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केवल 2 साल पुराने डिफेंस स्टार्टअप को मिला 100 करोड़ रुपये का ऑर्डर, सेना को मिलेगा एआई से लैस ‘ड्रोन का शिकारी’

सर्ज एक एआई बेस्ड काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) प्लेटफॉर्म है। इसका मुख्य काम संदिग्ध ड्रोन की पहचान करना और उन्हें टारगेट तक पहुंचने से रोकना है...

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📍नई दिल्ली | 6 May, 2026, 11:33 AM

SURGE Counter Drone System: भारत के स्वदेशी डिफेंस टेक स्टार्टअप आर्मरी को रक्षा मंत्रालय से कुल 100 करोड़ रुपये के तीन बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं। कंपनी इन कॉन्ट्रैक्ट्स के तहत भारतीय सेनाओं को अपना स्वदेशी एआई-पावर्ड काउंटर-ड्रोन सिस्टम सर्ज (SURGE) उपलब्ध कराएगी। यह सिस्टम दुश्मन या संदिग्ध ड्रोन की पहचान करने, उन्हें ट्रैक करने और बिना गोली चलाए इनएक्टिव कर सकता है।

गुरुग्राम स्थित आर्मरी के फाउंडर और सीईओ अमरदीप सिंह के मुताबिक कंपनी ने फील्ड ट्रायल्स और ऑपरेशनल इवैल्यूएशन सफलतापूर्वक पूरे किए, जिसके बाद रक्षा मंत्रालय ने यह ऑर्डर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में ड्रोन खतरे तेजी से बदल रहे हैं और हर क्षेत्र में अलग तरह की चुनौती सामने आ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सर्ज सिस्टम को डिजाइन किया गया है।

SURGE Counter Drone System: फील्ड ट्रायल्स के बाद मिला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट

कंपनी के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने अलग-अलग इलाकों में कई चरणों में सर्ज सिस्टम के ट्रायल किए। इन ट्रायल्स के दौरान सिस्टम को ड्रोन डिटेक्शन, आइडेंटिफिकेशन और न्यूट्रलाइजेशन जैसी जरूरी ऑपरेशनल जरूरतों पर परखा गया। परीक्षण सफल रहने के बाद कंपनी को यह कॉन्ट्रैक्ट मिला।

आर्मरी ने बताया कि सर्ज सिस्टम को मथुरा, मेरठ, बबीना और जम्मू जैसे कई सैन्य इलाकों में टेस्ट किया गया। अलग-अलग मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों में इसकी क्षमता को जांचा गया। कंपनी का कहना है कि सिस्टम ने सभी ऑपरेशनल मानकों को पूरा किया।

क्या है सर्ज सिस्टम

सर्ज एक एआई बेस्ड काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) प्लेटफॉर्म है। इसका मुख्य काम संदिग्ध ड्रोन की पहचान करना और उन्हें टारगेट तक पहुंचने से रोकना है। यह सिस्टम रेडियो फ्रीक्वेंसी तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करता है।

कंपनी के अनुसार सर्ज किसी भी ड्रोन की मौजूदगी को लगभग 5 किलोमीटर की दूरी से पहचान सकता है। इसके बाद यह करीब 3 किलोमीटर तक ड्रोन के कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम कर सकता है। इससे ड्रोन अपना कंट्रोल खो देता है और मिशन पूरा नहीं कर पाता।

सर्ज “सॉफ्ट किल” तकनीक पर काम करता है। इसका मतलब है कि यह ड्रोन को फिजिकली गिराने के बजाय उसकी कम्युनिकेशन या नेविगेशन सिस्टम को ब्लॉक करता है। इसके लिए जैमिंग और स्पूफिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

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समारिटन बना सिस्टम का सबसे अहम हिस्सा

सर्ज सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका प्रोप्राइटरी ऑपरेटिंग सिस्टम समारिटन (Samaritan OS) है। आर्मरी ने इसे पूरी तरह भारत में तैयार किया है। कंपनी का दावा है कि यह एआई और मशीन लर्निंग बेस्ड सिस्टम है, जो रीयल टाइम स्कैनिंग करता है।

सर्ज सिस्टम रेडियो फ्रीक्वेंसी यानी RF तकनीक के जरिए करीब 5 किलोमीटर दूर तक किसी भी ड्रोन की मौजूदगी का पता लगा सकता है। इसके बाद यह लगभग 3 किलोमीटर की दूरी तक ड्रोन के कम्युनिकेशन और जीपीएस सिग्नल को जाम या स्पूफ करके उसे इनएक्टिव कर देता है। यानी ड्रोन पर बिना गोली चलाए ही कंट्रोल से बाहर किया जा सकता है।

यह सिस्टम लेयर्ड इंटरडिक्शन तकनीक पर काम करता है। फिलहाल इसमें “सॉफ्ट किल” क्षमता मौजूद है, जिसमें जैमिंग और स्पूफिंग के जरिए ड्रोन को रोका जाता है। कंपनी भविष्य में इसमें “हार्ड किल” क्षमता भी जोड़ने पर काम कर रही है, जिसके तहत ड्रोन को फिजिकली गिराया जा सकेगा।

सर्ज की खास बात यह भी है कि इसकी अलग-अलग यूनिट्स एक नेटवर्क की तरह काम कर सकती हैं। हैंडहेल्ड, ट्राइपॉड माउंटेड और व्हीकल माउंटेड सिस्टम आपस में जानकारी साझा करते हैं और मिलकर ड्रोन खतरे की निगरानी करते हैं। इससे सुरक्षा बलों को रीयल टाइम में बेहतर इंटेलिजेंस मिलती है।

SURGE Counter Drone System

यह सिस्टम कठिन मौसम और मुश्किल इलाकों में भी काम करने के लिए तैयार किया गया है। यह माइनस 30 डिग्री से लेकर प्लस 50 डिग्री सेल्सियस तापमान तक काम कर सकता है। इसके अलावा 95 प्रतिशत तक ह्यूमिडिटी यानी नमी वाले वातावरण में भी इसकी क्षमता प्रभावित नहीं होती।

कंपनी के अनुसार समारिटन ओएस हर सेकंड लाखों बार स्कैन करता है। इससे सिस्टम को तेजी से रेस्पॉन्स देने में मदद मिलती है। यह ऑपरेटर को ड्रोन की दिशा, ऊंचाई और लोकेशन जैसी जानकारी भी देता है। खास बात यह है कि यह केवल पहले से मौजूद डेटा लाइब्रेरी पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि नए और अनजान ड्रोन पैटर्न को भी पहचान सकता है।

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आर्मरी के सीईओ अमरदीप सिंह के मुताबिक हर क्षेत्र में ड्रोन खतरे अलग होते हैं। कहीं पहाड़ी इलाका होता है, कहीं घना शहरी क्षेत्र और कहीं खुला मैदान। मौसम, ऊंचाई, लाइन ऑफ साइट और रेडियो क्लटर जैसी परिस्थितियां भी बदलती रहती हैं।

उन्होंने कहा, “हमारा सिस्टम अलग-अलग इलाकों की जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज किया गया है। ड्रोन खतरे तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए हमें ऐसे समाधान तैयार करने पड़े जो लगातार खुद को एडाप्ट कर सकें।”

कंपनी के अनुसार सर्ज सिस्टम कई ड्रोन को एक साथ ट्रैक और हैंडल कर सकता है। यह ऑपरेटर को केवल महत्वपूर्ण खतरों की जानकारी दिखाता है ताकि अनावश्यक अलर्ट से बचा जा सके।

सर्ज और समारिटन ओएस दोनों पूरी तरह भारत में विकसित किए गए हैं। कंपनी का दावा है कि सिस्टम का कोड, एल्गोरिदम और मैन्युफैक्चरिंग भारत में ही की गई है।

तीन अलग-अलग वेरिएंट में उपलब्ध

सर्ज सिस्टम को अलग-अलग ऑपरेशनल जरूरतों के हिसाब से कई वेरिएंट्स में तैयार किया गया है। इसका हैंडहेल्ड या मैनपैक वर्जन एक सैनिक अपने साथ आसानी से लेकर चल सकता है। यह खासतौर पर उन इलाकों जैसे पहाड़ी क्षेत्र, जंगल या कठिन टेरेन में उपयोगी है जहां बड़े सिस्टम तैनात करना मुश्किल होता है, ।

इसका दूसरा वेरिएंट ट्राइपॉड माउंटेड है, जिसे किसी एक जगह स्थायी रूप से तैनात किया जा सकता है। यह सिस्टम लगातार निगरानी करने में सक्षम है और चेकपॉइंट्स, सैन्य ठिकानों या पेरिमीटर सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

वहीं, तीसरा वेरिएंट व्हीकल माउंटेड है, जिसे सैन्य वाहनों या चलती गाड़ियों पर लगाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल मूविंग कन्वॉय, मोबाइल ऑपरेशन और संवेदनशील सैन्य मूवमेंट की सुरक्षा के दौरान किया जाता है।

कंपनी का कहना है कि सिस्टम को 60 सेकंड से कम समय में ऑपरेशनल किया जा सकता है।

हार्ड किल तकनीक पर भी काम जारी

अमरदीप सिंह ने बताया कि कंपनी अब “हार्ड किल” सॉल्यूशन पर भी काम कर रही है। इसमें दुश्मन ड्रोन को फिजिकली नष्ट करने की क्षमता शामिल होगी। फिलहाल सर्ज सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ड्रोन को निष्क्रिय करता है, लेकिन आने वाले समय में इसमें डायरेक्ट इंटरसेप्शन क्षमता भी जोड़ी जाएगी।

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उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया भर में ड्रोन खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में केवल जैमिंग ही नहीं, बल्कि फिजिकल न्यूट्रलाइजेशन की जरूरत भी बढ़ रही है।

2024 में शुरू हुई थी कंपनी

आर्मरी की शुरुआत साल 2024 में हुई थी। सिर्फ दो साल के भीतर कंपनी को इतना बड़ा रक्षा ऑर्डर मिलना भारतीय डिफेंस स्टार्टअप सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अमरदीप सिंह ने कहा, “यह 100 करोड़ रुपये का ऑर्डर आर्मरी को संभवतः देश की सबसे युवा डिफेंस-टेक स्टार्टअप बनाता है, जिसने इतने कम समय में इतना बड़ा रक्षा कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है।”

कंपनी अब तक 35 करोड़ की इक्विटी फंडिंग जुटा चुकी है। इसमें ग्रोएक्स वेंचर्स, एंटलर, इंडस्ट्रियल 47, डेक्सटर वेंचर्स और एसी वेंचर्स जैसे निवेशकों ने हिस्सा लिया है। आर्मरी अब एक नए फंडिंग राउंड की तैयारी कर रही है। इस निवेश का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, हार्डवेयर डेवलपमेंट और नए टैलेंट की भर्ती के लिए किया जाएगा।

रक्षा बजट में बढ़ोतरी के बीच मिला ऑर्डर

यह ऑर्डर ऐसे समय में मिला है जब भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 ट्रिलियन आवंटित किए हैं। यह देश की जीडीपी का लगभग 2 प्रतिशत है।

पिछले वित्त वर्ष में रक्षा बजट 6.81 ट्रिलियन था, जबकि उससे पहले यह लगभग 6.22 ट्रिलियन था। सरकार लगातार स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भर भारत पर जोर दे रही है।

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  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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