📍नई दिल्ली | 13 May, 2026, 6:53 PM
Sureshastra Mk1 Drone: नोएडा के स्टार्टअप वेदा एयरोनॉटिक्स ने भारतीय वायुसेना को एस-यूएमएस सुरेशास्त्र एमके1 की पहली यूनिट्स सौंप दी हैं। यह एक जेट-पावर्ड कामिकाजे ड्रोन है, जो 150 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक उड़ान भर सकता है और दुश्मन के अहम सैन्य ठिकानों को सटीक तरीके से तबाह कर सकता है।
यह सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर बना है। खास बात यह है कि यह केवल एक ड्रोन नहीं बल्कि “स्वार्म ड्रोन सिस्टम” का हिस्सा है। यानी कई ड्रोन एक साथ मिलकर हमला कर सकते हैं और दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को भ्रमित कर सकते हैं।
भारतीय वायुसेना ने इस सिस्टम को ऐसे समय शामिल किया है जब दुनिया के कई युद्धों में ड्रोन गेम चेंजर बन रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया तक, छोटे और सस्ते ड्रोन बड़े सैन्य सिस्टम को चुनौती देते दिखाई दिए हैं।
Sureshastra Mk1 Drone: मेहर बाबा प्रतियोगिता से शुरू हुआ सफर
सुरेशास्त्र एमके1 का डेवलपमेंट भारतीय वायुसेना की मेहर बाबा स्वार्म ड्रोन प्रतियोगिता के तहत हुआ था। इस प्रतियोगिता का मकसद भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को नई पीढ़ी के ड्रोन सिस्टम विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना था।
वेदा एयरोनॉटिक्स ने इसी कार्यक्रम के तहत अपना डिजाइन पेश किया था। कंपनी की तकनीक और प्रदर्शन से प्रभावित होकर अगस्त 2023 में भारतीय वायुसेना ने लगभग 300 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। इसके तहत 200 यूनिट्स तैयार की जानी थीं।
यह किसी भारतीय स्टार्टअप को अनमैन्ड सिस्टम्स के लिए दिया गया सबसे बड़ा शुरुआती ऑर्डर था। कंपनी ने तय समय से पहले इस साल अप्रैल में पहली यूनिट्स की डिलीवरी शुरू कर दी है।
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर दिपेश गुप्ता के मुताबिक इस प्लेटफॉर्म को भारतीय वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
क्या है सुरेशास्त्र एमके1
सुरेशास्त्र एमके1 एक फिक्स्ड-विंग जेट ड्रोन है। इसका डिजाइन वी-टेल कॉन्फिगरेशन पर आधारित है। इसकी लंबाई करीब 3.5 मीटर और विंगस्पैन लगभग 3 मीटर है। ड्रोन का वजन करीब 90 किलोग्राम है।
इसे कैटापल्ट लॉन्च सिस्टम से उड़ाया जाता है। इसका मतलब है कि इसे किसी बड़े एयरबेस की जरूरत नहीं होती। छोटे प्लेटफॉर्म या खुले इलाके से भी लॉन्च किया जा सकता है।
इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका जेट इंजन है। आम तौर पर कई कामिकाजे ड्रोन प्रोपेलर सिस्टम पर चलते हैं, लेकिन सुरेशास्त्र एमके1 के जेट पावर से लैस होने से यह काफी तेजी से उड़ता है और दुश्मन के रडार को प्रतिक्रिया देने का समय बहुत कम मिलता है। इसकी रेंज 150 किलोमीटर से ज्यादा है।
दुश्मन के एयरबेस और रडार होंगे निशाने पर
इस ड्रोन को खास तौर पर हाई वैल्यू टारगेट्स पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें दुश्मन के एयरफील्ड, पार्क किए गए लड़ाकू विमान, रडार सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और मिलिट्री कम्युनिकेशन नेटवर्क शामिल हैं।
अगर किसी दुश्मन एयरबेस पर एक साथ कई सुरेशास्त्र ड्रोन हमला करें, तो वहां खड़े विमानों और रडार सिस्टम को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
रक्षा सूत्रों का कहना है कि इस तरह के कामिकाजे ड्रोन पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में कम लागत वाले होते हैं, लेकिन कई परिस्थितियों में उतने ही प्रभावी साबित हो सकते हैं।
स्वार्म टेक्नोलॉजी से बदल रहा युद्ध
सुरेशास्त्र एमके1 की सबसे बड़ी खासियत इसका एआई बेस्ड स्वार्म सिस्टम माना जा रहा है। इसमें कई ड्रोन एक-दूसरे से लगातार संपर्क में रहते हैं और मिलकर मिशन पूरा करते हैं।
अगर किसी मिशन में 10 या 20 ड्रोन भेजे जाएं, तो वे अलग-अलग दिशाओं से हमला कर सकते हैं। इससे दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है।
बता दें कि आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम एक समय में सीमित संख्या में टारगेट को इंटरसेप्ट कर पाते हैं। लेकिन जब बड़ी संख्या में ड्रोन एक साथ हमला करते हैं तो डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है।
ड्रोन में ऑनबोर्ड इंटेलिजेंस भी दी गई है। यानी यह केवल उड़ान ही नहीं भरता, बल्कि लक्ष्य की पहचान और ट्रैकिंग भी कर सकता है।
जीपीएस जाम होने पर भी कर सकेगा हमला
आधुनिक युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तेजी से अहम होता जा रहा है। कई बार दुश्मन जीपीएस सिग्नल जाम करने की कोशिश करता है ताकि ड्रोन और मिसाइल रास्ता भटक जाएं।
लेकिन सुरेशास्त्र एमके1 को ऐसे माहौल में भी काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें ऑनबोर्ड नेविगेशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे यह जीपीएस डिनाइड एनवायरनमेंट में भी मिशन जारी रख सकता है।
यह क्षमता चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के खिलाफ बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि भविष्य के युद्धों में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का इस्तेमाल बढ़ सकता है।
भारतीय वायुसेना लंबे समय से ऐसे सिस्टम चाहती थी जो कम लागत में दुश्मन के अहम ठिकानों को निशाना बना सकें। पारंपरिक फाइटर जेट मिशन महंगे होते हैं और उनमें पायलट की जान का जोखिम भी रहता है।
कामिकाजे ड्रोन इस समस्या का समाधान माने जा रहे हैं। इन्हें बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर दुश्मन के अंदर तक भेजा जा सकता है।
यह सिस्टम काउंटर एयर ऑपरेशन, एयरफील्ड डिनायल और डीप स्ट्राइक मिशन में उपयोगी हो सकता है।
एलएसी और पश्चिमी सीमा पर भी इसकी उपयोगिता मानी जा रही है। इस तरह के ड्रोन सीमापार मौजूद आतंकी ठिकानों या सैन्य पोस्ट्स को निशाना बनाने में भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
एयर लॉन्च्ड वर्जन पर भी काम
वेदा एयरोनॉटिक्स अब इस सिस्टम के नए वर्जन पर भी काम कर रही है। कंपनी ने एयर ड्रॉप्ड कैनिस्टराइज्ड स्वार्म यानी एडीसी-एस प्रोग्राम के तहत एयर लॉन्च्ड मॉडल का प्रस्ताव दिया है।
इस योजना में सी-130जे, सी-17 और सी-295 जैसे ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स से हवा में बड़ी संख्या में ड्रोन छोड़े जा सकेंगे।
इन ड्रोन को हाई एल्टीट्यूड से रिलीज किया जाएगा और फिर वे अलग-अलग दिशाओं में जाकर टारगेट पर हमला करेंगे। इससे ड्रोन की रेंज और ऑपरेशन एरिया दोनों बढ़ जाएंगे।
भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूती
सुरेशास्त्र एमके1 को “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत तैयार किया गया है। भारत पहले इस तरह के कई सिस्टम्स के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर था। लेकिन अब घरेलू कंपनियां खुद एडवांस ड्रोन सिस्टम तैयार कर रही हैं।
रक्षा मंत्रालय पिछले कुछ सालों से स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों को ज्यादा मौके दे रहा है। इसी वजह से ड्रोन, एआई, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और स्वार्म टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है।
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