📍नई दिल्ली | 9 Jul, 2026, 4:25 PM
Indian Army One-Way Attack Drones: भारतीय सेना तेजी से ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता बढ़ाने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, सेना ने करीब 1,500 करोड़ रुपये की लागत से 850 वन-वे अटैक ड्रोन खरीदने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। टेक्निकल टेस्टिंग और कमर्शियल बिड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में सामने आई है। वहीं निबे डिफेंस दूसरे स्थान पर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुल ऑर्डर का बड़ा हिस्सा टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को मिलेगा, जबकि शेष सप्लाई निबे डिफेंस करेगी।
यह भारतीय सेना द्वारा फास्ट ट्रैक प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया के तहत किया जा रहा पहला बड़ा वन-वे अटैक ड्रोन खरीद कार्यक्रम माना जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य रक्षा जरूरतों को तेजी से पूरा करना है ताकि कॉन्ट्रैक्ट होने के कुछ महीनों के भीतर ही उपकरणों की आपूर्ति शुरू हो सके।
Indian Army One-Way Attack Drones: क्या होते हैं वन-वे अटैक ड्रोन
वन-वे अटैक ड्रोन को लॉइटरिंग म्यूनिशन या कामिकाजे ड्रोन भी कहा जाता है। यह सर्विलांस ड्रोन से अलग होते हैं। इनका उद्देश्य केवल जानकारी जुटाना नहीं, बल्कि टारगेट पर सीधे हमला करना होता है।
इस तरह के ड्रोन पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में कम लागत वाले होते हैं, लेकिन सटीक हमला करने की क्षमता रखते हैं।
पिछले कुछ सालों में दुनिया के कई संघर्षों ने यह साबित किया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। यूक्रेन-रूस संघर्ष और पश्चिम एशिया में हुए सैन्य अभियानों के दौरान वन-वे अटैक ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। इन ड्रोन ने दुश्मन की तोपों, रडार, कमांड पोस्ट, बख्तरबंद वाहनों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना ने भी हाल के अभियानों और ऑपरेशनल अनुभवों से कई महत्वपूर्ण सबक लिए हैं। इन्हीं अनुभवों के आधार पर नई पीढ़ी के ऐसे ड्रोन चुने जा रहे हैं, जो युद्ध के कठिन हालात में भी प्रभावी तरीके से काम कर सकें।
ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव का भी दिखेगा असर
सूत्रों के मुताबिक नए वन-वे अटैक ड्रोन के चयन में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिले अनुभवों को भी शामिल किया गया है। युद्ध के दौरान दुश्मन अक्सर ड्रोन के कम्युनिकेशन नेटवर्क को बाधित करने की कोशिश करता है। इसके लिए जैमिंग और स्पूफिंग जैसी इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
नए सिस्टम में ऐसे फीचर भी शामिल किए गए हैं जिससे ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बीच भी अपने मिशन को पूरा कर सके। परीक्षण के दौरान इन्हें ऐसे वातावरण में उड़ाया गया जहां टेकऑफ से लेकर पूरे मिशन तक इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग मौजूद थी। वहीं, इन परिस्थितियों में भी ड्रोन ने शानदार प्रदर्शन किया।
100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक करेंगे हमला
सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना जिन ड्रोन की खरीद कर रही है उनकी प्रभावी मारक क्षमता 100 किलोमीटर से अधिक होगी।
इसका मतलब यह है कि भारतीय सेना अपने सुरक्षित क्षेत्र में रहते हुए सीमा के काफी भीतर मौजूद दुश्मन के सैन्य ठिकानों, तोपों की तैनाती, कमांड पोस्ट और अन्य महत्वपूर्ण टारगेटों पर हमला कर सकेगी।
इस क्षमता से आर्टिलरी को भी बड़ी मजबूती मिलेगी क्योंकि अब केवल पारंपरिक तोपों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।
टाटा और निबे डिफेंस को मिलेगा ऑर्डर
सूत्रों के मुताबिक टेक्निकल इवेल्युशन पूरा होने के बाद तीन कंपनियां फाइनल स्टेज तक पहुंची थीं। इनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, नाइब डिफेंस और एक अन्य कंपनी शामिल थी। कमर्शियल बिड खुलने के बाद टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही। इसके बाद नाइब डिफेंस दूसरे स्थान पर रही।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार कुल ऑर्डर का लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को मिलेगा, जबकि शेष हिस्सा नाइब डिफेंस को दिया जाएगा, ताकि सप्लाई तेजी की जा सके।
भारतीय सेना बना रही है नई ड्रोन युद्ध क्षमता
हालांकि भारतीय सेना की जरूरत 850 ड्रोनों से इससे कहीं अधिक है। सेना आने वाले समय में अलग-अलग दूरी और अलग-अलग मिशनों के लिए हजारों ड्रोन शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।
सूत्रों का कहना है कि फिलहाल 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने वाले वन-वे अटैक ड्रोन की खरीद को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा 50 किलोमीटर, 300 किलोमीटर, 500 किलोमीटर और 1000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक हमला करने वाले कई कैटेगरी के ड्रोन भी अलग-अलग चरणों में खरीद प्रक्रिया में शामिल हैं।
सेना का उद्देश्य ऐसी बहुस्तरीय ड्रोन क्षमता तैयार करना है, जिससे युद्ध के अलग-अलग मोर्चों पर जरूरत के अनुसार सही ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सके।
आर्टिलरी में बनाई जा रही हैं विशेष ड्रोन यूनिट
भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंटों में विशेष ड्रोन यूनिट भी शामिल की जा रही हैं। इसके लिए शक्तिबाण रेजिमेंट तैयार की गई हैं, जिनका मुख्य काम ड्रोन आधारित हमले करना है। इनके साथ दिव्यास्त्र बैटरियां भी बनाई गई हैं, जहां विभिन्न प्रकार के अटैक ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं।
इसके अलावा भैरव बटालियन को भी ड्रोन आधारित हमलों के लिए आधुनिक प्रणालियों से लैस किया जा रहा है। इन यूनिटों का उद्देश्य दुश्मन की सीमा के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को कम समय में निशाना बनाना है।
वहीं, वन-वे अटैक ड्रोन पारंपरिक आर्टिलरी का विकल्प नहीं हैं, बल्कि उसके साथ मिलकर काम करने वाले हथियार हैं। यदि दुश्मन की कोई तोप, रडार या कमांड पोस्ट ऐसी जगह मौजूद है जहां सामान्य गोले प्रभावी नहीं हैं, तो पहले ड्रोन भेजकर उस टारगेट को नष्ट किया जा सकता है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर तोपों से आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
यह खरीद फास्ट ट्रैक प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया के तहत की जा रही है। सामान्य रक्षा खरीद की तुलना में यह प्रक्रिया काफी तेज होती है।
इस प्रक्रिया में कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होने के बाद कंपनियों को कम समय के भीतर सप्लाई शुरू करनी होती है। यदि तय समय पर ड्रोन नहीं दिए जाते, तो कॉन्ट्रैक्ट में देरी के लिए कड़े दंड का भी प्रावधान रहता है।
इसी वजह से इस खरीद प्रक्रिया को भारतीय सेना की सबसे तेज ड्रोन खरीद परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।
1500 किलोमीटर तक मार करने वाले ड्रोन पर भी काम
सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना केवल 100 किलोमीटर श्रेणी तक सीमित नहीं रहना चाहती। 1500 किलोमीटर तक हमला करने में सक्षम लंबी दूरी के वन-वे अटैक ड्रोन की खरीद प्रक्रिया भी अलग से आगे बढ़ाई जा रही है।
इसके अलावा जेट इंजन से चलने वाले तेज गति वाले अटैक ड्रोन की खरीद के लिए भी लगभग 1500 करोड़ रुपये का अलग टेंडर तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना में भी एल-1 और एल-2 कंपनियों के बीच ऑर्डर बांटने की योजना पर काम हो रहा है।
एक लाख ड्रोन की जरूरत का आकलन
भारतीय सेना को अलग-अलग भूमिकाओं के लिए करीब एक लाख ड्रोन की आवश्यकता है। इनमें निगरानी ड्रोन, टोही ड्रोन, वन-वे अटैक ड्रोन, लंबी दूरी के स्ट्राइक ड्रोन, छोटे सामरिक ड्रोन, रसद सहायता ड्रोन और विशेष मिशन वाले ड्रोन शामिल हैं।
सेना का उद्देश्य हर स्तर की सैन्य इकाई को उसकी जरूरत के अनुसार ड्रोन उपलब्ध कराना है ताकि आधुनिक युद्ध में तेजी से बदलती परिस्थितियों का सामना किया जा सके। (Indian Army One-Way Attack Drones)
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