📍नई दिल्ली | 19 May, 2026, 5:48 PM
Operation Sindoor Smart Power: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की “स्मार्ट पावर” का सबसे बड़ा उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि इसमें सैन्य ताकत, कूटनीतिक संदेश, सूचना नियंत्रण और आर्थिक संकल्प सभी का एक साथ इस्तेमाल किया गया।
दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित “सिक्योरिटी टू प्रॉस्पेरिटी” राष्ट्रीय सेमिनार में बोलते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दिखा दिया कि आधुनिक दौर में सिर्फ हथियारों की ताकत ही काफी नहीं होती, बल्कि टेक्नोलॉजी, रणनीति और तेज फैसले भी उतने ही जरूरी हैं।
उन्होंने बताया कि यह अभियान केवल 22 मिनट तक चला, लेकिन इस दौरान भारतीय सेनाओं ने आतंकी ढांचे को गहरा नुकसान पहुंचाया। सेना प्रमुख के मुताबिक कार्रवाई पूरी तरह सटीक और योजनाबद्ध थी।
Operation Sindoor Smart Power: 22 मिनट की कार्रवाई, 88 घंटे बाद जानबूझकर रोका गया ऑपरेशन
जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय बलों ने दुश्मन के आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने लंबे समय से बनी एक रणनीतिक सोच को भी तोड़ दिया।
सेना प्रमुख ने बताया कि कार्रवाई के बाद भारत ने 88 घंटे के भीतर ऑपरेशन को जानबूझकर और सोच-समझकर रोका। उनके मुताबिक यह फैसला किसी दबाव में नहीं बल्कि रणनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर लिया गया था।
उन्होंने कहा कि आधुनिक संघर्षों में केवल हमला करना ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि यह तय करना भी जरूरी होता है कि कब रुकना है और कितना संदेश देना है।
#ArmyChief General Upendra Dwivedi at a national seminar on “Security to Prosperity” says India demonstrated “smart power” through #OperationSindoor — a precise 22-minute operation that combined military action, information control, diplomatic signalling and economic resolve.
He… pic.twitter.com/tHqCHawKg4— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) May 19, 2026
“दुनिया अब पावर पॉलिटिक्स से चल रही है”
अपने संबोधन में सेना प्रमुख ने कहा कि आज दुनिया अव्यवस्था, अविश्वास और बदलते गठबंधनों के दौर से गुजर रही है। ऐसे माहौल में अब “पावर पॉलिटिक्स” समृद्धि को प्रभावित कर रही है।
उन्होंने कहा कि पहले यह माना जाता था कि वैश्विक व्यापार और आर्थिक विकास युद्ध और संघर्ष को पीछे छोड़ देंगे, लेकिन मौजूदा हालात अलग तस्वीर दिखा रहे हैं।
जनरल द्विवेदी ने अपनी बात के दौरान “द एंड ऑफ हिस्ट्री एंड द लास्ट मैन” किताब का भी जिक्र किया और कहा कि दुनिया अब फिर से शक्ति संतुलन की राजनीति की तरफ बढ़ रही है।
लैब से बैटलफील्ड तक तेजी से पहुंच रही तकनीक
सेना प्रमुख ने आधुनिक युद्ध में तकनीक की भूमिका पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि पहले किसी नई सैन्य तकनीक को लैब से युद्धक्षेत्र तक पहुंचने में कई दशक लग जाते थे, लेकिन अब यह समय घटकर कुछ महीनों तक रह गया है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई तकनीक बड़े स्तर पर इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं हो पाती तो उसका महत्व कम हो जाता है।
जनरल द्विवेदी के मुताबिक भारत के पास नए आइडिया और प्रोटोटाइप तैयार करने की क्षमता मौजूद है, लेकिन अब जरूरत उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की है।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर वॉरफेयर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, ऑटोनॉमस सिस्टम्स, स्पेस और एडवांस मैटेरियल्स आधुनिक युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं।
निजी कंपनियों और रिसर्च संस्थानों की भूमिका अहम
सेना प्रमुख ने कहा कि भारत को रक्षा तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने के लिए सरकार, निजी कंपनियों, रिसर्च संस्थानों और अकादमिक क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि ड्यूल-यूज रिसर्च एंड डेवलपमेंट इकोसिस्टम को मजबूत करना होगा। इसका मतलब ऐसी तकनीकों से है जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य – दोनों क्षेत्रों में किया जा सके।
उन्होंने साफ कहा कि सरकार को निजी क्षेत्र को स्पष्ट समर्थन देना चाहिए ताकि रक्षा क्षेत्र में नई तकनीकों का तेजी से विकास हो सके।
विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता को बताया बड़ा खतरा
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि आज सबसे बड़ा रणनीतिक खतरा केवल सैन्य कमजोरी नहीं है, बल्कि विदेशी सप्लाई चेन पर अत्यधिक निर्भरता भी है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई देश जरूरी तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर या महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता है, तो यह उसकी सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है।
उन्होंने कहा कि मजबूती का मतलब केवल हथियार खरीदना नहीं है, बल्कि जरूरी संसाधनों और तकनीकों में आत्मनिर्भर बनना भी है।
सेना प्रमुख ने कहा कि भारत को समान सोच वाले देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ानी चाहिए, लेकिन साथ ही अपनी घरेलू क्षमता भी मजबूत करनी होगी।
“जो टेक्नोलॉजी पर नियंत्रण करेगा, वही युद्ध के नतीजे तय करेगा”
सेना प्रमुख ने कहा कि आने वाले दशक में वही देश युद्ध के नतीजों को प्रभावित करेगा जिसके पास आधुनिक टेक्नोलॉजी पर पकड़ होगी।
उन्होंने कहा कि भारत को केवल विदेशी तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे स्वदेशी तकनीकों को विकसित करना, उन्हें सैन्य इस्तेमाल के लिए तैयार करना और उनमें नेतृत्व करना होगा।
उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में डेटा, नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एआई आधारित फैसले बहुत अहम हो चुके हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी का भी किया जिक्र
अपने भाषण के दौरान जनरल द्विवेदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बयान का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि “शांति का मतलब ताकत की कमी नहीं होता, बल्कि क्षमता, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की मौजूदगी होता है।”
सेना प्रमुख ने कहा कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और रक्षा क्षेत्र में कई बड़े बदलाव हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब जरूरी है कि देश नई चुनौतियों के मुताबिक अपनी तैयारी को लगातार मजबूत करता रहे।


