📍नई दिल्ली | 14 May, 2026, 8:08 PM
CDS on Theatre Command: देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने साफ कहा है कि भविष्य के युद्ध केवल जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं रहेंगे। आने वाले समय में साइबर, स्पेस, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और इंफॉर्मेशन वॉरफेयर भी उतने ही बड़े हथियार होंगे। उन्होंने कहा कि भारत अब तेजी से थिएटराइजेशन, जॉइंटनेस और मल्टी डोमेन वॉरफेयर की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
नई दिल्ली में मानेकशॉ सेंटर में आयोजित सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज (CENJOWS) के कलम एंड कवच के तीसरे संस्करण में आयोजित फायरसाइड चैट में बोलते हुए सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने थिएटराइजेशन, जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता, मल्टी-डोमेन वॉरफेयर, इनोवेशन और भविष्य के युद्धों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम में बातचीत के दौरान जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारतीय सेनाओं में जो बड़े सैन्य सुधार चल रहे हैं, वे केवल स्ट्रक्चरल बदलाव नहीं हैं, बल्कि सोच बदलने की प्रक्रिया भी है। उन्होंने माना कि थिएटर कमांड बनाने से ज्यादा मुश्किल काम सेनाओं की मानसिकता बदलना था।
उन्होंने कहा कि भारत जिस थिएटराइजेशन और जॉइंटनेस सुधार की तरफ बढ़ रहा है, वह देश के सबसे बड़े सैन्य सुधारों में से एक है। उनके मुताबिक भविष्य का युद्ध जॉइंटनेस यानी तीनों सेनाओं के एक साथ काम करने पर आधारित होगा।
CDS on Theatre Command: “सहमति” के रास्ते से आगे बढ़ाने की कोशिश
जनरल चौहान ने कहा कि कई देशों ने पहले भी इस मॉडल को अपनाया है और हर जगह अलग-अलग सैन्य सेवाओं के बीच मतभेद और प्रतिस्पर्धा देखने को मिली थी। भारत में भी शुरुआत में कई तरह की चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने इस प्रक्रिया को “सहमति” के रास्ते से आगे बढ़ाने की कोशिश की।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने हजारों सैन्य अधिकारियों और संस्थानों के बीच जाकर थिएटर कमांड और जॉइंटनेस पर चर्चा की। उनका मकसद केवल नया ढांचा बनाना नहीं बल्कि यह समझाना था कि भविष्य के युद्धों में तीनों सेनाओं को एक साथ काम करना ही होगा।
सीडीएस ने कहा कि जैसे-जैसे अधिकारियों और जवानों को यह समझ आया कि मल्टी डोमेन वॉरफेयर में अकेली कोई भी सेना पूरी लड़ाई नहीं लड़ सकती, वैसे-वैसे थिएटराइजेशन को लेकर स्वीकार्यता भी बढ़ी।
उन्होंने कहा कि असली चुनौती संरचना बदलना नहीं बल्कि “माइंडसेट” बदलना था।
जनरल चौहान ने कहा कि अब इस प्रक्रिया को “गति और दिशा” दोनों मिल चुकी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले सीडीएस के कार्यकाल में यह प्रक्रिया और तेजी से आगे बढ़ेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि सैन्य सुधार कभी खत्म नहीं होते, यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस सैन्य अभियान के दौरान भारत के पास दुश्मन की तुलना में बेहतर बैटलफील्ड ट्रांसपेरेंसी और सिचुएशनल अवेयरनेस थी। यानी भारतीय सेनाओं को यह साफ पता था कि सीमा के दोनों तरफ क्या हो रहा है।
उन्होंने कहा कि यही वजह थी कि भारत पूरे ऑपरेशन के दौरान “एस्केलेशन मैट्रिक्स” पर हावी रहा। उन्होंने बताया कि भारतीय सेनाओं के बीच बेहतर इंटीग्रेशन और नेटवर्क आधारित सिस्टम की वजह से तेजी से फैसले लेने और जवाब देने में मदद मिली। सीडीएस ने कहा कि आधुनिक युद्धों में केवल हथियार नहीं बल्कि सूचना, डेटा और नेटवर्क भी बड़ी ताकत बन चुके हैं। (CDS On Theatre Command)
मल्टी डोमेन वॉरफेयर पर जोर
जनरल चौहान ने कहा कि आज सेनाओं के बीच इंटीग्रेशन केवल जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं रह सकता। अब साइबर स्पेस, स्पेस डोमेन, कॉग्निटिव वॉरफेयर और इंफॉर्मेशन ऑपरेशन भी युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
उन्होंने बताया कि भविष्य के युद्धों में “कॉग्निटिव वॉरफेयर” यानी लोगों की सोच और भावनाओं को प्रभावित करना भी एक बड़ा हथियार होगा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और फेक न्यूज अब युद्ध का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
सीडीएस ने अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपनी भावनाओं को नियंत्रित रखना सीखें, क्योंकि सोशल मीडिया पर छोटी-छोटी बातें भी विरोधी देशों द्वारा इस्तेमाल की जा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि दुनिया अभी भी इस नए तरह के युद्ध को पूरी तरह समझने की कोशिश कर रही है और भारत भी लगातार इससे सीख रहा है। (CDS On Theatre Command)
ईरान युद्ध और ड्रोन खतरे का जिक्र
जनरल चौहान ने हाल के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ड्रोन वॉरफेयर देखने को मिला, लेकिन ईरान से जुड़े संघर्षों में एक नई चीज देखने को मिली, वह थी बड़े पैमाने पर मिसाइलों का इस्तेमाल।
उन्होंने कहा कि कई बैलिस्टिक मिसाइलें सैन्य और नागरिक दोनों तरह के ठिकानों तक पहुंचीं। कुछ मिसाइलों को रोका गया लेकिन कुछ अपने टारगेट तक भी पहुंचीं।
सीडीएस के मुताबिक भविष्य में दुनिया को ड्रोन और मिसाइलों के “सैचुरेशन अटैक” से बड़ी चुनौती मिल सकती है। यानी एक साथ इतनी बड़ी संख्या में हमले किए जाएं कि एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ जाए। उन्होंने कहा कि यह एक नया ट्रेंड है, जिसे पूरी दुनिया देख रही है। (CDS On Theatre Command)
डीएमए और आईडीएस की भूमिका समझाई
जनरल चौहान ने फायरसाइड चैट के दौरान डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स यानी डीएमए और हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ यानी आईडीएस की भूमिका भी समझाई। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच अभी भी इन दोनों संस्थाओं को लेकर भ्रम है।
उन्होंने बताया कि आईडीएस का काम तीनों सेनाओं के बीच इंटीग्रेशन और नए डोमेन्स में क्षमता निर्माण करना है, जबकि डीएमए रक्षा मंत्रालय के भीतर सैन्य मामलों को संभालता है।
उन्होंने कहा कि डीएमए की स्थापना भारतीय सैन्य सुधारों में सबसे बड़ा बदलाव रही है क्योंकि अब सेना से जुड़े कई फैसले सीधे सैन्य नेतृत्व के जरिए लिए जा सकते हैं।
कारगिल रिव्यू कमेटी का भी जिक्र
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि थिएटराइजेशन का सुझाव सबसे पहले कारगिल रिव्यू कमेटी ने दिया था। उनके अनुसार डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स यानी डीएमए का गठन इस दिशा में सबसे बड़ा बदलाव रहा है, क्योंकि अब सैन्य मामलों के लिए एक अलग और स्पष्ट व्यवस्था मौजूद है। हालांकि उन्होंने कहा कि इस सिस्टम को पूरी तरह से बनने के लिए अभी समय की जरूरत है। (CDS On Theatre Command)
भारत के पास विवादित सीमाएं
जनरल चौहान ने कहा कि भारत के पास विवादित सीमाएं हैं, इसलिए देश को हर समय तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि युद्ध छोटा होगा या लंबा, इस पर ध्यान देने की बजाय उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर किसी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य स्पष्ट हो तो मिशन पूरा होने के बाद जल्दी बाहर निकलने की रणनीति भी जरूरी होती है।
सीडीएस ने यह भी कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, ऑटोनॉमस सिस्टम और नई पीढ़ी की तकनीकें युद्ध का रूप बदल देंगी। उन्होंने कहा कि थिएटर कमांड अंत नहीं, बल्कि आगे आने वाले बड़े सैन्य सुधारों की शुरुआत है। (CDS On Theatre Command)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।


