📍नई दिल्ली | 1 Jul, 2026, 10:00 AM
General Dhiraj Seth Challenges: भारतीय सेना के 31वें सेना प्रमुख के तौर पर जनरल धीरज सेठ ने ऐसे समय में कमान संभाली है, जब सेना का लक्ष्य खुद को आत्मनिर्भर और भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह तैयार करना है। इसके साथ ही चीन और पाकिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों का भी लगातार सामना करना पड़ रहा है। तो दूसरी ओर सेना के भीतर भी बड़े स्तर पर संगठनात्मक बदलाव किए जा रहे हैं। जनरल धीरज सेठ के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन सभी बदलावों को समय पर लागू करने के साथ सेना की ऑपरेशनल तैयारी को और मजबूत बनाए रखना होगी।
General Dhiraj Seth Challenges: थिएटर कमांड को आगे बढ़ाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी
जनरल धीरज सेठ के सामने सबसे अहम चुनौती प्रस्तावित थिएटर कमांड सिस्टम को आगे बढ़ाने की होगी। पिछले कई सालों से तीनों सेनाओं को इंटीग्रेटेड कमान के तहत लाने की तैयारी चल रही है। इसका उद्देश्य थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि किसी भी सैन्य अभियान के दौरान निर्णय लेने और कार्रवाई करने में कम समय लगे।
इस प्रक्रिया में कई तकनीकी और संगठनात्मक मुद्दों पर अभी भी चर्चा जारी है। अलग-अलग सेनाओं की ऑपरेशनल जरूरतों, संसाधनों के इस्तेमाल और कमांड स्ट्रक्चर को संतुलित करना आसान नहीं माना जाता। ऐसे में नए सेना प्रमुख को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस), नौसेना और वायुसेना के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा।
ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख को सेना का स्थायी हिस्सा बनाना
पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना की नई युद्ध क्षमता की झलक दिखाई। अब सबसे बड़ी चुनौती इस अभियान के मिले अनुभवों को परमानेंट मिलिटरी स्ट्रक्चर्स का हिस्सा बनाना है। सैन्य हलकों में इसे अनौपचारिक रूप से “ऑपरेशन सिंदूर 2.0” की तैयारी भी कहा जा रहा है। इसमें सेना की ट्रेनिंग, ऑपरेशनल डॉक्ट्रिन, कमांड सिस्टम और हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े अनुभव भी शामिल हैं। नए सेना प्रमुख के सामने इन बदलावों को संस्थागत रूप देना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। (General Dhiraj Seth Challenges)
नई तकनीक के अनुसार सेना को बनाना होगा और मजबूत
आज का युद्ध पहले जैसा नहीं रहा। अब केवल टैंक, तोप और सैनिक ही किसी युद्ध का फैसला नहीं करते। ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल नेटवर्क और रियल टाइम इंटेलिजेंस जैसी तकनीकें भी युद्ध का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।
इसी वजह से भारतीय सेना भी तेजी से नई तकनीकों को अपना रही है। जनरल धीरज सेठ के सामने इन सभी नई क्षमताओं को पूरी सेना में प्रभावी तरीके से लागू करना बड़ी जिम्मेदारी होगी। (General Dhiraj Seth Challenges)
चीन और पाकिस्तान के खिलाफ दो मोर्चों पर तैयारी बनाए रखना
भारतीय सेना को एक साथ उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार निगरानी की मांग करती हैं। वहीं पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद, घुसपैठ और ड्रोन गतिविधियां भी सेना के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, नए सेना प्रमुख के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक दोनों मोर्चों पर सैन्य संसाधनों का संतुलित उपयोग बनाए रखना होगा। इसके लिए सैनिकों की तैनाती, निगरानी प्रणाली, सड़क और अन्य सैन्य ढांचे, संचार व्यवस्था और लॉजिस्टिक नेटवर्क को लगातार मजबूत रखना जरूरी होगा।
अभी पूरी नहीं हुई है आधुनिकीकरण की प्रक्रिया
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना ने कई बड़े सुधार शुरू किए हैं। बड़ी संख्या में ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अश्नि ड्रोन प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ब्रिगेड, शौर्य स्क्वाड्रन और इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी) जैसे नए मिलिट्री स्ट्रक्चर्स पर काम शुरू हुआ है।
हालांकि यह पूरी प्रक्रिया अभी जारी है। कई महत्वपूर्ण रक्षा खरीद परियोजनाएं अभी अलग-अलग चरणों में हैं। टैंकों के आधुनिकीकरण, नई आर्टिलरी, एयर डिफेंस सिस्टम, सामरिक वाहनों और अन्य आधुनिक सैन्य उपकरणों की कई योजनाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। इन परियोजनाओं को तय समय के भीतर पूरा कराना नए सेना प्रमुख की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। (General Dhiraj Seth Challenges)

इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप मॉडल का विस्तार
भारतीय सेना ने 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर के तहत पहली बार इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप यानी आईबीजी मॉडल को ऑपरेशनल रूप दिया है। यह फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, आईबीजी का उद्देश्य भारी-भरकम डिवीजन आधारित व्यवस्था की जगह छोटी, तेज और आत्मनिर्भर लड़ाकू फॉर्मेशन तैयार करना है। प्रत्येक आईबीजी में पैदल सेना, आर्टिलरी, इंजीनियर, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स, आर्मी सर्विस कोर, कम्यूनिकेशन सिस्टम और चिकित्सा सहायता जैसी सभी आवश्यक क्षमताएं पहले से मौजूद रहती हैं।
यदि यह मॉडल सफल रहता है तो इसे सेना की अन्य कोर में भी लागू किया जाएगा। ऐसे में इसकी समीक्षा, सुधार और विस्तार की जिम्मेदारी भी नए सेना प्रमुख के सामने होगी। (General Dhiraj Seth Top-10 Challenges)
ड्रोन और काउंटर ड्रोन क्षमता को और मजबूत करना
आज का युद्ध तेजी से बदल रहा है। रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया के युद्धों ने दिखाया है कि छोटे ड्रोन भी बड़े सैन्य प्लेटफॉर्म के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। इसी वजह से भारतीय सेना ने ड्रोन और काउंटर ड्रोन तकनीक पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है।
अब केवल ड्रोन खरीदना काफी नहीं है। बल्कि उन्हें हर स्तर की सैन्य फॉर्मेशन के साथ जोड़ना, सैनिकों को प्रशिक्षण देना, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एयर डिफेंस सिस्टम के साथ उनका तालमेल बनाना भी उतना ही जरूरी है। जनरल धीरज सेठ के सामने इन सभी प्रणालियों को बड़े स्तर पर लागू करने की जिम्मेदारी होगी।
स्वदेशी हथियारों और रक्षा उद्योग को बढ़ावा देना
भारतीय सेना अब तेजी से स्वदेशी रक्षा उपकरणों की ओर बढ़ रही है। ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन, कम्यूनिकेशन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण, आर्टिलरी सिस्टम और अन्य कई क्षेत्रों में भारतीय उद्योग की भागीदारी बढ़ रही है।
सेना की जरूरतों और रक्षा उद्योग के बीच बेहतर तालमेल बनाना भी नए सेना प्रमुख की प्राथमिकताओं में रहेगा। समय पर परीक्षण, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और सैनिकों तक आधुनिक उपकरण पहुंचाना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। (General Dhiraj Seth Challenges)
नेटवर्क बेस्ड बैटल सिस्टम को मजबूत करना
आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़ा जाता। सिक्योर कम्यूनिकेशन, तेज डेटा शेयरिंग, डिजिटल कमांड सिस्टम, एआई बेस्ड एनालिसिस और रियल टाइम फैसले भी उतने ही महत्वपूर्ण हो चुके हैं।
भारतीय सेना पहले से नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर मॉडल पर काम कर रही है। सेना के भीतर डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया, सिक्योर कम्यूनिकेशन नेटवर्क और अलग-अलग वेपन सिस्टम्स को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ने का काम जारी है। इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना भी नए सेना प्रमुख की अहम जिम्मेदारी होगी।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी की विरासत को आगे बढ़ाना भी बड़ी जिम्मेदारी
जनरल धीरज सेठ के सामने एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जनरल उपेंद्र द्विवेदी के कार्यकाल में शुरू हुए सैन्य बदलावों को अगले स्तर तक पहुंचाना होगा। पिछले दो वर्षों में सेना ने कई बड़े सुधारों की शुरुआत की। सेना ने “फ्यूचर रेडी फोर्स” और “स्वदेशीकरण से सशक्तिकरण” के विजन के तहत संगठनात्मक और तकनीकी बदलावों को गति दी।
अब इन पहलों को पूरे मिलिट्री स्ट्रक्चर में प्रभावी तरीके से लागू करना, आधुनिकीकरण की गति बनाए रखना, स्वदेशी तकनीकों को तेजी से शामिल करना और सेना की नई युद्धक जरूरतों को देखते हुए तैयार करना जनरल धीरज सेठ की प्रमुख चुनौतियों में शामिल रहेगा। (General Dhiraj Seth Challenges)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।



