडेट लेती रहती है और रास्ता भी बदल सकती है। युद्ध की स्थिति में यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। (MICA NG Missile)
चीन के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
फ्रांस ने आधिकारिक रूप से किसी देश का नाम नहीं लिया है, लेकिन रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मीका-एनजी जैसी मिसाइलें चीन के जे-20 जैसे स्टेल्थ विमानों को ध्यान में रखकर विकसित की गई हैं। चीन के पास आज दुनिया का सबसे बड़ा स्टेल्थ लड़ाकू विमान बेड़ा माना जाता है।
जे-20 को चीन अपनी वायु शक्ति का सबसे अहम हथियार मानता है। लेकिन स्टेल्थ का मतलब पूरी तरह अदृश्य होना नहीं होता। हर विमान किसी न किसी रूप में गर्मी और इलेक्ट्रॉनिक संकेत छोड़ता है। एमआईसीए एनजी का नया इंफ्रारेड सीकर ऐसे ही संकेतों को पकड़ने के लिए तैयार किया गया है। (MICA NG Missile)
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परीक्षण?
भारतीय वायुसेना के पास पहले से 36 राफेल लड़ाकू विमान हैं। ये विमान अंबाला और हाशिमारा एयरबेस पर तैनात हैं। लद्दाख से लेकर पूर्वी क्षेत्र तक कई संवेदनशील मोर्चों पर राफेल को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।
इसी बीच भारत ने फ्रांस को 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए अनुरोध पत्र भेजा है। इस प्रस्ताव के तहत बड़ी संख्या में विमान भारत में ही बनाए जाने की योजना है। यदि यह कार्यक्रम आगे बढ़ता है तो भारतीय वायुसेना के पास राफेल का बहुत बड़ा बेड़ा हो सकता है। यदि भविष्य में मीका-एनजी भारतीय राफेल बेड़े का हिस्सा बनती है तो वायुसेना को छोटी और मध्यम दूरी के हवाई मुकाबलों में एक नई क्षमता मिलेगी।
फ्रांस ने वर्ष 2018 में एमआईसीए एनजी कार्यक्रम की शुरुआत की थी। उस समय दुनिया भर में स्टेल्थ विमान, ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा था। फ्रांसीसी वायुसेना चाहती थी कि उसके पास ऐसी मिसाइल हो जो आने वाले कई दशकों तक सर्विस में बनी रहे।
फ्रांस पहले ही 500 से अधिक एमआईसीए एनजी मिसाइलों का ऑर्डर दे चुका है। इन मिसाइलों का उपयोग केवल वायुसेना तक सीमित नहीं रहेगा। इसका एक अलग वर्जन जहाजों और जमीन पर तैनात एयर डिफेंस सिस्टम्स के लिए भी तैयार किया जा रहा है। (MICA NG Missile)




