📍नई दिल्ली/जयपुर | 5 May, 2026, 7:31 PM
Operation Sindoor Anniversary: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने के मौके पर 7 और 8 मई को जयपुर में भारतीय सेना की साउथ वेस्टर्न कमांड यानी सप्तशक्ति कमाांड में जॉइंट कमांडर्स कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। जिसमें तीनों सेनाएं थल सेना, वायु सेना और नौसेना की टॉप लीडरशिप पिछले ऑपरेशनों की समीक्षा से लेकर भविष्य की सैन्य रणनीति तक हर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करेगी। इस बार इस कॉन्फ्रेंस का सबसे बड़ा केंद्र जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर रहने वाला है, जिसे महीने के आखिर तक पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके बाद 7 मई की रात भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना ने मिलकर ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पीओके के अंदर मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
कार्रवाई बेहद कम समय में पूरी की गई, लेकिन उसका असर कई दिनों तक दिखाई दिया। सेना के अंदर इसे एक ऐसे ऑपरेशन के तौर पर देखा गया, जिसने जॉइंट मिलिट्री आपरेशन की जरूरत को और स्पष्ट कर दिया।
Operation Sindoor Anniversary: क्या होने वाला है जयपुर में
जयपुर में होने वाली इस कॉन्फ्रेंस में सीडीएस जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अलावा तीनों सेनाओं के वरिष्ठ कमांडर शामिल होंगे।
यहां ऑपरेशन सिंदूर की पूरी समीक्षा की जाएगी। यह देखा जाएगा कि ऑपरेशन के दौरान क्या मजबूत रहा और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। इसके साथ ही पाकिस्तान और चीन से जुड़े सुरक्षा हालात पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “यह कॉन्फ्रेंस सिर्फ समीक्षा नहीं है, बल्कि आने वाले समय की तैयारी का पूरा रोडमैप तय करने का मंच है।”
खास बात यह है कि सात मई को ही जयपुर में एक बेहद अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होने वाली है, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डीजीएमओ रहे लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, वायुसेना के डीजी एयर ऑपरेशंस रहे एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती, और डीजी नेवल ऑपरेशंस वाइस एडमिरल एएन प्रमोद संबोधित करेंगे। बता दें कि ये तीनों वही अफसर हैं, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के बाद 6-7 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।
माना जा रहा है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद अहम एलान हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर बनाने को लेकर भी एलान हो सकता है।
क्या है जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर
जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर यानी जेओसी एक ऐसा केंद्रीय सिस्टम है, जहां तीनों सेनाओं की जानकारी और ऑपरेशन एक साथ जुड़ेंगे। यह सेंटर नई दिल्ली में बनाया जा रहा है और इसे मई 2026 के अंत तक पूरी तरह शुरू करने की योजना है। इसका मकसद अलग-अलग काम कर रही सेनाओं को एक साथ लाकर एक ही दिशा में काम करना है।
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने हाल ही में एक इवेंट में कहा था, “जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर जॉइंटनेस को मजबूत करने का एक बड़ा कदम है और इसे जल्द ही पूरी तरह ऑपरेशनल कर दिया जाएगा।”
कैसे काम करेगा यह सेंटर
जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर का काम सिर्फ जानकारी इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि उसे समझकर तुरंत निर्णय लेने में मदद करना है। अभी तक तीनों सेनाएं अपने-अपने सिस्टम के जरिए काम करती थीं, लेकिन अब सभी डेटा एक ही जगह पर आएगा।
इस सेंटर में रियल टाइम डेटा शेयरिंग होगी। यानी जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और स्पेस से जुड़ी जानकारी एक साथ दिखाई देगी। इसे कॉमन ऑपरेटिंग पिक्चर कहा जाता है।
जब किसी ऑपरेशन की योजना बनेगी, तो तीनों सेनाओं के अधिकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर बैठकर फैसला ले सकेंगे। इससे समय बचेगा और फैसले लेने की रफ्तार बढ़ेगी।
मल्टी डोमेन ऑपरेशन का बनेगा आधार
आज के युद्ध सिर्फ जमीन या हवा तक सीमित नहीं रहे हैं। अब साइबर अटैक, ड्रोन, सैटेलाइट और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं। इसी को मल्टी डोमेन ऑपरेशन कहा जाता है।
जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर इन सभी क्षेत्रों को जोड़ने का काम करेगा। अगर कहीं सीमा पर हलचल होती है, तो उसका डेटा तुरंत एयर और नेवी तक भी पहुंच जाएगा।
एक अधिकारी के अनुसार, “अब युद्ध का फैसला तेजी से लेने वाले पक्ष के हाथ में होता है, इसलिए डेटा और निर्णय का एक साथ होना जरूरी है।”
OODA लूप को तेज करने की कोशिश
सैन्य भाषा में एक प्रक्रिया होती है, ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट। इसे ओओडीए लूप कहा जाता है। इसका मतलब है कि पहले स्थिति को देखो, समझो, फैसला लो और फिर कार्रवाई करो।
जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर का मकसद इसी प्रक्रिया को तेज करना है। जितनी जल्दी फैसला होगा, उतनी ही जल्दी कार्रवाई हो सकेगी।
इस सेंटर के जरिए तीनों सेनाओं के एयर डिफेंस सिस्टम को भी जोड़ा जाएगा। अभी तक सेना, वायु सेना और नौसेना के अपने-अपने सिस्टम थे, लेकिन अब सभी एक साथ काम करेंगे।
कम्युनिकेशन सिस्टम भी इंटीग्रेट किया जा रहा है, ताकि किसी भी ऑपरेशन के दौरान जानकारी में देरी न हो। सुरक्षित मोबाइल कम्युनिकेशन और साझा साइबर सुरक्षा नीति भी इसी का हिस्सा है।
थिएटर कमांड्स की दिशा में कदम
जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर को थिएटर कमांड सिस्टम की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। अभी भारत में अलग-अलग कमांड हैं, लेकिन भविष्य में उन्हें मिलाकर बड़े थिएटर बनाए जाएंगे। इस दिशा में तीन सेट की सिफारिशें पहले ही सरकार को भेजी जा चुकी हैं। जयपुर कॉन्फ्रेंस में इन पर भी चर्चा होगी।
टेक्नोलॉजी और डेटा पर जोर
2026 को सेना के अंदर “नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिक” साल के रूप में देखा जा रहा है। इसका मतलब है कि अब युद्ध में तकनीक और डेटा की भूमिका सबसे अहम हो गई है।
जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर इसी सोच का हिस्सा है, जहां डेटा के आधार पर फैसले लिए जाएंगे। पिछले कुछ वर्षों में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने पर लगातार काम हो रहा है। इसके तहत कम्युनिकेशन, ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशन जैसे कई क्षेत्रों में बदलाव किए गए हैं। जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर इन्हीं प्रयासों को एक जगह लाकर मजबूत करेगा।
सेना के अंदर इस सेंटर को लेकर काफी समय से काम चल रहा है। अलग-अलग सिस्टम को जोड़ना, डेटा शेयरिंग की व्यवस्था बनाना और अधिकारियों को इसके लिए तैयार करना, ये सभी काम धीरे-धीरे किए गए हैं।
एक अधिकारी ने कहा, “यह बदलाव दिखने में छोटा लग सकता है, लेकिन इसके पीछे बहुत बड़ा काम हुआ है।”
ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक
इस कॉन्फ्रेंस में ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों को भी विस्तार से रखा जाएगा। उस ऑपरेशन में मिसाइल, एयर स्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई एक साथ हुई थी, लेकिन बेहतर तालमेल की जरूरत महसूस हुई थी।
सीडीएस ने अपने एक बयान में कहा था, “जॉइंटनेस और इंटीग्रेशन एक धीमी प्रक्रिया है, लेकिन यही भविष्य के युद्ध की जरूरत है।”
7 मई को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कुछ अहम पहलुओं को सार्वजनिक किया जाए। इसमें ऑपरेशन की योजना, लक्ष्य और उसके परिणामों की जानकारी दी जा सकती है।


