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ऑपरेशन सिंदूर में दिखी ‘न्यू एज वॉरफेयर’ की झलक, भारत तैयार कर रहा मल्टी डोमेन वॉर सिस्टम

लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने बताया कि आईएसीसीएस और आकाशतीर जैसे सिस्टम को एक साथ जोड़कर इस्तेमाल किया गया। इससे पूरे एयर स्पेस की एक संयुक्त तस्वीर तैयार हुई और खतरे की पहचान तेजी से हो सकी...

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📍जयपुर | 7 May, 2026, 3:57 PM

Operation Sindoor New Warfare Model: ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस ऑपरेशन आधुनिक युद्ध का नया मॉडल बताया। इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए मिनवाला ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि इसमें साइबर स्पेस, सूचना युद्ध और मल्टी डोमेन ऑपरेशन का भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया।

उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने दिखाया कि अब भारत की सेनाएं सिर्फ पारंपरिक युद्ध नहीं लड़ रहीं, बल्कि नई तकनीक और अलग-अलग डोमेन्स को जोड़कर तेज और सटीक कार्रवाई करने में सक्षम हैं।

जयपुर में आयोजित विशेष प्रेस ब्रीफिंग के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीनों सेनाओं के तालमेल, इंटेलिजेंस नेटवर्क, एयर डिफेंस सिस्टम, साइबर क्षमताओं और सूचना युद्ध की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।

Operation Sindoor New Warfare Model: ऑपरेशन सिंदूर में दिखा नया वॉर मॉडल

लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन मिनवाला ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच ऐसा तालमेल देखने को मिला, जो पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत था। उन्होंने बताया कि पूरे ऑपरेशन को चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के निर्देशों के तहत हेडक्वार्टर आईडीएस के ऑपरेशन डायरेक्टरेट ने ऑपरेट किया।

उन्होंने कहा, “ऑपरेशन के दौरान सिर्फ पारंपरिक सैन्य क्षेत्र ही नहीं, बल्कि साइबर स्पेस और सूचना क्षेत्र को भी साथ लेकर काम किया गया। यह हमारी युद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव दिखाता है।”

उनके मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि भारत अब मल्टी डोमेन ऑपरेशन को तेजी से, सटीकता और स्पष्ट उद्देश्य के साथ अंजाम दे सकता है।

सिर्फ पाकिस्तान पर हमला नहीं था यह ऑपरेशन

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को किसी एक घटना की प्रतिक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे कई सालों की तैयारी, सैन्य सुधार और अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय शामिल था।

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लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने कहा कि इस अभियान की सफलता अचानक नहीं मिली, बल्कि इसके लिए लंबे समय से मिलिट्री स्ट्रक्चर, प्रक्रियाओं और क्षमता निर्माण पर काम किया जा रहा था। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर कोई अकेली सफलता नहीं थी। यह संस्थागत मजबूती का परिणाम था।”

सीडीएस और रक्षा सुधारों की अहम भूमिका

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस का पद बनाए जाने और रक्षा सुधारों पर लगातार काम करने से तीनों सेनाओं के बीच तालमेल मजबूत हुआ। रक्षा मंत्री द्वारा 2025 को “रिफॉर्म्स का वर्ष” घोषित किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे जॉइंटनेस और इंटीग्रेशन को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

उन्होंने कहा कि स्ट्रक्चर्स, प्रोसेसेस, एंड आर्गेनाइजेशंस को एक-दूसरे से जोड़ने का असर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान साफ दिखाई दिया।

इंटेलिजेंस और कम्युनिकेशन नेटवर्क ने निभाई बड़ी भूमिका

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अलग-अलग एजेंसियों से मिलने वाली जानकारी को एक साथ जोड़कर इस्तेमाल किया गया। लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने बताया कि मजबूत जॉइंट कम्युनिकेशन सिस्टम की वजह से हर स्तर पर बेहतर स्थिति की जानकारी मिलती रही।

उन्होंने कहा कि सेना, खुफिया एजेंसियों और निगरानी प्रणालियों से मिलने वाले इनपुट को तेजी से साझा किया गया, जिससे फैसले लेने की प्रक्रिया काफी तेज हो गई।

उनके मुताबिक, अब इस पूरे नेटवर्क को और मजबूत किया जा रहा है और इसे एक फुली फंक्शनल जॉइंट ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर में बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में टारगेट तय करने और ऑपरेशन के दौरान फैसले लेने की क्षमता और बेहतर होगी।

एयर डिफेंस सिस्टम ने संभाला मोर्चा

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन और दूसरे हवाई खतरों का इस्तेमाल किया गया था। इस पर बोलते हुए लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने कहा कि भारतीय एयर डिफेंस नेटवर्क ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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उन्होंने बताया कि आईएसीसीएस और आकाशतीर जैसे सिस्टम को एक साथ जोड़कर इस्तेमाल किया गया। इससे पूरे एयर स्पेस की एक संयुक्त तस्वीर तैयार हुई और खतरे की पहचान तेजी से हो सकी।

उन्होंने कहा कि अब इन नेटवर्क्स को और मजबूत बनाया जा रहा है ताकि ड्रोन, मिसाइल और दूसरे हवाई खतरों से एक साथ निपटा जा सके।

ड्रोन और नई तकनीकों पर बढ़ा फोकस

लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने कहा कि हाल के संघर्षों ने यह साफ कर दिया है कि अब युद्ध में अनमैन्ड और ऑटोनॉमस सिस्टम की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय सेनाएं अब लंबी दूरी तक मार करने वाली सटीक हथियार प्रणालियों और मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग पर काम कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय और सिविल एविएशन मंत्रालय के साथ मिलकर एक नेशनल काउंटर यूएएस पॉलिसी तैयार की जा रही है। इसका मकसद ड्रोन खतरों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत ढांचा तैयार करना है।

स्पेस और डेटा आधारित युद्ध की तैयारी

लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने कहा कि भारतीय सेनाएं अब नेटवर्क सेंट्रिक सिस्टम से आगे बढ़कर डेटा सेंट्रिक आर्किटेक्चर की तरफ जा रही हैं। उन्होंने बताया कि स्पेस डोमेन में भी तेजी से काम हो रहा है। इसरो और डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के साथ समन्वय बढ़ाया गया है ताकि रियल टाइम निगरानी और टारगेटिंग क्षमता मजबूत हो सके।

उनके मुताबिक, मल्टी सेंसर इनपुट और डेटा आधारित फैसलों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

फेक न्यूज से लड़ने के लिए बनेगा नया डिवीजन

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सोशल मीडिया और सूचना युद्ध भी बड़ा मुद्दा बना रहा। इसे लेकर लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि अब रक्षा क्षेत्र में एक नया “डिफेंस स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन डिवीजन” बनाया जा रहा है। यह डिवीजन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स का इस्तेमाल करेगा।

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उन्होंने कहा कि इसका मकसद गलत जानकारी, दुष्प्रचार और फेक नैरेटिव को रियल टाइम में जवाब देना होगा।

उनके मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सूचना और संज्ञानात्मक क्षेत्र में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ मिलकर काम किया गया था। इससे सरकार और सेना का पक्ष प्रभावी तरीके से सामने रखा जा सका।

तीनों सेनाओं के बीच बढ़ा तालमेल

लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने कहा कि पिछले एक साल में कई ट्राई सर्विस एक्सरसाइज, वॉर गेमिंग और सिमुलेशन किए गए, जिससे मल्टी डोमेन ऑपरेशन की अवधारणा को मजबूत किया गया। उन्होंने बताया कि सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच लॉजिस्टिक सपोर्ट और मेंटेनेंस प्रोटोकॉल को भी जोड़ा गया है। इससे ऑपरेशनल तैयारी और क्षमता में सुधार हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय तटरक्षक बल, बीएसएफ, खुफिया एजेंसियों, डीआरडीओ, एनटीआरओ और निजी इंडस्ट्री के साथ भी समन्वय बढ़ा है। उनके मुताबिक, पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट कंपनियां और स्टार्टअप्स भी अब रक्षा तैयारियों का हिस्सा बन रहे हैं।

उन्होंने कहा, “आज हमारे पास ऐसा सिस्टम है जिसमें सेनाएं, मंत्रालय और सरकारी एजेंसियां एक साथ काम कर रही हैं। यही पूरे राष्ट्र की संयुक्त शक्ति का उदाहरण है।”

Operation Sindoor Showed India’s New-Age Warfare Model with Cyber, AI and Multi-Domain Operations: Lt Gen Zubin Minwalla

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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