📍नई दिल्ली | 6 May, 2026, 7:38 PM
MICA Missile MRO India: यूरोप की प्रसिद्ध मिसाइल कंपनी एमबीडीए और भारतीय वायुसेना के बीच एक बेहद अहम समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत राफेल और मिराज-2000 में इस्तेमाल होने वाली एयर-टू-एयर मीका मिसाइलों की मरम्मत, रखरखाव और मिड लाइफ ओवरहॉल (MRO) की सुविधा भारत में ही तैयार की जाएगी। ये वही मीका मिसाइलें हैं जिनका इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर में क्लोज कॉम्बैट फाइट में किया गया था।
इस फैसले के बाद भारतीय वायुसेना को अपनी एयर टू एयर मिसाइलों के मेंटेनेंस के लिए विदेश पर पहले जैसी निर्भरता नहीं रखनी पड़ेगी। वहीं इस कदम को भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।
MICA Missile MRO India: क्या है इस पूरे समझौते में
यूरोपीयन मल्टी-नेशनल डिफेंस कंपनी मैट्रा बे डायनेमिक्स एलेनिया यानी एमबीडीए ने भारतीय वायुसेना के साथ मीका मिसाइलों के लिए एमआरओ यानी मेंटेनेंस, रिपेयर और मिड लाइफ ओवरहॉल क्षमता डेवलप करने का एग्रीमेंट किया है। इस सुविधा को भारतीय वायुसेना ही स्थापित करेगी और उसका ऑपरेशन भी वायुसेना के हाथ में रहेगा। वहीं एमबीडीए कंपनी मशीनें, विशेष उपकरण, तकनीकी डेटा, ट्रेनिंग और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगी। इसका मतलब यह है कि अब मीका मिसाइलों की जांच, मरम्मत और उनकी सर्विस लाइफ बढ़ाने का काम भारत में ही किया जा सकेगा।
एमबीडीए नाम चार बड़ी यूरोपीय रक्षा कंपनियों के नामों को मिलाकर बना है। इसमें “एम” फ्रांस की कंपनी मैट्रा से लिया गया है। “बी” ब्रिटेन की बीएई सिस्टम्स को दर्शाता है। “डी” का मतलब डायनेमिक्स है, जबकि “ए” इटली की एलेनिया कंपनी से जुड़ा है, जो पहले एलेनिया मार्कोनी सिस्टम्स और फिनमेकेनिका का हिस्सा थी। अब यह कंपनी लियोनार्डो ग्रुप के नाम से जानी जाती है। (MICA Missile MRO India)
क्या होती है एमआरओ सुविधा
एमआरओ का मतलब होता है किसी हथियार या सिस्टम की समय-समय पर तकनीकी जांच, खराब हिस्सों की मरम्मत और लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए उसकी क्षमता बनाए रखना।
हर मिसाइल की एक तय सर्विस लाइफ होती है। कुछ सालों बाद उसकी जांच और ओवरहॉल जरूरी हो जाता है। अभी तक इस तरह का काम कई बार विदेशों में करना पड़ता था, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ते थे।
अब भारत में यह सुविधा बनने के बाद मिसाइलों को जल्दी तैयार किया जा सकेगा। (MICA Missile MRO India)
क्या है मीका मिसाइल
मीका एक आधुनिक एयर टू एयर मिसाइल है, जिसका इस्तेमाल दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को मार गिराने के लिए किया जाता है।
इसका पूरा नाम “मिसाइल डी इंटरसेप्शन एट डी कॉम्बैट एरियन” है। यह फ्रांस में डेवलप की गई मिसाइल है और दुनिया की एडवांस एयर कॉम्बैट मिसाइलों में गिनी जाती है। भारतीय वायुसेना इसे मिराज 2000 और राफेल लड़ाकू विमानों पर इस्तेमाल करती है। लॉकहीड मर्टिन के बाद एमबीडीए दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मिसाइल कंपनी है, जो मीटियोर, मीकाा, स्कैल्प, स्ट्रॉम, शैडो, ब्रिमस्टोन, एक्सोसेट और एस्टर जैसे प्रोडक्ट्स बनाती है।
MICA मिसाइल भारतीय वायु सेना के मिराज 2000 लड़ाकू विमान की मुख्य एयर-टू-एयर मिसाइल मानी जाती है और इसका इस्तेमाल राफेल फाइटर जेट पर भी किया जाता है। यह मिसाइल दुश्मन के विमान को दूर से मार गिराने यानी बीवीआर (बियॉन्ड विजुअल रेंज) लड़ाई में भी काम आती है और करीब से होने वाले हवाई मुकाबले में भी इस्तेमाल की जा सकती है।
इसके दो अलग-अलग संस्करण हैं। एक इंफ्रारेड सीकर वाला और दूसरा रडार आधारित सीकर वाला। इससे यह दिन और रात दोनों समय काम कर सकती है। यह करीब 60 किलोमीटर तक लक्ष्य को निशाना बना सकती है। यह हाई मैन्यूवरेबिलिटी (50G) वाली मिसाइल है। इसकी सबसे बड़ी खासियत “फायर एंड फॉरगेट” क्षमता है, यानी मिसाइल दागने के बाद पायलट को लगातार उसे कंट्रोल नहीं करना पड़ता। इसके अलावा यह बहुत तेजी से मोड़ लेने और हवा में तेजी से दिशा बदलने में सक्षम है।
ऑपरेशन सिंदूर में मिराज 2000 और राफेल पर मीटियोर जैसी लंबी दूरी की मिसाइल की जगह मीका लगाई गई थी। क्योंकि यह कॉम्बैट एयर पेट्रोल और सीमित एंगेजमेंट वाले मिशनों में यह ज्यादा उपयुक्त थी। (MICA Missile MRO India)
बालाकोट में हुई थी इस्तेमाल
बता दें कि बालाकोट एयर स्ट्राइक में मीका मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इसका इस्तेमाल जमीन पर हमला करने के लिए नहीं हुआ था। यह मिसाइल भारतीय लड़ाकू विमानों को हवाई सुरक्षा देने के लिए इस्तेमाल की गई थी।
26 फरवरी 2019 को भारतीय वायु सेना ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर हमला किया था। इस मिशन में 12 से 20 मिराज 2000 लड़ाकू विमान शामिल थे। इनमें से कुछ विमान स्पाइस 2000 स्मार्ट बम और क्रिस्टल मेज मिसाइल लेकर गए थे, जो हमले में शामिल थे।
इसके अलावा चार मिराज 2000 विमान मीका आरएफ और मीका आईआर एयर-टू-एयर मिसाइलों से लैस थे। इनका काम स्ट्राइक मिशन को सुरक्षा देना था। ये विमान पीछे रहकर नजर रख रहे थे ताकि अगर पाकिस्तान की तरफ से एफ-16 जैसे लड़ाकू विमान हमला करने आएं, तो तुरंत जवाब दिया जा सके।
मीका मिसाइल मिराज 2000 की मुख्य एयर-टू-एयर मिसाइल है। यह लंबी दूरी की बियोंड द विजुअल रेंज (बीवीआर) लड़ाई और क्लोज कॉम्बैट हवाई मुकाबलों दोनों में इस्तेमाल की जा सकती है। बालाकोट मिशन के दौरान इसे पूरी तरह तैयार रखा गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके। (MICA Missile MRO India)
भारतीय वायुसेना के लिए क्यों है अहम
भारतीय वायुसेना पिछले कई सालों से मीका मिसाइलों का इस्तेमाल कर रही है। खास तौर पर राफेल और मिराज जैसे फाइटर जेट्स की एयर कॉम्बैट क्षमता में इसकी बड़ी भूमिका है। अब भारत में एमआरओ सुविधा बनने से इन मिसाइलों की उपलब्धता बढ़ेगी। वहीं, एमबीडीए की मीटियोर और स्कैल्प जैसी मिसाइलें भी भारतीय वायुसेना की ताकत का हिस्सा हैं।
ऑपरेशनल तैयारी होगी मजबूत
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि भारत में इस तरह की क्षमता विकसित करने से देश की रणनीतिक स्वतंत्रता मजबूत होगी। इस प्रोजेक्ट के जरिए भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को आधुनिक मिसाइल सिस्टम पर काम करने का मौका मिलेगा। एमबीडीए भारतीय वायुसेना को तकनीकी प्रशिक्षण भी देगी। इससे भविष्य में भारत के भीतर ही उच्च स्तर की मिसाइल तकनीक से जुड़ा अनुभव विकसित होगा। (MICA Missile MRO India)


