📍वाशिंगटन/बीजिंग | 26 Jun, 2026, 7:50 AM
China-US Stealth Aircraft Report: चीन ने पिछले दो दशकों में स्टेल्थ फाइटर जेट, लो-फ्रीक्वेंसी रडार, पैसिव सेंसर और इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क पर तेजी से निवेश किया है। चीन के जे-20 फाइटर जेट के बाद जे-35 जैसे नए स्टेल्थ प्लेटफॉर्म भी सामने आ चुके हैं। लेकिन अमेरिकी वायुसेना के चीन एयरोस्पेस स्टडीज इंस्टीट्यूट (सीएएसआई) की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने अमेरिकी स्टेल्थ क्षमता को समझने में एक अहम गलती की है।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन स्टेल्थ को मुख्य रूप से एक तकनीकी हथियार मानता है, जबकि अमेरिका इसे केवल विमान की रडार से बचने वाले डिजाइन तक सीमित नहीं रखता। अमेरिकी सोच में स्टेल्थ विमान के साथ मिशन प्लानिंग, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, रडार जैमिंग, सैटेलाइट डेटा, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम, दूसरे फाइटर जेट और पायलटों की ट्रेनिंग भी जुड़ी होती है।
सीएएसआई के फेलो और अमेरिकी वायुसेना के मेजर डेरेक एक्लेबे ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चीन के कई आकलन तकनीकी वास्तविकता और वास्तविक ऑपरेशनल प्रैक्टिस से अलग दिखाई देते हैं। एक्लेबे पहले बी-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर से जुड़े वेपन्स ऑफिसर रह चुके हैं। उनकी रिपोर्ट का शीर्षक है, “चाइनीज परसेप्शंस ऑफ स्टेल्थ: शेपिंग डिफेंस अगेंस्ट यूएस कैपेबिलिटीज एंड इंडिजिनस डेवलपमेंट्स।”
China-US Stealth Aircraft Report: स्टेल्थ का मतलब केवल रडार से गायब होना नहीं
आम भाषा में स्टेल्थ विमान को ऐसा जेट समझा जाता है जो रडार पर दिखाई नहीं देता। लेकिन वास्तविकता में कोई भी विमान पूरी तरह अदृश्य नहीं होता। स्टेल्थ तकनीक का उद्देश्य विमान की पहचान को इतना कठिन बनाना है कि दुश्मन के रडार को उसे समय पर पकड़ने, उसकी सटीक स्थिति जानने और मिसाइल को उस तक पहुंचाने में मुश्किल हो।
स्टेल्थ डिजाइन में विमान की बॉडी का डिजाइन बहुत महत्वपूर्ण होता है। विमान की सतह, किनारे, एयर इनटेक और टेल सेक्शन को इस तरह बनाया जाता है कि रडार तरंगें वापस उसी दिशा में न लौटें, जहां से वे आई हैं। इसके अलावा रडार एब्जॉर्बेंट मटेरियल यानी ऐसी विशेष कोटिंग इस्तेमाल होती है जो रडार तरंगों को सोखने या कमजोर करने में मदद करती है।
स्टेल्थ फाइटर में हथियार आमतौर पर अंदरूनी वेपन बे में रखे जाते हैं। यदि मिसाइलें और बम विंग के नीचे लटकें तो वे रडार सिग्नेचर बढ़ा सकते हैं। इंजन की गर्मी भी एक चुनौती होती है, क्योंकि इन्फ्रारेड सेंसर गर्म एग्जॉस्ट को पहचान सकते हैं। इसलिए इंजन नोजल, एग्जॉस्ट और गर्मी के फैलाव को नियंत्रित करने के लिए अलग डिजाइन अपनाया जाता है।
रडार क्रॉस सेक्शन यानी आरसीएस किसी विमान के रडार पर दिखाई देने वाले आकार का संकेत है। यह विमान के वास्तविक आकार से अलग हो सकता है। बड़े विमान का आरसीएस छोटा बनाया जा सकता है, जबकि छोटे विमान का आरसीएस बाहरी हथियारों और डिजाइन के कारण ज्यादा हो सकता है। (China-US Stealth Aircraft Report)
अमेरिका ने स्टेल्थ को युद्ध के पूरे नेटवर्क से जोड़ा
अमेरिका ने स्टेल्थ तकनीक पर काम शीत युद्ध के दौरान शुरू किया था। एफ-117 नाइटहॉक पहला ऐसा स्टेल्थ हमला विमान था, जिसने दुनिया का ध्यान खींचा। इसके बाद बी-2 स्पिरिट बॉम्बर, एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग-2 जैसे प्लेटफॉर्म विकसित किए गए।
सीएएसआई रिपोर्ट का मुख्य तर्क है कि अमेरिका की स्टेल्थ क्षमता केवल इन विमानों के डिजाइन में नहीं है। अमेरिकी वायुसेना स्टेल्थ को एक “सिस्टम ऑफ सिस्टम्स” के रूप में देखती है। यानी किसी मिशन से पहले दुश्मन के रडार, मिसाइल बैटरी, कमांड सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और फाइटर जेट की जानकारी जुटाई जाती है।
इसके बाद मिशन रूट, ऊंचाई, समय, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सपोर्ट और हथियारों का चयन किया जाता है। कई मामलों में स्टेल्थ विमान अकेला नहीं जाता। उसके साथ इलेक्ट्रॉनिक अटैक विमान, सर्विलांस प्लेटफॉर्म, सैटेलाइट डेटा और चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट भी जुड़े होते हैं। इसका उद्देश्य दुश्मन की एयर डिफेंस किल चेन को तोड़ना होता है।
किल चेन का अर्थ है किसी लक्ष्य को खोजने, पहचानने, ट्रैक करने, मिसाइल लॉन्च करने और उसे नष्ट करने तक की पूरी प्रक्रिया। यदि दुश्मन रडार किसी स्टेल्थ विमान को अनुमानित रूप से देख भी ले, तब भी उसे मिसाइल फायर के लिए सटीक लोकेशन चाहिए होती है। रिपोर्ट में इसी अंतर को सबसे अहम बताया गया है। (China-US Stealth Aircraft Report)
1999 में एफ-117 के गिरने से चीन ने क्या सीखा
रिपोर्ट में 1999 के कोसोवो युद्ध का भी उल्लेख है। उस दौरान यूगोस्लाविया की एयर डिफेंस यूनिट ने अमेरिकी एफ-117 नाइटहॉक को मार गिराया था। यह घटना स्टेल्थ विमान के खिलाफ पहली बड़ी सफलता के रूप में देखी गई थी।
अमेरिकी पक्ष का आकलन रहा कि यह स्टेल्थ तकनीक की पूरी विफलता नहीं थी, बल्कि मिशन प्लानिंग और ऑपरेशनल पैटर्न से जुड़ी समस्या थी। रिपोर्ट के अनुसार, विमान के रूट और उड़ान पैटर्न में अनुमान लगाने योग्य तत्व थे। इसके बाद अमेरिकी मिशन प्लानिंग में बदलाव किए गए।
मेजर एक्लेबे के अनुसार, चीन ने इस घटना को अलग तरीके से देखा। चीन के सैन्य विश्लेषकों ने इसे तकनीकी कमजोरी के संकेत के रूप में लिया और माना कि बेहतर सेंसर तथा नई रडार तकनीक से स्टेल्थ विमान की चुनौती खत्म की जा सकती है। इसी सोच ने चीन को एंटी-स्टेल्थ सेंसर, लो-फ्रीक्वेंसी रडार और लेयर्ड एयर डिफेंस पर तेजी से काम करने के लिए प्रेरित किया।
लो-फ्रीक्वेंसी रडार क्या कर सकते हैं और क्या नहीं
चीन ने यूएचएफ और वीएचएफ बैंड के लो-फ्रीक्वेंसी रडार विकसित किए हैं। इनमें वाईएलसी-8बी और अन्य एंटी-स्टेल्थ रडार सिस्टमों का नाम अक्सर सामने आता है। इन रडारों की वेवलेंथ ज्यादा लंबी होती है। इसी कारण ये कुछ परिस्थितियों में स्टेल्थ डिजाइन वाले विमानों की मौजूदगी का संकेत पकड़ सकते हैं।
लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी विमान का पता लगना और उसे मिसाइल से निशाना बनाना दो अलग बातें हैं। लो-फ्रीक्वेंसी रडार किसी क्षेत्र में स्टेल्थ विमान की मौजूदगी का संकेत दे सकता है, लेकिन उसकी सटीक स्थिति, ऊंचाई और गति की जानकारी सीमित हो सकती है।
मिसाइल को गाइड करने के लिए आमतौर पर ज्यादा सटीक फायर कंट्रोल रडार की जरूरत होती है। ऐसे रडार अक्सर हाई फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं। स्टेल्थ विमान की डिजाइन को खासतौर पर इन्हीं उच्च फ्रीक्वेंसी रडारों के खिलाफ प्रभावी बनाने की कोशिश की जाती है।
लो-फ्रीक्वेंसी रडार को जमीन, समुद्र, मौसम और दूसरे संकेतों से पैदा होने वाले क्लटर की समस्या भी होती है। क्लटर का मतलब ऐसी अवांछित जानकारी है जो असली लक्ष्य की पहचान कठिन बना दे। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और जैमिंग भी रडार की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। (China-US Stealth Aircraft Report)
चीन का इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क गंभीर चुनौती
रिपोर्ट चीन के एयर डिफेंस नेटवर्क को कमजोर नहीं बताती। इसमें कहा गया है कि चीन की असली ताकत किसी एक रडार या एक मिसाइल सिस्टम में नहीं, बल्कि पूरे इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम में है।
चीन लो-फ्रीक्वेंसी अर्ली वार्निंग रडार, पैसिव डिटेक्टर, सैटेलाइट, ग्राउंड रडार, फाइटर जेट, मिसाइल बैटरी और कॉर्प्स लेवल कमांड सेंटर को एक नेटवर्क में जोड़ने पर काम कर रहा है। इस तरह एक सेंसर से मिली जानकारी दूसरे सेंसर, कमांड सेंटर या मिसाइल यूनिट तक पहुंचाई जा सकती है।
पैसिव सेंसर ऐसे सिस्टम होते हैं जो खुद कोई रेडियो या रडार तरंग नहीं भेजते। वे दूसरे प्लेटफॉर्म से निकलने वाले इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को सुनते हैं। इससे सेंसर खुद अपनी स्थिति जाहिर किए बिना जानकारी जुटाने की कोशिश करता है।
चीन के लिए यह नेटवर्क इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह अमेरिकी स्टेल्थ विमान को केवल रडार की समस्या नहीं, बल्कि पूरे बैटफील्ड की सूचना और कमांड की समस्या के रूप में देख रहा है। हालांकि सीएएसआई रिपोर्ट का कहना है कि चीन का ध्यान अभी भी तकनीकी समाधान पर ज्यादा दिखाई देता है। (China-US Stealth Aircraft Report)
जे-20 और जे-35 में हार्डवेयर पर जोर
चीन का जे-20 माइटी ड्रैगन उसका पहला ऑपरेशनल स्टेल्थ फाइटर जेट माना जाता है। यह विमान 2017 से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स में सेवा में है। चीन ने इसके बाद जे-35 कार्यक्रम पर भी काम तेज किया है। जे-35 की डिजाइन को अक्सर अमेरिकी एफ-35 से मिलता-जुलता बताया जाता है।
सीएएसआई रिपोर्ट के अनुसार, चीन के स्टेल्थ प्लेटफॉर्म में हार्डवेयर मेट्रिक्स पर काफी जोर दिखता है। इसमें एयरफ्रेम डिजाइन, रडार सिग्नेचर, इंजन, सेंसर और हथियार क्षमता शामिल है। अमेरिकी मॉडल में इन चीजों के साथ सॉफ्टवेयर-डिफाइंड अडैप्टेबिलिटी, मिशन डेटा, टैक्टिक्स, टेक्निक्स और प्रोसीजर्स यानी टीटीपी को भी लगातार बदला और अपडेट किया जाता है।
रिपोर्ट में चीन के इंजन कार्यक्रम को भी एक चुनौती के रूप में रखा गया है। इसमें डब्ल्यूएस-10 और एएल-31एफ इंजन से जुड़ी विश्वसनीयता तथा मॉडर्नाइजेशन की समस्याओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट का तर्क है कि यदि किसी फाइटर जेट के इंजन की उपलब्धता और भरोसेमंद प्रदर्शन प्रभावित होता है तो उसकी सॉर्टी रेट भी प्रभावित हो सकती है। (China-US Stealth Aircraft Report)
चीन की सोच में ‘मिरर इमेजिंग’ का मुद्दा
मेजर एक्लेबे ने “मिरर इमेजिंग” का भी उल्लेख किया है। इसका मतलब है कि कोई देश अपनी तकनीकी या ऑपरेशनल समस्याओं को दूसरे देश के सिस्टम पर भी लागू मान ले। रिपोर्ट के अनुसार, चीन अपने इंजन, सॉर्टी रेट और मॉडर्नाइजेशन से जुड़ी घरेलू सीमाओं को अमेरिकी स्टेल्थ प्लेटफॉर्म पर भी लागू करके देख सकता है।
अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, यही सोच गलत आकलन पैदा कर सकती है। अमेरिका के पास स्टेल्थ विमान संचालन का कई दशक का अनुभव है। इस दौरान उसने एफ-117, बी-2, एफ-22 और एफ-35 जैसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म के साथ मिशन प्लानिंग, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, एयर डिफेंस दमन और नेटवर्क ऑपरेशन को डेवलप किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन स्टेल्थ को एक ऐसी क्षमता मानता है जिसे पर्याप्त संख्या, बेहतर सेंसर और इंटीग्रेटेड नेटवर्क के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है। इस सोच के कारण चीन स्टेल्थ को अजेय बाधा नहीं, बल्कि मैनेजेबल फैक्टर के रूप में देखता है। (China-US Stealth Aircraft Report)


