📍नई दिल्ली | 29 Jun, 2026, 10:21 PM
Achievements of General Upendra Dwivedi: प्रसिद्ध प्राचीन सैन्य रणनीतिकार, दार्शनिक और सेनापति सन त्जू ने आर्ट ऑफ वॉर में लिखा है, “पानी जिस तरह जमीन के अनुसार अपना आकार बदलता रहता है, उसी तरह युद्ध में भी कोई स्थायी स्थिति नहीं होती।” भारतीय सेना के प्रमुख जनरल द्विवेदी ने ठीक यही किया। उन्होंने समझा कि युद्ध का स्वरूप बदल चुका है, इसलिए उन्होंने सेना के आकार, संरचना और सोच को उसी के अनुसार बदल दिया।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी 30 जून को अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। उनके दो साल के कार्यकाल को सेना में सबसे तेज तकनीकी बदलावों के दौर के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि उन्हें “ड्रोन जनरल” या “ड्रोन चीफ ऑफ इंडिया” जैसे नामों से भी संबोधित किया जा रहा है। इसकी वजह केवल सेना में ड्रोन की संख्या बढ़ना नहीं है, बल्कि पूरी सैन्य सोच, संगठन, प्रशिक्षण और युद्ध लड़ने के तरीके में आया बड़ा बदलाव है।
जब जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 30 जून 2024 को सेना प्रमुख का पद संभाला था, तब भारतीय सेना के पास सीमित संख्या में ड्रोन थे। आज यह संख्या बढ़कर 50 हजार से अधिक हो चुकी है। लेकिन यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा। उनके कार्यकाल में सेना ने ड्रोन ऑपरेशन के लिए अलग यूनिट बनाईं, नई कॉम्बैट फॉरमेशंस तैयार कीं, नई सैन्य नीतियां लागू कीं और ड्रोन बेस्ड वॉरफेयर को रूटीन मिलिट्री ऑपरेशंस का हिस्सा बना दिया।
Achievements of General Upendra Dwivedi: “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” को दी रफ्तार
भारतीय सेना में चल रहे “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” यानी परिवर्तन के दशक की शुरुआत जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेना प्रमुख बनने से पहले हो चुकी थी। इसकी शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी, जब भारतीय सेना ने 2023 को “ईयर ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” और 2024 को “ईयर ऑफ टेक्नोलॉजी एब्जॉर्प्शन” के रूप में घोषित किया था।
जब जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना प्रमुख का पदभार संभाला तो उन्होंने इसे रफ्तार दी। उनके दो साल के कार्यकाल में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेटवर्क आधारित युद्ध, स्वदेशी हथियारों और नई कॉम्बैट फॉरमेशंस पर तेजी से काम हुआ। इसी दौरान अश्नी ड्रोन प्लाटून, बाज बटालियन, रुद्र ऑल आर्म्स ब्रिगेड, भैरव बटालियन और दिव्यास्त्र बैटरियों जैसी नई पहलें जमीन पर उतरनी शुरू हुईं। (Achievements of General Upendra Dwivedi)
पांच पिलर्स को दी मजबूती
जनरल द्विवेदी ने परिवर्तन के इस अभियान को पांच प्रमुख क्षेत्रों पर आगे बढ़ाया। इनमें तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, सेना की नई संरचना तैयार करना, आधुनिक तकनीक और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना, सैन्य प्रक्रियाओं में सुधार और मानव संसाधन को भविष्य के युद्ध के लिए तैयार करना शामिल था।
उनके कार्यकाल में लगभग 25 नए मिलिट्री डॉक्ट्रिन, पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स और ऑपरेशन संबंधी दिशानिर्देश भी जारी किए गए। वर्ष 2026-27 को “ईयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डेटा सेंट्रिसिटी” घोषित किया गया, ताकि सेना में डेटा-ड्रिवन डेसिजन-मेकिंग सिस्टम और आधुनिक नेटवर्किंग को और मजबूत किया जा सके। (Achievements of General Upendra Dwivedi)
“स्वदेशीकरण से सशक्तिकरण” तक
जनरल उपेंद्र द्विवेदी के कार्यकाल में भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की सबसे बड़ी पहचान उनकी स्पष्ट सोच और दीर्घकालिक विजन रहा। उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं जीते जाएंगे, बल्कि तकनीक, डेटा, नेटवर्किंग और स्वदेशी क्षमता निर्णायक भूमिका निभाएगी। इसी सोच के आधार पर उन्होंने “स्वदेशीकरण से सशक्तिकरण” को सेना के आधुनिकीकरण का प्रमुख मंत्र बनाया। उनका मानना था कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही भारतीय सेना को लंबे समय तक मजबूत और सक्षम बनाएगी। इसलिए उनके कार्यकाल में स्वदेशी हथियारों, ड्रोन, सेंसर, कम्युनिकेशन सिस्टम और नई सैन्य तकनीकों को तेजी से अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।
उन्होंने भारतीय सेना के लिए विजन-2047 भी सामने रखा। इस विजन का उद्देश्य सेना को एक ऐसी आधुनिक, चुस्त, तकनीक-सक्षम, आत्मनिर्भर और भविष्य के हर प्रकार के युद्ध के लिए तैयार सैन्य शक्ति में बदलना है, जो मल्टी डोमेन ऑपरेशंस जैसे जमीन, हवा, साइबर, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सभी क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से काम कर सके। इस विजन में अन्य सेनाओं के साथ बेहतर तालमेल और राष्ट्रीय हितों की रक्षा को भी प्राथमिकता दी गई।

फ्यूचर-रेडी फोर्स पर रहा फोकस
अपने लगभग हर महत्वपूर्ण संबोधन में जनरल द्विवेदी ने “फ्यूचर-रेडी फोर्स” यानी भविष्य के युद्ध के लिए तैयार सेना बनाने की बात दोहराई। उनका कहना था कि भारतीय सेना इस समय “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” यानी परिवर्तन के दशक के तहत खुद को पूरी तरह बदल रही है। इस परिवर्तन का उद्देश्य केवल नए हथियार खरीदना नहीं, बल्कि पूरी सैन्य संरचना, प्रशिक्षण, युद्ध सिद्धांत और ऑपरेशन के तरीके को आधुनिक बनाना है। (Achievements of General Upendra Dwivedi)
ऑपरेशन सिंदूर ने बदली सेना की सोच
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना के लिए केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि आधुनिक युद्ध की नई चुनौतियों को समझने और उनके अनुसार खुद को ढालने का महत्वपूर्ण अनुभव भी साबित हुआ। इस अभियान ने दिखाया कि भविष्य के युद्ध में केवल सैनिकों की संख्या या पारंपरिक हथियार पर्याप्त नहीं होंगे। अब ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल टाइम इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का समन्वित इस्तेमाल निर्णायक भूमिका निभाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण को नई गति दी। इस अभियान से मिले अनुभवों के आधार पर उनका पूरा फोकस ड्रोन युद्ध, काउंटर-ड्रोन क्षमता, रियल टाइम इंटेलिजेंस, सेंसर-टू-शूटर सिस्टम और नेटवर्क आधारित युद्ध पर रहा।
पिछले साल कारगिल विजय दिवस पर उन्होंने अश्नि ड्रोन प्लाटून, बाज बटालियन, दिव्यास्त्र बैटरियां और रूद्र ब्रिगेड बनाने का एलान किया। साथ ही स्वदेशी तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंट्रिक ऑपरेशन और मल्टी-डोमेन वॉरफेयर को सेना के आधुनिकीकरण का प्रमुख आधार बनाया गया। (Achievements of General Upendra Dwivedi)
“ईगल ऑन द आर्म” कॉन्सैप्ट
ड्रोन युद्ध को लेकर भी उन्होंने एक नया कॉन्सैप्ट सामने रखा, जिसे “ईगल ऑन द आर्म” के कॉन्सैप्ट के तौर पर जाना जाता है। इसका अर्थ है कि भविष्य में हर सैनिक के पास ऐसी ड्रोन क्षमता हो, जिससे वह खुद निगरानी कर सके, लक्ष्य की पहचान कर सके और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई भी कर सके। इसी सोच के तहत सेना में अश्नी ड्रोन प्लाटून, बाज बटालियन और अन्य ड्रोन आधारित संरचनाओं का विकास किया गया।
इसी के तहत हाल ही में भारतीय सेना में “बाज बटालियन” का गठन किया गया है। यह केवल ड्रोन उड़ाने वाली यूनिट नहीं होगी। इसे मौजूदा रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट फ्लाइट्स के आधार पर तैयार किया जा रहा है। इसमें ऐसे विशेषज्ञ सैनिक होंगे जिन्हें ड्रोन ऑपरेशन, मेंटेनेंस, रिपेयरिंग, मिशन प्लानिंग, डेटा एनालिसिस और पूरे ड्रोन नेटवर्क के ऑपरेशन की ट्रेनिंग दी जाएगी।
बाज बटालियन का उद्देश्य केवल ड्रोन उड़ाना नहीं बल्कि पूरे युद्धक्षेत्र में ड्रोन आधारित निगरानी और सूचना प्रणाली को लगातार सक्रिय रखना है। इससे कमांडरों को वास्तविक समय में जानकारी मिलेगी और निर्णय लेने की रफ्तार बढ़ेगी।
अश्नि ड्रोन प्लाटून ने बदली इन्फैंट्री की ताकत
ड्रोन क्रांति का दूसरा बड़ा कदम अश्नी ड्रोन प्लाटून हैं। अब लगभग हर इन्फैंट्री बटालियन में विशेष ड्रोन प्लाटून बनाई जा रही है। इनमें लगभग 20 से 25 प्रशिक्षित सैनिक होंगे जो निगरानी ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन दोनों को ऑपरेट करेंगे।
पहले ड्रोन केवल विशेष यूनिटों तक सीमित थे, लेकिन अब पैदल सेना की अग्रिम टुकड़ियां भी स्वयं टारगेट की पहचान कर सकेंगी और जरूरत पड़ने पर सटीक हमला भी कर सकेंगी।
इस बदलाव से बटालियन स्तर पर ही वास्तविक समय की निगरानी और त्वरित कार्रवाई की क्षमता विकसित हुई है। (Achievements of General Upendra Dwivedi)
दिव्यास्त्र बैटरियों से बदला आर्टिलरी की भूमिका
जनरल द्विवेदी के कार्यकाल में आर्टिलरी की भूमिका भी बदलनी शुरू हुई। अब केवल तोपों से गोले दागना ही उद्देश्य नहीं है। आर्टिलरी रेजीमेंट में दिव्यास्त्र बैटरियां बनाई जा रही हैं, जिनमें पारंपरिक तोपों के साथ ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन को जोड़ा जा रहा है।
इस व्यवस्था में सबसे पहले ड्रोन लक्ष्य की पहचान करता है। इसके बाद वही जानकारी सीधे फायर कंट्रोल सिस्टम तक पहुंचती है और कुछ ही समय में तोप से सटीक हमला किया जाता है। सेना इसे “सेंसर टू शूटर” सिस्टम कहती है। इससे टारगेट खोजने और हमला करने के बीच लगने वाला समय काफी कम हो जाता है।
रुद्र ब्रिगेड और भैरव बटालियन से बदला मिलिट्री स्ट्रक्चर
ड्रोन के साथ-साथ जनरल द्विवेदी ने सेना की कई कॉम्बैट फॉर्मेशंस में भी बदलाव शुरू किए। रुद्र ऑल आर्म्स ब्रिगेड ऐसी नई फॉरमेशन है, जिसमें इन्फैंट्री, ऑर्मर्ड व्हीकल, आर्टिलरी, सेना की एविएशन युनिट्स और ड्रोन क्षमता को एक साथ जोड़ा गया है।
इसी तरह भैरव बटालियन हल्की और तेज कार्रवाई करने वाली युनिट के तौर पर तैयार की जा रही है। इनका उद्देश्य कम समय में तेज ऑपरेशन करना और आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुसार काम करना है। (Achievements of General Upendra Dwivedi)
केवल ड्रोन नहीं, काउंटर ड्रोन पर भी पूरा जोर
जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि विरोधी के पास कितने ड्रोन हैं, बल्कि यह है कि भारतीय सेना उन्हें पहचान सके, उनका पीछा कर सके, उन्हें निष्क्रिय कर सके और पूरे ड्रोन युद्धक्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रख सके।
इसी सोच के तहत सेना में काउंटर ड्रोन तकनीक पर भी तेजी से काम किया गया है। इसमें रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक जैमर, हार्ड किल सिस्टम और भौतिक सुरक्षा उपायों को एक साथ विकसित किया जा रहा है।
इसके अलावाा सेना ने देशभर में 25 से अधिक ड्रोन और काउंटर ड्रोन हब स्थापित किए हैं। इनका उद्देश्य प्रशिक्षण, रखरखाव, मरम्मत, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और ऑपरेशन के दौरान तकनीकी मदद देना है।
इन केंद्रों में सैनिकों को अलग-अलग प्रकार के ड्रोन उड़ाने, डेटा पढ़ने और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौरान काम करने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

सेना की सोच हुई डेटा आधारित
जनरल द्विवेदी के कार्यकाल में केवल हथियार ही नहीं बदले बल्कि निर्णय लेने का तरीका भी बदला। सेना ने “नेटवर्किंग एंड डेटा सेंट्रिसिटी” को प्राथमिकता दी। इसका उद्देश्य अलग-अलग प्लेटफॉर्म से मिलने वाली जानकारी को एक नेटवर्क में जोड़ना है ताकि कमांडरों को तुरंत पूरी स्थिति दिखाई दे सके।
इसमें ड्रोन, सेंसर, रडार, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और कम्युनिकेशन से मिलने वाले डेटा को एक साथ इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया। (Achievements of General Upendra Dwivedi)
JAI पर फोकस
जनरल द्विवेदी की पूरी रणनीति सरकार के जेएआई (जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन) विजन के अनुरूप रही। उनके नेतृत्व में सेना ने जॉइंट मिलिट्री ऑपरेशन, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और नई तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया। यही कारण है कि उनके कार्यकाल को केवल नए हथियारों के शामिल होने का दौर नहीं, बल्कि भारतीय सेना की सोच, संरचना और युद्ध क्षमता में व्यापक बदलाव के दौर के रूप में देखा जा रहा है। (Achievements of General Upendra Dwivedi)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।



