📍नई दिल्ली | 19 May, 2026, 4:46 PM
Indian Navy Microwave Weapon: भारतीय नौसेना डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी टोनबो इमेजिंग को हाई पावर माइक्रोवेव यानी एचपीएम सिस्टम को विकसित और नेवल प्लेटफॉर्म्स पर इंटीग्रेट करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। यह प्रोजेक्ट अदिति 3.0 (ADITI) इनोवेशन फ्रेमवर्क के तहत दिया गया है।
यह सिस्टम ड्रोन खतरों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। दुनिया के बहुत कम देशों के पास ऐसी हाई पावर माइक्रोवेव क्षमता मौजूद है।
Indian Navy Microwave Weapon: क्या होता है हाई पावर माइक्रोवेव सिस्टम
हाई पावर माइक्रोवेव सिस्टम एक तरह का नॉन-किनेटिक डायरेक्टेड एनर्जी वेपन होता है। इसका मतलब यह है कि यह पारंपरिक मिसाइल या गोली की तरह विस्फोट करके हमला नहीं करता, बल्कि बेहद ताकतवर माइक्रोवेव पल्स के जरिए दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को बेकार कर देता है।
जब यह सिस्टम किसी ड्रोन, सेंसर, कम्युनिकेशन नेटवर्क या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर माइक्रोवेव एनर्जी छोड़ता है तो उसके सर्किट प्रभावित हो जाते हैं। इससे दुश्मन के ड्रोन, रडार, नेविगेशन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण काम करना बंद कर सकते हैं।
रक्षा जानकारों के मुताबिक आधुनिक युद्ध में यह तकनीक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आज ज्यादातर सैन्य प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर निर्भर हैं।
स्वार्म ड्रोन के खिलाफ बेहद कारगर
हाल के सालों में स्वार्म ड्रोन यानी एक साथ बड़ी संख्या में छोटे ड्रोन से हमला करने की रणनीति अपनाई जाती है। ऐसे ड्रोन सस्ते होते हैं लेकिन एक साथ हमला करके बड़े मिलिट्री सिस्टम को चुनौती दे सकते हैं।
पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम या मिसाइलों से हर छोटे ड्रोन पर अटैक करना महंगा और मुश्किल होता है। वहीं हाई पावर माइक्रोवेव सिस्टम एक साथ कई ड्रोन को टारगेट किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री युद्ध में यह तकनीक और ज्यादा उपयोगी हो सकती है क्योंकि युद्धपोतों को कई दिशाओं से आने वाले ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक खतरों का सामना करना पड़ सकता है। (Indian Navy Microwave Weapon Tonbo Imaging)
टोनबो इमेजिंग को मिला प्रोजेक्ट
भारतीय नौसेना ने यह प्रोजेक्ट टोनबो इमेजिंग को दिया है। यह कंपनी पहले इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स, थर्मल इमेजिंग और नाइट विजन सिस्टम्स के लिए जानी जाती थी। अब कंपनी एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और डायरेक्टेड एनर्जी वेपंस के सेक्टर में भी तेजी से काम कर रही है।
कंपनी का कहना है कि इस प्रोग्राम के तहत वह नेवल प्लेटफॉर्म्स के लिए सिस्टम इंटीग्रेशन और कमीशनिंग का काम करेगी। इसके बाद सफल परीक्षण और मंजूरी मिलने पर कई प्रोडक्शन यूनिट्स भी सप्लाई की जाएंगी।
टोनबो इमेजिंग के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ अरविंद लक्ष्मीकुमार ने कहा कि यह कार्यक्रम कंपनी के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से कंपनी हाई पावर माइक्रोवेव तकनीक के जरूरी सब-सिस्टम्स और वैक्यूम ट्यूब आधारित सोर्सेज पर काम कर रही है।
क्यों खास है वैक्यूम ट्यूब तकनीक
कंपनी के मुताबिक एचपीएम सिस्टम के लिए बेहद हाई पावर ऊर्जा की जरूरत होती है। इसके लिए वैक्यूम ट्यूब आधारित माइक्रोवेव सोर्स अभी सबसे प्रभावी माने जाते हैं।
अरविंद लक्ष्मीकुमार ने बताया कि सॉलिड-स्टेट आरएफ सिस्टम कई क्षेत्रों में अच्छे हैं, लेकिन हाई पावर माइक्रोवेव सिस्टम के लिए जरूरी एनर्जी लेवल हासिल करना अभी उनके लिए संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि टोनबो उन चुनिंदा निजी कंपनियों में शामिल है जिनके पास वैक्यूम ट्यूब टेक्नोलॉजी से जुड़ी खुद की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी मौजूद है।
वेवस्ट्राइक सिस्टम पर काम
रक्षा सूत्रों के मुताबिक यह कॉन्ट्रैक्ट टोनबो के वेवस्ट्राइक हाई पावर माइक्रोवेव सिस्टम से जुड़ा माना जा रहा है। कंपनी ने इसे एरो इंडिया 2025 में पेश किया था।
यह सिस्टम मल्टी-बीम क्लाइस्ट्रॉन तकनीक पर आधारित है। इसकी मदद से कम पावर में ज्यादा माइक्रोवेव एनर्जी पैदा की जा सकती है।
सिस्टम में एईएसए रडार और ईओ/आईआर कैमरे भी लगाए गए हैं। ये टारगेट की पहचान और ट्रैकिंग में मदद करते हैं। इसके जरिए ऑटोमैटिक टारगेटिंग भी संभव होती है।
मौजूदा सिस्टम की रेंज करीब तीन किलोमीटर बताई जा रही है। वहीं पांच किलोमीटर रेंज वाला एडवांस वर्जन भी डेवलप किया जा रहा है। (Indian Navy Microwave Weapon Tonbo Imaging)
हर मौसम में कर सकता है काम
एचपीएम सिस्टम की खास बात यह भी है कि यह अलग-अलग मौसम में काम कर सकता है। बारिश, धुंध और कम दृश्यता जैसे हालात में भी यह बखूबी काम कर सकता है।
इसे लैंड बेस्ड व्हीकल्स, युद्धपोतों और दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर लगाया जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के सिस्टम भविष्य के नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर में अहम भूमिका निभाएंगे। (Indian Navy Microwave Weapon Tonbo Imaging)
क्या है ADITI 3.0
एडीआईटीआई का पूरा नाम “एसिंग डेवलपमेंट ऑफ इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज विद आईडेक्स” है। यह भारत सरकार की पहल है जिसका मकसद नई रक्षा तकनीकों को विकसित करना और उन्हें सैन्य इस्तेमाल के लिए तैयार करना है।
इस कार्यक्रम के तहत हाई पावर माइक्रोवेव वेपन सिस्टम जैसे डीप-टेक समाधान विकसित किए जा रहे हैं। भारतीय नौसेना ने एडीआईटीआई 3.0 के तहत स्वायत्त ड्रोन झुंड को निष्क्रिय करने वाले सिस्टम की जरूरत रखी थी।
रक्षा मंत्रालय का फोकस ऐसे स्वदेशी सिस्टम विकसित करना है जो भविष्य के युद्ध में उपयोगी हों और विदेशी निर्भरता कम करें। (Indian Navy Microwave Weapon Tonbo Imaging)
नौसेना के लिए क्यों अहम है यह सिस्टम
भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रही है। ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और नेटवर्क आधारित हमले अब समुद्री सुरक्षा के बड़े खतरे बनते जा रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में केवल मिसाइल और तोपें ही पर्याप्त नहीं होंगी। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम पर कंट्रोल भी उतना ही जरूरी होगा।
इसी वजह से नौसेना अब ऐसी तकनीकों पर निवेश बढ़ा रही है जो दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को बिना बड़े भौतिक नुकसान के निष्क्रिय कर सकें।
टोनबो इमेजिंग पहले से भारतीय सेना और कई अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को थर्मल इमेजिंग और ऑप्ट्रॉनिक सिस्टम सप्लाई कर चुकी है। कंपनी का फोकस अब इंटीग्रेटेड डिफेंस सिस्टम्स पर बढ़ रहा है।
कंपनी लॉइटरिंग म्यूनिशन, काउंटर-यूएएस सिस्टम, एम्बेडेड सॉफ्टवेयर और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स पर भी काम कर रही है। (Indian Navy Microwave Weapon Tonbo Imaging)

