📍जयपुर | 7 May, 2026, 1:59 PM
Operation Sindoor Anniversary: ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर जयपुर में आयोजित विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय सेना के पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस यानी डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने इसे भारत की रणनीतिक यात्रा का “निर्णायक मोड़” बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और सोच में बड़ा बदलाव था।
7 मई 2025 को शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर को भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में अंजाम दिया था। उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारतीय सेना, वायुसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी।
ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व डीजीएमओ राजीव घई ने उस पूरे ऑपरेशन से जुड़ी कई अहम बातें साझा कीं।
Operation Sindoor Anniversary: “यह सिर्फ ऑपरेशन नहीं, रणनीतिक बदलाव था”
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की पुरानी रणनीति से आगे बढ़कर नई दिशा दिखाई।
उन्होंने कहा, “आज से ठीक एक साल पहले ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया गया था। उस समय मैं डीजीएमओ के पद पर था। पीछे मुड़कर देखता हूं तो यह सिर्फ सैन्य ऑपरेशन नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक यात्रा का एक निर्णायक क्षण था।”
उन्होंने कहा कि भारत ने इस कार्रवाई के दौरान बहुत सोच-समझकर नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार जाकर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।
राजीव घई के मुताबिक, यह संदेश साफ था कि भारत अब सिर्फ रक्षात्मक रवैया नहीं अपनाएगा, बल्कि आतंकवाद के स्रोत तक पहुंचकर कार्रवाई करेगा।
पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके की बैसरन घाटी में आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला किया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी जबकि कई लोग घायल हुए थे।
इस घटना के बाद पूरे देश में गुस्सा था। केंद्र सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों और सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं।
इसके बाद 7 मई 2025 की रात ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया। भारतीय सेना और वायुसेना ने मिलकर पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी लॉन्च पैड्स, ट्रेनिंग सेंटर और ठिकानों पर हमला किया।
नौ बड़े आतंकी ठिकाने बनाए गए थे निशाना
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कुल नौ बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े कैंप शामिल थे।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे।
सैन्य सूत्रों के मुताबिक, ऑपरेशन बेहद कम समय में पूरा किया गया था, लेकिन इसकी तैयारी कई दिनों से चल रही थी।
#Operationsindoor press conference begins by paying homage to victims of Pahalgam terror attack. “It was a statement of resolve” #operationsindoor pic.twitter.com/2Fs902t9cd
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) May 7, 2026
“ऑपरेशन सिंदूर अंत नहीं, शुरुआत थी”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को किसी एक घटना की प्रतिक्रिया भर समझना गलत होगा।
उन्होंने मशहूर पंक्तियों का जिक्र करते हुए कहा, “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं। मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अंत नहीं था। यह सिर्फ शुरुआत थी। आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी रहेगी।”
सरकार ने सेना को दी थी पूरी छूट
राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान सरकार ने सेना को स्पष्ट राजनीतिक और सैन्य उद्देश्य दिए थे। उन्होंने बताया कि सेना को ऑपरेशन की योजना बनाने और उसे अंजाम देने की पूरी ऑपरेशनल स्वतंत्रता दी गई थी।
उन्होंने कहा, “सरकार ने हमें साफ निर्देश दिए थे। लक्ष्य स्पष्ट था- आतंकी ढांचे को खत्म करना, उनकी योजना बनाने की क्षमता को कमजोर करना और भविष्य में होने वाले हमलों को रोकना।” उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान सटीकता, संतुलन और जिम्मेदारी का पूरा ध्यान रखा गया।
पाकिस्तान ने किया जवाबी हमला
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की ओर से भी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। पाकिस्तान ने ड्रोन हमले और सीमा पर गोलाबारी शुरू की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच करीब चार दिन तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के कई रडार सिस्टम और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, लाहौर और गुजरांवाला के पास मौजूद रडार सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा था।
चार दिन तक चला था तनाव
7 मई से शुरू हुआ सैन्य तनाव 10 मई तक जारी रहा। इस दौरान सीमा पर लगातार निगरानी, एयर डिफेंस एक्टिविटी और सैन्य तैयारियां बढ़ा दी गई थीं।
भारतीय वायुसेना और सेना दोनों हाई अलर्ट पर थीं। कई इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किए गए थे।
स्थिति उस समय बदली जब पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क किया। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद 10 मई को संघर्ष विराम पर सहमति बनी।
ऑपरेशन ने जॉइंटनेस की जरूरत भी दिखाई
उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने सेना, वायुसेना और अन्य एजेंसियों के बीच तालमेल की अहमियत को और स्पष्ट किया। इसी कारण अब भारतीय सेनाएं जॉइंट ऑपरेशंस, डेटा शेयरिंग और थिएटर कमांड जैसे सिस्टम्स पर तेजी से काम कर रहे हैं।
जयपुर कार्यक्रम में भी कई अधिकारियों ने मल्टी-डोमेन वॉरफेयर, एयर डिफेंस इंटीग्रेशन और रियल टाइम ऑपरेशन को लेकर चर्चा की।
“भारत जिम्मेदारी के साथ जवाब देता है”
राजीव घई ने अपने संबोधन में कहा कि भारत हमेशा जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई करता है। उन्होंने कहा, “भारत अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और अपने नागरिकों की रक्षा पूरी दृढ़ता, पेशेवर तरीके और जिम्मेदारी के साथ करेगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य सिर्फ सैन्य जवाब देना नहीं था, बल्कि यह दिखाना भी था कि भारत आतंकवाद को लेकर अपनी नीति पर पूरी तरह स्पष्ट है।
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