HomeIndian Armyभारतीय सेना अपनाएगी ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी, सीएमई पुणे में लगेगा फ्यूल सेल...

भारतीय सेना अपनाएगी ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी, सीएमई पुणे में लगेगा फ्यूल सेल माइक्रोग्रिड सिस्टम

इस परियोजना के तहत सीएमई परिसर में ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड सिस्टम लगाया जाएगा, जिसमें फ्यूल सेल एनर्जी स्टोरेज तकनीक का इस्तेमाल होगा...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली/पुणे | 30 Jun, 2026, 7:43 PM

Indian Army Green Hydrogen Microgrid: भारतीय सेना के पुणे स्थित प्रतिष्ठित कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग (सीएमई) में अब ग्रीन हाइड्रोजन बेस्ड एनर्जी सिस्टम बनाया जाएगा। इसके लिए टीकेआईएल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और सीएमई के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस परियोजना के तहत सीएमई परिसर में ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड सिस्टम लगाया जाएगा, जिसमें फ्यूल सेल एनर्जी स्टोरेज तकनीक का इस्तेमाल होगा। इसका उद्देश्य ऐसी स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा प्रणाली का प्रदर्शन करना है, जो मुख्य बिजली ग्रिड पर निर्भर हुए बिना भी काम कर सके।

Indian Army Green Hydrogen Microgrid: ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों के लिए तैयार होगी नई एनर्जी सिस्टम

टीकेआईएल की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस परियोजना में स्विट्जरलैंड की कंपनी सोहाइटेक एसए की एडवांस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक सौर ऊर्जा की मदद से ग्रीन हाइड्रोजन तैयार करती है। बाद में इसी हाइड्रोजन को फ्यूल सेल के माध्यम से फिर से बिजली में बदला जाता है।

पूरी सिस्टम को माइक्रोग्रिड मॉडल पर डेवलप किया जाएगा। यानी एक ऐसा छोटा बिजली नेटवर्क, जो अपने स्तर पर बिजली का उत्पादन, भंडारण और वितरण कर सके। इस तरह की व्यवस्था उन इलाकों में खास तौर पर उपयोगी मानी जाती है, जहां सामान्य बिजली आपूर्ति उपलब्ध नहीं होती या लगातार बाधित रहती है।

ग्रीन हाइड्रोजन से बनेगी स्वच्छ बिजली

इस परियोजना में सबसे पहले सौर ऊर्जा से बिजली तैयार की जाएगी। इस बिजली का उपयोग पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग करने के लिए किया जाएगा। इस प्रक्रिया से बनने वाला ग्रीन हाइड्रोजन सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाएगा।

यह भी पढ़ें:  नए आर्मी चीफ ने बदली सेना की सोच! जनरल धीरज सेठ की टीम में पहली बार महिला ADC अफसर की नियुक्ति

जब जरूरत होगी, तब यही हाइड्रोजन फ्यूल सेल के जरिए दोबारा बिजली में बदला जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में डीजल जैसे पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम होती है और प्रदूषण भी काफी कम होता है। इसी वजह से ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सेना के लिए शोध और परीक्षण का केंद्र बनेगा सीएमई

कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग के अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी। इसे एक लाइव डेमोंस्ट्रेशन और रिसर्च प्लेटफॉर्म के रूप में भी इस्तेमाल किया जाएगा।

यहां सैन्य इंजीनियर ग्रीन हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा प्रणाली, माइक्रोग्रिड तकनीक और फ्यूल सेल की उपयोगिता का अध्ययन करेंगे। साथ ही यह देखा जाएगा कि इस तरह की प्रणाली को रक्षा प्रतिष्ठानों और दूरदराज के सैन्य क्षेत्रों में किस प्रकार इस्तेमाल किया जा सकता है।

छात्रों और सैन्य अधिकारियों को मिलेगा व्यावहारिक अनुभव

इस परियोजना के माध्यम से सीएमई में प्रशिक्षण लेने वाले इंजीनियरिंग अधिकारी और छात्र नई ऊर्जा तकनीकों को व्यावहारिक रूप से समझ सकेंगे।

ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, ऊर्जा भंडारण, माइक्रोग्रिड संचालन और फ्यूल सेल तकनीक पर उन्हें सीधे काम करने का अवसर मिलेगा। इससे भविष्य की ऊर्जा प्रणालियों से जुड़ा तकनीकी ज्ञान भी बढ़ेगा।

उद्योग और रक्षा संस्थान मिलकर करेंगे काम

टीकेआईएल इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विवेक भाटिया ने कहा कि यह सहयोग ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों के लिए भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, दुनिया भर में ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ईंधन पर तेजी से काम हो रहा है। ऐसे समय में ग्रीन हाइड्रोजन मजबूत, विकेंद्रीकृत और कम कार्बन उत्सर्जन वाली ऊर्जा प्रणाली के रूप में उभर रहा है।

यह भी पढ़ें:  Delhi Defence Dialogue 2025: आर्मी चीफ बोले- 7वीं पीढ़ी की टेक्नोलॉजी को अपनी ट्रेनिंग में शामिल कर रही सेना, तीन ‘डी’ को बताया मॉडर्न वॉरफेयर के लिए जरूरी

कंपनी के ग्रीन हाइड्रोजन विभाग के प्रमुख सुरेश अगस्ती ने कहा कि यह परियोजना ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, फ्यूल सेल ऊर्जा भंडारण और माइक्रोग्रिड तकनीक को एक साथ जोड़कर स्वच्छ ऊर्जा समाधान विकसित करने का प्रयास है।

सौर ऊर्जा से चलेगी पूरी व्यवस्था

इस परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित हाइड्रोजन उत्पादन प्रणाली को माइक्रोग्रिड के साथ जोड़ा जाएगा। इससे दिन के समय सौर ऊर्जा का उपयोग कर हाइड्रोजन तैयार किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उसी हाइड्रोजन से बिजली बनाई जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाना और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करना है। साथ ही यह प्रणाली लंबे समय तक ऊर्जा उपलब्ध कराने में भी सक्षम होगी।

आत्मनिर्भर भारत और स्वच्छ ऊर्जा अभियान को मिलेगा समर्थन

यह परियोजना देश में स्वदेशी क्षमता विकसित करने और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को बढ़ावा देने के प्रयासों का भी हिस्सा है। ग्रीन हाइड्रोजन, माइक्रोग्रिड और फ्यूल सेल जैसी तकनीकों पर होने वाला यह शोध रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है।

इस पहल के जरिए उद्योग और रक्षा संस्थान मिलकर नई ऊर्जा तकनीकों पर काम करेंगे। साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा प्रणालियों की उपयोगिता, दक्षता और संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन भी किया जाएगा।

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

यह भी पढ़ें:  ऑपरेशन सिंदूर के बाद बड़ा फैसला, थिएटराइजेशन से पहले भारतीय सेना और नौसेना के बीच जॉइंटनेस बढ़ाने को लेकर हुआ बड़ा समझौता
रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular

Recent Comments