HomeGeopoliticsचाहे चीन हो या पाकिस्तान, बैकचैनल बातचीत में क्यों आता है संघ...

चाहे चीन हो या पाकिस्तान, बैकचैनल बातचीत में क्यों आता है संघ के राम माधव का नाम? कोलंबो ट्रैक-2 मीटिंग में ISI की एंट्री!

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ट्रैक-1 बातचीत वह होती है जिसमें दोनों देशों के मौजूदा सरकारी अधिकारी सीधे बातचीत करते हैं। इसमें विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय या अन्य सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली/कोलंबो | 27 Jun, 2026, 1:17 PM

India-Pakistan Track-2 Talks: भारत और पाकिस्तान के बीच सरकारी स्तर पर औपचारिक बातचीत भले ही लंबे समय से रुकी हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच बैकचैनल संपर्क पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। इस सप्ताह श्रीलंका की राजधानी कोलंबो और थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच ट्रैक-2 और ट्रैक-1.5 स्तर की बातचीत हुई। खास बात यह रही कि इन बैठकों भारत फाउंडेशन के अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव, पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे और पूर्व राजनयिक रुचि घनश्याम शामिल थीं। इन बैठकों में आतंकवाद, सिंधु जल संधि, संकट के समय दोनों देशों के बीच कम्युनिकेशन बनाए रखने की व्यवस्था और तनाव बढ़ने से रोकने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों का सबसे बड़ा उद्देश्य किसी नए समझौते पर पहुंचना नहीं था, बल्कि ऐसे संवाद के रास्ते खुले रखना था जिनका इस्तेमाल भविष्य में किसी संकट के दौरान किया जा सके। दोनों देशों के बीच आधिकारिक वार्ता अभी भी शुरू नहीं हुई है, लेकिन बैकचैनल स्तर पर बातचीत जारी रहने को दोनों पक्षों के बीच संपर्क बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

India-Pakistan Track-2 Talks: पाकिस्तान ही नहीं, चीन के साथ वार्ता में भी आया था राम माधव का नाम

इसकी एक बड़ी वजह यह है कि वह इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं। यह एक थिंक-टैंक है, जो चीन के साथ ट्रैक-2 यानी अनौपचारिक संवाद के कई कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। इस मंच के जरिए भारतीय और चीनी विशेषज्ञ, पूर्व अधिकारी और रणनीतिक मामलों के जानकार कई बार बातचीत कर चुके हैं। इसके तहत भारतीय प्रतिनिधिमंडल शंघाई और ल्हासा जैसे शहरों का भी दौरा कर चुका है।

राम माधव ने भारत-चीन संबंधों, सीमा विवाद और गलवान जैसी घटनाओं पर कई लेख भी लिखे हैं। उनका मानना रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर सख्त रुख बनाए रखते हुए भी बातचीत के रास्ते खुले रहने चाहिए।

इसी वजह से जब भी चीन या पाकिस्तान के साथ ट्रैक-2 या बैकचैनल बातचीत की खबर आती है, तो राम माधव का नाम अक्सर चर्चा में रहता है। पाकिस्तान के मामले में वह हाल में कोलंबो में हुई ट्रैक-2 बैठक में शामिल हुए थे, जबकि चीन से जुड़े कई अनौपचारिक संवादों में भी वह पहले हिस्सा ले चुके हैं। (India-Pakistan Track-2 Talks)

सरकारी बातचीत बंद, लेकिन बैकचैनल संपर्क जारी

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद और अधिक तनावपूर्ण हो गए थे। उस हमले में 20 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की। 10 मई 2025 को संघर्ष विराम लागू होने के बाद सीमा पर हालात को शांत हो गए, लेकिन राजनीतिक और कूटनीतिक रिश्ते सामान्य नहीं हो सके।

भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच विदेश सचिव स्तर या अन्य औपचारिक सरकारी वार्ताएं अभी भी शुरू नहीं हुई हैं। व्यापार सीमित है, दोनों देशों के उच्चायोग कम स्टाफ के साथ काम कर रहे हैं और लोगों के बीच आवाजाही भी पहले की तुलना में काफी कम है।

इसी माहौल में ट्रैक-2 और ट्रैक-1.5 जैसी अनौपचारिक बातचीत दोनों देशों के बीच संवाद का एकमात्र सक्रिय माध्यम बनी हुई है। (India-Pakistan Track-2 Talks)

क्या होती है ट्रैक-2 और ट्रैक-1.5 बातचीत

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ट्रैक-1 बातचीत वह होती है जिसमें दोनों देशों के मौजूदा सरकारी अधिकारी सीधे बातचीत करते हैं। इसमें विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय या अन्य सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

इसके विपरीत ट्रैक-2 संवाद पूरी तरह अनौपचारिक होता है। रिटायर्ड डिप्लोमेट्स पूर्व सैन्य अधिकारी, रणनीतिक मामलों के जानकार, शिक्षाविद, पत्रकार और थिंक टैंक से जुड़े लोग हिस्सा लेते हैं। इन बैठकों में कोई आधिकारिक समझौता नहीं होता, लेकिन संवेदनशील मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है।

यह भी पढ़ें:  रेड कॉरिडोर से विकास के गलियारे तक: कैसे खत्म हुआ 50 साल का नक्सल संकट

ट्रैक-1.5 को दोनों के बीच का मॉडल माना जाता है। इसमें गैर-सरकारी विशेषज्ञों के साथ कुछ मौजूदा सरकारी अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि वे आधिकारिक वार्ताकार की भूमिका में नहीं होते। (India-Pakistan Track-2 Talks)

कोलंबो बैठक में किन लोगों ने लिया हिस्सा

सूत्रों के अनुसार, कोलंबो में आयोजित क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने अलग से डेढ़ दिन तक बातचीत की। यह सम्मेलन लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) की ओर से आयोजित किया गया था।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में भारत फाउंडेशन के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव, पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे और पूर्व राजनयिक रुचि घनश्याम शामिल थीं।

सूत्रों के मुताबिक, 21 से 24 जून के बीच श्रीलंका दौरे पर रहे अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री एस. पॉल कपूर ने आईआईएसएस की ओर से आयोजित सम्मेलन के प्रतिभागियों के लिए रखे गए रात्रिभोज में हिस्सा लिया। इस सीमित आमंत्रण वाले कार्यक्रम में भारत और पाकिस्तान के कुछ प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

पाकिस्तान की ओर से पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व राजदूत शेरी रहमान, बॉलिवुड एक्टर सैफ अली खान के चाचा रिटायर्ड मेजर जनरल इस्फंदियार अली खान पटौदी और विदेश मंत्रालय के दक्षिण एशिया एवं सार्क प्रभाग के महानिदेशक सज्जाद हैदर खान मौजूद थे।

बता दें कि शेरी रहमान 2011 से 2013 के बीच अमेरिका में पाकिस्तान की राजदूत भी रह चुकी हैं। वहीं, मेजर जनरल पटौदी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई में भी सेवाएं दे चुके हैं और सेना में एक मैकेनाइज्ड डिवीजन की कमान संभाल चुके हैं। पीपीपी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है।

सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से एक मौजूदा अधिकारी की मौजूदगी के कारण कुछ हलकों में इसे ट्रैक-1.5 संवाद भी कहा गया, हालांकि भारती की तरफ से कोई मौजूदा सरकारी अधिकारी बैठक में शामिल नहीं था।

आतंकवाद और जल विवाद पर हुई खुल कर चर्चा

बैठक में आतंकवाद सबसे महत्वपूर्ण विषयों में रहा। दोनों पक्षों ने इस मुद्दे पर अपने-अपने विचार रखे। इसके अलावा सीमा पार नदियों के जल बंटवारे और सिंधु जल संधि से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार, संकट के समय दोनों देशों के बीच संवाद व्यवस्था को मजबूत करने और सैन्य तनाव को बढ़ने से रोकने के तरीकों पर भी विस्तार से विचार हुआ।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि इन अनौपचारिक बैठकों से निकलने वाले विचारों को भविष्य में औपचारिक ट्रैक-1 स्तर तक किस तरह पहुंचाया जा सकता है। हालांकि इस विषय पर कोई औपचारिक निर्णय सामने नहीं आया।

बैठक से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस दौर की बातचीत से कोई बड़ा या ठोस परिणाम सामने नहीं आया। इसे मुख्य रूप से संपर्क बनाए रखने और दोनों पक्षों की सोच समझने की प्रक्रिया के रूप में देखा गया।

पाकिस्तानी मीडिया में ऐसी खबरें भी सामने आईं कि भारत ने सिंधु जल संधि बहाल करने के बदले पाकिस्तान से अपना हवाई क्षेत्र खोलने की बात कही थी। हालांकि बैठक में शामिल एक पाकिस्तानी प्रतिभागी ने इन दावों से इनकार किया और कहा कि ऐसी कोई पेशकश नहीं की गई। (India-Pakistan Track-2 Talks)

बैंकॉक में भी हुई थी बातचीत

सूत्रों के अनुसार, कोलंबो के अलावा बैंकॉक में भी इसी सप्ताह भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच ट्रैक-2 स्तर की चर्चा हुई। वहां भी क्राइसिस मैनेजमेंट, आतंकवाद, जल विवाद और संवाद के चैनल खुले रखने पर चर्चा हुई।

इन बैठकों में दोनों पक्षों ने मौजूदा हालात पर अपने-अपने दृष्टिकोण रखे। साथ ही यह भी चर्चा हुई कि यदि भविष्य में किसी तरह का तनाव पैदा होता है तो संचार व्यवस्था किस प्रकार सक्रिय रखी जा सकती है। (India-Pakistan Track-2 Talks)

यह भी पढ़ें:  Indian Army BrahMos Test: भारतीय सेना ने किया बंगाल की खाड़ी में ब्रह्मोस का टेस्ट, सफलतापूर्वक पूरा किया लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन स्ट्राइक मिशन

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का है सपोर्ट

बैठक में जो चेहरा बार-बार सामने आ रहा है वह है संघ के पूर्व प्रचारक राम माधव का। खास बात यह है कि वे इससे पहले चीन से वार्ता शुरू होने से पहले उन्होंने ही ट्रैक-2 की डिप्लोमेसी को लीड किया था। रक्षा समाचार ने इसकी खबर भी प्रकाशित की थी। “China-India Talks: बड़ा खुलासा! भारत-चीन वार्ता से पहले भाजपा के इस थिंकटैंक ने किया था बीजिंग का सीक्रेट दौरा, कूटनीतिक संबंधों की बहाली को लेकर की थी बात।” यह दौरा देशों के नेताओं और विशेष प्रतिनिधियों डोभाल और वांग यी के बीच हुई बैठक से पहले हुआ था, जिसमें पूर्वी लद्दाख में तनाव को कम करने और डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने को लेकर बातचीत की गई थी।

इससे पहले मई और जून में संघ के दो बड़े नेताओं ने पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर अहम बातें कही थीं। संघ का मानना है कि बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होना चाहिए।

संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने मई 2026 में कहा था कि अगर पाकिस्तान पुलवामा जैसे आतंकी हमलों की कोशिश करता है, तो भारत को उसका कड़ा जवाब देना चाहिए। देश की सुरक्षा और सम्मान सबसे पहले हैं।

लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि बातचीत के सभी रास्ते बंद नहीं होने चाहिए। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच हमेशा संवाद का कोई न कोई माध्यम खुला रहना चाहिए। इसी वजह से राजनयिक संबंध, व्यापार और वीजा जैसी व्यवस्थाएं पूरी तरह खत्म नहीं की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ने से तनाव कम हो सकता है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्ते हैं और कभी दोनों एक ही देश का हिस्सा थे। उनका मानना है कि लोगों के बीच बातचीत भविष्य में रिश्ते सामान्य बनाने में मदद कर सकती है।

वहीं, जून 2026 में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने होसबोले के बयान का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में भी ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि भारत का बंटवारा गलत था। वहां कुछ पत्रकार और बुद्धिजीवी भी हैं जो संघ के काम की सराहना करते हैं। उनका कहना था कि पाकिस्तान में एक ऐसा वर्ग भी है जो दो-राष्ट्र सिद्धांत से सहमत नहीं है और मानता है कि दोनों देशों का साथ रहना बेहतर होता।

भागवत ने कहा कि अगर भविष्य में कभी भारत किसी युद्ध में पाकिस्तान पर बड़ी जीत हासिल करता है, तो वहां के लोगों के साथ शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए बातचीत जरूरी होगी। इसलिए संवाद के रास्ते खुले रहने चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि “हम हिटलर जैसे नहीं हैं।” उनका मतलब था कि भारत की सोच बदले की नहीं, बल्कि न्याय और शांति की है। इसलिए जहां जरूरी हो, वहां बातचीत के लिए कुछ रास्ते खुले रखने चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा था कि संघ की अपनी अलग विदेश नीति नहीं है। पाकिस्तान के मामले में संगठन केंद्र सरकार की नीति का ही समर्थन करता है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि होसबोले की बातें पाकिस्तान की सरकार या सेना के बारे में नहीं थीं, बल्कि वहां के आम लोगों के संदर्भ में थीं। (India-Pakistan Track-2 Talks)

राम माधव ने किया इनकार

हालांकि राम माधव का कहना है कि इस पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनके मुताबिक, यह भारत और पाकिस्तान के बीच कोई अलग ट्रैक-2 वार्ता नहीं थी, बल्कि इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) का हर साल होने वाला दक्षिण एशिया सुरक्षा सम्मेलन था। इसमें भारत, श्रीलंका, अमेरिका, ब्रिटेन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान समेत कई देशों के विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल हुए थे। पहले भी इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के सरकारी अधिकारी हिस्सा लेते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ट्रैक-2 वार्ता सिर्फ दो देशों के बीच होती है, जबकि इस सम्मेलन में कई देशों के प्रतिभागी मौजूद थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने पूरे दो दिन चली बैठक में हिस्सा नहीं लिया था। उन्हें केवल एक सत्र में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। अपना संबोधन देने के बाद वह वहां से लौट आए। उनके अनुसार, इस पूरे मामले को बेवजह सनसनीखेज बनाकर पेश किया जा रहा है, जबकि वास्तव में इसमें कोई नई या विशेष कहानी नहीं है। (India-Pakistan Track-2 Talks)

यह भी पढ़ें:  DAC बैठक में बड़ा फैसला, 114 राफेल, स्कैल्प मिसाइल और 6 पी-8आई विमान को मंजूरी

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़े बैकचैनल संपर्क

सूत्रों के अनुसार, मई 2025 के सैन्य संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच कई बैकचैनल बैठकें हो चुकी हैं। इनमें लंदन, दोहा, पश्चिम एशिया के कुछ अन्य शहर और अब कोलंबो तथा बैंकॉक शामिल हैं।

इन बैठकों में हर बार प्रतिभागियों की सूची अलग रही है। कभी सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी शामिल हुए तो कभी पूर्व राजनयिक, सांसद, रणनीतिक विशेषज्ञ और थिंक टैंक से जुड़े लोग भी बातचीत का हिस्सा बने।

इन बैठकों का मकसद औपचारिक वार्ता की जगह लेना नहीं बल्कि ऐसे संवाद को जारी रखना है जिससे दोनों देशों के बीच पूरी तरह संपर्क समाप्त न हो। (India-Pakistan Track-2 Talks)

भारत का रुख पहले जैसा

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इन बैकचैनल संपर्कों को किसी भी तरह औपचारिक सरकारी वार्ता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। भारत का रुख पहले जैसा ही है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद जारी रहेगा, तब तक औपचारिक बातचीत संभव नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच इस समय केवल सैन्य स्तर पर डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस यानी डीजीएमओ हॉटलाइन जैसे सिस्टम एक्टिव हैं। दोनों देशों के डीजीएमओ नियमित रूप से हर बुधवार को तय प्रक्रिया के तहत संपर्क बनाए रखते हैं ताकि सीमा पर किसी गलतफहमी की स्थिति न बने। (India-Pakistan Track-2 Talks)

संवाद के लिए न्यूट्रल देशों का चयन

भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली अधिकांश ट्रैक-2 बैठकों के लिए ऐसे देशों का चयन किया जाता है जो दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य हों। श्रीलंका, कतर, थाईलैंड और कुछ पश्चिम एशियाई देशों में पहले भी ऐसी बैठकें होती रही हैं।

ऐसी बैठकों का आयोजन आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक, शोध संस्थान या सुरक्षा सम्मेलन आयोजित करने वाले संगठन करते हैं। सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधि अलग से मुलाकात कर संवेदनशील विषयों पर चर्चा करते हैं।

इस बार भी कोलंबो में आयोजित क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने अलग बैठकें कीं। इसमें किसी संयुक्त बयान या आधिकारिक दस्तावेज की जानकारी सामने नहीं आई। (India-Pakistan Track-2 Talks)

सार्वजनिक पुष्टि से दोनों पक्षों ने बनाई दूरी

दिलचस्प बात यह रही कि भारत और पाकिस्तान, दोनों सरकारों ने इन बैठकों पर सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के एक अधिकारी ने मीडिया से कहा कि उन्हें ट्रैक-1 के अलावा किसी बैठक की जानकारी नहीं है। वहीं भारत सरकार की ओर से भी इस विषय पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया।

सूत्रों का कहना है कि ट्रैक-2 या ट्रैक-1.5 बैठकों की प्रकृति ही ऐसी होती है कि उन्हें आमतौर पर सार्वजनिक प्रचार से दूर रखा जाता है। यही वजह है कि प्रतिभागियों के नाम और चर्चा के पूरे विवरण भी सीमित स्तर पर ही सामने आते हैं। (India-Pakistan Track-2 Talks)

Author

  • Herry Photo

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

Most Popular