📍नई दिल्ली/बेंगलुरु | 26 Jun, 2026, 7:00 AM
T-12 Shotgun Indian Army: भारतीय सेना को जल्दी ही स्वदेशी छोटे हथियार मिलने जा रहे हैं। बेंगलुरु की एसएसएस डिफेंस की टी-12 सेमी-ऑटोमैटिक 12 गेज शॉटगन की डिलीवरी जुलाई से शुरू होने वाली है। कंपनी के मुताबिक, भारतीय सेना की विभिन्न यूनिटों और दो डायरेक्टोरेट ने इस हथियार की खरीद के लिए कॉन्ट्रैक्ट किए हैं। यह पहली बार है जब भारतीय सेना एसएसएस डिफेंस के किसी प्रोडक्ट को सप्लाई करेगी। कंपनी इससे पहले इस साल मई में भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड को टी-12 शॉटगन की डिलीवरी कर चुकी है।
टी-12 को केवल पारंपरिक शॉटगन के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसे खासतौर पर कम ऊंचाई पर आने वाले छोटे ड्रोन, फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन, नजदीकी लड़ाई, बिल्डिंग क्लियरिंग और ब्रीचिंग जैसे कामों के लिए तैयार किया गया है। आधुनिक युद्ध में छोटे ड्रोन तेजी से बड़ा खतरा बने हैं। ऐसे में एक हल्का, तेजी से फायर करने वाला और अलग-अलग प्रकार के कारतूस इस्तेमाल करने वाला हथियार इन्फैंट्री के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, सेना की यूनिट स्तर की जरूरतें अब बदल रही हैं। पहले छोटे हथियारों का उपयोग मुख्य रूप से जमीन पर मौजूद विरोधी सैनिकों के खिलाफ होता था। लेकिन अब सैनिकों को सामने से आने वाले खतरे के साथ ऊपर से आने वाले छोटे ड्रोन पर भी नजर रखनी पड़ती है। टी-12 जैसे हथियार का इस्तेमाल इसी में किया जाएगा।
T-12 Shotgun Indian Army: एसएसएस डिफेंस को सेना का पहला ऑर्डर
एसएसएस डिफेंस का पूरा नाम स्टम्प शूले एंड सोमप्पा डिफेंस है। कंपनी की मुख्य ग्रुप मूल समूह कई दशक से प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम करता रहा है। कंपनी ने 2017 में रक्षा क्षेत्र में प्रवेश किया और अब छोटे हथियारों, स्नाइपर राइफल, असॉल्ट राइफल, सब-मशीन गन और पिस्टल जैसे कई प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है।
कंपनी की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, वह डिजाइन से लेकर क्वालिफिकेशन और सीरियल प्रोडक्शन तक छोटे हथियारों को इन-हाउस विकसित करने वाली इंटीग्रेटेड ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर है। उसके पास असॉल्ट राइफल, स्नाइपर राइफल, प्रिसीजन राइफल, सब-मशीन गन और हैंडगन समेत 12 प्लेटफॉर्म का पोर्टफोलियो है।
कंपनी पहले भी अपनी स्नाइपर राइफलें विदेश भेज चुकी है। उसके असॉल्ट राइफल प्लेटफॉर्म पुलिस बलों और स्पेशियल सिक्युरिटी यूनिट्स के साथ भी जुड़े रहे हैं। लेकिन भारतीय सेना के लिए टी-12 शॉटगन की खरीद बेहद अहम है, क्योंकि कंपनी पहली बार सेना को कोई ऑर्डर सप्लाई करेगी। (T-12 Shotgun Indian Army)
क्या है टी-12
टी-12 एक 12 गेज, गैस-ऑपरेटेड और मैगजीन-फेड सेमी-ऑटोमैटिक शॉटगन है। गैस-ऑपरेटेड सिस्टम में फायरिंग के बाद निकलने वाली गैस का एक हिस्सा अगले कारतूस को चैंबर में लाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होता है। इससे सैनिक को हर शॉट के बाद हथियार को हाथ से चलाने की जरूरत नहीं पड़ती और वह तेजी से अगला शॉट फायर कर सकता है।
सेमी-ऑटोमैटिक का मतलब है कि ट्रिगर दबाने पर एक राउंड फायर होगा और अगला राउंड अपने आप चैंबर में आ जाएगा। हर फायर के लिए ट्रिगर दोबारा दबाना होता है। यह सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक फायर से अलग है।
टी-12 का वजन करीब 3.8 किलोग्राम है। छोटे हथियार में वजन का महत्व बहुत ज्यादा होता है, क्योंकि सैनिक इसे लंबे समय तक लेकर चलता है। यदि हथियार भारी हो तो तेज मूवमेंट में परेशानी हो सकती है। वहीं बहुत हल्के हथियार में रिकॉइल यानी फायरिंग के बाद पीछे लगने वाला झटका बढ़ सकता है। इसलिए डिजाइन में वजन और नियंत्रण के बीच संतुलन जरूरी होता है।
इस शॉटगन में पांच राउंड क्षमता वाली डिटैचेबल मैगजीन का उपयोग किया जाता है। डिटैचेबल मैगजीन यानी खाली होने पर मैगजीन को निकालकर दूसरी भरी हुई मैगजीन लगाई जा सकती है। इससे पारंपरिक ट्यूब मैगजीन वाली शॉटगन की तुलना में रीलोडिंग का तरीका अलग हो जाता है। (T-12 Shotgun Indian Army)
क्या है 12 गेज का मतलब
12 गेज शॉटगन का कैलिबर बताने का पारंपरिक तरीका है। यह राइफल के 5.56 एमएम या 7.62 एमएम कैलिबर से अलग सिस्टम है। 12 गेज शॉटगन कारतूस में अलग-अलग तरह के लोड इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इनमें ट्रेनिंग के लिए कम रिकॉइल लोड, नजदीकी टारगेट के लिए शॉट कारतूस और दरवाजा तोड़ने के लिए विशेष ब्रीचिंग राउंड शामिल हो सकते हैं।
शॉट कारतूस में एक ही गोली के बजाय कई छोटे पेलेट होते हैं। फायर होने के बाद ये पेलेट आगे फैलते हैं। इसी कारण नजदीकी दूरी पर छोटे और तेज टारगेट के खिलाफ इसका उपयोग उपयोगी माना जाता है। ड्रोन रोधी भूमिका में भी यही विशेषता महत्वपूर्ण बनती है, क्योंकि एक छोटे हवाई टारगेट को निशाना बनाने के लिए पेलेट पैटर्न अधिक क्षेत्र कवर कर सकता है।
हालांकि शॉटगन की प्रभावशीलता दूरी, कारतूस के प्रकार, चोक, मौसम, टारगेट की स्पीडऔर शूटर की स्थिति पर निर्भर करती है। इसलिए इसे हर स्थिति में एंटी-ड्रोन सोल्यूशन्स नहीं माना जाता। (T-12 Shotgun Indian Army)
20 इंच बैरल और मल्टी-चोक
टी-12 में 20 इंच बैरल दिया गया है। बहुत लंबा बैरल खुली जगह में उपयोगी हो सकता है, लेकिन बिल्डिंग, बंकर, वाहन या संकरी जगह में उसे संभालना कठिन हो सकता है। 20 इंच बैरल को नजदीकी और सीमित दूरी के ऑपरेशन के लिए संतुलन वाला साइज माना जाता है।
कंपनी के अनुसार, इसमें मल्टी-चोक क्षमता है। चोक बैरल के मुहाने पर बना ऐसा हिस्सा होता है जो फायर होने के बाद पेलेट के फैलाव को प्रभावित करता है। अलग चोक के जरिए पेलेट पैटर्न को अपेक्षाकृत ज्यादा फैला हुआ या ज्यादा केंद्रित रखा जा सकता है।
ड्रोन के खिलाफ इस्तेमाल में पेलेट का फैलाव महत्वपूर्ण हो सकता है। बहुत ज्यादा फैलाव होने पर दूरी बढ़ने के साथ ऊर्जा कम हो सकती है। बहुत ज्यादा संकुचित पैटर्न होने पर तेज और छोटे टारगेट को निशाना बनाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए मिशन के अनुसार चोक और गोला-बारूद का चुनाव किया जाता है।
टी-12 की प्रभावी रेंज करीब 50 से 80 मीटर है, जबकि परिस्थितियों और गोला-बारूद के आधार पर इसकी पहुंच 100 मीटर तक जा सकती है। कंपनी प्रमुख विवेक कृष्णन ने कहा है कि आने वाले ड्रोन को गिराने के लिए यह हथियार उपयोगी है, क्योंकि इसके कारतूस से पेलेट निकलते हैं। (T-12 Shotgun Indian Army)
ड्रोन खतरे के बीच शॉटगन की जरूरत क्यों बढ़ी
रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया भर की सेनाओं को दिखाया है कि सस्ते और छोटे ड्रोन भी सैनिकों, बंकरों, वाहनों और रसद ठिकानों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन में ऑपरेटर कैमरे के जरिए ड्रोन को टारगेट तक ले जाता है। ऐसे ड्रोन बहुत कम ऊंचाई पर और तेजी से आ सकते हैं।
बड़े ड्रोन को रडार, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, मिसाइल या एंटी-एयरक्राफ्ट गन से निशाना बनाया जा सकता है। लेकिन छोटे ड्रोन के मामले में हर बार महंगे सिस्टम का उपयोग व्यावहारिक नहीं होता। इसके अलावा ड्रोन कई बार पेड़, इमारत, पहाड़ी या जमीन की सतह के करीब उड़ते हैं, जहां उनकी पहचान और प्रतिक्रिया का समय कम हो जाता है।
ऐसी स्थिति में पैदल सैनिक के पास मौजूद शॉटगन सुरक्षा का एक साधन बन सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि शॉटगन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर या एंटी-ड्रोन रडार की जगह लेगी। बल्कि यह मल्टी-लेवल काउंटर-ड्रोन सिस्टम का नजदीकी स्तर का हिस्सा होती है। (T-12 Shotgun Indian Army)
ब्रीचिंग और क्लोज क्वार्टर बैटल में इस्तेमाल
टी-12 का दूसरा महत्वपूर्ण इस्तेमाल क्लोज क्वार्टर बैटल में है। क्लोज क्वार्टर बैटल का मतलब ऐसी लड़ाई है जो कम दूरी पर होती है, जैसे इमारत के भीतर, कमरे में, संकरी गली में, बंकर में या वाहन के आसपास।
ऐसी स्थिति में लंबी राइफल को तेजी से घुमाना और टारगेट पर लाना मुश्किल हो सकता है। शॉटगन का कॉम्पैक्ट डिजाइन और कम दूरी पर प्रभावी पैटर्न इसे कुछ विशेष मिशनों के लिए उपयोगी बनाता है।
ब्रीचिंग ऑपरेशन में किसी बंद दरवाजे या बाधा को नियंत्रित तरीके से तोड़ना शामिल होता है। इसके लिए विशेष ब्रीचिंग राउंड इस्तेमाल किए जाते हैं। इनका उद्देश्य दरवाजे के लॉक, हिंज या लॉकिंग मैकेनिज्म को नुकसान पहुंचाना होता है, ताकि सैनिक तेजी से प्रवेश कर सकें। ऐसे ऑपरेशन में सुरक्षा नियम, दूरी और कोण बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
आतंकवाद रोधी अभियान, बंधक बचाव, तलाशी अभियान और शहरी क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई के दौरान इस तरह के हथियार की जरूरत पड़ सकती है। (T-12 Shotgun Indian Army)
पिकाटिनी रेल से ऑप्टिक्स और एक्सेसरीज की सुविधा
टी-12 में पिकाटिनी रेल दी गई है। यह हथियार के ऊपर या अन्य हिस्सों में बनी मानक रेल होती है, जिस पर अलग-अलग उपकरण लगाए जा सकते हैं। इसमें रेड डॉट साइट, ऑप्टिकल साइट, टॉर्च, लेजर पॉइंटर या मिशन के अनुसार अन्य एक्सेसरीज शामिल हो सकती हैं।
रात के ऑपरेशन में टॉर्च या नाइट साइट उपयोगी हो सकती है। नजदीकी दूरी पर रेड डॉट साइट से टारगेट पर तेजी से निशाना लगाने में मदद मिल सकती है। लेजर पॉइंटर कुछ विशेष परिस्थितियों में उपयोगी होता है, हालांकि इसका इस्तेमाल ऑपरेशनल नियमों और सुरक्षा के अनुसार किया जाता है।
मॉड्यूलर डिजाइन का अर्थ यही है कि एक ही हथियार को अलग मिशन के लिए अलग तरीके से कॉन्फिगर किया जा सके। यदि यूनिट को ड्रोन रोधी भूमिका में उपयोग करना है, तो अलग साइट और कारतूस चुने जा सकते हैं। यदि बिल्डिंग क्लियरिंग करनी है, तो कॉम्पैक्ट सेटअप और अलग एक्सेसरीज का उपयोग किया जा सकता है। (T-12 Shotgun Indian Army)


