📍नई दिल्ली/लेह | 3 Jul, 2026, 9:26 PM
Indian Army Old Silk Route Expedition: भारतीय सेना ने लद्दाख के ऐतिहासिक ओल्ड सिल्क रूट पर 12 दिन का विशेष समर एक्सपेडिशन शुरू किया है। इस अभियान में सेना के जवान 264 किलोमीटर की कठिन यात्रा तय करेंगे। यह अभियान 11 हजार फीट से लेकर 18 हजार फीट तक की ऊंचाई वाले इलाकों से होकर गुजर रहा है। इसका उद्देश्य केवल कठिन परिस्थितियों में सैनिकों की क्षमता को परखना नहीं है, बल्कि लद्दाख की ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देना और स्थानीय लोगों के साथ सेना के जुड़ाव को भी मजबूत करना है।
इस अभियान की शुरुआत लेह से की गई। इसे भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल मदनराज पांडे ने हरी झंडी दिखाई। फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स, जिसे भारतीय सेना की 14वीं कोर भी कहा जाता है, पूरे लद्दाख सेक्टर की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है।
Indian Army Old Silk Route Expedition: एशिया के सबसे पुराने व्यापार मार्ग पर चल रहे हैं सैनिक
सूत्रों के मुताबिक यह अभियान जिस रास्ते पर चल रहा है, वह कभी एशिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों में शामिल था। ओल्ड सिल्क रूट चीन के शीआन शहर से शुरू होकर मध्य एशिया के रास्ते यूरोप तक जाता था। इस पूरे नेटवर्क में लद्दाख सबसे महत्वपूर्ण पहाड़ी व्यापार केंद्रों में गिना जाता था।
सदियों पहले व्यापारी इसी रास्ते से रेशम, पश्मीना ऊन, नमक, चाय, बोरेक्स, घोड़े और कई अन्य सामान लेकर एक देश से दूसरे देश तक जाते थे। उस समय लेह बड़े कारोबारी केंद्र के रूप में जाना जाता था। नुब्रा घाटी, डिस्किट, हुंदर और खारदुंग ला के आसपास के इलाके भी इस व्यापारिक मार्ग के अहम पड़ाव थे।
सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना का यह अभियान उसी ऐतिहासिक मार्ग को फिर से याद करने और उसकी विरासत को सामने लाने का प्रयास है।
Retracing History, Inspiring the Future 🇮🇳
The Indian Army has embarked on a 12-day Summer Expedition along the historic Old Silk Route in Ladakh, traversing 264 km across altitudes ranging from 11,000 to 18,000 feet.
Retracing one of Asia’s oldest trade routes, the expedition… pic.twitter.com/HKgU0VobnL
— @firefurycorps_IA (@firefurycorps) July 3, 2026
18 हजार फीट की ऊंचाई पर आसान नहीं होती यात्रा
यह अभियान सामान्य ट्रेकिंग से कहीं अधिक कठिन माना जाता है। सैनिकों को लगातार बदलते मौसम और बेहद कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में आगे बढ़ना पड़ता है।
सूत्रों के अनुसार 11 हजार से 18 हजार फीट की ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन का स्तर काफी कम हो जाता है। ऐसे वातावरण में शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे हाई एल्टीट्यूड सिकनेस और हाइपोक्सिया जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
यही वजह है कि इस तरह के अभियानों से पहले सैनिकों को कई चरणों में एक्लिमेटाइजेशन कराया जाता है, ताकि उनका शरीर ऊंचाई वाले वातावरण के अनुरूप खुद को ढाल सके।
हर दिन बदलती रहती हैं मौसम की चुनौतियां
लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में गर्मियों के दौरान भी मौसम तेजी से बदल सकता है। तेज बर्फीली हवाएं, अचानक तापमान में गिरावट और ऊबड़-खाबड़ रास्ते इस अभियान को और कठिन बना देते हैं।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक अभियान के दौरान जवानों को लंबी दूरी तक पैदल चलना, सीमित संसाधनों में रहना और कठिन भूभाग में आगे बढ़ना पड़ता है। इससे उनकी शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती की भी परीक्षा होती है।
महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र लद्दाख
लद्दाख सदियों तक प्राचीन सिल्क रूट का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र रहा। उस समय लेह केवल एक शहर नहीं, बल्कि व्यापारिक कारवां का सबसे बड़ा ठिकाना था, जहां भारत, तिब्बत, चीन और मध्य एशिया से आने वाले व्यापारी रुकते थे। कारगिल भी इस व्यापार मार्ग का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता था। इन दोनों शहरों में कारवां सराय होती थीं, जहां व्यापारी आराम करते, अपने जानवरों को विश्राम देते और सामान की खरीद-बिक्री करते थे।
भारत से निकलने वाला प्रमुख व्यापारिक मार्ग श्रीनगर से जोजिला दर्रा पार करते हुए कारगिल और फिर लेह तक पहुंचता था। इसके बाद व्यापारिक कारवां नुब्रा घाटी के दिस्किट और हुंदर से होकर श्योक और नुब्रा नदी के किनारे आगे बढ़ते थे। इसके बाद वे खारदुंग ला के आसपास के ऊंचे पहाड़ी दर्रों को पार कर यारकंद (आज के शिनजियांग, चीन) पहुंचते थे। यारकंद से यह मार्ग काशगर और फिर पूरे मध्य एशिया तक फैल जाता था।
सिल्क रूट का संपर्क केवल कश्मीर तक सीमित नहीं था। इसके अलग-अलग रास्ते गिलगित-बाल्टिस्तान, तिब्बत और हिमाचल प्रदेश से भी जुड़ते थे। इसी वजह से लद्दाख सदियों तक एशिया के सबसे महत्वपूर्ण ट्रांस-हिमालयी व्यापार केंद्रों में शामिल रहा, जहां रेशम, पश्मीना ऊन, नमक, चाय, बोरेक्स, घोड़े और कई अन्य कीमती वस्तुओं का व्यापार होता था।
हालांकि 15वीं शताब्दी के बाद समुद्री व्यापार मार्गों के विकसित होने से सिल्क रूट का महत्व धीरे-धीरे कम होने लगा। समुद्र के रास्ते व्यापार तेज, सस्ता और अधिक सुरक्षित होने लगा, जिसके बाद लद्दाख से होकर गुजरने वाले इस ऐतिहासिक व्यापार मार्ग का इस्तेमाल लगातार घटता गया।
सिर्फ फिटनेस नहीं, लीडरशिप की भी होती है परीक्षा
सूत्रों का कहना है कि इस तरह के अभियान केवल शारीरिक अभ्यास नहीं होते। इनका उद्देश्य सैनिकों में टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, नेविगेशन स्किल और कठिन परिस्थितियों में तेजी से निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना भी होता है।
ऊंचाई वाले इलाकों में किसी भी छोटी चुनौती का असर पूरी टीम पर पड़ सकता है। इसलिए हर सदस्य को एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर आगे बढ़ना होता है। यही वजह है कि ऐसे अभियानों को सेना की महत्वपूर्ण ट्रेनिंग का हिस्सा माना जाता है।
फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स की है अहम जिम्मेदारी
यह अभियान भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स आयोजित कर रही है। यह कोर लद्दाख के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाती है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार यह कोर नियमित रूप से हाई एल्टीट्यूड एक्सपेडिशन, पर्वतारोहण अभियान और कठिन इलाकों में सैनिकों की ट्रेनिंग आयोजित करती रहती है। इससे जवानों को वास्तविक परिस्थितियों में काम करने का अनुभव मिलता है।
स्थानीय लोगों से जुड़ाव भी है अभियान का हिस्सा
सूत्रों के मुताबिक इस अभियान का एक उद्देश्य सेना और लद्दाख के लोगों के बीच विश्वास और सहयोग को मजबूत करना भी है।
अभियान के दौरान सैनिक विभिन्न गांवों और स्थानीय समुदायों के संपर्क में आते हैं। इससे क्षेत्र की संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को समझने का अवसर मिलता है। सेना लंबे समय से लद्दाख में मेडिकल कैंप, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी स्थानीय लोगों के साथ जुड़ाव बनाए हुए है।
पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को भी मिल रही पहचान
ओल्ड सिल्क रूट केवल ऐतिहासिक महत्व का मार्ग नहीं है, बल्कि यह लद्दाख की सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा है।
इस अभियान के माध्यम से उन पुराने व्यापारिक रास्तों पर भी ध्यान गया है, जहां कभी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से व्यापारी आया करते थे। इन रास्तों ने सदियों तक भारत, तिब्बत, चीन और मध्य एशिया के बीच व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। (Indian Army Old Silk Route Expedition)
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