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Explainer: MUM-T की तरफ बढ़ रही भारतीय सेना, स्पेशल ड्रोन फोर्स बाज बटालियन का पूरा ब्लूप्रिंट आया सामने!

बाज बटालियन भारतीय सेना के डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन कार्यक्रम का हिस्सा है। इसी कार्यक्रम के तहत सेना रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, शक्तिबाण आर्टिलरी रेजिमेंट और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली पर भी काम कर रही है...

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📍नई दिल्ली | 2 Jul, 2026, 4:51 PM

Baaz Battalion Indian Army: भारतीय सेना केवल नए ड्रोन ही नहीं खरीद रही बल्कि पूरे ड्रोन इकोसिस्टम को डेवलप करने की दिशा में भी काम कर रही है। भारतीय सेना का मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग (एमयूएम-टी) पर है। इसी रणनीति के तहत सेना ने नई ‘बाज बटालियन’ बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक यह विशेष बटालियन भारतीय सेना की रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (आरपीए) क्षमता को मजबूत करेगी। इसमें हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (एचएएलई) और मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (एमएएलई) कैटेगरी के बड़े ड्रोन ऑपरेट किए जाएंगे। सेना का उद्देश्य निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, टारगेट की पहचान, लंबी दूरी तक लगातार नजर रखने और युद्ध के दौरान तेज प्रतिक्रिया देने की क्षमता को कई गुना बढ़ाना है।

Baaz Battalion Indian Army: आधुनिक युद्ध में पूरी तरह बदल चुकी है ड्रोन की भूमिका

सूत्रों का कहना है कि बाज बटालियन भारतीय सेना के डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन कार्यक्रम का हिस्सा है। इसी कार्यक्रम के तहत सेना रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, शक्तिबाण आर्टिलरी रेजिमेंट और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली पर भी काम कर रही है।

रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संघर्ष और हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ कर दिया कि आधुनिक युद्ध अब केवल टैंक, तोप और लड़ाकू विमानों से नहीं लड़े जाते। ड्रोन अब युद्ध के लगभग हर चरण का हिस्सा बन चुके हैं। वे दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने से लेकर सटीक हमला करने, गोला-बारूद पहुंचाने, ऑपरेशन के बाद नुकसान का आकलन करने और सैनिकों की सुरक्षा तक कई जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी हाल ही में स्पष्ट कर चुके हैं कि ड्रोन अब केवल सर्विलांस के लिए नहीं हैं, बल्कि उनका इस्तेमाल इंटेलिजेंस, टारगेट पहचान, प्रिसिजन स्ट्राइक, लॉजिस्टिक सपोर्ट, बैटल डैमेज असेसमेंट और सैनिकों की सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में किया जा रहा है। इसलिए सेना केवल ड्रोन की संख्या बढ़ाने के बजाय एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रही है जिसमें प्रशिक्षित मानव संसाधन, मेंटेनेंस, ऑपरेशनल प्रिंसिपल, एंटी-ड्रोन क्षमता और स्वदेशी निर्माण सभी एक साथ डेवलप हों।

क्या है बाज बटालियन?

रक्षा सूत्रों के अनुसार बाज बटालियन भारतीय सेना की पहली ऐसी विशेष ड्रोन यूनिट होगी, जिसका पूरा ध्यान केवल अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स पर रहेगा। अभी तक सेना में ड्रोन छोटे-छोटे डिटैचमेंट के रूप में इन्फैंट्री, आर्टिलरी और अन्य फॉर्मेशन के साथ जुड़े रहते थे। उनका मुख्य काम सीमित दूरी तक निगरानी करना और तोपखाने को लक्ष्य की जानकारी देना होता था।

अब बाज बटालियन इससे अलग होगी। इसमें केवल ड्रोन ऑपरेशन के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित अधिकारी और जवान होंगे। ये यूनिट बड़े ड्रोन, लंबी दूरी की निगरानी, इंटेलिजेंस सर्विलांस एंड रिकॉनिसेंस यानी आईएसआर मिशन, लॉइटरिंग म्यूनिशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सटीक हमलों जैसी जिम्मेदारियां संभालेंगी।

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रक्षा सूत्रों का कहना है कि इन बटालियनों का गठन मौजूदा रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट फ्लाइट्स के आधार पर किया जा रहा है। इससे पहले से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग भी होगा और नई विशेषज्ञ क्षमता भी विकसित होगी। (Baaz Battalion Indian Army)

आर्मी एविएशन कॉर्प्स के साथ करेगी काम

सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना की नई बाज बटालियन मुख्य रूप से आर्मी एविएशन कॉर्प्स के अधीन काम करेगी। यह यूनिट मौजूदा रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (आरपीए) फ्लाइट्स के आधार पर तैयार की जा रही है। अब तक अलग-अलग फॉर्मेशन में ऑपरेट होने वाले बड़े ड्रोन प्लेटफॉर्म को एक आर्गेनाइज्ड स्ट्रक्चर के तहत लाया जाएगा, जहां विशेष रूप से प्रशिक्षित अधिकारी और जवान इनके ऑपरेशन, मेंटेनेंस और मिशन मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभालेंगे।

सूत्रों का कहना है कि आर्मी एविएशन कॉर्प्स भारतीय सेना में हेलिकॉप्टर ऑपरेशन की प्रमुख ब्रांच है। वर्तमान में इसमें तीन प्रमुख आर्मी एविएशन ब्रिगेड हैं, जिनकी तैनाती लेह, मिसामारी और जोधपुर में है। इन ब्रिगेडों के अंतर्गत कई स्क्वाड्रन और फ्लाइट काम करते हैं। प्रत्येक स्क्वाड्रन में आमतौर पर दो फ्लाइट होती हैं, जबकि फ्लाइट सबसे छोटी ऑपरेशनल यूनिट मानी जाती है। इन्हीं स्ट्रक्चर के जरिए चीता, ध्रुव, रुद्र और प्रचंड जैसे हेलिकॉप्टरों का ऑपरेशन किया जाता है।

सूत्रों के अनुसार आर्मी एविएशन कॉर्प्स ने पिछले कुछ सालों में ड्रोन क्षमता का भी लगातार विस्तार किया है। साल 2021 में मिसामारी में बनी नई आर्मी एविएशन ब्रिगेड में हेलिकॉप्टरों के साथ हेरॉन कैटेगरी के अनमैन्ड एरियल व्हीकल भी शामिल किए गए थे।

सूत्रों के मुताबिक यह बटालियन आर्मी एविएशन कॉर्प्स में एक विशेष ड्रोन फॉर्मेशन के तौर पर काम करेगी। इसका फोकस मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) और हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) कैटेगरी के बड़े ड्रोन के ऑपरेशन पर रहेगा। इनमें वर्तमान और भविष्य में सेना के बेड़े में शामिल होने वाले एमक्यू-9बी, हेरॉन, अन्य एडवांस प्लेटफॉर्म तथा स्वदेशी विकसित बड़े अनमैन्ड एरियल सिस्टम भी शामिल हो सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना के पास इस समय 50 हजार से अधिक ड्रोन हैं, जबकि दो-तीन साल पहले यह संख्या केवल कुछ सौ ही थी। सेना का लक्ष्य अगले दो से तीन वर्षों में इस क्षमता को और बढ़ाना है।

ये ड्रोन न केवल लंबी दूरी तक निगरानी कर सकते हैं, बल्कि लगातार कई घंटों तक उड़ान भी भर सकते हैं। ये ड्रोन, इंटेलिजेंस, सर्विलांस एंड रिकॉनिसेंस (आईएसआर) मिशन के अलावा जरूरत पड़ने पर प्रिसिजन स्ट्राइक में भी मदद करेंगे।

होगी एक्सपर्ट बेस्ड फॉरमेशन

सूत्रों का कहना है कि बाज बटालियन में केवल ड्रोन ऑपरेटर ही नहीं होंगे, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञ, मेंटेनेंस स्टाफ, इंटेलिजेंस एनालिस्ट, मिशन प्लानर, डेटा प्रोसेसिंग एक्सपर्ट और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम ऑपरेट करने वाले प्रशिक्षित अधिकारी और जवान भी शामिल होंगे।

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हालांकि यह पारंपरिक इन्फैंट्री बटालियन की तरह बड़ी संख्या वाली यूनिट नहीं होगी, बल्कि एक अत्यधिक तकनीकी और विशेषज्ञ कैडर पर आधारित फॉरमेशन होगी, जहां संख्या से अधिक महत्व स्पेशल ट्रेनिंग और टेक्निकल प्रोफिशिएंसी को दिया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि हर मिशन से मिलने वाला वीडियो, तस्वीरें और सेंसर डेटा भी यहीं प्रोसेस किया जाएगा। इसके बाद यह जानकारी सीधे फील्ड कमांडरों तक पहुंचेगी ताकि वे वास्तविक समय में निर्णय ले सकें।

सूत्रों के अनुसार सेना एक से अधिक बाज बटालियन तैयार कर रही है और भविष्य में जरूरत के अनुसार इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। प्रत्येक बटालियन को अलग-अलग ऑपरेशनल थिएटर और सैन्य जरूरतों के मुताबिक ड्रोन और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

सूत्रों के मुताबिक बाज बटालियन का सीधा कॉर्डिनेशन फ्रंटलाइन इन्फैंट्री, आर्टिलरी और आर्मर्ड फॉर्मेशन के साथ भी रहेगा। ड्रोन से मिलने वाली रीयल-टाइम खुफिया जानकारी और टारगेट डेटा सीधे बैटलफील्ड में मौजूद कमांडरों तक पहुंचेगा, जिससे आर्टिलरी, मिसाइल यूनिट और अन्य मिलिट्री प्लेटफॉर्म तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे। इससे सेना की इंटेलिजेंस, सर्विलांस एंड रिकॉनिसेंस (आईएसआर) क्षमता और बैटलफील्ड की सिचुएशनल अवेयरनेस दोनों मजबूत होंगी।

क्या है एमयूएम-टी और क्यों बदल देगा युद्ध का तरीका?

सूत्रों का कहना है कि बाज बटालियन केवल ड्रोन उड़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य की मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग (एमयूएम-टी) कॉन्सैप्ट की भी महत्वपूर्ण कड़ी होगी। इसके तहत मानव चालित प्लेटफॉर्म, जैसे अपाचे एएच-64ई अटैक हेलिकॉप्टर, एएलएच ध्रुव, इन ड्रोनों के साथ मिलकर जॉइंट ऑपरेशन कर सकेंगे।

उदाहरण के तौर पर किसी ऑपरेशन के दौरान कोई अटैक हेलिकॉप्टर दुश्मन की सीमा के पास पहुंचता है। पहले उसे खुद आगे बढ़कर जानकारी जुटानी पड़ती थी। लेकिन एमयूएम-टी में हेलिकॉप्टर सुरक्षित दूरी पर रहेगा और अपने साथ जुड़े ड्रोन को आगे भेज देगा। ड्रोन दुश्मन की स्थिति, हथियारों की तैनाती और गतिविधियों की लाइव जानकारी भेजेगा। इसके बाद पायलट उसी आधार पर हमला करेगा या जरूरत पड़ने पर ड्रोन को ही टारगेट पर भेज सकता है।

इस तकनीक से सैनिकों और पायलटों का जोखिम काफी कम हो जाता है और ऑपरेशन की सफलता की संभावना बढ़ जाती है। (Baaz Battalion Indian Army)

भारतीय सेना क्यों दे रही है एमयूएम-टी पर इतना जोर?

रक्षा सूत्रों का कहना है कि भविष्य के युद्ध में सबसे महत्वपूर्ण चीज केवल हथियार नहीं, बल्कि इनफॉरमेशन होगी। जो सेना दुश्मन की गतिविधियों की सही जानकारी पहले हासिल कर लेगी, वही तेजी से फैसले ले सकेगी।

एमयूएम-टी इसी सोच पर आधारित है। इसमें ड्रोन लगातार निगरानी करते रहते हैं जबकि हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान या ग्राउंड फोर्स सुरक्षित रहते हुए कार्रवाई करते हैं। इससे सैनिकों की सुरक्षा बढ़ती है और ऑपरेशन की गति भी तेज होती है।

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भारतीय सेना पहले ही कई अभ्यासों में इस तकनीक का परीक्षण कर चुकी है। वर्ष 2025 में त्रिशक्ति कोर द्वारा आयोजित एक्सरसाइज सर्वशक्ति के दौरान भी इस कॉन्सैप्ट को परखा गया था। इसमें हेलिकॉप्टर, ड्रोन और जमीनी सैनिकों के बीच कॉर्डिनेशन का सफल प्रदर्शन किया गया था।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक बाज बटालियन सीधे आर्टिलरी और मिसाइल यूनिटों के साथ भी कॉर्डिनेशन करेगी।

यदि ड्रोन किसी दुश्मन के कमांड पोस्ट, बंकर, तोप या मिसाइल लॉन्चर की पहचान करता है तो उसकी लोकेशन तुरंत संबंधित आर्टिलरी यूनिट तक भेजी जा सकेगी। इससे टारगेट पर सटीक और तेज कार्रवाई संभव होगी। (Baaz Battalion Indian Army)

अश्नि प्लाटून और बाज बटालियन में क्या है अंतर?

सूत्रों का कहना है कि कई लोग अश्नि प्लाटून और बाज बटालियन को एक जैसा मान रहे हैं, जबकि दोनों की भूमिका पूरी तरह अलग है।

अश्नि पहल के तहत इन्फैंट्री बटालियनों को छोटे स्ट्रेटेजिक ड्रोन दिए गए हैं। इनका इस्तेमाल फ्रंटलाइन सैनिक अपने आसपास के कुछ किलोमीटर क्षेत्र की निगरानी के लिए करते हैं। इन्हें सैनिकों की “आसमान में आंखें” भी कहा जाता है।

वहीं बाज बटालियन एक स्वतंत्र और कहीं बड़ा मिलिटरी स्ट्रक्चर होगा। इसका ऑपरेशन अलग कमांड के तहत होगा और यह पूरे ऑपरेशनल थिएटर में लंबी दूरी के मिशन, रणनीतिक निगरानी, प्रिसिजन स्ट्राइक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और अन्य जटिल अभियानों को संभालेगी। (Baaz Battalion Indian Army)

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के साथ कॉर्डिनेशन

रक्षा सूत्रों का कहना है कि बाज बटालियन केवल ड्रोन नहीं उड़ाएगी बल्कि इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के साथ भी काम करेगी।

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का उद्देश्य दुश्मन के संचार नेटवर्क, रडार और डेटा लिंक की पहचान करना, जरूरत पड़ने पर उन्हें बाधित करना और अपने संचार नेटवर्क को सुरक्षित बनाए रखना होता है।

जब ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम एक साथ काम करेंगे तो दुश्मन की गतिविधियों की अधिक सटीक जानकारी मिल सकेगी। (Baaz Battalion Indian Army)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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