📍नई दिल्ली | 7 May, 2026, 1:52 AM
Operation Sindoor Indian Navy Submarines: पहलगाम हमले के जवाब में पिछले साल 6-7 मई की रात को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने समुद्र में ऐसा दबाव बनाया था कि पाकिस्तान की नौसेना अपने ही बंदरगाहों तक सीमित होकर रह गई। इस पूरे अभियान में सबसे बड़ी भूमिका भारतीय सबमरीनों की रही, जो चुपचाप पाकिस्तानी समुद्री इलाके के बेहद करीब पहुंच गई थीं। हालात ऐसी थी कि अगर नौसेना को हमला करने का आदेश मिलता, तो पहली मिसाइल या टॉरपीडो दागने के लिए भारतीय सबमरीनें पूरी तरह तैयार थीं।
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर अब इस अभियान से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं। सेना और वायु सेना की कार्रवाई के बीच भारतीय नौसेना ने अरब सागर में ऐसी तैनाती की थी, जिसने पाकिस्तान पर लगातार मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दबाव बनाए रखा।
Operation Sindoor Indian Navy Submarines: पहलगाम हमले के बाद शुरू हुई तैयारी
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें कई निर्दोष पर्यटकों की जान गई थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ तीनों सेनाओं को सक्रिय कर दिया।
जहां वायु सेना और थल सेना ने सीधे जवाबी कार्रवाई की तैयारी शुरू की, वहीं भारतीय नौसेना ने समुद्र में अपनी सबसे ताकतवर तैनाती शुरू कर दी।
आईएनएस विक्रांत को आगे बढ़ाया गया
भारतीय नौसेना ने अपने सबसे बड़े युद्धपोत आईएनएस विक्रांत को फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट पर भेजा। इसके साथ पूरा कैरियर बैटल ग्रुप भी अरब सागर में सक्रिय किया गया।
इस ग्रुप में कई युद्धपोत, डेस्ट्रॉयर, स्टील्थ फ्रिगेट, फास्ट अटैक क्राफ्ट और सबमरीन शामिल थीं। कुल मिलाकर उत्तरी अरब सागर में 36 से ज्यादा भारतीय युद्धपोत तैनात कर दिए गए थे।
पाकिस्तानी जलक्षेत्र के करीब पहुंचीं सबमरीनें
ऑपरेशन के दौरान भारतीय नौसेना की कलवरी क्लास सबमरीनें बेहद अहम भूमिका में थीं। ये सबमरीनें पाकिस्तानी समुद्री इलाके के करीब तक पहुंचकर लगातार निगरानी कर रही थीं।
सबसे खास बात यह रही कि पाकिस्तान की नौसेना अपने एंटी-सबमरीन सिस्टम और लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमानों के बावजूद भारतीय सबमरीनों का पता नहीं लगा सकी।
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सबमरीनें इतनी रणनीतिक जगहों पर तैनात थीं कि आदेश मिलते ही कराची पोर्ट, ग्वादर और पाकिस्तानी युद्धपोत सीधे निशाने पर आ सकते थे।
A symbol of national resolve — #OpSindoor 🇮🇳🫡
As the nation marks the first anniversary of #OperationSindoor, the commitment to safeguarding India’s sovereignty, unity, and integrity remains unwavering.
Operation Sindoor
Justice served.
Precise in action, eternal in memory —… pic.twitter.com/EgJijltqjN— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) May 6, 2026
“हम हर समय स्ट्राइक के लिए तैयार थे”
ऑपरेशन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, “हम दुश्मन के इलाके के बेहद करीब थे। हमारी स्थिति ऐसी थी कि आदेश मिलते ही कार्रवाई शुरू हो सकती थी। लेकिन हमारी सबसे बड़ी ताकत यह थी कि दुश्मन को हमारी मौजूदगी का पता ही नहीं चला।”
भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन के दौरान अपनी सबमरीनों को बेहद शांत मोड में चलाया, ताकि वे दुश्मन के सोनार सिस्टम से बच सकें।
चार सबमरीन कमांडरों को मिला सम्मान
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान साहस और रणनीतिक क्षमता दिखाने वाले चार सबमरीन कमांडरों को नौसेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया गया।
इन अधिकारियों ने लंबे समय तक उच्च जोखिम वाले इलाके में रहकर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखी और अपने मिशन को पूरा किया।
हार्बर तक सीमित रही पाकिस्तानी नौसेना
भारतीय नौसेना की इस तैनाती का असर पाकिस्तान की नौसेना पर साफ दिखाई दिया। पाकिस्तान के कई युद्धपोत खुले समुद्र में आने की बजाय कराची और ग्वादर बंदरगाहों के आसपास ही सीमित रहे।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारतीय नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अपने मेरिटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट “सी ईगल” को भेजा था, लेकिन भारतीय नौसेना ने तुरंत प्रतिक्रिया दी।
मिग-29के ने रोका पाकिस्तानी विमान
जैसे ही पाकिस्तानी विमान भारतीय रडार पर दिखाई दिया, आईएनएस विक्रांत से मिग-29के लड़ाकू विमान उड़ाए गए।
भारतीय फाइटर जेट्स ने पाकिस्तानी विमान को इंटरसेप्ट किया और चेतावनी दी। इसके बाद वह विमान वापस कराची की दिशा में लौट गया।
समुद्र में पूरी तरह नेटवर्क आधारित ऑपरेशन
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना का पूरा बेड़ा नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर सिस्टम से जुड़ा हुआ था। यानी युद्धपोत, सबमरीन, हेलिकॉप्टर और फाइटर जेट लगातार एक-दूसरे से जानकारी साझा कर रहे थे।
इससे किसी भी खतरे पर तुरंत प्रतिक्रिया देना आसान हो गया था।
पी-8आई विमान भी थे सक्रिय
भारतीय नौसेना के पी-8आई पोसीडॉन समुद्री निगरानी विमान भी लगातार अरब सागर में गश्त कर रहे थे। इन विमानों की मदद से दुश्मन की गतिविधियों पर लंबी दूरी से नजर रखी जा रही थी।
इनकी वजह से पाकिस्तान की समुद्री गतिविधियों को लगातार ट्रैक किया जा रहा था।
आईएनएस विक्रांत सिर्फ एक विमानवाहक पोत नहीं, बल्कि पूरा चलता-फिरता युद्ध प्लेटफॉर्म माना जाता है।
इस पर मिग-29के फाइटर जेट, एमएच-60 रोमियो हेलिकॉप्टर, चेतक और सीकिंग हेलिकॉप्टर तैनात थे। इसके अलावा बराक-8 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम भी मौजूद था।
अगर समुद्र से हमला शुरू होता, तो विक्रांत की भूमिका सबसे आगे रहती।
सबमरीनें क्यों थीं सबसे खतरनाक
समुद्र में सबमरीन सबसे मुश्किल लक्ष्य मानी जाती हैं, क्योंकि वे लंबे समय तक बिना दिखाई दिए ऑपरेट कर सकती हैं।
भारतीय सबमरीनों के पास आधुनिक सोनार, टॉरपीडो और स्टेल्थ क्षमता थी। यही वजह रही कि पाकिस्तान की नौसेना उन्हें खोज नहीं सकी।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, समुद्र में सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक दबाव तब बनता है, जब दुश्मन को पता हो कि सबमरीन आसपास है, लेकिन उसकी सही स्थिति मालूम न हो।
बिना गोली चलाए बनाया दबाव
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय नौसेना ने कोई सीधा हमला नहीं किया, लेकिन उसकी मौजूदगी ही पाकिस्तान के लिए बड़ा दबाव बन गई।
अरब सागर में भारतीय नौसेना की तैनाती इतनी मजबूत थी कि पाकिस्तान को हर समय समुद्र से संभावित हमले का डर बना रहा। यही वजह थी कि उसकी नौसेना खुले समुद्र में आक्रामक गतिविधियां नहीं दिखा सकी।
Indian Navy Submarines Entered Pakistani Waters During Operation Sindoor

