📍नई दिल्ली | 14 May, 2026, 12:28 PM
MQ-28 Ghost Bat: भारत और ऑस्ट्रेलिया अब भविष्य के युद्धों में इस्तेमाल होने वाली एडवांस एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी, ड्रोन सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित युद्ध क्षमता पर भी तेजी से साथ काम कर रहे हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में हुई 12वीं एयर स्टाफ टॉक्स के दौरान मीटिंग की तस्वीरों में बोइंग का एडवांस अनक्रूड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट “एमक्यू-28 घोस्ट बैट” बैकग्राउंड में दिखाई दिया।
भारतीय वायुसेना और रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स के बीच 12वीं एयर स्टाफ टॉक्स हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में आयोजित हुई थी। बातचीत का मुख्य फोकस ऑपरेशनल कॉर्डिनेशन, इंटरऑपरेबिलिटी, ट्रेनिंग, संयुक्त सैन्य अभ्यास और भविष्य के एयरोस्पेस सहयोग पर रहा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक फोटो ऑप नहीं था, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का संकेत था। खासकर ऐसे समय में जब भारत ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपनी वायु युद्ध रणनीति, ड्रोन क्षमता और जॉइंट वॉरफेयर मॉडल पर तेजी से काम कर रहा है।
MQ-28 Ghost Bat: कैनबरा में हुई अहम बैठक
भारतीय वायुसेना और रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स के बीच 12वीं एयर स्टाफ टॉक्स मई 2026 में आयोजित की गई। इसमें भारतीय वायुसेना की ओर से एयर वाइस मार्शल संजीव तलियान शामिल हुए, जबकि ऑस्ट्रेलिया की ओर से डिप्टी चीफ ऑफ एयर फोर्स एयर वाइस मार्शल स्टीवन पेस्के ने बातचीत का नेतृत्व किया।
बैठक में ऑपरेशनल सिनर्जी, इंटरऑपरेबिलिटी, जॉइंट एक्सरसाइज, ट्रेनिंग, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग और भविष्य के एयरोस्पेस सहयोग जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
भारतीय वायुसेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि दोनों देशों की वायु सेनाएं इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता मजबूत करने और भविष्य के लिए तैयार रक्षा साझेदारी बनाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं।
वहीं, ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्रालय ने भी इस बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ते एयर पावर सहयोग का अहम हिस्सा बताया।
Strengthening Air Power Partnerships 🇦🇺🤝🇮🇳
Deputy Chief of Air Force, Air Vice-Marshal Steven Pesce, AM, recently hosted Air Vice-Marshal Sanjeev Taliyan from the @IAF_MCC in Canberra and Brisbane, advancing Australia-India defence cooperation through professional air power… pic.twitter.com/1tyyj2raKP
— Defence Australia (@DefenceAust) May 13, 2026
एमक्यू-28 घोस्ट बैट ने खींचा ध्यान
इस बैठक के दौरान जारी तस्वीरों में बोइंग डिफेंस ऑस्ट्रेलिया का एमक्यू-28 घोस्ट बैट दिखाई दिया। यह एक एडवांस “कोलेबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट” है, जिसे बिना पायलट वाले कॉम्बैट प्लेटफॉर्म के तौर पर डेवलप किया गया है।
इसे ऐसे डिजाइन किया गया है कि यह फाइटर जेट्स और एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम्स के साथ मिलकर काम कर सके। आसान शब्दों में कहें तो यह भविष्य का “लॉयल विंगमैन” सिस्टम माना जा रहा है।
यह ड्रोन केवल निगरानी नहीं करता, बल्कि दुश्मन की एयर डिफेंस पर हमला, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, डिकॉय मिशन और मिसाइल सपोर्ट जैसे काम भी कर सकता है।
इसे बनाने वाली कंपनी बोइंग के मुताबिक यह प्लेटफॉर्म एडवांस एयर पावर सिस्टम्स के लिए “फोर्स मल्टीप्लायर” की तरह काम करता है। इसका डिजाइन पूरी तरह मॉड्यूलर है। मिशन के हिसाब से इसके पेलोड और सिस्टम को तेजी से बदला जा सकता है। इसकी रेंज 2000 नॉटिकल मील से ज्यादा है और यह करीब मैक 0.9 की स्पीड से उड़ान भर सकता है।
पिछले आठ वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में विकसित किए गए इस सिस्टम को बोइंग दुनिया का सबसे परिपक्व कोलेबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बता रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक आधुनिक युद्धों में ऐसे सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि ये पायलट की जान को जोखिम में डाले बिना खतरनाक मिशन पूरे कर सकते हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह तकनीक
भारत भी इस समय अपने यू-सीएवी कैट्स वॉरियर प्रोग्राम पर काम कर रहा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इसे बना रहा है और यह सिस्टम भारतीय वायुसेना के लिए स्वदेशी लॉयल विंगमैन प्लेटफॉर्म माना जा रहा है।
पूर्व एचएएल प्रमुख डीके सुनील पहले ही बता चुके हैं कि कैट्स वॉरियर को 2027 तक उड़ान के लिए तैयार करने की योजना है।
यह प्लेटफॉर्म भी फाइटर जेट्स के साथ मिलकर काम करेगा और स्ट्राइक मिशन, सर्विलांस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और स्वार्म अटैक जैसी भूमिकाएं निभाएगा।
ऐसे में एमक्यू-28 का भारत-ऑस्ट्रेलिया एयर स्टाफ टॉक्स के दौरान सामने आना कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच भविष्य में टेक्नोलॉजी सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ सकती है।
The 12th Air Staff Talks between the #IndianAirForce and #RoyalAustralianAirForce were recently conducted at Canberra. The discussions focused on enhancing operational synergy, interoperability, joint exercises, Air-to-Air Refuelling Agreement, training and future aerospace… pic.twitter.com/0o7BZrtA32
— Indian Air Force (@IAF_MCC) May 13, 2026
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली सोच
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने भारत ने अपनी डिफेंस स्ट्रेटेजी में बड़ा बदलाव किया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।
करीब 88 घंटे तक चले इस सैन्य अभियान में पहली बार बड़े स्तर पर ड्रोन, लॉन्ग रेंज मिसाइल, प्रिसिजन स्ट्राइक और मल्टी डोमेन ऑपरेशन देखने को मिले।
भारतीय वायुसेना ने राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमानों से स्कैल्प, ब्रह्मोस, रैम्पेज और दूसरी एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
वहीं भारतीय सेना ने एम777 हॉवित्जर और एक्सकैलिबर प्रिसिजन शेल्स का इस्तेमाल किया। नौसेना ने आईएनएस विक्रांत समेत कई युद्धपोतों को फॉरवर्ड पोजिशन में तैनात किया।
इस ऑपरेशन में ड्रोन वॉरफेयर की भूमिका बेहद अहम रही। भारत ने हार्पी, हारोप और एआई आधारित ड्रोन सिस्टम्स का इस्तेमाल किया।
रक्षा अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने साफ कर दिया कि भविष्य के युद्ध केवल फाइटर जेट और टैंक से नहीं जीते जाएंगे। अब डेटा, एआई, ड्रोन और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
तीनों सेनाओं के तालमेल पर बढ़ा जोर
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान थलसेना, वायुसेना और नौसेना ने एक साथ मिलकर काम किया। इसे भारतीय सैन्य ढांचे में “जॉइंटनेस” का बड़ा उदाहरण माना गया।
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने बाद में कहा था कि शुरुआती चुनौतियों के बाद भारतीय बलों ने दुश्मन की एयर डिफेंस को भेदते हुए सटीक हमले किए।
इसी अनुभव के बाद भारत अब थिएटराइजेशन और मल्टी डोमेन ऑपरेशन पर तेजी से काम कर रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक एमक्यू-28 जैसे सिस्टम और भारत का कैट्स वॉरियर प्रोग्राम इसी नई रणनीति का हिस्सा हैं, जहां मानव और मशीन एक साथ मिलकर युद्ध लड़ेंगे।
इंडो-पैसिफिक में बढ़ रहा सहयोग
भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों क्वाड समूह का हिस्सा हैं। चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते सुरक्षा माहौल के बीच दोनों देशों के रक्षा संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं।
हाल के वर्षों में दोनों देशों ने जॉइंट एक्सरसाइज की संख्या और बढ़ाई हैं। भारत ने टैलिस्मन सेबर और पुक पुक जैसे सैन्य अभ्यासों में भी भाग लिया।
नवंबर 2024 में दोनों देशों के बीच एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग एग्रीमेंट भी हुआ था। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया के केसी-30ए मल्टी रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट विमान भारतीय सैन्य विमानों को हवा में ईंधन दे सकते हैं।
ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने कहा था कि इससे दोनों देशों की इंटरऑपरेबिलिटी और ऑपरेशनल क्षमता मजबूत होगी। साथ ही, भारतीय नौसेना के पी-8आई समुद्री निगरानी विमानों की इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऑपरेटिंग क्षमता भी बढ़ेगी।
ड्रोन और एआई आधारित युद्ध की तरफ बढ़ रहा भारत
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने रक्षा खरीद और सैन्य आधुनिकीकरण की रफ्तार तेज कर दी है। ड्रोन, लॉयटरिंग म्यूनिशन, एआई आधारित सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता पर खास जोर दिया जा रहा है।
भारतीय वायुसेना और रक्षा मंत्रालय अब ऐसे सिस्टम चाहते हैं जो कम लागत में ज्यादा प्रभावी हों और पायलटों को कम जोखिम में डालें।
यही वजह है कि लॉयल विंगमैन और कोलेबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट जैसे सिस्टम तेजी से चर्चा में हैं।
सूत्रों का कहना है कि भविष्य के युद्धों में एक फाइटर जेट के साथ कई अनक्रूड ड्रोन उड़ते दिखाई दे सकते हैं, जो अलग-अलग मिशन संभालेंगे। इससे दुश्मन की एयर डिफेंस पर दबाव बढ़ेगा और ऑपरेशन ज्यादा सुरक्षित बनेंगे।
Author
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

