📍उलानबातर/नई दिल्ली | 25 Jun, 2026, 12:10 PM
Exercise Khaan Quest 2026: मंगोलिया की राजधानी उलानबातर के निकट फाइव हिल्स ट्रेनिंग एरिया में मल्टीलेटरल मिलिट्री एक्सरसाइज खान क्वेस्ट 2026 चल रही है। इस अभ्यास में भारतीय सेना की 40 सदस्यीय टुकड़ी भी हिस्सा ले रही है। भारतीय दल में जाट रेजिमेंट की एक बटालियन के जवानों के साथ सेना की अन्य आर्म्स और सर्विसेज के कर्मी शामिल हैं। अभ्यास 20 जून से शुरू हुआ है और 3 जुलाई तक चलेगा।
खान क्वेस्ट का यह 23वां संस्करण है। इसमें 18 देशों के एक हजार से अधिक सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। इस वर्ष का आयोजन इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस अभ्यास के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारतीय सेना के अनुसार, यह प्रशिक्षण संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना अभियानों में काम आने वाली प्रक्रियाओं, आपसी तालमेल और बहुराष्ट्रीय वातावरण में तुरंत प्रतिक्रिया की क्षमता पर केंद्रित है।
Exercise Khaan Quest 2026: फाइव हिल्स में मल्टीनेशनल ट्रेनिंग
फाइव हिल्स ट्रेनिंग एरिया मंगोलिया का प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्र है। यहां अलग-अलग देशों के सैनिक एक ही ट्रेनिंग स्ट्रक्चर में अभ्यास कर रहे हैं। अलग-अलग देशों की सेनाओं के वेपंस, रेडियो प्रोसीजर्स, व्हीकल्स, कमांड स्ट्रक्चर और काम करने के तरीके अलग होते हैं। संयुक्त राष्ट्र के मिशन में इन्हीं सैनिकों को एक साथ काम करना पड़ता है। इसलिए खान क्वेस्ट जैसे अभ्यास में केवल सैन्य ड्रिल ही नहीं, बल्कि कम्यूनिकेशन, कमांड सिस्टम, औऱ जॉइंट प्लानिंग पर भी ध्यान दिया जाता है।
भारतीय सेना के सूत्रों के अनुसार, भारतीय टुकड़ी संयुक्त राष्ट्र के मेंडेट के मुताबिक बनाए गए सिनारियो में हिस्सा ले रही है। इसमें संघर्ष प्रभावित इलाकों में नागरिकों की सुरक्षा, राहत कार्य, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और मिशन परिसरों की सुरक्षा जैसी स्थितियां शामिल हैं। सैनिकों को यह समझना होता है कि किसी तनावपूर्ण इलाके में बल का इस्तेमाल कब, कितना और किस नियम के तहत किया जा सकता है।
2003 में शुरू हुई थी खान क्वेस्ट
खान क्वेस्ट की शुरुआत वर्ष 2003 में अमेरिका और मंगोलिया के बीच द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के रूप में हुई थी। उस समय इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण और सहयोग बढ़ाना था। वर्ष 2006 से इसे बहुपक्षीय रूप दिया गया। इसके बाद कई देशों की सेनाएं इसमें शामिल होने लगीं।
अब यह अभ्यास शांति अभियानों के प्रशिक्षण का एक बड़ा मंच बन चुका है। इसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय सात से जुड़े मिशनों के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। ऐसे मिशनों में केवल निगरानी या युद्धविराम के अलावा नागरिकों की सुरक्षा और शांति भंग करने वाले तत्वों से निपटने की जिम्मेदारी भी हो सकती है।
उद्घाटन समारोह में मंगोलिया के रक्षा मंत्री बतलुत दांबा, मंगोलियाई सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल गनब्यांबा सुनरेव और मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सुर्वे मौजूद रहे। समारोह के बाद भाग लेने वाले देशों की टुकड़ियों ने संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया।
Indian Army contingent departs for Exercise KHAAN QUEST 2026 in Mongolia, a multinational peacekeeping exercise aimed at enhancing interoperability under the UN Charter. The participation underscores India’s commitment to global peace and its strategic partnership with Mongolia.… pic.twitter.com/gSY2LlpCqW
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) June 18, 2026
जाट रेजिमेंट के जवानों के साथ अन्य विशेषज्ञ
भारतीय दल का मुख्य हिस्सा जाट रेजिमेंट की बटालियन से लिया गया है। जाट रेजिमेंट भारतीय सेना की पुरानी पैदल सेना रेजिमेंटों में शामिल है। इसकी पहचान कठिन परिस्थितियों में काम करने, अनुशासन और फील्ड ऑपरेशन के अनुभव के लिए रही है।
टुकड़ी में इन्फैंट्री के अलावा सेना की अन्य शाखाओं और सेवाओं के कर्मी भी शामिल हैं। इनमें इंजीनियर, सिग्नल, चिकित्सा और लॉजिस्टिक्स से जुड़े विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण है। शांति स्थापना मिशन में किसी क्षेत्र की सुरक्षा के साथ-साथ संचार व्यवस्था, चिकित्सा सहायता, अस्थायी ढांचा, राहत सामग्री और वाहनों की उपलब्धता भी जरूरी होती है।
सूत्रों के अनुसार, अभ्यास में भारतीय सैनिकों को ऐसे वातावरण में काम करना पड़ रहा है जहां उन्हें दूसरे देशों की टुकड़ियों के साथ साझा कमांड पोस्ट, साझा रेडियो नेटवर्क और संयुक्त पेट्रोलिंग का हिस्सा बनना है। इससे सैनिकों को यह समझने का मौका मिलता है कि बहुराष्ट्रीय मिशन में आदेशों और सूचनाओं को किस तरह तेजी से साझा किया जाता है।
चेकपॉइंट और पेट्रोलिंग की ड्रिल
खान क्वेस्ट में चेकपॉइंट सिस्टम की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। किसी संघर्ष क्षेत्र में चेकपॉइंट का इस्तेमाल वाहनों और लोगों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए किया जाता है। यहां सैनिकों को वाहन रोकने, दस्तावेज जांचने, संदिग्ध गतिविधि पहचानने और स्थिति बिगड़ने पर कंट्रोल्ड रेस्पॉन्स देने का अभ्यास कराया जाता है।
स्थिर चेकपॉइंट के अलावा मोबाइल चेकपॉइंट भी महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हें किसी सड़क, गांव के प्रवेश मार्ग या संवेदनशील इलाके में कम समय के लिए स्थापित किया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र मिशन में ऐसी कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों के साथ व्यवहार, भाषा की समस्या और मानवाधिकार नियमों का ध्यान रखना पड़ता है।
भारतीय टुकड़ी पेट्रोलिंग की प्रक्रिया का भी अभ्यास कर रही है। पेट्रोलिंग के दौरान सैनिक इलाके का नक्शा समझते हैं, स्थानीय गतिविधियों पर नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर कमांड सेंटर तक सूचना पहुंचाते हैं। पेट्रोलिंग का मकसद स्थानीय आबादी के साथ संपर्क बनाना और भरोसा कायम रखना भी होता है।
कॉर्डन एंड सर्च में तालमेल की परीक्षा
अभ्यास के दौरान कॉर्डन एंड सर्च ड्रिल भी कराई जा रही है। इसमें किसी संदिग्ध इलाके को चारों ओर से घेरकर तलाशी ली जाती है। ऐसी कार्रवाई में अलग-अलग टीमों की जिम्मेदारी तय होती है। एक टीम बाहरी घेरा बनाती है, दूसरी तलाशी करती है, तीसरी सुरक्षा देती है और चौथी टीम संचार तथा मेडिकल सहायता के लिए तैयार रहती है।
बहुराष्ट्रीय मिशन में यह ड्रिल अधिक जटिल हो जाती है, क्योंकि अलग-अलग देशों के सैनिकों को एक ही योजना के तहत काम करना होता है। भारतीय सैनिकों को इसमें तलाशी प्रक्रिया, नागरिकों से संवाद, संदिग्ध वस्तुओं की पहचान और रिपोर्टिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मॉब कंट्रोल यानी भीड़ नियंत्रण भी अभ्यास का हिस्सा है। कई शांति स्थापना मिशनों में राजनीतिक तनाव, अफवाह या हिंसा की वजह से बड़ी भीड़ इकट्ठा हो सकती है। ऐसे समय सैनिकों का लक्ष्य स्थिति को नियंत्रित करना होता है, न कि उसे और भड़काना। अभ्यास में सैनिकों को भीड़ को सुरक्षित दूरी पर रोकने, चेतावनी देने, रास्ता खाली कराने और कमजोर लोगों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया सिखाई जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र परिसरों और नागरिकों की सुरक्षा
संयुक्त राष्ट्र मिशनों में मुख्यालय, कैंप, मेडिकल सेंटर, गोदाम और राहत सामग्री के ठिकाने महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हें सुरक्षित रखना मिशन की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होता है। खान क्वेस्ट में भारतीय टुकड़ी संयुक्त राष्ट्र की संपत्तियों की सुरक्षा से जुड़ी ड्रिल में भी हिस्सा ले रही है।
इस दौरान सैनिकों को परिधि सुरक्षा, निगरानी पोस्ट, प्रवेश नियंत्रण, त्वरित प्रतिक्रिया दल और खतरे की स्थिति में निकासी योजना से परिचित कराया जा रहा है। कैंप या राहत केंद्र पर हमला, आग लगने, संदिग्ध पैकेट मिलने या भीड़ के पहुंचने जैसी स्थितियों के लिए अलग-अलग प्रतिक्रिया योजना बनाई जाती है।
मानवीय मदद से जुड़ी ट्रेनिंग भी इसी कार्यक्रम का हिस्सा है। संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सेना को कई बार भोजन, पानी, दवाइयां और जरूरी सामग्री पहुंचाने में प्रशासन की मदद करनी पड़ती है। राहत वितरण के समय भीड़ प्रबंधन, प्राथमिकता तय करना और सुरक्षा बनाए रखना जरूरी होता है। भारतीय सैनिक इसी प्रकार के अभ्यासों में भाग ले रहे हैं।
कॉम्बैट फर्स्ट एड और कैजुअल्टी इवैक्यूएशन
एक्सरसाइज में कॉम्बैट फर्स्ट एड और कैजुअल्टी इवैक्यूएशन पर भी काम किया जा रहा है। इसमें घायल व्यक्ति को घटनास्थल पर तुरंत प्राथमिक चिकित्सा मुहैया कराई जाती है। इसमें रक्तस्राव रोकना, सांस की जांच करना, घायल को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना और मेडिकल टीम को सही जानकारी देना शामिल होता है।
कैजुअल्टी इवैक्यूएशन में घायल सैनिक या नागरिक को खतरे वाले क्षेत्र से निकालकर उपचार केंद्र तक पहुंचाया जाता है। इसके लिए स्ट्रेचर, बख्तरबंद वाहन, एम्बुलेंस या हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल हो सकता है। अभ्यास में यह देखा जाता है कि सुरक्षा टीम, मेडिकल टीम और वाहन चालक एक-दूसरे के साथ कितनी तेजी से तालमेल कर पाते हैं।
काउंटर आईईडी ड्रिल भी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आईईडी यानी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस, जिसे स्थानीय स्तर पर तैयार विस्फोटक उपकरण कहा जाता है। सड़क किनारे, वाहन में या किसी इमारत के पास ऐसे उपकरण लगाए जा सकते हैं। सैनिकों को संदिग्ध वस्तु दिखने पर क्षेत्र को सुरक्षित करने, आवाजाही रोकने, बम निरोधक विशेषज्ञों को बुलाने और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया का अभ्यास कराया जाता है।
महिला, शांति और सुरक्षा पर विशेष सत्र
खान क्वेस्ट 2026 में महिला, शांति और सुरक्षा खंड को विशेष स्थान दिया गया है। यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 से जुड़ा विषय है। इस प्रस्ताव में संघर्ष और संघर्ष के बाद की स्थितियों में महिलाओं की सुरक्षा, उनकी भागीदारी और उनके अधिकारों पर जोर दिया गया है।
भारतीय दल इस सत्र में भी सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। इसमें जेंडर सेंसिटिव पीसकीपिंग, नागरिकों की सुरक्षा, सामुदायिक जुड़ाव और स्थानीय महिलाओं के साथ संवाद जैसे विषय शामिल हैं। कई संघर्ष क्षेत्रों में महिलाएं और बच्चे हिंसा, विस्थापन और यौन अपराधों से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे मामलों में महिला शांति सैनिकों की मौजूदगी से पीड़ितों को अपनी बात रखने में मदद मिलती है।
भारत ने वर्ष 2007 में लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र की पहली ऑल-विमेन फॉर्म्ड पुलिस यूनिट भेजी थी। इस तैनाती को संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है। भारतीय महिला सैन्य और पुलिस कर्मियों ने कई मिशनों में स्थानीय समुदायों के साथ संवाद और सुरक्षा कार्यों में भूमिका निभाई है।
संयुक्त राष्ट्र मिशनों में भारत का अनुभव
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में योगदान देता रहा है। भारतीय सैन्य पर्यवेक्षक, स्टाफ अधिकारी, सैन्य टुकड़ियां, पुलिस इकाइयां और चिकित्सा दल अलग-अलग मिशनों में तैनात रहे हैं। भारतीय सैनिकों ने कांगो, दक्षिण सूडान, लेबनान, साइप्रस, गोलान हाइट्स और पश्चिमी सहारा जैसे क्षेत्रों में काम किया है।
भारतीय सेना के सूत्रों के अनुसार, खान क्वेस्ट में भागीदारी के दौरान भारत अपने पुराने मिशन अनुभवों को भी साझा कर रहा है। इसमें स्थानीय आबादी से संपर्क, कठिन भूभाग में ऑपरेशन, मेडिकल सहायता और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े अनुभव शामिल हैं। अभ्यास में भाग लेने वाले देशों की टुकड़ियां भी अपने-अपने अनुभव साझा कर रही हैं।
भारत-मंगोलिया के बीच बढ़ा रक्षा सहयोग
भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों के साथ रक्षा सहयोग भी बढ़ा है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, उच्चस्तरीय संवाद और संयुक्त गतिविधियों का सिलसिला चलता रहा है। मंगोलिया भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है और भारत भी मध्य एवं पूर्वोत्तर एशिया के साथ अपने संपर्क में मंगोलिया को महत्व देता है।


