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अरुणाचल प्रदेश के ताकसिंग सेक्टर में चीनी घुसपैठ! PLA ने बनाई सड़क, पुल और मिलिट्री कैंप, देखें एक्सक्लूसिव फोटो

रक्षा समाचार को मिली जानकारी के मुताबिक नाह वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष केरू चादेर ने 25 जून को अपर सुबनसिरी के डिप्टी कमिश्नर को एक पत्र भेजा है। इस पत्र का विषय भारतीय सीमा के भीतर कथित चीनी सैन्य शिविरों की स्थापना बताया गया है...

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📍ताकसिंग/नई दिल्ली | 28 Jun, 2026, 12:38 PM

Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment: अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के ताकसिंग सेक्टर से सटे कुछ इलाकों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने ‘कब्जा’ कर लिया है। स्थानीय सामाजिक संगठन नाह वेलफेयर सोसायटी (एनडब्ल्यूएस) ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि चीन सीमा से लगे कई इलाकों में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। संगठन का कहना है कि जिन इलाकों का इस्तेमाल स्थानीय लोग वर्षों से चराई, शिकार और जंगल से वन उपज इकट्ठा करने के लिए करते रहे हैं, वहां अब पीएलए ने सड़कें, पुल और सैन्य शिविर बना लिए हैं।

रक्षा समाचार के पास उस पत्र की कापी मौजूद है। साथ ही चीनी कब्जे वाले इलाकों के फोटोग्राफ भी मौजूद हैं।

Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment: जिला प्रशासन को भेजा पत्र

रक्षा समाचार को मिली जानकारी के मुताबिक नाह वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष केरू चादेर ने 25 जून को अपर सुबनसिरी के डिप्टी कमिश्नर को एक पत्र भेजा है। इस पत्र का विषय भारतीय सीमा के भीतर कथित चीनी सैन्य शिविरों की स्थापना बताया गया है।

Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment

पत्र में कहा गया है कि ताकसिंग सर्कल के सीमावर्ती इलाकों में पिछले कई सालों से पीएलए अपनी गतिविधियां लगातार बढ़ा रही है। संगठन का आरोप है कि चीन केवल सीमा के पास गश्त तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने कई रणनीतिक स्थानों पर सड़कें, पुल और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर लिया है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि जिन जगहों पर कुछ साल पहले तक हमारे लोग शिकार करते थे, जंगल से वन उपज इकट्ठा करते थे और अपने पशु चराते थे, वे इलाके अब चीनी पीएलए के कब्जे में बताए जा रहे हैं। संगठन ने इसे स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है। वेलफेयर सोसाइटी ने लिखा है कि हमारा मानना है कि उनका उद्देश्य सीमा के पास ज्यादा से ज्यादा जमीन पर अपनी मौजूदगी बढ़ाना है। (Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment)

Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment

किन इलाकों का किया गया जिक्र

पत्र में कुछ विशेष स्थानों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें स्थानीय संगठन ने संवेदनशील बताया है। इनमें आसाफिला क्षेत्र का ओयिंग (2445), चुजार्टा क्षेत्र का पनियार, मरनाफे का मरपान, पोत्रांग झील और टिंगडिंगटांग जैसे इलाके शामिल हैं।

नाह वेलफेयर सोसायटी का दावा है कि ये सभी स्थान ताकसिंग मुख्यालय के काफी करीब हैं। संगठन का आरोप है कि इन इलाकों में पीएलए ने सैन्य शिविर स्थापित किए हैं और वहां तक पहुंचने के लिए सड़क तथा अन्य बुनियादी ढांचा भी तैयार किया गया है।

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सूत्रों के मुताबिक, संगठन ने यह भी दावा किया है कि इनमें से कुछ इलाके वर्ष 2020 से पहले भारतीय नियंत्रण में थे और स्थानीय लोग वहां नियमित रूप से जाते थे। (Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment)

Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment

चरागाह और पारंपरिक जमीन को लेकर चिंता

पत्र में सबसे ज्यादा चिंता स्थानीय लोगों की पारंपरिक जमीन को लेकर जताई गई है। संगठन का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग सालों से इन इलाकों का इस्तेमाल पशुओं की चराई, जंगल से लकड़ी और अन्य वन उत्पाद इकट्ठा करने तथा पारंपरिक गतिविधियों के लिए करते रहे हैं।

पत्र के अनुसार, अब इन क्षेत्रों में पीएलए की मौजूदगी बढ़ने से स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। संगठन ने दावा किया है कि कई चरागाह अब उनके उपयोग में नहीं रह गए हैं।

इसके अलावा पत्र में कुछ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों का भी उल्लेख किया गया है। संगठन का कहना है कि इन क्षेत्रों का स्थानीय समुदाय के लिए विशेष महत्व है। (Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment)

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पिछले 10 से 15 सालों की गतिविधियों का जिक्र

नाह वेलफेयर सोसायटी ने अपने पत्र में कहा है कि ताकसिंग सेक्टर में पिछले 10 से 15 वर्षों के दौरान चीन की गतिविधियों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। संगठन के मुताबिक, पहले जहां सीमावर्ती इलाकों में केवल सीमित गतिविधियां दिखाई देती थीं, वहीं अब सड़क निर्माण, पुलों का निर्माण और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि इन गतिविधियों की रफ्तार हाल के सालों में और बढ़ी है। इसी वजह से संगठन ने जिला प्रशासन से इस मामले को राज्य सरकार और केंद्र सरकार तक पहुंचाने का अनुरोध किया है। (Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment)

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भारत सरकार से की ये मांग

सूत्रों के अनुसार, नाह वेलफेयर सोसायटी ने डिप्टी कमिश्नर से अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले को अरुणाचल प्रदेश सरकार और भारत सरकार के सामने रखा जाए।

संगठन ने पत्र में कहा है कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंताओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। पत्र में यह भी लिखा गया है कि स्थानीय लोगों का भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है, लेकिन स्थिति को देखते हुए सरकार के स्तर पर भी जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।

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संगठन ने यह भी कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और स्थानीय समुदाय के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जरूरत है। (Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment)

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ताकसिंग सेक्टर क्यों है रणनीतिक रूप से अहम

ताकसिंग अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले का एक दूरस्थ सीमावर्ती इलाका है। यह वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी के करीब स्थित है और पूर्वी सेक्टर के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाता है।

खास बात यह है कि यह इलाका उन छह इलाकों में शामिल है जहां से 1962 में चीनी सेना ने घुसपैठ की थी। यह इलाका पहाड़ी भूभाग, घने जंगलों और सीमित सड़क संपर्क के कारण रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी क्षेत्र के पास आसाफिला पॉकेट भी स्थित है, जिसका कई सालों से सीमा विवाद के संदर्भ में उल्लेख होता रहा है।

भारत मैकमोहन रेखा को अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि चीन पूरे अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा जताता रहा है। इसी कारण पूर्वी सेक्टर में समय-समय पर अलग-अलग तरह के दावे और विवाद सामने आते रहे हैं। (Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment)

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सीमा पर दोनों देशों का बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर

पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन दोनों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अपने-अपने क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का तेजी से विस्तार किया है।

चीन ने सीमा के निकट सड़कें, पुल, गांव और अन्य सैन्य सुविधाएं विकसित की हैं। दूसरी ओर भारत ने भी सीमा सड़क संगठन के जरिए सड़कों, पुलों और अन्य सैन्य संपर्क मार्गों का तेजी से निर्माण किया है। साथ ही सीमावर्ती गांवों को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

इसी कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी स्थानीय दावे या शिकायत को सुरक्षा के नजरिए से गंभीर माना जाता है और संबंधित एजेंसियां अपने स्तर पर उसका आकलन करती हैं। (Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment)

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ताकसिंग के पास के इलाके का चीन ने बदला नाम

दरअसल, चीन समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों के पहाड़ों, दर्रों, नदियों और छोटी बस्तियों के नाम बदलकर नई सूची जारी करता है। इसे वह “मानकीकृत भौगोलिक नाम” (स्टैंडर्डाइज्ड जियोग्राफिकल नेम्स) बताता है। विशेषज्ञ इसे चीन की “कार्टोग्राफिक एग्रेसन” यानी नक्शों के जरिए अपने दावे को मजबूत करने की रणनीति मानते हैं।

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चीन पूरे अरुणाचल प्रदेश को “जांगनान” यानी “दक्षिण तिब्बत” कहता है। उसका दावा है कि यह इलाका ऐतिहासिक रूप से तिब्बत का हिस्सा रहा है, जबकि भारत इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है और अरुणाचल प्रदेश को देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा मानता है।

हालांकि चीन ने अभी तक अरुणाचल प्रदेश के ताकसिंग का नाम आधिकारिक तौर पर नहीं बदला है। लेकिन ताकसिंग के आसपास के कुछ इलाकों के नाम वह पहले बदल चुका है। वर्ष 2023 में चीन ने अपनी तीसरी सूची जारी करते समय अपर सुबनसिरी जिले के पास स्थित चकमुत्से गांगरी नाम की एक चोटी का चीनी नाम घोषित किया था। यह इलाका ताकसिंग के काफी करीब माना जाता है।

चीन ने पहली बार अप्रैल 2017 में अरुणाचल प्रदेश के छह स्थानों के नाम बदले थे। इसके बाद दिसंबर 2021 में 15, अप्रैल 2023 में 11, मार्च 2024 में 30, मई 2025 में 27 और अप्रैल 2026 में 23 स्थानों के नए नाम जारी किए। इस तरह अब तक चीन अरुणाचल प्रदेश के कुल 112 स्थानों के नाम बदलने का दावा कर चुका है।

इन सूचियों में ज्यादातर नाम वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास स्थित पहाड़ों, दर्रों, नदियों और छोटी बस्तियों के हैं। वर्ष 2023 की सूची में ताकसिंग के नजदीक स्थित चकमुत्से गांगरी का नाम भी शामिल था, लेकिन ताकसिंग का नाम अब तक किसी भी सूची में नहीं बदला गया है।

भारत हर बार चीन के इस कदम का विरोध करता है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि केवल नाम बदल देने से जमीनी सच्चाई नहीं बदलती। भारत का स्पष्ट रुख है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। (Arunachal Pradesh Taksing PLA Encroachment)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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