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Bharat Forge विशाखापट्टनम में बनाएगी भारत का पहला प्राइवेट मरीन गैस टरबाइन हब, देश में ही होगी वॉरशिप्स के इंजनों की मरम्मत

आधुनिक युद्धपोतों में हाई-स्पीड ऑपरेशन, लंबी दूरी की तैनाती और तेजी से प्रतिक्रिया के लिए गैस टरबाइन इंजन इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्हें लगातार हाई टैंपरेचर और हेवी प्रेशर में काम करना पड़ता है...

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📍पुट्टापर्थी/विशाखापट्टनम | 19 May, 2026, 3:59 PM

Bharat Forge Marine Gas Turbine: भारत फोर्ज लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश सरकार के साथ एक अहम समझौता किया है, जिसके तहत विशाखापट्टनम में देश का पहला प्राइवेट सेक्टर मरीन गैस टरबाइन सुविधा केंद्र बनाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना के युद्धपोतों में इस्तेमाल होने वाले गैस टरबाइन इंजनों की मरम्मत, ओवरहॉल और भविष्य में स्वदेशी विकास से जुड़ा होगा।

यह समझौता 15 मई को आंध्र प्रदेश के पुट्टापर्थी में आयोजित एयरोस्पेस और डिफेंस इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव के दौरान हुआ था। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद थे। इसी कार्यक्रम में भारत के एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए स्टेल्थ फाइटर प्रोग्राम की आधारशिला भी रखी गई।

भारत फोर्ज की ओर से कंपनी के एयरोस्पेस डिवीजन के सीईओ गुरु बिस्वाल ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। कंपनी का कहना है कि यह प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक को पूरा करेगा।

भारत फोर्ज के वाइस चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी ने कहा कि भारतीय युद्धपोत लंबे समय तक विदेशी इंजनों पर निर्भर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विशाखापट्टनम में बनने वाली यह सुविधा उस निर्भरता को कम करने की दिशा में बड़ा कदम है।

अमित कल्याणी के मुताबिक यह केवल एक निवेश नहीं, बल्कि भारतीय नौसेना और देश के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता है।

Bharat Forge Marine Gas Turbine: क्या होता है मरीन गैस टरबाइन

मरीन गैस टरबाइन युद्धपोतों का बेहद अहम हिस्सा होता है। यह वही सिस्टम है जो बड़े नौसैनिक जहाजों को ताकत देता है और उन्हें तेज रफ्तार से समुद्र में चलाने में मदद करता है।

आधुनिक युद्धपोतों में हाई-स्पीड ऑपरेशन, लंबी दूरी की तैनाती और तेजी से प्रतिक्रिया के लिए गैस टरबाइन इंजन इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्हें लगातार हाई टैंपरेचर और हेवी प्रेशर में काम करना पड़ता है। इसलिए इन इंजनों की समय-समय पर मरम्मत और ओवरहॉलिंग बेहद जरूरी होती है।

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अब तक भारत इन तकनीकों के लिए काफी हद तक विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहा है। खासतौर पर यूक्रेन की कंपनी जोर्या-माशप्रोएक्ट जैसी कंपनियां भारतीय नौसेना के लिए महत्वपूर्ण सप्लायर रही हैं। लेकिन वैश्विक तनाव और सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण भारत लंबे समय से इस क्षेत्र में घरेलू क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहा था। (Bharat Forge Marine Gas Turbine)

विशाखापट्टनम में क्यों बन रहा है यह केंद्र

विशाखापट्टनम भारतीय नौसेना का एक बड़ा और रणनीतिक बेस है। यहां ईस्टर्न नेवल कमांड का मुख्यालय मौजूद है। इसके अलावा नेवल डॉकयार्ड और आईएनएस एक्सिला जैसी महत्वपूर्ण नौसैनिक सुविधाएं भी यहीं स्थित हैं।

भारत फोर्ज का यह नया केंद्र करीब 80 एकड़ जमीन पर आंध्र प्रदेश डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के अंदर बनाया जाएगा। यह लोकेशन इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे नौसेना के जहाजों के इंजन की मरम्मत और रखरखाव का समय काफी कम हो जाएगा।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पहले कई मामलों में विदेशी सहायता या बाहरी सपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे। अब यह काम भारत में ही तेजी से किया जा सकेगा। (Bharat Forge Marine Gas Turbine)

दो चरणों में पूरा होगा प्रोजेक्ट

भारत फोर्ज इस परियोजना को दो चरणों में विकसित करेगा। पहले चरण में मरीन गैस टरबाइन रिपेयर और ओवरहॉल कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। इसमें टरबाइन ब्लेड्स, वेंस और कॉम्बशन लाइनर्स की मरम्मत की सुविधा होगी। साथ ही कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और एनडीई यानी नॉन-डिस्ट्रक्टिव एग्जामिनेशन लेबोरेटरी भी बनाई जाएगी।

कंपनी का दावा है कि इस सुविधा के जरिए नेवल डॉकयार्ड को 72 घंटे के अंदर तकनीकी सपोर्ट दिया जा सकेगा। यानी जहाजों के इंजन की जांच और जरूरी मरम्मत पहले की तुलना में काफी तेजी से होगी।

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दूसरे चरण में भारत का पहला प्राइवेट सेक्टर मरीन गैस टरबाइन डेवलपमेंट और असेंबली हॉल बनाया जाएगा। यहां फुल-स्पेक्ट्रम हॉट टेस्ट सेल भी स्थापित किया जाएगा, जहां अलग-अलग क्षमता वाले इंजनों की टेस्टिंग हो सकेगी।

इसी चरण में पहली बार भारत में स्वदेशी मरीन गैस टरबाइन को डेवलप और क्वालिफाई करने का काम शुरू होगा।

नौसेना के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट

भारतीय नौसेना लगातार अपने युद्धपोत बेड़े को आधुनिक बना रही है। नए विध्वंसक, फ्रिगेट और दूसरे बड़े जहाजों में एडवांस प्रोपल्शन सिस्टम की जरूरत होती है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के समय किसी भी देश के लिए अपने जहाजों की मरम्मत क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है। अगर इंजन या प्रोपल्शन सिस्टम के लिए विदेशी सपोर्ट पर निर्भरता ज्यादा हो तो ऑपरेशन प्रभावित हो सकते हैं।

भारत फोर्ज का यह प्रोजेक्ट इसी कमी को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे नौसेना को घरेलू स्तर पर इंजन सपोर्ट मिलेगा और विदेशी निर्भरता कम होगी।

इस प्रोजेक्ट से करीब 750 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। इंजीनियरिंग, मशीनिंग, टेस्टिंग और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े स्थानीय युवाओं को भी इसमें अवसर मिल सकते हैं।

आंध्र प्रदेश सरकार लंबे समय से राज्य को एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रही है। यह प्रोजेक्ट उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सुविधाओं से आसपास छोटी और मध्यम उद्योग इकाइयों को भी काम मिलेगा। इससे सप्लाई चेन और लोकल इंडस्ट्री दोनों मजबूत होंगे।

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भारत फोर्ज कल्याणी ग्रुप की प्रमुख कंपनी है और ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में काम करती है।

पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने रक्षा क्षेत्र में तेजी से विस्तार किया है। कंपनी पहले ही आर्टिलरी सिस्टम, ड्रोन इंजन और एयरोस्पेस कंपोनेंट्स पर काम कर रही है।

कंपनी का एयरोस्पेस डिवीजन बेंगलुरु में गैस टरबाइन और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर भी चला रहा है। यहां इंजन डिजाइन और विकास पर काम किया जा रहा है।

भारत फोर्ज ने हाल ही में जोर्या-माशप्रोएक्ट इंडिया में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी भी हासिल की है। इससे कंपनी की मरीन गैस टरबाइन क्षेत्र में मौजूदगी और मजबूत हुई है। (Bharat Forge Marine Gas Turbine)

आंध्र प्रदेश बन रहा डिफेंस हब

आंध्र प्रदेश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर को तेजी से विकसित किया जा रहा है। सरकार राज्य में एयरोस्पेस, नौसैनिक और रक्षा उद्योग से जुड़े बड़े निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रही है।

विशाखापट्टनम पहले से ही नौसैनिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। अब मरीन गैस टरबाइन जैसी हाई-टेक सुविधा आने से इसकी रणनीतिक और औद्योगिक अहमियत और बढ़ गई है। (Bharat Forge Marine Gas Turbine)

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  • News Desk

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