📍नई दिल्ली | 6 Jun, 2026, 7:40 PM
Indian Army Strategic Guidelines 2047: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एक ऐसा डॉक्यूमेंट जारी किया है, जिसे आने वाले दो दशकों के लिए सेना का रणनीतिक रोडमैप माना जा रहा है। इसका नाम है “इंडियन आर्मी स्ट्रैटेजिक गाइडलाइंस 2047″। इस डॉक्यूमेंट सैन्य सुधारों के साथ इस बात का भी जिक्र है कि 2047 तक भारतीय सेना किस तरह की सेना बनना चाहती है और बदलती दुनिया में अपनी भूमिका को कैसे देख रही है।
सूत्रों के मुताबिक यह डॉक्यूमेंट “डिफेंस फोर्सेज विजन 2047” के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य सेना को ऐसी ताकत में बदलना है जो भविष्य के युद्धों, नई तकनीकों और बदलते सुरक्षा माहौल का सामना करने में सक्षम हो।
Indian Army Strategic Guidelines 2047: क्यों पड़ी नए रणनीतिक डॉक्यूमेंट की जरूरत?
एडीजीपीआई के एक्स हेंडल पर जारी ट्वीट में कहा गया है, “भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने “इंडियन आर्मी स्ट्रैटेजिक गाइडलाइंस 2047” का अनावरण किया है। यह महत्वपूर्ण दस्तावेज “डिफेंस फोर्सेज विजन 2047” के स्ट्रक्चर पर आधारित है और भारतीय सेना को भविष्य के लिए तैयार फोर्स में बदलने की दिशा तय करता है।
यह दस्तावेज रणनीतिक सोच को स्पष्ट और क्रियान्वित किए जा सकने वाले प्रयासों में बदलता है, ताकि भारतीय सेना की क्षमताएं, संरचना और कार्रवाईयां “विकसित भारत 2047″ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप आगे बढ़ सकें।”
पिछले कुछ सालों में तेजी से दुनिया के हालात बदले हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संघर्ष, ड्रोन बेस्ड अटैक, साइबर अटैक और स्पेस बेस्ड सर्विलांस ने युद्ध का स्वरूप बदल दिया है।
आज किसी भी देश की सेना केवल टैंक, तोप और लड़ाकू विमानों के भरोसे नहीं रह सकती। मल्टी डोमेन ऑपरेशंस जैसे डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और अंतरिक्ष तकनीक भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो चुकी हैं।
भारतीय सेना का मानना है कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है। इसी सोच के तहत यह नया रोडमैप तैयार किया गया है।
डिफेंस फोर्सेज विजन 2047 का आर्मी स्पेशल एडिशन
मार्च 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिफेंस फोर्सेज विजन 2047 जारी किया था। उस डॉक्यूमेंट में तीनों सेनाओं के लिए व्यापक दिशा तय की गई थी।
इंडियन आर्मी स्ट्रैटेजिक गाइडलाइंस 2047 उसी विजन का आर्मी स्पेशल एडिशन है। यह नया डॉक्यूमेंट बताता है कि भारतीय सेना उस लक्ष्य तक कैसे पहुंचेगी।
इसमें क्षमता निर्माण, आधुनिकीकरण, संगठनात्मक बदलाव, तकनीकी विकास और युद्ध तैयारी जैसे विषयों को विस्तार से शामिल किया गया है।
Indian Army Strategic Guidelines 2047#GeneralUpendraDwivedi, #COAS unveils the #IndianArmy Strategic Guidelines 2047, drawn from the framework of Defence Forces Vision 2047. The seminal document translates strategic intent into coherent, actionable Lines of Effort for… pic.twitter.com/vp4cpkgodG
— ADG PI – INDIAN ARMY (@adgpi) June 5, 2026
तीन चरणों में बदलेगी सेना
डॉक्यूमेंट के मुताबिक भारतीय सेना का परिवर्तन एक दिन में नहीं होगा। इसके लिए तीन बड़े चरण तय किए गए हैं।
पहला चरण 2032 तक चलेगा। इसे ट्रांसफॉर्मेशन का दशक कहा गया है। इस दौरान सेना के स्ट्रक्चर, हथियारों, तकनीक और ऑपरेटिंग सिस्टम में बड़े बदलाव किए जाएंगे।
दूसरा चरण 2037 तक का होगा। इसमें पहले चरण में किए गए सुधारों को मजबूत किया जाएगा और संयुक्त सैन्य क्षमता को और बेहतर बनाया जाएगा।
तीसरा चरण 2047 तक चलेगा। इसमें भारतीय सेना को पूरी तरह भविष्य के युद्धों के लिए तैयार बल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या है मल्टी डोमेन ऑपरेशन?
इस डॉक्यूमेंट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मल्टी डोमेन ऑपरेशन की अवधारणा है।
पहले युद्ध मुख्य रूप से जमीन, समुद्र और हवा में लड़े जाते थे। अब साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, सूचना युद्ध और इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रम भी युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं।
मल्टी डोमेन ऑपरेशन का मतलब है कि सेना एक साथ कई क्षेत्रों में काम करेगी और सभी क्षेत्रों से मिलने वाली जानकारी का उपयोग करेगी।
उदाहरण के लिए यदि सीमा पर कोई गतिविधि होती है तो उपग्रह, ड्रोन, रडार, साइबर नेटवर्क और जमीनी सैनिक एक साथ काम करेंगे। इससे फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।
2026 को क्यों बनाया गया डेटा सेंट्रिसिटी का वर्ष?
भारतीय सेना ने 2026 को “ईयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डेटा सेंट्रिसिटी” घोषित किया है। इसका मतलब है कि सेना अब डेटा बेस्ड डिसिजन सिस्टम की ओर बढ़ रही है। भविष्य के युद्ध में जानकारी सबसे बड़ा हथियार मानी जा रही है। जिस सेना के पास अधिक और सटीक जानकारी होगी, उसे बढ़त मिलेगी। सेना का लक्ष्य है कि विभिन्न वेपन सिस्टम्स, कमांड सेंटर, निगरानी उपकरण और सैनिक एक साझा डिजिटल नेटवर्क से जुड़े रहें।
इस रणनीतिक डॉक्यूमेंट में कई नई तकनीकों का उल्लेख किया गया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, क्वांटम टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन, ड्रोन, स्वार्म ड्रोन, साइबर वॉरफेयर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि आने वाले सालों में तकनीक आधारित युद्ध का महत्व लगातार बढ़ेगा। इसलिए सेना केवल हथियार खरीदने पर नहीं बल्कि तकनीक विकसित करने पर भी ध्यान दे रही है।
सेना के स्ट्रक्चर में भी होंगे बदलाव
डॉक्यूमेंट में संगठनात्मक परिवर्तन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए जॉइंट स्ट्रक्चर डेवलप किया जाएगा।
थिएटर कमांड का कॉन्सैप्ट भी इसी हिस्सा है। जिसका उद्देश्य अलग-अलग सेनाओं की क्षमताओं को एक साथ उपयोग करना है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और युद्ध के समय फैसले लेने की प्रक्रिया तेज होगी।
इसके अलावा भारतीय सेना अपने कई पुराने प्लेटफॉर्म को बदलने की प्रक्रिया में पहले से ही लगी हुई है। नए डॉक्यूमेंट में मैकेनाइज्ड फोर्सेज, आर्टिलरी, कॉम्बैट एविएशन, एयर डिफेंस और इन्फैंट्री के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया है।
सेना का उद्देश्य ऐसे वेपंस और सिस्टम्स हासिल करना है जो भविष्य के युद्धों में भी प्रभावी साबित हों। इस डॉक्यूमेंट में आत्मनिर्भरता को भी प्रमुख स्थान दिया गया है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। स्वदेशी तोपें, मिसाइलें, ड्रोन, रडार और संचार प्रणालियां विकसित की गई हैं।
सेना चाहती है कि भविष्य में विदेशी हथियारों पर निर्भरता और कम हो। इसी कारण भारतीय उद्योग, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और रक्षा कंपनियों को सेना की जरूरतों से जोड़ा जा रहा है।
सैनिकों के स्किल्स डेवलपमेंट पर भी फोकस
रणनीतिक दिशानिर्देश केवल हथियारों और तकनीक तक सीमित नहीं हैं। डॉक्यूमेंट में मानव संसाधन विकास को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है। भविष्य के सैनिक को केवल शारीरिक रूप से मजबूत होना ही पर्याप्त नहीं होगा। उसे तकनीक, डेटा और आधुनिक प्रणालियों को समझने की क्षमता भी होनी चाहिए।
इसी कारण प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कौशल विकास योजनाओं और करियर प्रबंधन प्रणाली को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।
पूरे राष्ट्र को जोड़ने की सोच
इस डॉक्यूमेंट में “होल ऑफ नेशन अप्रोच” की अवधारणा भी शामिल की गई है। इसका अर्थ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें सरकार, उद्योग, शिक्षा संस्थान, तकनीकी क्षेत्र और नागरिक समाज की भी भूमिका होती है।
गतिशक्ति जैसी राष्ट्रीय परियोजनाओं, दोहरे उपयोग वाले बुनियादी ढांचे, पूर्व सैनिक कल्याण और रक्षा कूटनीति को भी इस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माना गया है।
विकसित भारत 2047 से क्या है संबंध?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। भारतीय सेना का मानना है कि आर्थिक विकास, निवेश, उद्योग और सामाजिक प्रगति तभी संभव है जब देश सुरक्षित हो।
इसी वजह से यह रणनीतिक डॉक्यूमेंट विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के साथ सीधे जुड़ा हुआ है।
सेना के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। इसी सोच के तहत 2047 तक की पूरी योजना तैयार की गई है।



