📍नई दिल्ली | 6 May, 2026, 8:54 PM
Pakistan Navy assists Indian vessel: अरब सागर में पाकिस्तान नेवी ने समुद्र में फंसे एक भारतीय जहाज की मदद करने की खबर को पाकिस्तान ने इस तरह प्रचारित किया कि उसने अनुशासन और राजनीतिक तनावों किनारे रख कर मदद पहुंचाई। लेकिन असलियत यह है कि जहाज की बिजली पूरी तरह बंद हो जाने के कारण समुद्र में बह रहे इस जहाज पर सात लोग सवार थे। पाकिस्तानी टीम ने जहाज तक पहुंचकर क्रू को खाने-पीने का सामान दिया, जबकि भारतीय तटरक्षक बल ने आगे की कार्रवाई शुरू की।
यह मामला भारतीय मर्चेंट वेसल “एमवी गौतम” से जुड़ा है, जो ओमान से गुजरात के अलंग शिपब्रेकिंग यार्ड की ओर जा रहा था। रास्ते में जहाज का जनरेटर खराब हो गया, जिसके बाद उसमें पूरी तरह बिजली चली गई और वह समुद्र में बहने लगा।
Pakistan Navy assists Indian vessel: अलंग जा रहा था जहाज
एमवी गौतम (मोरोनी पंजीकृत) एक पुराना मल्टी-पर्पज ऑफशोर वेसल था, जिसे तोड़ने के लिए गुजरात के अलंग भेजा जा रहा था। अलंग दुनिया के सबसे बड़े शिपब्रेकिंग यार्ड में गिना जाता है, जहां पुराने जहाजों को काटा जाता है।
यह जहाज ओमान के शिनास पोर्ट से भारत की तरफ आ रहा था। जहाज पर कुल सात क्रू सदस्य मौजूद थे, जिनमें छह भारतीय और एक इंडोनेशियाई नागरिक था।
अचानक बंद हुआ पूरा पावर सिस्टम
3 मई को समुद्र में सफर के दौरान जहाज का मुख्य जनरेटर खराब हो गया। इसके बाद जहाज में पूरी बिजली सप्लाई बंद हो गई। बिजली बंद होने से इंजन, नेविगेशन सिस्टम और कई जरूरी उपकरणों ने काम करना बंद कर दिया।
हालात ऐसे हो गए कि जहाज खुद से आगे बढ़ने में सक्षम नहीं रहा और समुद्र में धीरे-धीरे बहने लगा। उस समय यह पाकिस्तान के सर्च एंड रेस्क्यू (SAR) क्षेत्र में मौजूद था।
पाकिस्तान के SAR क्षेत्र में हुई घटना
समुद्र में अलग-अलग देशों के जिम्मेदारी वाले सर्च एंड रेस्क्यू क्षेत्र तय होते हैं। जिस इलाके में यह घटना हुई, वहां बचाव की जिम्मेदारी पाकिस्तान की थी।
मुंबई स्थित मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर ने पाकिस्तान के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पाकिस्तान मैरीटाइम सिक्योरिटी एजेंसी और पाकिस्तान नेवी ने जहाज तक पहुंचने की कार्रवाई शुरू की।
पाकिस्तानी टीम जहाज पर पहुंची
पाकिस्तान मैरीटाइम सिक्योरिटी एजेंसी की तकनीकी टीम जहाज पर चढ़ी और उन्होंने खराबी की जांच की। जांच के बाद पता चला कि जहाज का मुख्य जनरेटर पूरी तरह खराब हो चुका है और उसे मौके पर ठीक करना संभव नहीं है।
इसके बाद पाकिस्तानी टीम ने जहाज पर मौजूद लोगों को जरूरी खाने-पीने का सामान उपलब्ध कराया। लेकिन यह मदद केवल इमरजेंसी सप्लाई तक सीमित रही, क्योंकि जहाज की तकनीकी खराबी को ठीक करना उनकी क्षमता से बाहर था।
सूत्रों के मुताबिक, “जहाज में मुख्य समस्या पावर जेनरेशन सिस्टम की थी। यह खराबी इतनी बड़ी थी कि समुद्र में उसे ठीक करना संभव नहीं था।”
लगातार बहता रहा जहाज
बिजली और इंजन बंद होने के कारण जहाज समुद्र की लहरों के सहारे बहता रहा। शुरुआत में यह करीब 1.5 नॉट की रफ्तार से पूर्व-उत्तर दिशा की तरफ बढ़ रहा था। धीरे-धीरे उसकी रफ्तार घटकर करीब 0.6 नॉट रह गई थी।
धीरे-धीरे बहते हुए जहाज भारतीय सर्च एंड रेस्क्यू क्षेत्र के करीब पहुंच गया। 4 मई की शाम तक यह द्वारका लाइटहाउस से करीब 262 नॉटिकल मील दूर पहुंच चुका था।
भारतीय तटरक्षक बल भी सक्रिय हुआ
भारतीय तटरक्षक बल के गांधीनगर स्थित रीजनल हेडक्वॉर्टर (उत्तर-पश्चिम) को 4 मई की रात 11:22 पर इस मामले की जानकारी मिली। इसके बाद आईसीजी जहाज “राजरतन” को इलाके में भेजा गया।
जहाज के पास पहुंचने के बाद भारतीय तटरक्षक बल ने उससे संपर्क स्थापित किया। हालांकि जहाज की कम्युनिकेशन क्षमता बहुत सीमित थी। केवल वीएचएफ और एआईएस सिस्टम बैटरी बैकअप पर चल रहे थे।
क्रू की स्थिति सामान्य बताई गई, लेकिन जहाज बिना लाइट और बिना इंजन के समुद्र में मौजूद था, जिससे आसपास गुजरने वाले दूसरे जहाजों के लिए खतरा पैदा हो गया।
टग बोट बुलाने की तैयारी
भारतीय तटरक्षक बल ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग को जहाज की स्थिति की जानकारी दी। जहाज को सुरक्षित जगह तक खींचकर ले जाने के लिए अब टग बोट की जरूरत बताई गई है।
क्योंकि जहाज खुद से चल नहीं सकता, इसलिए उसे खींचकर अलंग तक पहुंचाना ही एकमात्र विकल्प माना जा रहा है।
समुद्र में क्यों खतरनाक होती है ऐसी स्थिति
जब किसी जहाज की बिजली और इंजन पूरी तरह बंद हो जाते हैं, तो वह समुद्र में अनियंत्रित हो जाता है। रात के समय लाइट्स बंद होने पर दूसरे जहाजों के लिए उसे देख पाना मुश्किल हो जाता है।
ऐसी स्थिति में टक्कर का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से भारतीय तटरक्षक बल लगातार जहाज की निगरानी कर रहा है।
एंटी-पाइरेसी और SAR सहयोग का हिस्सा
भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव के बावजूद समुद्र में सर्च एंड रेस्क्यू सहयोग पहले भी होता रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों (UNCLOS) और IMO (International Maritime Organization) के तहत किसी भी संकट में फंसे जहाज की मदद करना जरूरी माना जाता है।
इस मामले में भी पाकिस्तान नेवी और भारतीय एजेंसियों के बीच जानकारी साझा की गई। पूरी प्रक्रिया मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सिस्टम के जरिए आगे बढ़ाई गई।
क्रू की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी प्राथमिकता
जहाज पर मौजूद सात लोगों की सुरक्षा इस पूरे ऑपरेशन का सबसे अहम हिस्सा रही। पाकिस्तानी टीम ने जहाज पर पहुंचकर उनकी स्थिति देखी और जरूरी सप्लाई दी, जबकि भारतीय तटरक्षक बल आगे की निगरानी में लगा हुआ है।
6 मई की सुबह तक जहाज धीरे-धीरे भारतीय क्षेत्र की तरफ बह रहा था और उसकी रफ्तार घटकर करीब 0.6 नॉट रह गई थी। फिलहाल जहाज समुद्र में बहता हुआ निगरानी में रखा गया है और उसे सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने की तैयारी जारी है।

