📍नई दिल्ली | 10 May, 2026, 9:11 PM
India-Pakistan Track 2 Talks: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर बैक चैनल बातचीत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारत और पाकिस्तान के रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों और पूर्व राजनयिकों के बीच तीसरे देशों में ट्रैक-2 मीटिंग्स हुई हैं। इन बैठकों को लेकर अब देश के रणनीतिक और सुरक्षा हलकों में बहस छिड़ गई है।
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने इन बैठकों को लेकर खुलकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ऐसे समय में जब पाकिस्तान की नीति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा, तब भारत में कुछ लॉबी फिर से पाकिस्तान के साथ बातचीत बहाल करने का माहौल बनाने में जुटी है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले तीन महीनों में भारत और पाकिस्तान के रिटायर्ड जनरलों और पूर्व डिप्लोमैट्स के बीच कम से कम दो अनौपचारिक बैठकें हो चुकी हैं। इनमें से एक बैठक कतर में हुई, जबकि दूसरी किसी अन्य एशियाई देश की राजधानी में आयोजित की गई।
India-Pakistan Track 2 Talks: क्या है ट्रैक-2 बातचीत का मकसद
ट्रैक-2 डायलॉग ऐसे अनौपचारिक संवाद होते हैं, जिनमें सरकार के मौजूदा अधिकारी शामिल नहीं होते। इसमें रिटायर्ड सैन्य अधिकारी, पूर्व राजनयिक, थिंक टैंक विशेषज्ञ या रणनीतिक मामलों के जानकार हिस्सा लेते हैं।
आमतौर पर इन बैठकों का मकसद दोनों देशों के बीच तनाव कम करना, एक-दूसरे की सोच को समझना और संकट की स्थिति में बातचीत के रास्ते खुले रखना होता है। हालांकि इनका कोई आधिकारिक दर्जा नहीं होता।
भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी कई बार ऐसे ट्रैक-2 संपर्क होते रहे हैं। अतीत में बैंकॉक, दुबई, कतर और यूरोप के कुछ देशों में ऐसी बैठकें आयोजित की जाती रही हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार हुईं ऐसी बैठकें
रिपोर्ट के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के पूर्व अधिकारियों के बीच इस तरह की बातचीत हुई है।
पाकिस्तान समर्थक आतंकी संगठनों ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम दिया था। जिसके बाद भारत ने 6-7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिन तक सैन्य तनाव बना रहा।
उस दौरान डीजीएमओ हॉटलाइन के अलावा कोई एक्टिव कम्यूनिकेशन सिस्टम नहीं था। अब माना जा रहा है कि इसी अनुभव के बाद कुछ रणनीतिक हलकों में यह सोच बनी कि अगर भविष्य में कोई बड़ा संकट पैदा होता है, तो कम से कम कोई एक अनौपचारिक कम्यूनिकेशन सिस्टम मौजूद होना चाहिए।
एनएसए अजित डोभाल के ऑफिस तक पहुंची जानकारी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि इन बैठकों की जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के कार्यालय तक पहुंचाई गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट (NSCS) को पाकिस्तान की तरफ से दिखाई गई “विलिंगनेस” यानी बातचीत की इच्छा के बारे में भी जानकारी दी गई है।
हालांकि अभी तक भारत सरकार की तरफ से किसी आधिकारिक बैक चैनल को मंजूरी नहीं दी गई है।
सूत्रों के हवाले से कहा गया कि यह कोई औपचारिक बातचीत नहीं है, बल्कि केवल क्राइसिस मैनेजमेंट के दौरान कम्यूनिकेशन सिस्टम के संभावित विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
भारत की नीति में बदलाव नहीं
रिपोर्ट में साफ कहा गया कि भारत की आधिकारिक नीति अभी भी वही है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। भारत का मानना है कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद खत्म किए बिना औपचारिक बातचीत का कोई मतलब नहीं है। इसी वजह से इन ट्रैक-2 बैठकों को किसी नए शांति प्रयास या आधिकारिक डायलॉग की शुरुआत नहीं माना जा रहा।
Press reports fed by unnamed sources are appearing in our media about Track 2 talks being held between retired Indian generals and diplomats and their Pakistani counterparts in third countries .
Lobbies, international and local, seem to be promoting such meetings and the idea…
— Kanwal Sibal (@KanwalSibal) May 9, 2026
पूर्व विदेश सचिव ने उठाए सवाल
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इन बैठकों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मीडिया में ‘सूत्रों’ के जरिए जानबूझकर ऐसी खबरें प्लांट की जा रही हैं, ताकि भारत में पाकिस्तान के साथ फिर से बैक चैनल डायलॉग शुरू करने के पक्ष में माहौल बनाया जा सके।
कंवल सिब्बल ने लिखा कि कुछ अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय लॉबी इन बैठकों को बढ़ावा दे रही हैं। उनका कहना था कि इन रिपोर्टों का उद्देश्य यह दिखाना है कि आधिकारिक बातचीत बंद होने के कारण पैदा हुए “वैक्यूम” को भरने के लिए ट्रैक-2 डायलॉग जरूरी है।
उनके मुताबिक अमेरिका और पाकिस्तान के बेहतर होते संबंधों को देखकर कुछ लोग चाहते हैं कि भारत खुद ही पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू कर दे, ताकि भविष्य में अमेरिका का दबाव न बढ़े।
सिब्बल का आरोप है कि कुछ लोग चाहते हैं कि भारत पाकिस्तान के प्रति अपनी सख्त नीति को नरम कर दे, जबकि पाकिस्तान की सोच और भारत विरोधी रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक माहौल पहले जैसा मजबूत नहीं रहा और पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की भारत की कोशिशें भी पूरी तरह सफल नहीं हुईं हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पाकिस्तान की भारत विरोधी नीति में कोई बदलाव नहीं आया, तब भारत को अपनी मूल नीति क्यों बदलनी चाहिए। कंवल सिब्बल ने इसे “व्यावहारिक कूटनीति” के नाम पर “हार मानने वाली सोच” बताया। उनका कहना है कि इससे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को दिया गया सख्त संदेश कमजोर पड़ सकता है।
उनके मुताबिक कुछ लोग अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में आई गर्माहट के कारण भारत को डिफेंसिव पोजिशन स्थिति में धकेलना चाहते हैं। उन्होंने इसे “प्रैग्मैटिक डिप्लोमेसी” के नाम पर “डिफीटिस्ट एटीट्यूड” बताया।
Fully agree with @KanwalSibal. We have the misfortune that sections of our society which neither wants to understand what Pakistan wants from India nor wants to learn from experience that whenever in difficulty Pakistan begins to prod our stargazers to talk of dialogue and… https://t.co/CfpCn0pMhF
— Vikram Sood (@Vikram_Sood) May 9, 2026
पूर्व रॉ चीफ ने भी जताई चिंता
रॉ के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद ने भी कंवल सिब्बल की बातों का समर्थन किया। विक्रम सूद ने कहा कि भारत में कुछ लोग पाकिस्तान की असली सोच को समझना ही नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि हर बार जब पाकिस्तान किसी मुश्किल में फंसता है, तब वह भारत में शांति और बातचीत की बात करने वाले लोगों को आगे कर देता है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मानसिकता और नीतियां नहीं बदलेंगी।
विक्रम सूद ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने इस्लामिक और जिहादी विचारधारा की बात की थी।
उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदा नीति, पाकिस्तान को नजरअंदाज करना और जरूरत पड़ने पर जवाब देना, फिलहाल सही तरीके से काम कर रही है।
अमेरिका फैक्टर क्यों बना चर्चा का विषय
इस पूरे मामले में अमेरिका की भूमिका को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। सूत्रों के हवाले से कहा गया कि पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके करीबी अधिकारियों ने पाकिस्तान के नेतृत्व, खासकर फील्ड मार्शल असीम मुनीर को खुला समर्थन दिया है।
सूत्रों के मुताबिक भारत को चिंता है कि अगर भविष्य में कोई बड़ा आतंकी हमला होता है, तो पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। इसी वजह से भारत चाहता है कि उसके पास अपने “पॉइंट्स ऑफ एंगेजमेंट” मौजूद रहें, ताकि किसी संकट की स्थिति में अमेरिका सीधे हस्तक्षेप न करे।
क्या भारत पर अमेरिकी दबाव है?
इस पूरे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया जाने लगा कि अमेरिका भारत पर पाकिस्तान से बातचीत शुरू करने का दबाव बना रहा है। हालांकि सूत्रों ने इस पर कुछ नहीं कहा, लेकिन ये जरूर कहा कि भारत खुद चाहता है कि कोई ऐसा अनौपचारिक चैनल मौजूद रहे, जिससे किसी संकट के समय तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से बचा जा सके।
सूत्रों ने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य तनाव के दौरान वैश्विक दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण कुछ रणनीतिक हलकों में यह सोच उभरी है कि कम से कम संवाद का एक सीमित और अनौपचारिक रास्ता खुला रहना चाहिए।
पाकिस्तान में भी पावर स्ट्रक्चर में बदलाव
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान में भी पावर स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव हुआ है। पिछले साल 30 अप्रैल को पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद असीम मलिक को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी नियुक्त किया गया। वह पाकिस्तान के पहले ऐसे एनएसए बने हैं जो एक साथ आईएसआई चीफ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दोनों पद संभाल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पाकिस्तान में सैन्य और नागरिक सत्ता केंद्र लगभग एक हो गए हैं। यानी पाकिस्तान की सुरक्षा और विदेश नीति पर अब सेना का नियंत्रण पहले से ज्यादा मजबूत हो गया है।
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से इन ट्रैक-2 मीटिंग्स को संभव बनाने में अब पाकिस्तान के एनएसए और आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक की अहम भूमिका मानी जा रही है। उनक कहना है कि मई 2025 में एनएसए बनने के बाद असीम मलिक ने बैकडोर कम्युनिकेशन चैनल फिर से एक्टिव किए।
पहले ऐसी बैठकों में पाकिस्तान की तरफ से रिटायर्ड जनरल या पूर्व डिप्लोमैट शामिल होते थे, जिनकी बात को ज्यादा आधिकारिक नहीं माना जाता था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। अब इन मीटिंग्स में ऐसे लोग शामिल बताए जा रहे हैं जो सीधे पाकिस्तान के असली पावर सेंटर यानी आर्मी और आईएसआई के करीब हैं।
इसका मतलब है कि बातचीत में जो भी चर्चा होती है, उसकी जानकारी सीधे पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व तक पहुंच सकती है। इसलिए अब ट्रैक-2 मीटिंग्स को पहले से ज्यादा “अथॉरिटेटिव” माना जा रहा है। वहीं, भारतीय पक्ष में भी इन बैठकों पर नजर रखी जा रही है। बताया जा रहा है कि अजित डोभाल का ऑफिस इन मीटिंग्स की जानकारी ले रहा है। सूत्रों का कहना है कि मई 2025 के बाद से डोभाल और असीम मलिक के बीच इनडायरेक्ट संपर्क चैनल भी मौजूद है।
इसी वजह से अब ट्रैक-2 बातचीत को सिर्फ रिटायर्ड अधिकारियों की औपचारिक मुलाकात नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे किसी बड़े संकट की स्थिति में “क्राइसिस मैनेजमेंट बैकअप” के तौर पर देखा जा रहा है।
पहले भी चलती रही हैं बैक चैनल बातचीत
भारत और पाकिस्तान के बीच बैक चैनल संपर्क कोई नई बात नहीं है। 2015 से 2018 के बीच एनएसए अजित डोभाल और पाकिस्तान के तत्कालीन एनएसए नासिर खान जंजुआ के बीच कई गुप्त बैठकें हुई थीं।
बाद में यह भी सामने आया कि डोभाल की बातचीत पाकिस्तान के पूर्व एनएसए मोईद यूसुफ और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से भी होती रही थी। इन बैठकों का मकसद सीमा तनाव कम करना और सैन्य टकराव को रोकना बताया गया था। हालांकि इन प्रयासों के बावजूद भारत-पाकिस्तान संबंधों में स्थायी सुधार नहीं हो पाया।
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।


