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भारत में पहली बार पूरी तरह स्वदेशी ड्रोन इंजन लाइन तैयार! वेक्टर टेक्निक्स बनाएगी हर साल 3 लाख UAV प्रोपल्शन यूनिट

कंपनी ने दावा किया है कि उसने 60 सीसी, 170 सीसी और 210 सीसी बॉक्सर टाइप इंटरनल कंबशन इंजन डेवलप किए हैं। ये इंजन मुख्य रूप से हाइब्रिड-वीटीओएल और फिक्स्ड विंग यूएवी के लिए बनाए गए हैं...

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📍नई दिल्ली | 9 Jul, 2026, 7:09 PM

Indigenous UAV Propulsion System India: डिफेंस सेक्टर की प्रसिद्ध जेन टेक्नोलॉजीज की सहायक कंपनी वेक्टर टेक्निक्स ने दावा किया है कि उसने देश की पहली पूरी तरह स्वदेशी और प्रोडक्शन के लिए तैयार यूएवी प्रोपल्शन लाइन डेवलप कर ली है। कंपनी के अनुसार अब वह ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी लगभग हर प्रमुख सिस्टम भारत में ही डिजाइन और तैयार कर रही है। इनमें बीएलडीसी मोटर, स्पीड कंट्रोलर, कार्बन फाइबर प्रोपेलर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार्टर-जनरेटर और इंटरनल कंबशन (आईसी) इंजन शामिल हैं।

Indigenous UAV Propulsion System India: क्या होता है ड्रोन का प्रोपल्शन सिस्टम?

किसी भी ड्रोन को उड़ाने वाले पूरे सिस्टम को प्रोपल्शन स्टैक कहा जाता है। इसमें केवल मोटर ही नहीं होती, बल्कि मोटर को कंट्रोल करने वाला इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोलर, प्रोपेलर, पावर मैनेजमेंट सिस्टम, फर्मवेयर और जरूरत के अनुसार आईसी इंजन भी शामिल होते हैं।

वहीं, अगर इन सभी हिस्सों का डेवलपमेंट अलग-अलग देशों में होता है, तो सुरक्षा और भरोसे से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं। इसी वजह से अब रक्षा खरीद में यह भी देखा जा रहा है कि किसी सिस्टम का फर्मवेयर किसने डेवलप किया है, इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर कहां बना है और उसके प्रमुख पुर्जों का स्रोत क्या है।

सात साल में तैयार हुई स्वदेशी तकनीक

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पृथ्वी राज पकलापति के अनुसार इस क्षमता को विकसित करने में करीब सात साल का समय लगा। उन्होंने बताया कि कंपनी ने तैयार पुर्जे आयात करने के बजाय खुद मोटर की वाइंडिंग की, अपना फर्मवेयर डेवलप किया, इंजन की मशीनिंग की और कार्बन फाइबर प्रोपेलर भी स्वयं डिजाइन किए।

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कंपनी का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल ड्रोन बनाना नहीं था, बल्कि ऐसी तकनीक तैयार करना था जिस पर पूरी तरह भारत का नियंत्रण हो। (Indigenous UAV Propulsion System India)

तीन नए आईसी इंजन भी किए डेवलप

कंपनी ने दावा किया है कि उसने 60 सीसी, 170 सीसी और 210 सीसी बॉक्सर टाइप इंटरनल कंबशन इंजन डेवलप किए हैं। ये इंजन मुख्य रूप से हाइब्रिड-वीटीओएल और फिक्स्ड विंग यूएवी के लिए बनाए गए हैं।

जहां छोटे इलेक्ट्रिक ड्रोन सीमित समय तक उड़ सकते हैं, जबकि लंबी दूरी और लंबे समय तक निगरानी करने वाले ड्रोन में आईसी इंजन अधिक उपयोगी साबित होते हैं। ऐसे इंजन लगातार पावर देते हैं और मिशन की अवधि बढ़ाने में मदद करते हैं।

बॉक्सर इंजन क्यों होते हैं खास?

बॉक्सर इंजन में सिलेंडर एक-दूसरे के सामने हॉरिजॉनटल डायरेक्शन में लगे होते हैं। इस डिजाइन से इंजन में कंपन कम होता है और उसका संतुलन बेहतर रहता है।

ड्रोन के लिए यह सिस्टम इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि कम कंपन से सेंसर, कैमरा और नेविगेशन सिस्टम अधिक स्थिर रहते हैं। साथ ही इंजन का वजन भी संतुलित रहता है, जिससे उड़ान की क्षमता बेहतर होती है।

खास बात यह है कि अब तक भारत में इस श्रेणी के इंजन पर डीआरडीओ भी काम करता रहा है। इसके अलावा कुछ निजी कंपनियां भी यूएवी इंजन डेवलप कर रही हैं। हालांकि वेक्टर टेक्निक्स ने इसे देश की पहली प्रोडक्शन के लिए तैयार स्वदेशी यूएवी इंजन लाइन बताया है। (Indigenous UAV Propulsion System India)

हर साल तीन लाख प्रोपल्शन यूनिट बनाने की क्षमता

कंपनी के अनुसार हैदराबाद के शमशाबाद स्थित संयंत्र की उत्पादन क्षमता बढ़ाकर अब तीन लाख प्रोपल्शन यूनिट प्रति वर्ष कर दी गई है।

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रक्षा सूत्रों का कहना है कि इतनी बड़ी उत्पादन क्षमता का मतलब है कि जरूरत पड़ने पर रक्षा और औद्योगिक दोनों क्षेत्रों की मांग को तेजी से पूरा किया जा सकता है। इससे बड़े ऑर्डर मिलने की स्थिति में उत्पादन बढ़ाने में भी आसानी होगी।

कंपनी का दावा है कि वह इलेक्ट्रिक मोटर के अलावा बीएलडीसी मोटर, स्पीड कंट्रोलर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, कार्बन फाइबर प्रोपेलर, स्टार्टर-जनरेटर और आईसी इंजन तक का निर्माण कर रही है।

स्पीड कंट्रोलर पूरी तरह भारतीय फर्मवेयर पर आधारित हैं, जबकि पावर इलेक्ट्रॉनिक्स ड्रोन के अलग-अलग उपकरणों तक सुरक्षित बिजली पहुंचाने का काम करते हैं। वहीं स्टार्टर-जनरेटर लंबे समय तक उड़ान भरने वाले प्लेटफॉर्म में बिजली उत्पादन में मदद करते हैं। (Indigenous UAV Propulsion System India)

विदेशी निर्भरता कम करने पर जोर

सूत्रों के मुताबिक पिछले कई सालों तक भारत में बनने वाले कई ड्रोन में इस्तेमाल होने वाली मोटर और कंट्रोलर का बड़ा हिस्सा विदेशी, खासकर चीनी सप्लाई चेन से आता था। इससे सुरक्षा और सप्लाई दोनों को लेकर चिंता बनी रहती थी।

अब रक्षा क्षेत्र में आईडीडीएम (इंडिजिनियसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड) कैटेगरी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें केवल अंतिम उत्पाद नहीं, बल्कि उसके प्रमुख पुर्जों और तकनीक के स्वदेशी होने पर भी ध्यान दिया जाता है।

कंपनी का कहना है कि उसके बनाए कई प्रोपल्शन सिस्टम पहले से भारतीय डिफेंस प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। प्रत्येक यूनिट को आपूर्ति से पहले तीन एनएबीएल मान्यता प्राप्त परीक्षण मानकों पर जांचा जाता है।

बता दें कि आधुनिक ड्रोन की असली ताकत केवल उसके एयरफ्रेम में नहीं, बल्कि उसके प्रोपल्शन सिस्टम में होती है। यदि इंजन, मोटर और कंट्रोल सिस्टम विदेशी सप्लाई पर निर्भर हों, तो किसी भी संकट की स्थिति में पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। (Indigenous UAV Propulsion System India)

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  • News Desk

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