📍नई दिल्ली | 27 Jun, 2026, 5:24 PM
Indian Army Leadership Reshuffle 2026: एक जुलाई से भारतीय सेना में कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। एक तरफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी के रिटायर होने के बाद जनरल धीरज सेठ नए आर्मी चीफ की जिम्मेदारी संभालेंगे। तो वहीं, सेना की दो महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमांड, सदर्न कमांड और साउथ वेस्टर्न कमांड को नए जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) मिल रहे हैं। इसके अलावा सेना को नया वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ भी मिलेगा, जिसकी जिम्मेदारी भी तक जनरल धीरज सेठ के पास थी।
इसके साथ ही पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की सुरक्षा संभालने वाली 14 कोर यानी फायर एंड फ्यूरी कोर और भारतीय सेन की 2 स्ट्राइक कोर का नेतृत्व भी बदल रहा है।
Indian Army Leadership Reshuffle 2026: सदर्न कमांड की जिम्मेदारी संभालेंगे लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर
लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर फिलहाल अंबाला स्थित 2 कोर यानी खड़गा कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग हैं। करीब 35 सालों का सैन्य अनुभव रखने वाले लेफ्टिनेंट जनरल पुष्कर भारतीय सेना की आर्मर्ड कोर से आते हैं। वह 74 आर्मर्ड रेजिमेंट, जिसे “डेजर्ट हॉक्स” के नाम से भी जाना जाता है, उसके कर्नल भी हैं। यह रेजिमेंट टी-90 मुख्य युद्धक टैंकों से लैस है।
सूत्रों के अनुसार, उन्होंने अपने सैन्य करियर में ऑपरेशनल क्षेत्र में आर्मर्ड रेजिमेंट की कमान संभाली, एक स्ट्रैटेजिक इंडिपेंडेंट आर्मर्ड ब्रिगेड का नेतृत्व किया और पश्चिमी क्षेत्र में एक इन्फैंट्री डिवीजन की भी कमान संभाली। आर्मर्ड कोर के अधिकारी द्वारा इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभालना सेना में महत्वपूर्ण अनुभव माना जाता है क्योंकि इससे अलग-अलग प्रकार के युद्ध संचालन का व्यावहारिक अनुभव मिलता है।
विदेशों में भी निभा चुके हैं अहम जिम्मेदारी
रक्षा सूत्रों के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल पुष्कर केवल फील्ड कमांड तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने भूटान में भारतीय सैन्य प्रशिक्षण दल में भी सेवा दी है। इसके अलावा वह मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में डिफेंस अटैची भी रहे, जहां उनके पास आर्मेनिया और बेलारूस की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी थी।
उन्होंने सेना मुख्यालय में डायरेक्टर जनरल टेरिटोरियल आर्मी के रूप में भी कार्य किया। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट और नेशनल डिफेंस कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से उन्होंने उच्च सैन्य शिक्षा प्राप्त की है। (Indian Army Leadership Reshuffle 2026)
सदर्न कमांड क्यों है इतनी महत्वपूर्ण
पुणे स्थित सदर्न कमांड भारतीय सेना की सबसे बड़े भौगोलिक इलाके वाली कमांड मानी जाती है। इसके अधीन महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात के कई हिस्से और केंद्र शासित प्रदेश आते हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह कमांड केवल शांति क्षेत्र की जिम्मेदारी नहीं संभालती। बल्कि ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक सपोर्ट, सैन्य अभ्यास, तटीय सुरक्षा में सहयोग, आपदा राहत अभियान और स्ट्राइक फॉर्मेशन की तैयारी भी इसी कमांड की अहम जिम्मेदारी होती है।
युद्ध की स्थिति में दक्षिण भारत से सैनिकों, हथियारों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही का बड़ा हिस्सा भी इसी कमांड के जरिए ऑपरेट किया जाता है। (Indian Army Leadership Reshuffle 2026)
🚨 Breaking | Indian Army Leadership Update
Lt Gen Manish Luthra is set to take over as the new General Officer Commanding (GOC) of the prestigious 2 Corps, one of the Indian Army’s key strike formations.
Meanwhile, Maj Gen Madanraj Pande will assume command of the…
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) June 19, 2026
जयपुर स्थित साउथ वेस्टर्न कमांड को मिले नए कमांडर
भारतीय सेना की साउथ वेस्टर्न कमांड की जिम्मेदारी अब लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा संभालेंगे। वह फिलहाल कोलकाता स्थित ईस्टर्न कमांड में चीफ ऑफ स्टाफ के पद पर कार्यरत हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल मल्होत्रा वर्ष 1989 में भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होकर 47 आर्मर्ड रेजिमेंट में कमीशन हुए थे। अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने आर्मर्ड रेजिमेंट, इंडिपेंडेंट आर्मर्ड ब्रिगेड, पटियाला स्थित पहली आर्मर्ड डिवीजन और जोधपुर स्थित 12 कोर की कमान संभाली है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और सेना मेडल सहित कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्होंने ब्रिटेन में एडवांस्ड कमांड एंड स्टाफ कोर्स भी किया है। (Indian Army Leadership Reshuffle 2026)
पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा में अहम भूमिका
जयपुर स्थित साउथ वेस्टर्न कमांड भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमांड में गिनी जाती है। इसका जिम्मा राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा करना है।
यह इलाका खुले रेगिस्तान, लंबी सीमा और तेज गति से आर्मर्ड कॉम्बैट ऑपरेशंस के लिए जाना जाता है। इसलिए यहां आर्मर्ड फॉर्मेशन और मैकेनाइज्ड यूनिट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आर्मर्ड कोर के अधिकारी का इस कमांड का नेतृत्व संभालना रेगिस्तानी युद्ध संचालन के अनुभव के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। (Indian Army Leadership Reshuffle 2026)
दोनों प्रमुख कमांड अब आर्मर्ड कोर अधिकारियों के पास
रक्षा सूत्रों के अनुसार, सदर्न कमांड और साउथ वेस्टर्न कमांड दोनों की जिम्मेदारी अब आर्मर्ड कोर के वरिष्ठ अधिकारियों के पास होगी। इससे पहले इन दोनों कमांड की जिम्मेदारी इन्फैंट्री पृष्ठभूमि के अधिकारी संभाल रहे थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय सेना में अलग-अलग हथियार शाखाओं के अधिकारियों को समय-समय पर विभिन्न कमांड देने की परंपरा रही है। इससे नेतृत्व का अनुभव व्यापक होता है और अलग-अलग युद्ध परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलता है। (Indian Army Leadership Reshuffle 2026)
पूर्वी लद्दाख में बदलेगा 14 कोर का नेतृत्व
इसी बीच भारतीय सेना की 14 कोर में भी नेतृत्व परिवर्तन हो रहा है। लेह स्थित इस कोर का मुख्यालय दुनिया के सबसे ऊंचे सैन्य मुख्यालयों में गिना जाता है।
इसी कोर के जिम्मे पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा की सुरक्षा, सियाचिन ग्लेशियर और पूरे उच्च हिमालयी क्षेत्र में सैन्य संचालन की जिम्मेदारी होती है। इसी वजह से इसे “फायर एंड फ्यूरी कोर” के नाम से भी जाना जाता है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, मौजूदा कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला अब नॉर्दर्न कमांड में चीफ ऑफ स्टाफ बनेंगे। उनकी जगह मेजर जनरल मदनराज पांडे पदोन्नति के बाद कोर कमांडर का पद संभालेंगे।
सबसे लंबे समय तक रहे 14 कोर कमांडर
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला ने करीब 24 महीने तक 14 कोर की कमान संभाली। यह सामान्य अवधि से काफी अधिक है।
आमतौर पर ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात कोर कमांडरों का कार्यकाल 13 से 15 महीने के बीच रहता है। कठिन मौसम, लगातार ऑपरेशनल दबाव और विशेष परिस्थितियों के कारण यहां लंबे समय तक एक ही अधिकारी की तैनाती कम देखने को मिलती है।
उनके कार्यकाल के दौरान भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए। (Indian Army Leadership Reshuffle 2026)
नए कोर कमांडर की भूमिका क्यों अहम होगी
सूत्रों के अनुसार, अक्टूबर 2024 में भारत और चीन के बीच देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी को लेकर सहमति बनी थी। इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं ने तय प्रक्रिया के तहत पीछे हटने का काम पूरा किया।
अब देपसांग के पांच और डेमचोक के दो पेट्रोलिंग प्वाइंट पर अप्रैल 2020 से पहले की तरह गश्त फिर शुरू हो चुकी है। हालांकि जिन इलाकों में पहले सैनिक पीछे हटे थे, वहां कुछ बफर जोन अभी भी बने हुए हैं।
पिछले महीने भारत और चीन के बीच सीमा मामलों पर बातचीत और समन्वय के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म यानी डब्ल्यूएमसीसी की बैठक भी हुई थी। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद कोर कमांडर स्तर की अगली बैठक होने की संभावना है।
ऐसी स्थिति में भारतीय पक्ष का नेतृत्व नए कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मदनराज पांडे कर सकते हैं।
कोर कमांडर स्तर की इन बैठकों में सीमा पर सैनिकों की तैनाती, गश्त, आपसी समन्वय और तनाव कम करने से जुड़े सैन्य मुद्दों पर चर्चा होती है।
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन बने नए वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन को भारतीय सेना का नया वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (वीसीओएएस) नियुक्त किया गया है। वह अब तक पुणे स्थित सदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने 1 अप्रैल 2026 को सदर्न कमांड की कमान संभाली थी। इससे पहले इसी पद पर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ थे, जिन्हें बाद में वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाया गया और अब वे 30 जून से भारतीय सेना के नए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) का पद संभालेंगे।
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन भारतीय सेना की 13 महार रेजिमेंट से हैं। उन्हें 11 जून 1988 को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सेना में कमीशन मिला था। करीब 38 वर्षों के सैन्य करियर में उन्होंने ऑपरेशनल, प्रशिक्षण और स्टाफ नियुक्तियों सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह 1 अगस्त 2024 से महार रेजिमेंट के कर्नल भी हैं। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें साल 2022 में सेना मेडल (एसएम) और 2025 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) से सम्मानित किया गया।
उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला, भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन और केन्या के नेशनल डिफेंस कॉलेज से उच्च सैन्य शिक्षा प्राप्त की है।
अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने वर्ष 2022 में नॉर्दर्न कमांड की 16 कोर (पिवट कोर) की कमान संभाली। इसके बाद फरवरी 2024 से जून 2025 तक वह इंडियन मिलिट्री अकादमी (आईएमए), देहरादून के कमांडेंट रहे, जहां भविष्य के सैन्य अधिकारियों के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी उनके पास थी। जून 2025 से मार्च 2026 तक उन्होंने सदर्न कमांड में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में काम किया और सेना की क्षमता बढ़ाने तथा फोर्स री-स्ट्रक्चरिंग से जुड़े कार्यों में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद 1 अप्रैल 2026 को उन्हें सदर्न कमांड का जीओसी-इन-सी नियुक्त किया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल जैन ने ऑपरेशनल क्षेत्र में इन्फैंट्री बटालियन की कमान संभाली, स्ट्राइक कोर के तहत इन्फैंट्री ब्रिगेड का नेतृत्व किया और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स की कमान भी संभाली। इसके अलावा वह दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के दौरान सेक्टर कमांडर रहे और इथियोपिया में मिलिट्री ऑब्जर्वर के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। सेना मुख्यालय में उन्होंने मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट, मिलिट्री सेक्रेटरी ब्रांच और डायरेक्टर जनरल (कैपेबिलिटी डेवलपमेंट) जैसे महत्वपूर्ण स्टाफ पदों पर भी काम किया। (Indian Army Leadership Reshuffle 2026)
खड़गा कोर की कमान संभालेंगे लेफ्टिनेंट जनरल मनीष लूथरा
लेफ्टिनेंट जनरल मनीष लूथरा जल्द ही अंबाला स्थित भारतीय सेना की 2 कोर (खड़गा कोर) के नए जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) की जिम्मेदारी संभालेंगे। 2 कोर भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित स्ट्राइक कोर में से एक मानी जाती है। यह पश्चिमी मोर्चे पर जरूरत पड़ने पर तेज गति से सैन्य कार्रवाई करने वाली प्रमुख फॉर्मेशन है।
लेफ्टिनेंट जनरल मनीष लूथरा इन्फैंट्री के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वह फिलहाल सेना मुख्यालय, नई दिल्ली में डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अक्टूबर 2025 में यह जिम्मेदारी संभाली थी। डीजीएमओ के तौर पर उनके पास देशभर में सेना के ऑपरेशनल प्लान, सैन्य अभियानों की निगरानी और रणनीतिक स्तर पर फैसलों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य रहे हैं। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) से सम्मानित किया जा चुका है।
करीब 38 सालों के सैन्य करियर में लेफ्टिनेंट जनरल लूथरा ने फील्ड और सेना मुख्यालय दोनों जगह कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में इंजीनियर ब्रिगेड की कमान संभाली, सीमा क्षेत्र में इन्फैंट्री ब्रिगेड का नेतृत्व किया और मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट में असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस के रूप में भी काम किया। डीजीएमओ बनने से पहले भी वह सैन्य अभियानों की योजना बनाने और ऑपरेशनल रणनीति तैयार करने से जुड़े रहे हैं।
रक्षा मामलों और भविष्य के युद्ध पर उनका अच्छा अनुभव माना जाता है। उन्होंने आधुनिक युद्ध, नई सैन्य तकनीक और भारतीय सेना की भविष्य की रणनीति जैसे विषयों पर कई महत्वपूर्ण व्याख्यान भी दिए हैं।
अंबाला स्थित 2 कोर (खड़गा कोर) भारतीय सेना की सबसे पुरानी और प्रमुख स्ट्राइक कोर में से एक है। यह वेस्टर्न कमांड के तहत काम करती है और जरूरत पड़ने पर पश्चिमी सीमा पर बड़े सैन्य अभियान चलाने की क्षमता रखती है। इस कोर में आर्मर्ड, मैकेनाइज्ड और अन्य लड़ाकू फॉर्मेशन शामिल हैं, जिन्हें तेजी से कार्रवाई के लिए तैयार रखा जाता है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल मनीष लूथरा की यह नियुक्ति हाल में हुए सेना के बड़े नेतृत्व बदलाव का हिस्सा है। वह लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर की जगह लेंगे, जिन्हें सदर्न कमांड का जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ बनाया गया है। (Indian Army Leadership Reshuffle 2026)



