📍नई दिल्ली | 26 Jun, 2026, 9:19 PM
Tejas Mk-1A Production: स्वदेशी लड़ाकू विमान एलसीए तेजस एमके-1ए कार्यक्रम को रफ्तार देने की कोशिशें तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), भारतीय वायुसेना और संबंधित एजेंसियां प्रोडक्शन की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि मौजूदा योजना के अनुसार काम आगे बढ़ता है तो सितंबर में सभी प्रमुख पक्ष एक बार फिर बैठक कर प्रोडक्शन और इंटीग्रेशन की समीक्षा करेंगे।
सूत्रों का कहना है कि हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में विमान प्रोडक्शन, इंजन उपलब्धता, एयरक्राफ्ट इंटीग्रेशन और सर्टिफिकेशन से जुड़े कई बिंदुओं पर चर्चा हुई। इसके बाद तय किया गया कि अगले तीन महीनों में होने वाली प्रगति का दोबारा आकलन किया जाएगा।
इसी बीच एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। एचएएल को अब तक अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस से छह एफ-404-आईएन20 इंजन मिल चुके हैं। इनमें से पांच इंजन पूरी तरह ऑपरेशनल बताए जा रहे हैं, जबकि एक इंजन में कुछ तकनीकी गड़बड़ी सामने आई है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह कोई बड़ी दिक्कत नहीं है और निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत उसकी जांच शुरू कर दी है।
Tejas Mk-1A Production: रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, 8 जून को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई थी। इसमें रक्षा मंत्रालय, एचएएल और भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में तेजस एमके-1ए कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति, प्रोडक्शन की गति और तय समयसीमा पर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में एचएएल से कहा गया कि वह कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार तय समयसीमा पूरी करने के लिए प्रोडक्शन में तेजी लाए और अब तक हुई देरी की भरपाई करने की कोशिश करे। बता दें कि प्रोजेक्ट पहले ही दो साल की देरी से चल रहा है। रक्षा मंत्रालय इस बात की भी समीक्षा कर रहा है कि यदि आगे भी देरी होती है तो कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार क्या कार्रवाई की जा सकती है।
तेजस एमके-1ए कार्यक्रम की सबसे बड़ी चुनौती पिछले दो वर्षों से इंजन आपूर्ति रही है। जीई एयरोस्पेस द्वारा तैयार एफ-404-आईएन20 इंजन की सप्लाई में देरी के कारण एचएएल तैयार विमान भी समय पर भारतीय वायुसेना को नहीं सौंप पाया है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, अप्रैल 2025 से अब तक जीई एयरोस्पेस छह इंजन एचएएल को सौंप चुका है। छठा इंजन मई में मिला था। कुल 99 एफ-404-आईएन20 इंजन की सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट है, जिनका इस्तेमाल तेजस एमके-1ए फाइटर जेट्स में किया जाएगा।
एचएएल हर इंजन की अलग से जांच करता है
एचएएल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, किसी भी इंजन या अन्य महत्वपूर्ण उपकरण की डिलीवरी के बाद कंपनी के इंजीनियर उसकी विस्तृत तकनीकी जांच करते हैं। इसमें बाहरी निरीक्षण के साथ कई तकनीकी परीक्षण भी शामिल होते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रोडक्ट तय मानकों के अनुरूप है।
यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी कमी या असामान्यता दिखाई देती है तो उसकी जानकारी तुरंत ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर यानी ओईएम को दी जाती है। इस मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई है।
सूत्रों का कहना है कि संबंधित तकनीकी समस्या को जीई एयरोस्पेस के साथ साझा किया गया है और उसका समाधान किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह कोई बड़ी तकनीकी खराबी नहीं है और नियमित प्रक्रिया के तहत इसे ठीक किया जा रहा है।
इंजन मिलने के बाद भी कई चरण पूरे करने होते हैं
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, केवल इंजन मिल जाने से विमान तुरंत उड़ान के लिए तैयार नहीं हो जाता। इंजन को एयरफ्रेम में लगाया जाता है, उसके बाद फ्यूल सिस्टम, हाइड्रोलिक सिस्टम, इलेक्ट्रिकल नेटवर्क और एवियोनिक्स के साथ उसका इंटीग्रेशन किया जाता है।
इसके बाद ग्राउंड टेस्ट, इंजन रन, सिस्टम कैलिब्रेशन, टैक्सी ट्रायल और विभिन्न तकनीकी परीक्षण पूरे किए जाते हैं। सभी परीक्षण सफल होने के बाद ही विमान को फ्लाइट टेस्ट के लिए भेजा जाता है। फ्लाइट टेस्ट के दौरान भी कई तरह की जांच होती है, जिनमें इंजन की परफॉरमेंस, फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, सेंसर और वेपन सिस्टम का इवेल्यूशन शामिल रहता है।
यही कारण है कि इंजन की डिलीवरी और विमान की अंतिम डिलीवरी के बीच कई महत्वपूर्ण तकनीकी चरण पूरे करने पड़ते हैं।
तेजस एमके-1ए भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण का अहम हिस्सा
भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम में तेजस एमके-1ए की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह स्वदेशी 4.5 जनरेशन डेल्टा विंग मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसे डीआरडीओ की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने डेवलप किया है और एचएएल इसका निर्माण कर रहा है।
तेजस एमके-1 की पहली स्क्वाड्रन वर्ष 2016 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुई थी। शुरुआती योजना के तहत 40 तेजस एमके-1 विमान शामिल किए जाने थे। अब तक इनमें से अधिकांश विमान वायुसेना को मिल चुके हैं।
इसके बाद फरवरी 2021 में भारतीय वायुसेना ने 83 तेजस एमके-1ए विमानों की खरीद के लिए लगभग 46 हजार करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट किया। बाद में सितंबर 2025 में 97 अतिरिक्त तेजस एमके-1ए विमानों की खरीद को भी मंजूरी मिली, जिसकी कीमत लगभग 62,370 करोड़ रुपये बताई गई।
इन दोनों कॉन्ट्रैक्ट्स के बाद भारतीय वायुसेना के लिए कुल 180 तेजस एमके-1ए विमान शामिल करने की योजना पर काम चल रहा है।
देरी से वायुसेना की योजनाओं पर पड़ा असर
तेजस एमके-1ए की समय पर डिलीवरी भारतीय वायुसेना के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में उसकी फाइटर स्क्वाड्रनों की संख्या स्वीकृत स्तर से कम है।
भारतीय वायुसेना के पास इस समय लगभग 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि दो मोर्चों पर संभावित चुनौती को ध्यान में रखते हुए 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है।
पुराने मिग-21 जैसे लड़ाकू विमानों के सेवा से बाहर होने के बाद नई स्क्वाड्रनों का गठन तेजस एमके-1ए जैसे स्वदेशी विमानों पर काफी हद तक निर्भर करता है। यही कारण है कि इंजन सप्लाई में हुई देरी का असर केवल प्रोडक्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वायुसेना की ऑपरेशन योजनाओं पर भी पड़ा।
वायुसेना प्रमुख कई बार जता चुके हैं चिंता
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह सार्वजनिक मंचों पर कई बार तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में हो रही देरी पर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि वायुसेना को समय पर विमान मिलना बेहद जरूरी है ताकि उसकी ऑपरेशनल क्षमता प्रभावित न हो।
वायुसेना लगातार इस बात पर जोर देती रही है कि प्रोडक्शन और डिलीवरी तय कार्यक्रम के अनुसार पूरी होनी चाहिए। इसी वजह से रक्षा मंत्रालय, एचएएल और वायुसेना के बीच लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
सितंबर की समीक्षा बैठक पर रहेगी नजर
सूत्रों के मुताबिक, एचएएल फिलहाल इंजन इंटीग्रेशन, सर्टिफिकेशन, उड़ान परीक्षण और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं को तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ा रहा है। यदि मौजूदा योजना के मुताबिक सभी चरण पूरे होते हैं तो सितंबर में रक्षा मंत्रालय, एचएएल, भारतीय वायुसेना और अन्य संबंधित एजेंसियां फिर से बैठक कर प्रोडक्शन की स्थिथि की समीक्षा करेंगी।


