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शुक्रवार को 1 लाख करोड़ की सबसे बड़ी रक्षा खरीद! K-9 वज्र, कामिकाजे ड्रोन और वर्बा मिसाइल पर होगा बड़ा फैसला

DAC बैठक में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए आधुनिक हथियारों, मिसाइलों, तोपों, ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम, समुद्री निगरानी उपकरण और लंबी दूरी तक मार करने वाली प्रणालियों से जुड़े प्रस्ताव रखे जाएंगे...

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📍नई दिल्ली | 2 Jul, 2026, 1:46 PM

DAC Meeting 2026: भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में शुक्रवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की बैठक शुक्रवार को होने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले कई बड़े रक्षा खरीद प्रस्तावों पर एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (एओएन) देने पर विचार किया जा सकता है। हाल के सालों में इसे सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डीएसी बैठकों में से एक माना जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि बैठक में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए आधुनिक हथियारों, मिसाइलों, तोपों, ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम, समुद्री निगरानी उपकरण और लंबी दूरी तक मार करने वाली प्रणालियों से जुड़े प्रस्ताव रखे जाएंगे। इन खरीद योजनाओं में स्वदेशी रक्षा उद्योग को प्राथमिकता देने पर भी विशेष जोर रहेगा।

DAC Meeting 2026: क्या है डीएसी और एओएन?

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल रक्षा मंत्रालय की सबसे बड़ी रक्षा खरीद समिति है। देश की बड़ी सैन्य खरीद इसी समिति की मंजूरी के बाद आगे बढ़ती है। इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं और इसमें तीनों सेनाओं के प्रमुखों के अलावा रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।

सूत्रों के अनुसार, किसी भी सैन्य खरीद की प्रक्रिया में एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (एओएन) पहला औपचारिक चरण होता है। इसका मतलब यह होता है कि सेना की जरूरत को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है और अब खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इसके बाद रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी होती है, कंपनियों का मूल्यांकन किया जाता है, व्यावसायिक बातचीत होती है और अंत में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाते हैं। पूरी प्रक्रिया पूरी होने में कई बार सालों का समय लग जाता है।

भारतीय सेना के प्रस्तावों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस

सूत्रों के मुताबिक, इस बार सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय सेना के आधुनिकीकरण से जुड़ा है। माना जा रहा है कि सेना से संबंधित प्रस्तावों की कुल कीमत 31 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।

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सेना की प्राथमिकता उन हथियारों और प्रणालियों को तेजी से शामिल करना है, जिनकी जरूरत बदलते युद्ध और चीन तथा पाकिस्तान से मिलने वाली सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए महसूस की जा रही है। (DAC Meeting 2026)

के-9 वज्र तोपों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव

बैठक में जिन सबसे बड़े प्रस्तावों पर विचार होना है, उनमें के-9 वज्र सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्जर शामिल है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, लगभग 300 अतिरिक्त के-9 वज्र तोपों की खरीद का प्रस्ताव रखा जा सकता है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 23 हजार करोड़ रुपये है।

के-9 वज्र 155 मिलीमीटर की ट्रैक वाली आधुनिक तोप है। यह दक्षिण कोरिया की तकनीक पर बेस्ड है और भारत में लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) द्वारा बनाई जा रही है। यह तोप पहले ही भारतीय सेना में शामिल हो चुकी है और लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों के साथ-साथ थार रेगिस्तान में भी इसका सफल ऑपरेशन किया जा चुका है।

इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी इसकी तेज रफ्तार, कम समय में तैनाती और लंबी दूरी तक सटीक मार करने की क्षमता मानी जाती है। यह लगातार अपनी स्थिति बदलते हुए भी फायर कर सकती है, जिससे दुश्मन के लिए इसका पता लगाना कठिन हो जाता है।

कामिकाजे ड्रोन खरीद पर भी फैसला संभव

सूत्रों का कहना है कि बैठक में कामिकाजे या लॉइटरिंग म्यूनिशन की खरीद पर भी चर्चा हो सकती है। इसके लिए 400 से अधिक यूनिट खरीदने का प्रस्ताव रखा जा सकता है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 1,800 से 2,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

हाल के वर्षों में यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों में कामिकाजे का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल देखा गया है। भारतीय सेना भी अब ऐसे सिस्टम्स को अपनी युद्ध क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। वहीं, अब इन सिस्टम्स के कई स्वदेशी संस्करण भी विकसित किए जा रहे हैं।

वर्बा मिसाइल से मजबूत होगी हवाई सुरक्षा

बैठक में वर्बा मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (मैनपैड्स) खरीदने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, इसमें लगभग 250 लॉन्चर और 5,000 मिसाइलें शामिल हो सकती हैं। इस प्रस्ताव की अनुमानित लागत करीब 1,200 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

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वर्बा कंधे पर रखकर दागी जाने वाली एयर डिफेंस मिसाइल है। इसका इस्तेमाल कम ऊंचाई पर उड़ रहे हेलिकॉप्टर, ड्रोन और लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। इसे पुराने इगला-एस सिस्टम की तुलना में अधिक आधुनिक माना जाता है और यह इलेक्ट्रॉनिक काउंटर मेजर का बेहतर सामना कर सकती है। (DAC Meeting 2026)

टैंकों को मिलेगी नई सुरक्षा

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सेना अपने टैंकों और आर्मर्ड कॉम्बैट वीहिकल्स के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम (एपीएस) खरीदने की तैयारी भी कर रही है।

इस परियोजना के तहत लगभग 2,000 एपीएस यूनिट खरीदने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। इसकी अनुमानित लागत करीब 5,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

यह सिस्टम टैंक की ओर आने वाली एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, रॉकेट और अन्य हथियारों का पता लगाकर उन्हें टैंक तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करने की क्षमता रखती है। आधुनिक युद्ध में इसे आर्मर्ड वीहिकल्स की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

एयर डिफेंस को भी मिलेगी नई ताकत

सूत्रों का कहना है कि सेना के लिए अतिरिक्त एयर डिफेंस गन और फायर कंट्रोल रडार से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में रखे जाएंगे।

इन सिस्टम्स का उद्देश्य ड्रोन, हेलिकॉप्टर, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमान और अन्य हवाई खतरों का तेजी से पता लगाकर उनका मुकाबला करना है। हाल के सालों में छोटे ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सेना एयर डिफेंस नेटवर्क को लगातार मजबूत कर रही है। (DAC Meeting 2026)

नौसेना के लिए टॉरपीडो और यूएसवी

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना के लिए भी कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव डीएसी के सामने रखे जाएंगे।

इनमें अगली पीढ़ी के हेवीवेट टॉरपीडो, अनमैन्ड सरफेस व्हीकल (यूएसवी) और ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (एयूवी) शामिल हैं।

यूएसवी ऐसे मानव रहित पोत होते हैं जो समुद्र की सतह पर बिना चालक दल के निगरानी और अन्य सैन्य कार्य कर सकते हैं। वहीं एयूवी समुद्र के भीतर काम करने वाला आटोमेटेड सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल पनडुब्बी रोधी अभियान, समुद्री निगरानी और समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने में किया जाता है।

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बैठक में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और नए सोनार सिस्टम खरीदने पर भी विचार हो सकता है, जिससे नौसेना की पानी के भीतर निगरानी क्षमता और मजबूत होगी। (DAC Meeting 2026)

वायुसेना के लिए लंबी दूरी के हथियार

सूत्रों का कहना है कि भारतीय वायुसेना के लिए भी कई बड़े प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इनमें लंबी दूरी तक मार करने वाली स्टैंड ऑफ प्रिसिजन मिसाइल, अतिरिक्त एयर टू एयर रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट और आधुनिक एयर डिफेंस रडार सिस्टम शामिल हैं।

स्टैंड ऑफ मिसाइल की मदद से लड़ाकू विमान दुश्मन की हवाई सुरक्षा सीमा में प्रवेश किए बिना काफी दूरी से लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं। वहीं एयर टू एयर रिफ्यूलिंग विमान हवा में ही लड़ाकू विमानों में ईंधन भरते हैं, जिससे उनकी ऑपरेशनल रेंज और मिशन की अवधि काफी बढ़ जाती है। (DAC Meeting 2026)

स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

वहीं, इस बार की खरीद प्रक्रिया में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को प्राथमिकता मिलेगी। रक्षा मंत्रालय ने कई परियोजनाओं के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) जैसी सरकारी रक्षा कंपनियों से भी प्रस्ताव मांगे हैं।

इन कंपनियों द्वारा मिसाइल, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और एयर डिफेंस उपकरण उपलब्ध कराए जाने की संभावना है। अधिकांश खरीद बाय इंडियन और बाय एंड मेक इंडियन श्रेणी के तहत किए जाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। (DAC Meeting 2026)

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    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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