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पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा से पहले बड़ा अपडेट! एक नहीं, अब अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइल बैटरियां चाहता है इंडोनेशिया

मार्च 2026 में दोनों देशों के बीच शुरुआती खरीद फ्रेमवर्क तैयार हुआ। उस समय इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि यह खरीद उसके समुद्री मिलिट्री मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम का हिस्सा है...

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📍नई दिल्ली | 3 Jul, 2026, 7:50 PM

Indonesia BrahMos Missile Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 6 से 8 जुलाई की इंडोनेशिया यात्रा से पहले भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल डील को लेकर बड़ अपडेट सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, इंडोनेशिया ब्रह्मोस की अतिरिक्त बैटरियों की खरीद पर भी भारत के साथ बातचीत कर रहा है। दोनों देशों के बीच इस विषय पर उच्च स्तर की चर्चा प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान होने की संभावना है।

Indonesia BrahMos Missile Deal: मार्च में तैयार हुआ था शुरुआती फ्रेमवर्क

सूत्रों के मुताबिक भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की बिक्री पर पहली औपचारिक चर्चा नवंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित डिफेंस कोऑपरेशन डायलॉग के दौरान हुई थी। उस समय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री स्जाफ्री स्जामसोद्दीन के बीच इस विषय पर बातचीत हुई थी।

इसके बाद मार्च 2026 में दोनों देशों के बीच शुरुआती खरीद फ्रेमवर्क तैयार हुआ। उस समय इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि यह खरीद उसके समुद्री मिलिट्री मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम का हिस्सा है। अब सूत्रों का कहना है कि इंडोनेशिया अपनी जरूरतों का रीवैल्यूशन कर रहा है और शुरुआती योजना से अधिक ब्रह्मोस बैटरियां खरीदने पर विचार कर रहा है।

आखिर क्या है ब्रह्मोस बैटरी?

कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि ब्रह्मोस बैटरी का मतलब केवल एक मिसाइल है या कुछ और।

तो बता दें कि ब्रह्मोस बैटरी केवल मिसाइलों का समूह नहीं होती। इसमें ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर, कमांड पोस्ट, अत्याधुनिक रडार, संचार उपकरण, फायर कंट्रोल सिस्टम और कई मिसाइलें शामिल होती हैं। आमतौर पर एक बैटरी में तीन से चार लॉन्चर और आठ से बारह मिसाइलें होती हैं। यही पूरा सिस्टम किसी तटीय क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है। (Indonesia BrahMos Missile Deal)

दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल

ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत इसकी रफ्तार है। यह दुनिया की एकमात्र ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो लगभग मैक-3 यानी करीब 3,700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरती है।

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अधिकांश क्रूज मिसाइलें सबसोनिक स्पीड से उड़ती हैं, जबकि ब्रह्मोस उनसे कई गुना तेज है। तेज रफ्तार के कारण दुश्मन के रडार को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। यही वजह है कि इसे इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन माना जाता है। (Indonesia BrahMos Missile Deal)

दो चरण वाले इंजन से मिलती है तेज रफ्तार

सूत्रों के मुताबिक ब्रह्मोस में दो स्टेज प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है। उड़ान की शुरुआत में सॉलिड फ्यूल बूस्टर मिसाइल को तेज रफ्तार देता है। इसके बाद लिक्विड रैमजेट इंजन एक्टिव हो जाता है।

रैमजेट इंजन उड़ान के दौरान वातावरण से ऑक्सीजन लेकर काम करता है। इससे मिसाइल लगातार सुपरसोनिक रफ्तार बनाए रखती है। यही तकनीक इसे पारंपरिक क्रूज मिसाइलों से अलग बनाती है।

समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ती है मिसाइल

ब्रह्मोस की एक और बड़ी खूबी इसकी सी-स्किमिंग उड़ान है। सूत्रों के अनुसार अंतिम चरण में यह मिसाइल समुद्र की सतह से बेहद कम ऊंचाई पर उड़ती है। कम ऊंचाई और कम रडार सिग्नेचर के चलते दुश्मन के रडार इसे काफी देर से पकड़ पाते हैं। जब तक मिसाइल दिखाई देती है, तब तक प्रतिक्रिया देने का समय काफी कम बचता है।

यही कारण है कि इसे आधुनिक एंटी-शिप हथियारों में सबसे प्रभावी माना जाता है। (Indonesia BrahMos Missile Deal)

फायर एंड फॉरगेट क्षमता भी बनाती है खास

ब्रह्मोस में आधुनिक गाइडेंस सिस्टम लगाया गया है। इसमें इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सपोर्ट और एक्टिव रडार सीकर का इस्तेमाल किया जाता है।

रक्षा सूत्रों के अनुसार लॉन्च होने के बाद मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए किसी बाहरी कंट्रोल पर निर्भर नहीं रहती। इसे फायर एंड फॉरगेट क्षमता कहा जाता है। यानी एक बार दागने के बाद यह अपने लक्ष्य की पहचान कर स्वयं हमला करती है। (Indonesia BrahMos Missile Deal)

अलग-अलग प्लेटफॉर्म से हो सकती है लॉन्च

ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-रोल कैपेबिलिटी भी है। यह मिसाइल जमीन से मोबाइल लॉन्चर के जरिए दागी जा सकती है। वॉरशिप्स से भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। पनडुब्बियों से लॉन्च करने की क्षमता भी विकसित की जा चुकी है। भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से भी इसका सफल परीक्षण और उपयोग हो चुका है।

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इसी वजह से इसे तीनों सेनाओं के लिए उपयोगी हथियार माना जाता है। (Indonesia BrahMos Missile Deal)

एक्सपोर्ट वर्जन की रेंज 290 किलोमीटर

सूत्रों के मुताबिक निर्यात किए जाने वाले ब्रह्मोस संस्करण की अधिकतम मारक क्षमता 290 किलोमीटर रखी गई है। यह सीमा मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) के नियमों के अनुरूप तय की गई है।

भारत के पास इससे अधिक दूरी तक मार करने वाले ब्रह्मोस के स्वदेशी संस्करण भी मौजूद हैं, लेकिन निर्यात के लिए निर्धारित रेंज वाला संस्करण ही विदेशी देशों को उपलब्ध कराया जाता है। (Indonesia BrahMos Missile Deal)

इंडोनेशिया चरणबद्ध तरीके से खरीद सकता है मिसाइल

सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच चरणबद्ध खरीद योजना पर काम हो रहा है। इसका मतलब यह है कि पूरी खरीद एक साथ नहीं होगी, बल्कि जरूरत और बजट के अनुसार अलग-अलग चरणों में की जा सकती है।

इंडोनेशिया इस खरीद के लिए अपने एक बैंक के जरिए फाइनेंशियल सिस्टम तैयार करने पर भी विचार कर रहा है। इससे भुगतान प्रक्रिया आसान हो सकेगी। (Indonesia BrahMos Missile Deal)

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी चल रही है चर्चा

सूत्रों का कहना है कि भारत केवल मिसाइल बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहता। नई दिल्ली ने जॉइंट डिफेंस इंडस्ट्री कोऑपरेशन कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा है।

इस कमेटी के माध्यम से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉइंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट, रक्षा उद्योग में सहयोग और भविष्य में स्थानीय स्तर पर कुछ उपकरणों के निर्माण जैसे विषयों पर भी काम किया जा सकता है। (Indonesia BrahMos Missile Deal)

फिलीपींस और वियतनाम पहले ही खरीद चुके हैं ब्रह्मोस

इंडोनेशिया ऐसा पहला देश नहीं होगा जो ब्रह्मोस खरीद रहा है। फिलीपींस पहले ही भारत से लगभग 375 मिलियन डॉलर की ब्रह्मोस डील कर चुका है और उसकी डिलीवरी शुरू हो चुकी है। वहां तटीय रक्षा के लिए ब्रह्मोस बैटरियां तैनात की जा रही हैं।

वहीं वियतनाम ने भी ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदने का समझौता किया है। इस पैकेज में मोबाइल कोस्टल डिफेंस बैटरियां, ऑपरेटर ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक सपोर्ट और मेंटेनेंस भी शामिल हैं।

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सूत्रों का कहना है कि इन तीनों देशों की समुद्री सुरक्षा आवश्यकताएं अलग हैं, लेकिन सभी अपने तटीय इलाकों की रक्षा क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। (Indonesia BrahMos Missile Deal)

समुद्री सुरक्षा में क्यों बढ़ रही है ब्रह्मोस की मांग

सूत्रों ने बताया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री मार्गों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से कई देश अपनी कोस्टल डिफेंस क्षमता मजबूत कर रहे हैं।

इंडोनेशिया का भौगोलिक स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उसके समुद्री क्षेत्र से होकर दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में से कई गुजरते हैं। ऐसे में लंबी दूरी तक जहाजों की निगरानी और जरूरत पड़ने पर त्वरित जवाब देने वाली मिसाइल क्षमता उसके लिए अहम मानी जा रही है। (Indonesia BrahMos Missile Deal)

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रक्षा सहयोग

सूत्रों का कहना है कि ब्रह्मोस अब भारत के रक्षा निर्यात का सबसे प्रमुख उत्पाद बन चुका है। यह मिसाइल केवल एक हथियार नहीं बल्कि भारत की रक्षा तकनीक, स्वदेशी निर्माण क्षमता और रक्षा उद्योग की ताकत का भी प्रतीक मानी जाती है।

भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम के तहत विकसित ब्रह्मोस का निर्माण 1998 में शुरू हुआ था। इसमें भारत के डीआरडीओ और रूस की एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिया की साझेदारी है।

आज यह मिसाइल भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की सेवा में शामिल है। इसी तकनीक के निर्यात के जरिए भारत कई मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को भी मजबूत कर रहा है। (Indonesia BrahMos Missile Deal)

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  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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