📍हनोई | 19 May, 2026, 2:36 PM
India-Vietnam Defence Ties: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों चार दिन की वियतनाम और द. कोरिया यात्रा पर है। रक्षा मंत्री की वियतनाम यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई अहम समझौतों और रणनीतिक योजनाओं पर सहमति बनाई। इस दौरे में सबसे अहम साझेदारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रही। भारत ने वियतनाम में एआई लैब स्थापित करने की घोषणा भी की है।
राजनाथ सिंह ने हनोई में वियतनाम के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता को लेकर विस्तार से चर्चा की।
रक्षा मंत्री का यह दौरा भारत-वियतनाम रक्षा संबंधों को नई तकनीकी दिशा देने वाला माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को लेकर कई देशों की चिंता बढ़ी हुई है।
India Vietnam Defence Ties: एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर बड़ा समझौता
इस दौरान एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी से जुड़े अहम समझौते पर दस्तखत किए गए। भारत के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस इंजीनियरिंग और वियतनाम की टेली कम्युनिकेशंस यूनिवर्सिटी के बीच इस क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अब दोनों देश भविष्य की युद्ध तकनीकों पर मिलकर काम करेंगे।
एआई तकनीक आज के आधुनिक युद्ध में तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसका इस्तेमाल ड्रोन ऑपरेशन, निगरानी, साइबर सुरक्षा, डेटा विश्लेषण और युद्ध क्षेत्र में तेजी से फैसले लेने के लिए किया जाता है। वहीं क्वांटम टेक्नोलॉजी को सुरक्षित कम्युनिकेशन और हाई-लेवल डिफेंस नेटवर्क के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
न्हा ट्रांग में बनेगी एआई लैब
राजनाथ सिंह ने वियतनाम के न्हा ट्रांग शहर स्थित टेली कम्युनिकेशंस यूनिवर्सिटी में एआई लैब स्थापित करने की घोषणा भी की। भारतीय सहायता से बनने वाली यह लैब वियतनाम के सैन्य और तकनीकी प्रशिक्षण को मजबूत करने में मदद करेगी। रक्षा जानकारों के मुताबिक यह केवल एक लैब नहीं, बल्कि हाई-टेक डिफेंस सहयोग का नया प्लेटफॉर्म होगा।
इस लैब में एआई आधारित सिस्टम, डेटा प्रोसेसिंग, साइबर डिफेंस और एडवांस टेक्नोलॉजी पर रिसर्च की जा सकती है। इससे वियतनाम के सैन्य अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों को आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग मिलेगी।
भारत पहले भी कई देशों के साथ रक्षा प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग करता रहा है, लेकिन एआई और क्वांटम जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी में सहयोग को काफी रणनीतिक माना जा रहा है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर साझा संदेश
बैठक के दौरान दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
दोनों देशों ने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन बेहद जरूरी है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों की पृष्ठभूमि में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और वियतनाम दोनों ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हैं। दोनों देश समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक सहयोग को लगातार बढ़ा रहे हैं।
रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत वियतनाम के साथ अपने “एनहैंस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने वियतनाम के रक्षा आधुनिकीकरण और क्षमता निर्माण में भारत के सहयोग को दोहराया। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, संयुक्त अभ्यास, सैन्य प्रशिक्षण और हाई-लेवल एक्सचेंज को बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
बैठक में साइबर सुरक्षा, संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने नियमित सैन्य संवाद और एक्सचेंज प्रोग्राम जारी रखने पर सहमति जताई।
वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग ने भारत के सहयोग की सराहना की और कहा कि दोनों देशों के बीच पुरानी दोस्ती लगातार मजबूत हो रही है। (India-Vietnam Defence Ties)
भाषा लैब का भी उद्घाटन
राजनाथ सिंह और वियतनाम के रक्षा मंत्री ने संयुक्त रूप से एक लैंग्वेज लैब का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। यह लैब वियतनाम के एयर फोर्स ऑफिसर्स कॉलेज में भारतीय सहायता से बनाई गई है।
इस लैब का मकसद सैन्य अधिकारियों की भाषा क्षमता और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण स्तर को बेहतर बनाना है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक आधुनिक सैन्य सहयोग में भाषा और कम्युनिकेशन की भूमिका काफी अहम होती है।
राष्ट्रपति तो लाम से भी हुई मुलाकात
द्विपक्षीय बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने वियतनाम के राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव तो लाम से भी मुलाकात की।
उन्होंने भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की ओर से शुभकामनाएं दीं और दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और समुद्री सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की।
दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच संबंध साझा विश्वास, ऐतिहासिक जुड़ाव और रणनीतिक हितों पर आधारित हैं।
वियतनाम के राष्ट्रपति ने भारत को अपने विकास और रणनीतिक प्राथमिकताओं का अहम साझेदार बताया। उन्होंने रक्षा सहयोग को दोनों देशों की साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। (India-Vietnam Defence Ties)
हो ची मिन्ह को दी श्रद्धांजलि
राजनाथ सिंह ने अपनी यात्रा की शुरुआत वियतनाम के संस्थापक नेता हो ची मिन्ह को श्रद्धांजलि देकर की। उन्होंने हो ची मिन्ह समाधि स्थल पर जाकर सम्मान व्यक्त किया।
यह अवसर हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती का भी था। राजनाथ सिंह ने कहा कि हो ची मिन्ह का नेतृत्व, स्वतंत्रता के प्रति समर्पण और वैश्विक एकजुटता का संदेश आज भी लोगों को प्रेरित करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और वियतनाम की दोस्ती की मजबूत नींव रखने में हो ची मिन्ह की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
भारत-वियतनाम रक्षा संबंध क्यों हैं अहम
भारत और वियतनाम पिछले कई वर्षों से रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं।
भारत वियतनाम को रक्षा प्रशिक्षण, नौसैनिक सहयोग और तकनीकी सहायता प्रदान करता रहा है। दोनों देशों की नौसेनाएं कई बार संयुक्त गतिविधियों में हिस्सा ले चुकी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि वियतनाम दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण देश है और भारत उसे इंडो-पैसिफिक रणनीति में अहम साझेदार मानता है।
भारत “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है। वहीं वियतनाम भी भारत को एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में देखता है। (India-Vietnam Defence Ties)


